जब मैं मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना..लहू से मेरी पेशानी में हिंदुस्तान लिख देना.!
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मशहूर शायर राहत इंदौरी का मंगलवार शाम पाँच बजे दिल का दौरा पड़ने से इंतकाल हो गया..कल कोरोना पॉजीटिव आने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था..पढ़ें युगान्तर प्रवाह की एक रिपोर्ट..
डेस्क:अपनी शायरी से देश और दुनियां के तमाम मुल्कों में शोहरत हासिल कर चुके मशहूर शायर राहत इंदौरी का मंगलवार शाम पाँच बजे इंदौर के अरबिंदो अस्पताल में इंतकाल हो गया।उनके निधन की सूचना से उनके चाहने वालों को गहरा आघात पहुँचा है।
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"राहत साहब का Cardiac Arrest की वजह से आज शाम 05:00 बजे इंतेक़ाल हो गया है..... उनकी मग़फ़िरत के लिए दुआ कीजिये...."
अपनी शायरी और शायरी को मुशायरों और कवि सम्मेलनों में जिस अंदाज में वह कहते थे वह सुनने वालों को काफ़ी आकर्षित करता था।
उनका एक प्रसिद्ध शेर है जिसमें उन्होंने कहा था-'जब मैं मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना..लहू से मेरी पेशानी में हिंदुस्तान लिख देना.!'
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