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Noneshwar Mahadev : सावन स्पेशल-जानिए 1400 वर्ष पुराने शिव मंदिर के बारे में जहां मुगल बादशाह नूरबाक़ी ने किया था हमला

Noneshwar Mahadev : सावन स्पेशल-जानिए 1400 वर्ष पुराने शिव मंदिर के बारे में जहां मुगल बादशाह नूरबाक़ी ने किया था हमला
कानपुर के चौबेपुर स्थित प्राचीन नोनेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास

Kanpur Noneshwar Mahadev Temple : आज हम आपको एक ऐसे कानपुर के प्रसिद्ध प्राचीन रहस्यमयी शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं. जो नोन नदी किनारे स्थित है. यह मंदिर करीब 1400 वर्ष पुराना बताया जाता है.इस शिव मंदिर की मान्यता अपने आप में अनूठी है. यहां पर जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पित करने मात्र से ही भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं. दूर-दूर से सावन के दिनों में यहां पर भक्तों का हुजूम उमड़ता है. यहां मुगल बादशाह नूरबाक़ी ने हमला किया था जिसकी गोलियों के निशान भी मौजूद है.


हाईलाइट्स

  • कानपुर के चौबेपुर में नरसिंह गांव में है प्राचीन नोनेश्वर महादेव मंदिर
  • 1400 वर्ष पुराना बताया जा रहा यह शिव मंदिर, नोन नदी किनारे स्थित है यह शिव मंदिर
  • मुगल बादशाह ने किया था हमला आज भी हैं गोलियों के निशान

Noneshwar Mahadev Temple has unique : हमारे देश में ऐसे कई रहस्यमयी और चमत्कारिक शिव मंदिर हैं. जिनकी एक अपनी अलग आस्था है. युगांतर प्रवाह की टीम आज आपको एक ऐसे प्राचीन कानपुर के शिव मंदिर के इतिहास के बारे में बताने जा रही है. जिसका अलग ही महत्व है.यह मंदिर कहां स्थित है कब स्थापित हुआ और इसकी क्या मान्यता है, इन सभी सवालों के जवाब भी हम आपको देंगे. तो चलिए शुरुआत करते हैं.

 

सावन मास में उमड़ती है भीड़

सावन मास का पवित्र माह चल रहा है. देश के कोने-कोने से छोटे-बड़े शिवालयों में भक्तों की भीड़ जुट रही है. कांवड़िए पवित्र नदियों से जल लेकर शिवालयों में जलाभिषेक करने के लिए पहुंच रहे हैं. चारों तरफ पूरा माहौल शिवमय हो चुका है. हर-हर महादेव ,ओम नमः शिवाय के साथ भक्त भक्ति भाव से मंदिरों में पहुंच रहे हैं.

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1400 वर्ष पुराना है शिव मन्दिर

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कानपुर का एक ऐसा प्राचीन मंदिर जो चौबेपुर क्षेत्र के नरसिंह गांव स्थित प्राचीन नोनेश्वर महादेव का मंदिर है. यह मंदिर करीब 1400 वर्ष पुराना बताया जाता है. इस मंदिर की अपनी एक अलग अनूठी आस्था भी है.श्रावण महीनों में दूर-दूर से भक्त पैदल यात्रा कर जलाभिषेक करते हैं .खास तौर पर सावन के सोमवार का विशेष महत्व रहता है. यहां जल से अभिषेक और दुग्ध से अभिषेक व बेल पत्र अर्पित करने मात्र से ही भोलेनाथ भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं.

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नोन नदी के समीप है प्राचीन मंदिर मुगल बादशाह ने किया था हमला

नोनेश्वर महादेव मन्दिर नोन नदी के पास ही स्थित है. आसपास घना जंगल भी है.इस मंदिर में जो शिवलिंग है वह काफी विशाल है. यहां पास में ही प्राचीन काली माता का मंदिर भी है. जिसका रास्ता निर्जन जंगलों से होकर जाता है.मन्दिर के इतिहास की बात करें तो 1400 वर्ष पुराने इस शिव मंदिर की स्थापना राजा रुकमंगत सिंह ने की थी. ऐसा बताया जाता है कि इस मंदिर में मुगल बादशाह नूर बाकी ने हमला भी किया था यहां गोलियों के निशान आज भी मौजूद हैं. वहीं मन्दिर में सुबह-शाम भक्तों की भीड़ उमड़ती है.

