
फतेहपुर:प्रियंका दौरा-ज़िले में आईं प्रियंका गांधी क्या कांग्रेसियो को एकजुट करने में सफल हो पाईं हैं.?
फतेहपुर दौरे में आई कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी ज़िले में क़रीब 6 घण्टों तक रही ज़िले में पार्टी नेताओं के बीच चल रही आपसी खींचातान इस दौरे के बाद क्या खत्म हो पाएगी...पढ़े युगान्तर प्रवाह की एक रिपोर्ट।
फ़तेहपुर: यूपी में कांग्रेस के उखड़े कूल्हे बैठाने का प्रयास कर रहीं प्रियंका पूरे प्रदेश की गलियों में ख़ाक छानते घूम रहीं हैं।प्रियंका भले ही इस बार के लोकसभा चुनावों के पहले तक सक्रिय राजनीति में न रहीं हो लेक़िन उनके नाम और चेहरे का प्रयोग कांग्रेसी हर चुनावों में करते रहें हैं।इसके पहले प्रियंका केवल अपनी मां सोनिया और भाई राहुल के संसदीय क्षेत्रों में ही प्रचार करती रहीं हैं और अन्य जगहो पर वह कम ही या न के बराबर जाती थीं।

लेक़िन 2014 के चुनावों में चला मोदी मैजिक देश भर से कांग्रेस के अस्तित्व को समाप्त कर गया। जिसके चलते इस बार के लोकसभा चुनावों के लिए प्रियंका ने कांग्रेस की डूबती नैय्या की डोर अपने हाँथो में ली है।
प्रियंका की ताक़त को कांग्रेस भी बखूबी जानती है और उनकी लोकप्रियता ख़ासकर यूपी में ज्यादा रही है यही वजह है प्रियंका गांधी ने अपने औपचारिक राजनीतिक जीवन की शुरुआत भले ही कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के पद से की हो लेक़िन उनकी असल परीक्षा पूर्वी यूपी के प्रभारी के तौर पर ही होगी।

क्या ज़िले में पार्टी के अंदर चल रही खींचा तान प्रियंका के दौरे के बाद समाप्त होगी..?
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अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रियंका के रोड शो के दौरान राकेश के साथ दिखने वाले ज़िले के कट्टर कांग्रेसी नेता टिकट बंटवारे का गम भुला सचान के पक्ष में कांग्रेस के लिए वोट मांगेंगे या कहानी वही से फ़िर शुरू होगी जो सचान के टिकट मिलने के बाद शुरू हुई थी।
