
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर ऐसे करें शिव-पार्वती की पूजा, भोलेनाथ स्वयं हर लेंगे जीवन के सभी कष्ट
महाशिवरात्रि पर विधि-विधान और चार प्रहर में पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं. प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित गोविंद शास्त्री जी ने बताया कि सही मुहूर्त, अभिषेक और रात्रि जागरण से कष्टों से मुक्ति और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है.
Mahashivratri 2026: फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे रहस्यमयी और आध्यात्मिक पर्व माना जाता है. मान्यता है कि इसी दिव्य रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. महाशिवरात्रि पर यदि श्रद्धा, नियम और सही पूजा विधि से शिव आराधना की जाए, तो जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं.
महाशिवरात्रि का पौराणिक महत्व और आध्यात्मिक रहस्य

इस कारण यह पर्व वैवाहिक सुख, दांपत्य जीवन की मजबूती और प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है. आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो यह रात्रि अहंकार, अज्ञान और नकारात्मकता के नाश की मानी जाती है. शिव आराधना से व्यक्ति के भीतर धैर्य, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
महाशिवरात्रि व्रत का महत्व और शिव कृपा का मार्ग
शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि का व्रत करने वाला भक्त अगले जन्मों के बंधन से भी मुक्त हो सकता है. यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी माना जाता है जो विवाह, संतान, नौकरी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं.
षोडशोपचार पूजा विधि और अभिषेक का महत्व
महाशिवरात्रि पर षोडशोपचार विधि से पूजा करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. इसमें भगवान शिव को आसन, स्नान, वस्त्र, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और मंत्रों के माध्यम से पूर्ण समर्पण किया जाता है. पंडित गोविंद शास्त्री जी बताते हैं कि इस दिन शिवलिंग का अभिषेक दूध, दही, शहद, घी, भांग और गन्ने के रस से करना विशेष फल देता है. प्रदोष काल में किया गया अभिषेक शिव को अत्यंत प्रिय होता है. ऐसा माना जाता है कि इस विधि से की गई पूजा से जीवन में सुख, शांति और स्थिरता आती है.
बेलपत्र और रुद्राभिषेक से दूर होते हैं बड़े संकट
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. कहा जाता है कि प्रत्येक बेलपत्र के साथ शिव भक्त के एक पाप का नाश करते हैं. महाशिवरात्रि पर बेलपत्र अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
इसके साथ ही इस दिन रुद्राभिषेक कराना अत्यंत शुभ माना गया है. मान्यता है कि रुद्राभिषेक से कालसर्प दोष, ग्रह दोष और अचानक आने वाले संकट समाप्त होते हैं. जिन लोगों के जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हों, उनके लिए महाशिवरात्रि का रुद्राभिषेक संजीवनी के समान माना गया है.
महाशिवरात्रि के चार प्रहर पूजा का शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि की पूजा चार प्रहर में की जाती है और प्रत्येक प्रहर का अपना विशेष महत्व होता है. पहला प्रहर शाम 6 बजकर 19 मिनट से रात 9 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, जिसमें दीप, धूप और जलाभिषेक करना चाहिए. दूसरा प्रहर रात 9 बजकर 26 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा, इस समय मंत्र जाप और शिव स्तुति फलदायी मानी जाती है.
तीसरा प्रहर रात 12 बजकर 34 मिनट से भोर 3 बजकर 41 मिनट तक रहेगा, जिसे सबसे पवित्र समय माना गया है. चौथा प्रहर भोर 3 बजकर 41 मिनट से सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, जिसमें अंतिम अभिषेक और आरती के साथ व्रत का समापन करना चाहिए.
