
Etawah Punarjanm ki kahani: पुनर्जन्म की इस हैरान कर देने वाली कहानी सुन हो जाएंगे रोंगटे खड़े ! अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इस सच्ची घटना पर लगाई थी मुहर
Sumitra Shiva Story In Hindi
वैसे तो आप सभी ने पुनर्जन्म को लेकर काफी किस्से और कहानियां सुनी और देखी होंगी. लेकिन आज हम आपको पुनर्जन्म की एक ऐसी सच्ची घटना से रूबरू करवाने जा रहे हैं. जिसे जानकर आप को डर भी लग सकता है. हालांकि इस घटना को खुद अमेरिका की वर्जिनिया यूनिवर्सिटी के पुनर्जन्म एक्सपर्टस टीम ने भारत आकर खुद इस घटना पर रिसर्च करते हुए इसे पुनर्जन्म की सच्ची कहानी का खिताब दिया था.
5 दशक वाली हैरान कर देने वाली सच्ची कहानी
यह पुनर्जन्म की घटना 5 दशक पुरानी उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सफीपुरा गांव की है. उस दौर में न तो घरों बिजली हुआ करती थी और न ही उस तरह की सुख सुविधाएं जो वर्तमान में हमारे इर्दगिर्द रहती है. इसी बीच साल 1968 में एक गरीब ठाकुर परिवार में एक लड़की का जन्म हुआ था. घरवालों ने लड़की का नाम सुमित्रा रखा, उस दौर में गांव में रहने वाले ग्रामीण अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए शहर जाकर नौकरी करते थे.

खेलने-कूदने की उम्र में हुई शादी एक दिन हुआ कुछ ऐसा
आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते सुमित्रा कभी स्कूल न जा सकी और अकेले होने की वजह से वह काफी परेशान भी रहती थी. जिसके बाद उसके पिता ने मात्र 13 साल की उम्र में ही जगदीश सिंह नाम के आदमी के साथ उसकी शादी करा दी, लेकिन जगदीश भी नौकरी करने के लिए शहर जाता था. यहाँ पर भी सुमित्रा अपने सास-ससुर के साथ ही रहती थी. इस बीच साल 1984 में उसने एक बेटे को जन्म दिया. बेटे को जन्म देने के बाद अब उसका अकेलापन काफी हद तक कम होने लगा था वह अपने बेटे को अपनी जान से भी ज्यादा चाहती थी. जब वह पानी भरने या घर के किसी भी काम से जाती तो अपने बेटे को साथ जरूर ले जाती थी.

16 जुलाई 1985 जिसने बदल दी कई जिंदगियां


बात करते-करते अचानक सुमित्रा हमेशा की तरह आसमान की तरफ देखने लगी और उसके हाथ अकड़ गए ऐसे में घबराई महिला ने आसपास के लोगों को बुलाकर इकट्ठा कर लिया सभी लोगों ने सुमित्रा को काफी हिलाया डुलाया लेकिन कुछ भी नही हुआ. जिसके बाद बैध जी को बुलाया गया काफी मशक्कत के बाद सुमित्रा को जमीन पर लिटाया गया. बैध ने सुमित्रा का परीक्षण कर उसे मृत घोषित कर दिया उसकी मौत की खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल गयी और सुमित्रा की भविष्यवाणी सच साबित हुई उधर सुमित्रा की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां हो रही थी कि तभी कुछ लोगो ने बताया कि सुमित्रा के शरीर में कुछ हरकत हो रही है, एक बार फिर से बैध जी को बुलाया गया उन्होंने उसे चमत्कार बताते हुए कहा कि, मातम करना बन्द कर दीजिए सुमित्रा अभी जिंदा है.

20 अक्टूबर 1985 को इस कहानी में आया नया मोड़, वैज्ञानिक भी हैरान
20 अक्टूबर को उस गांव में एक आदमी आया और उसने ग्रामीणों से सुमित्रा की विषय मे जानकारी जुटाई उसने बताया कि सुमित्रा उसे 3 महीनों से पत्र लिख रही है, जिसके बाद सुमित्रा के पति ने उससे पूछा कि आप कौन है तो उसने बताया कि, उसका नाम राम सिया त्रिपाठी है वह इटावा जिले के दिबियापुर गांव का रहने वाला है. पेशे से वह एक लेक्चरार है, उसकी बात सुनकर सुमित्रा दौड़ी चली आयी और उसने उस आदमी को पिता जी कहकर बुलाया और कहा कि पिता जी मैं सुमित्रा नही बल्कि आपकी बेटी शिवा त्रिपाठी हूँ. ये सुनकर सभी हैरान रह गये हालांकि इस बात को लेकर राम सिया काफी परेशान थे तो सबूत के तौर पर उन्होंने सुमित्रा/शिवा को उनकी बेटी की शादी का एलबम दिखाया जिसके बाद सुमित्रा से खुद को शिवा बताने वाली महिला ने फोटो में दिख रहे एक के बाद एक लोगो को पहचान लिया.
उसने ये भी बताया कि, 24 अक्टूबर 1962 को मेरा जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था और 18 साल की आयु में मेरी शादी छेदी लाल नाम आदमी के साथ हुई थी मैंने ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर अपने पिता की तरह ही लेक्चरार थी मेरे दो बेटे है अपने ससुराल में मैं सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी थी शायद इसीलिए मुझसे मेरी ननद नाराज रहती थी और उसने मेरे सर पर जानलेवा हमला करते हुए मुझे मार दिया था यह सुनकर राम सिया रोने लगे और सुमित्रा/शिवा को गले लगा लिया अब सब कुछ साफ होने लगा था क्योंकि सुमित्रा की मौत और शिवा की हत्या में केवल 24 घंटे का ही फर्क था शायद इसीलिए सुमित्रा ने 3 दिन पहले ही अपनी मौत की भविष्यवाणी की थी
फिलहाल वह अपने पिता के साथ खुशी-खुशी अपने घर वापस लौट गई.
अमेरिका के एक्सपर्ट्स सच्चाई जानने पहुंचे
वही जब लेक्चर अपने घर पहुंचे जहां पर वह अपने दोनों बच्चों के साथ रहने लगी कुछ समय बाद उसे एहसास हुआ कि जगदीश उसका काफी ख्याल रखता था जिसके चलते वहां अपने दोनों बच्चों को लेकर वापस उसी गांव में आ गई और सुमित्रा के एक बेटे और खुद के दो बच्चों के साथ अपने पति जगदीश के साथ गांव में ही रहने लगी तो वहीं ये घटना पूरे इटावा शहर में आग की तरह फैल गई मीडिया ने भी इस पूरी खबर पर अपनी दिलचस्पी दिखाई.
जिसके बाद भारत में पुनर्जन्म को लेकर रिसर्च कर रही टीम भी उनके घर और गांव में पहुंची. मामला काफी पेचीदा होने के चलते अमेरिका की वर्जिनिया यूनिवर्सिटी की पुनर्जन्म एक्सपर्ट टीम भी इस गांव में पहुंचे और बारीकी से सभी सबूत को एकत्रित किए, जांच में यह साबित हो गया कि, सुमित्रा की मौत के बाद शिवा का पुनर्जन्म हुआ था. उसी समय का यह दुनिया का पहला और अनोखा पुनर्जन्म का केस बन गया था. साल 1998 में सुमित्रा/शिवा की लंबी बीमारी के बाद मौत हो गयी. साथ ही लगभग दो वर्ष बाद जगदीश की मौत हो गई थी. आज भी उनके परिवार वाले जीवित हैं
