
फतेहपुर:जल सत्याग्रह को क्यों मजबूर हुए पत्रकार..!
ज़िले भर के पत्रकारों ने रविवार को जनपद के 15 से ज़्यादा अलग अलग स्थानों पर गंगा और यमुना नदियों की जलधारा में खड़े होकर जल सत्याग्रह किया..सवाल इस बात का है कि आखिर पत्रकारों को यह करने की ज़रूरत क्यों पड़ी.पढ़े पूरी खबर युगान्तर प्रवाह पर।
फतेहपुर:लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने की आज़ादी मिली है।पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है।लेकिन यूपी के मौजूदा हालात तो कुछ औऱ ही कहानी बयां कर रहे हैं।जिस तरीक़े से यहाँ पत्रकारों पर सिर्फ़ इस बात की खुन्नस में मुकदमे दर्ज कर दिए जा रहें हो कि उसने ज़िले में व्याप्त अव्यवस्थाओ को जनता के सामने उजागर कर दिया है!ताज़ा मामला फतेहपुर ज़िले का है रविवार को ज़िले भर के पत्रकारों ने अलग अलग स्थानों पर गंगा और यमुना नदियों की जलधारा में खड़े होकर जल सत्याग्रह किया।पत्रकारों की मांग है कि जिस तरीक़े से जिले के पत्रकारों के ऊपर फ़र्जी मुकदमें दर्ज किए गए हैं उन्हें वापस लिया जाए।

साथ ही पत्रकारों ने कहा कि वर्तमान जिलाधिकारी संजीव सिंह द्वारा लगातार पत्रकारों का उत्पीड़न किया जा रहा है।पत्रकारों ने सरकार से यह भी माँग की कि जिलाधिकारी संजीव सिंह का जनपद से स्थान्तरण किया जाए औऱ इनके कार्यकाल की शासन स्तर से उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर जाँच कराई जाए।अन्यथा कि स्थित में पत्रकारों का आंदोलन इसी तरह आगे भी जारी रहेगा।



इस मामले पर रविवार रात डीएम कार्यालय की तरफ़ से डाली गई प्रेस नोट में बताया गया है कि अजय भदौरिया द्वारा कोरोना कॉल के दौरान संचालित हो रही कम्युनिटी किचन के बन्द होने सम्बन्धी ट्वीट किया गया था।जो कि असत्य था।इसी सम्बन्ध में उनके विरुद्ध राजस्व निरीक्षक द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया है।
