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Rajesh Singh Chauhan:भारतीय किसान यूनियन में बग़ावत फतेहपुर के राजेश सिंह चौहान बने राष्ट्रीय अध्यक्ष

Rajesh Singh Chauhan:भारतीय किसान यूनियन में बग़ावत फतेहपुर के राजेश सिंह चौहान बने राष्ट्रीय अध्यक्ष
Rajesh Singh Chauhan फाइल फ़ोटो

भारतीय किसान यूनियन में तगड़ी फूट हो गई है.यूनियन के कई शीर्ष नेताओं ने अलग होकर एक नया संगठन खड़ा कर दिया है.किसान नेता व अभी तक भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे राजेश सिंह चौहान अब भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं. पढ़ें पूरी ख़बर युगान्तर प्रवाह पर. Rajesh Singh Chauhan Bhartiya Kisan Union President News

Rajesh Singh Chauhan:किसान आंदोलन में सबसे अधिक चर्चित रहे राकेश टिकैत जिस भारतीय किसान यूनियन से आते हैं, उसमें फूट पड़ गई है. संगठन के कई शीर्ष नेताओं ने बगावत कर दी है. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंह चौहान सहित कई बड़े किसान नेताओं ने भारतीय किसान यूनियन से अलग होकर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) नाम से नया संगठन बना लिया है.

युगान्तर प्रवाह से बातचीत करते हुए राजेश सिंह चौहान ने बताया कि भारतीय किसान यूनियन को राकेश टिकैत ने पूरी तरह से राजनीतिक कर दिया था.जिसके चलते हम लोगों को ऐसा निर्णय लेना पड़ा.

बता दें कि लखनऊ में राजेश सिंह चौहान की अध्यक्षता में भारतीय किसान यूनियन की एक बैठक हुई. जिसमें भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) का गठन करने का फैसला हुआ. इस संगठन के अध्यक्ष भी खुद राजेश सिंह चौहान हैं. अब तक नरेश सिंह टिकैत भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष थे. भारतीय किसान यूनियन की इस बैठक में नरेश टिकैत और राकेश टिकैत शामिल नहीं थे. 

बताया गया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की इस बैठक में जितने भी किसान नेता शामिल हुए, उनकी नाराजगी खासतौर पर राकेश टिकैत से थी. उन्होंने टिकैत पर आरोप लगाया कि, राकेश टिकैत ने आंदोलन का व्यक्तिगत फायदा उठाया. वो अलग-अलग पार्टियों के मंच पर दिखते रहे. यही सब आरोप लगाते हुए बैठक में प्रस्ताव लाया गया और इसके बाद ये बड़ा बदलाव किया गया. बैठक में ये दावा किया गया है कि ये भारतीय किसान यूनियन का मूल संगठन है, जिसमें अध्यक्ष बदला गया है. ये कोई नया संगठन नहीं बनाया गया है. 

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वहीं राकेश टिकैत ने कहा कि कई लोगों को छोटे-छोटे गांवों से निकालकर बीकेयू में 30 साल में बड़े-बड़े पदों पर बैठाया. संयुक्त मोर्चे में भी 550 किसान संगठन हैं.करनाल में बीकेयू की 18 मई को कार्यकारिणी की बैठक होगी.इसमें अहम फैसले लिए जाएंगे.हमारे ऊपर कोई राजनीतिक दबाव नहीं है.उन लोगों ने दबाव में अपना दूसरा संगठन बनाया है.हमने उन्हें सुबह भी मनाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने.

Read More: महाराष्ट्र में बदलेगा मौसम का मिजाज: बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट, सावधान रहें किसान

15 May 2022 By Shubham Mishra

Rajesh Singh Chauhan:भारतीय किसान यूनियन में बग़ावत फतेहपुर के राजेश सिंह चौहान बने राष्ट्रीय अध्यक्ष

Rajesh Singh Chauhan:किसान आंदोलन में सबसे अधिक चर्चित रहे राकेश टिकैत जिस भारतीय किसान यूनियन से आते हैं, उसमें फूट पड़ गई है. संगठन के कई शीर्ष नेताओं ने बगावत कर दी है. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंह चौहान सहित कई बड़े किसान नेताओं ने भारतीय किसान यूनियन से अलग होकर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) नाम से नया संगठन बना लिया है.

युगान्तर प्रवाह से बातचीत करते हुए राजेश सिंह चौहान ने बताया कि भारतीय किसान यूनियन को राकेश टिकैत ने पूरी तरह से राजनीतिक कर दिया था.जिसके चलते हम लोगों को ऐसा निर्णय लेना पड़ा.

बता दें कि लखनऊ में राजेश सिंह चौहान की अध्यक्षता में भारतीय किसान यूनियन की एक बैठक हुई. जिसमें भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) का गठन करने का फैसला हुआ. इस संगठन के अध्यक्ष भी खुद राजेश सिंह चौहान हैं. अब तक नरेश सिंह टिकैत भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष थे. भारतीय किसान यूनियन की इस बैठक में नरेश टिकैत और राकेश टिकैत शामिल नहीं थे. 

बताया गया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की इस बैठक में जितने भी किसान नेता शामिल हुए, उनकी नाराजगी खासतौर पर राकेश टिकैत से थी. उन्होंने टिकैत पर आरोप लगाया कि, राकेश टिकैत ने आंदोलन का व्यक्तिगत फायदा उठाया. वो अलग-अलग पार्टियों के मंच पर दिखते रहे. यही सब आरोप लगाते हुए बैठक में प्रस्ताव लाया गया और इसके बाद ये बड़ा बदलाव किया गया. बैठक में ये दावा किया गया है कि ये भारतीय किसान यूनियन का मूल संगठन है, जिसमें अध्यक्ष बदला गया है. ये कोई नया संगठन नहीं बनाया गया है. 

वहीं राकेश टिकैत ने कहा कि कई लोगों को छोटे-छोटे गांवों से निकालकर बीकेयू में 30 साल में बड़े-बड़े पदों पर बैठाया. संयुक्त मोर्चे में भी 550 किसान संगठन हैं.करनाल में बीकेयू की 18 मई को कार्यकारिणी की बैठक होगी.इसमें अहम फैसले लिए जाएंगे.हमारे ऊपर कोई राजनीतिक दबाव नहीं है.उन लोगों ने दबाव में अपना दूसरा संगठन बनाया है.हमने उन्हें सुबह भी मनाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने.

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