आरती का है विशेष महत्व

मंदिर की भव्यता और नक्काशी एक बहुत ही सुंदर दिखाई देती है. श्रावण मास में और प्रतिदिन यहां की आरती में भक्त शामिल होते हैं. खासतौर पर यहां की शयन आरती का विशेष महत्व भी है.यहां पर आरती विशेष वाद्य यंत्रों के साथ की जाती है सावन मास के दिनों में गांव के लोगों व कई जिलों से आने वाले भक्तों की इस मन्दिर में विशेष आस्था है. मंदिर में आए हुए भक्तों का कहना है , बाबा के दर्शन के लिए कई वर्षों से आ रहे हैं बाबा ने हमारी सभी मनोकामनाएं पूरी की है यहां पर जलाभिषेक और बेलपत्र चढ़ाने से ही बाबा प्रसन्न होते हैं.

09 Jul 2023 By Vishal Shukla

Noneshwar Mahadev : सावन स्पेशल-जानिए 1400 वर्ष पुराने शिव मंदिर के बारे में जहां मुगल बादशाह नूरबाक़ी ने किया था हमला


हाईलाइट्स

  • कानपुर के चौबेपुर में नरसिंह गांव में है प्राचीन नोनेश्वर महादेव मंदिर
  • 1400 वर्ष पुराना बताया जा रहा यह शिव मंदिर, नोन नदी किनारे स्थित है यह शिव मंदिर
  • मुगल बादशाह ने किया था हमला आज भी हैं गोलियों के निशान

Noneshwar Mahadev Temple has unique : हमारे देश में ऐसे कई रहस्यमयी और चमत्कारिक शिव मंदिर हैं. जिनकी एक अपनी अलग आस्था है. युगांतर प्रवाह की टीम आज आपको एक ऐसे प्राचीन कानपुर के शिव मंदिर के इतिहास के बारे में बताने जा रही है. जिसका अलग ही महत्व है.यह मंदिर कहां स्थित है कब स्थापित हुआ और इसकी क्या मान्यता है, इन सभी सवालों के जवाब भी हम आपको देंगे. तो चलिए शुरुआत करते हैं.

 

सावन मास में उमड़ती है भीड़

सावन मास का पवित्र माह चल रहा है. देश के कोने-कोने से छोटे-बड़े शिवालयों में भक्तों की भीड़ जुट रही है. कांवड़िए पवित्र नदियों से जल लेकर शिवालयों में जलाभिषेक करने के लिए पहुंच रहे हैं. चारों तरफ पूरा माहौल शिवमय हो चुका है. हर-हर महादेव ,ओम नमः शिवाय के साथ भक्त भक्ति भाव से मंदिरों में पहुंच रहे हैं.

1400 वर्ष पुराना है शिव मन्दिर

कानपुर का एक ऐसा प्राचीन मंदिर जो चौबेपुर क्षेत्र के नरसिंह गांव स्थित प्राचीन नोनेश्वर महादेव का मंदिर है. यह मंदिर करीब 1400 वर्ष पुराना बताया जाता है. इस मंदिर की अपनी एक अलग अनूठी आस्था भी है.श्रावण महीनों में दूर-दूर से भक्त पैदल यात्रा कर जलाभिषेक करते हैं .खास तौर पर सावन के सोमवार का विशेष महत्व रहता है. यहां जल से अभिषेक और दुग्ध से अभिषेक व बेल पत्र अर्पित करने मात्र से ही भोलेनाथ भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं.

नोन नदी के समीप है प्राचीन मंदिर मुगल बादशाह ने किया था हमला

नोनेश्वर महादेव मन्दिर नोन नदी के पास ही स्थित है. आसपास घना जंगल भी है.इस मंदिर में जो शिवलिंग है वह काफी विशाल है. यहां पास में ही प्राचीन काली माता का मंदिर भी है. जिसका रास्ता निर्जन जंगलों से होकर जाता है.मन्दिर के इतिहास की बात करें तो 1400 वर्ष पुराने इस शिव मंदिर की स्थापना राजा रुकमंगत सिंह ने की थी. ऐसा बताया जाता है कि इस मंदिर में मुगल बादशाह नूर बाकी ने हमला भी किया था यहां गोलियों के निशान आज भी मौजूद हैं. वहीं मन्दिर में सुबह-शाम भक्तों की भीड़ उमड़ती है.

आरती का है विशेष महत्व

मंदिर की भव्यता और नक्काशी एक बहुत ही सुंदर दिखाई देती है. श्रावण मास में और प्रतिदिन यहां की आरती में भक्त शामिल होते हैं. खासतौर पर यहां की शयन आरती का विशेष महत्व भी है.यहां पर आरती विशेष वाद्य यंत्रों के साथ की जाती है सावन मास के दिनों में गांव के लोगों व कई जिलों से आने वाले भक्तों की इस मन्दिर में विशेष आस्था है. मंदिर में आए हुए भक्तों का कहना है , बाबा के दर्शन के लिए कई वर्षों से आ रहे हैं बाबा ने हमारी सभी मनोकामनाएं पूरी की है यहां पर जलाभिषेक और बेलपत्र चढ़ाने से ही बाबा प्रसन्न होते हैं.

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