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Madhurashtakam: जन्माष्टमी में बालगोपाल को प्रसन्न करने के लिए करें मधुराष्टकम् का पाठ अधरं मधुरं वदनं मधुरं

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भगवान श्री कृष्ण (Shri Krishna) को प्रसन्न करने के आराधना करना भी एक मध्यम है.ऐसा ही एक ग्रंथ है महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य (Vallabhacharya) द्वारा लिखित मधुराष्टकम् जिसमें भगवान श्री कृष्ण की मधुरता का वर्णन किया गया है.कहते हैं की इसके निरंतर पाठ करने से श्री कृष्ण की परमभक्ति प्राप्त होती हैं. पढ़ें मधुराष्टकं का पाठ (Madhurashtakam Adhram Madhuram Vadnam Madhuram)

Madhurashtakam: कहते हैं की महाप्रभु श्रीवल्लभाचार्य जी द्वारा लिखित मधुराष्टकम का नित्य पाठ करते रहने से घर की बाधाएं दूर होती हैं,पति-पत्नी के रिश्तों में मधुरता आती हैं और जब सब जगह से निराशा हो जाए तो मधुराष्टकं के पाठ करने मात्र से बड़े से बड़ा विघ्न दूर हो जाता है. इस ग्रंथ की प्रत्येक पंक्ति भगवान श्री कृष्ण के चरित्र उनकी मधुरता और उनकी गतिविधि को दर्शाता है

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      मधुराष्टकम् (Madhurashtakam)

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं ।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥१॥

वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरं ।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥२॥

वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥३॥

गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरं ।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥४॥

करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरं ।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥५॥

गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥६॥

गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरं।
दृष्टं मधुरं सृष्टं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥७॥

गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥८॥

 श्री वल्लभाचार्य कृत
Madhurashtakam Adharam Madhuram Vadanam Madhuram Lyrics In Hindi

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