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UP:हाईकोर्ट के आदेश के बाद देर रात जेल से रिहा हुए डॉ. कफ़ील खान..लगाए गम्भीर आरोप.!

UP:हाईकोर्ट के आदेश के बाद देर रात जेल से रिहा हुए डॉ. कफ़ील खान..लगाए गम्भीर आरोप.!
जेल से रिहा होने के बाद कफ़ील खान।

एनएसए(NSA) के तहत मथुरा जेल में बन्द डॉक्टर कफ़ील खान आखिरकार मंगलवार देर रात जेल से रिहा कर दिए गए..पढ़ें पूरी खबर युगान्तर प्रवाह पर..

लखनऊ:डॉक्टर कफ़ील खान मंगलवार देर रात जेल से रिहा कर दिए गए।उन्हें यूपी सरकार द्वारा एनएसए की कार्यवाही के तहत गिरफ्तार कर जेल में रखा गया था।मंगलवार को हाईकोर्ट से उन्हें ज़मानत मिल गई।जिसके बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ़ हुआ।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि कफ़ील ख़ान को एनएसए के तहत गिरफ़्तार किया जाना 'ग़ैरक़ानूनी' है।अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा, "डॉक्टर कफ़ील ख़ान का भाषण किसी तरह की नफ़रत या हिंसा को बढ़ावा देने वाला नहीं था, बल्कि यह लोगों के बीच राष्ट्रीय एकता का आह्वान था।"

क्या है पूरा मामला..

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डॉक्टर कफ़ील खान का नाम उस वक़्त सबसे पहले चर्चा में आया था जब वह बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में तैनात थे।साल 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 60 बच्चों की मौत हो गई थी।उत्तर प्रदेश सरकार ने लापरवाही बरतने, भ्रष्टाचार में शामिल होने सहित कई आरोप लगाकर डॉ. कफ़ील को निलंबित कर जेल भेज दिया था। हालाँकि कई मामलों में बाद में उन्हें सरकार से क्लीन चिट मिल गई थी लेकिन उनका निलंबन रद्द नहीं हुआ था।

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इसके बाद पिछले साल दिसंबर महीने में नागरिकता संशोधन क़ानून यानी सीएए के ख़िलाफ़ डॉक्टर कफ़ील ख़ान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिया था।इस मामले में कफ़ील के ख़िलाफ़ अलीगढ़ के सिविल लाइंस थाने में केस दर्ज किया गया था।29 जनवरी को यूपी एसटीएफ़ ने उन्हें मुंबई से गिरफ़्तार किया था।

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10 फ़रवरी को उन्हें ज़मानत मिल गई थी, लेकिन तीन दिन तक जेल से उनकी रिहाई नहीं हो सकी और इस दौरान अलीगढ़ ज़िला प्रशासन ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (रासुका) लगा दिया।तब से वह मथुरा जेल में बन्द थे।

मंगलवार रात जेल से रिहा होने के बाद डाक्टर कफ़ील ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें जेल में पाँच पाँच दिनों तक भूखा प्यासा रखा गया।इसके पहले भी उन्होंने जेल में अव्यवस्थाओं को लेकर एक पत्र लिखा था जो सोशल मीडिया में काफ़ी वायरल हुआ था।

02 Sep 2020 By Shubham Mishra

UP:हाईकोर्ट के आदेश के बाद देर रात जेल से रिहा हुए डॉ. कफ़ील खान..लगाए गम्भीर आरोप.!

लखनऊ:डॉक्टर कफ़ील खान मंगलवार देर रात जेल से रिहा कर दिए गए।उन्हें यूपी सरकार द्वारा एनएसए की कार्यवाही के तहत गिरफ्तार कर जेल में रखा गया था।मंगलवार को हाईकोर्ट से उन्हें ज़मानत मिल गई।जिसके बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ़ हुआ।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि कफ़ील ख़ान को एनएसए के तहत गिरफ़्तार किया जाना 'ग़ैरक़ानूनी' है।अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा, "डॉक्टर कफ़ील ख़ान का भाषण किसी तरह की नफ़रत या हिंसा को बढ़ावा देने वाला नहीं था, बल्कि यह लोगों के बीच राष्ट्रीय एकता का आह्वान था।"

क्या है पूरा मामला..

डॉक्टर कफ़ील खान का नाम उस वक़्त सबसे पहले चर्चा में आया था जब वह बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में तैनात थे।साल 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 60 बच्चों की मौत हो गई थी।उत्तर प्रदेश सरकार ने लापरवाही बरतने, भ्रष्टाचार में शामिल होने सहित कई आरोप लगाकर डॉ. कफ़ील को निलंबित कर जेल भेज दिया था। हालाँकि कई मामलों में बाद में उन्हें सरकार से क्लीन चिट मिल गई थी लेकिन उनका निलंबन रद्द नहीं हुआ था।

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इसके बाद पिछले साल दिसंबर महीने में नागरिकता संशोधन क़ानून यानी सीएए के ख़िलाफ़ डॉक्टर कफ़ील ख़ान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिया था।इस मामले में कफ़ील के ख़िलाफ़ अलीगढ़ के सिविल लाइंस थाने में केस दर्ज किया गया था।29 जनवरी को यूपी एसटीएफ़ ने उन्हें मुंबई से गिरफ़्तार किया था।

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10 फ़रवरी को उन्हें ज़मानत मिल गई थी, लेकिन तीन दिन तक जेल से उनकी रिहाई नहीं हो सकी और इस दौरान अलीगढ़ ज़िला प्रशासन ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (रासुका) लगा दिया।तब से वह मथुरा जेल में बन्द थे।

मंगलवार रात जेल से रिहा होने के बाद डाक्टर कफ़ील ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें जेल में पाँच पाँच दिनों तक भूखा प्यासा रखा गया।इसके पहले भी उन्होंने जेल में अव्यवस्थाओं को लेकर एक पत्र लिखा था जो सोशल मीडिया में काफ़ी वायरल हुआ था।

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