
Fatehpur News: फतेहपुर का ऐसा शिवमंदिर जिसकी खोज क़रीब हज़ार साल पहले गाय चराते हुए एक चरवाहे ने की थी
Fatehpur News In Hindi
सावन महीने में युगान्तर प्रवाह लेकर आ रहा सावन स्पेशल सीरीज जिसमें आप को मिलेगी शिव मंदिरों की वो अनसुनी व रोचक जानकारियां जो आपने शायद पहले न सुनी या पढ़ी हो. ऐसा ही एक शिव मंदिर है फतेहपुर के गाजीपुर क्षेत्र के चुरियानी गाँव मे स्थित रुरेश्वर धाम शिवमंदिर की माना जाता है कि इस मंदिर की खोज करीब एक हज़ार साल पहले हुई थी, जानिए इसके बारे में
फतेहपुर:हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार सावन का महीना बहुत ही पवित्र व पावन माना जाता है।ऐसी मान्यता है कि सावन माह में भगवान शंकर की पूजा करने से मनुष्य को विशेष पुण्य लाभ की प्राप्ति होती है।शिव मंदिरों में सावन माह में श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठा रहती है खासकर सावन के सोमवार को तो मंदिरों व शिवालयों में भारी भीड़ पूजा पाठ करने के लिए इक्क्ठा होती है।

ये भी पढ़े-फतेहपुर:फिर बरपा आकाशीय बिजली का कहर..सात की मौत आधा दर्जन से ज्यादा घायल!

क्या है मन्दिर का इतिहास...


लेक़िन जब वह वापस अपने घर पहुंचकर रात में सोया तो उसे सपना हुआ कि जिस पत्थर पर उसने अपने हंसिये को रगड़कर धार लगाई है वह भगवान शिव की पाताली मूर्ति है।इसके बाद जब वह सुबह जगा तो उसने अपने सपने के बारे में आस पास के गाँव वालों को बताया।जिसके बाद सभी लोग उस टीले पर पहुंचे और उस स्थान की खुदाई की काफ़ी गहरी खुदाई करने के बावजूद भी उस शिवलिंग नुमा पत्थर का कोई अंत नहीं मिला।

मन्दिर में होते हैं हर वर्ष धार्मिक आयोजन..
रुरेश्वर धाम मन्दिर में प्रतिवर्ष गुरुपूर्णिमा के अवसर पर भंडारे का आयोजन होता है।साथ ही वसंत पंचमी के अवसर पर तीन दिनों तक मन्दिर में वसन्तोत्सव मनाया जाता है जिसमें एक भारी मेले का आयोजन भी होता है।
प्रसिद्ध संत ब्रह्मलीन मूलानंद महाराज का है समाधि स्थल...
रुरेश्वर धाम के अंदर धीरे धीरे कई मंदिरों की स्थापना हो गई।प्रसिद्ध संत मूलानंद जी महाराज की तपोस्थली भी रुरेश्वर धाम रहा है और जब वह ब्रह्मलीन हुए तो लोगों ने रुरेश्वर धाम में ही समाधि स्थल बना।
