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CAA हिंसा मामला:सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से किया इंकार..योगी सरकार से पूछे सवाल..!

CAA हिंसा मामला:सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से किया इंकार..योगी सरकार से पूछे सवाल..!
प्रतीकात्मक फ़ोटो साभार गूगल

लखनऊ में सीएए प्रदर्शनकारियो के पोस्टर लगाए जानें के मामले हाईकोर्ट के निर्णय के विरोध में सुप्रीम कोर्ट पहुंची योगी सरकार को वहां से भी शुरुआती झटका मिला है..पढ़े युगान्तर प्रवाह की एक रिपोर्ट।

नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इंकार किया है।आपको बता दे कि हाईकोर्ट ने योगी सरकार को लखनऊ में CAA हिंसा के आरोपियों की होर्डिंग्स, बैनर लगवाए जाने के मामले में फटकार लगाई थी।और सरकार से पूछा था कि किस क़ानून के तहत होर्डिंग्स लगाई गई हैं।साथ ही होर्डिंग्स को तत्काल हटाए जाने का आदेश दिया था। (caa violence supreme court verdict)

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इस आदेश के विरोध में योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं थीं।गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पोस्टर्स लगाए जाने पर सवाल उठाए।जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने कहा कि सरकार को क़ानून के मुताबिक़ चलना चाहिए और फ़िलहाल कोई भी क़ानून उत्तर प्रदेश सरकार का समर्थन नहीं कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि किस क़ानून के तरह उत्तर प्रदेश की सरकार ने प्रदर्शनकारियों के पोस्टर राजधानी लखनऊ के चौक-चौराहे पर लगाए हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने ये मामला बड़ी बेंच को भेजने का फ़ैसला किया है।अब इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

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आपको बता दे कि 19 दिसंबर को सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान लखनऊ के चार थाना क्षेत्रों में हिंसा भड़क गई थी।इस दौरान ठाकुरगंज, हज़रतगंज, क़ैसरबाग़ और हसनगंज इलाक़े में कई निजी वाहनों समेत पुलिस चौकी और पुलिस के वाहनों को भी आग लगा दी गई थी।राज्य सरकार ने नुक़सान की भरपाई के लिए वीडियो फ़ुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर 150 से ज़्यादा लोगों को नोटिस जारी किया था जिनमें फ़िलहाल 57 को इसके लिए दोषी पाया गया है।

इन्ही 57 लोगों की फ़ोटो और होर्डिंग्स लखनऊ प्रशासन द्वारा लगवाई गई है।और इनसे जल्द से जल्द हर्जाना राशि भरने का आदेश दिया गया है।

12 Mar 2020 By Shubham Mishra

CAA हिंसा मामला:सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से किया इंकार..योगी सरकार से पूछे सवाल..!

नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इंकार किया है।आपको बता दे कि हाईकोर्ट ने योगी सरकार को लखनऊ में CAA हिंसा के आरोपियों की होर्डिंग्स, बैनर लगवाए जाने के मामले में फटकार लगाई थी।और सरकार से पूछा था कि किस क़ानून के तहत होर्डिंग्स लगाई गई हैं।साथ ही होर्डिंग्स को तत्काल हटाए जाने का आदेश दिया था। (caa violence supreme court verdict)

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इस आदेश के विरोध में योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं थीं।गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पोस्टर्स लगाए जाने पर सवाल उठाए।जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने कहा कि सरकार को क़ानून के मुताबिक़ चलना चाहिए और फ़िलहाल कोई भी क़ानून उत्तर प्रदेश सरकार का समर्थन नहीं कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि किस क़ानून के तरह उत्तर प्रदेश की सरकार ने प्रदर्शनकारियों के पोस्टर राजधानी लखनऊ के चौक-चौराहे पर लगाए हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने ये मामला बड़ी बेंच को भेजने का फ़ैसला किया है।अब इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

आपको बता दे कि 19 दिसंबर को सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान लखनऊ के चार थाना क्षेत्रों में हिंसा भड़क गई थी।इस दौरान ठाकुरगंज, हज़रतगंज, क़ैसरबाग़ और हसनगंज इलाक़े में कई निजी वाहनों समेत पुलिस चौकी और पुलिस के वाहनों को भी आग लगा दी गई थी।राज्य सरकार ने नुक़सान की भरपाई के लिए वीडियो फ़ुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर 150 से ज़्यादा लोगों को नोटिस जारी किया था जिनमें फ़िलहाल 57 को इसके लिए दोषी पाया गया है।

इन्ही 57 लोगों की फ़ोटो और होर्डिंग्स लखनऊ प्रशासन द्वारा लगवाई गई है।और इनसे जल्द से जल्द हर्जाना राशि भरने का आदेश दिया गया है।

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