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uttar pradesh news:पूर्व राज्यपाल का लखनऊ के पीजीआई में निधन

uttar pradesh news:पूर्व राज्यपाल का लखनऊ के पीजीआई में निधन
माता प्रसाद पूर्व राज्यपाल।फ़ाइल फ़ोटो

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल रहे माता प्रसाद का लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में बीमारी के बाद निधन हो गया.पढ़ें युगान्तर प्रवाह की रिपोर्ट.

लखनऊ:अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद का लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में निधन हो गया।माता प्रसाद 1993 से 1999 तक अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल रहें हैं।mata prasad governor

माता प्रसाद(mata prasad) यूपी के जौनपुर ज़िले के मछली शहर के रहने वाले थे।उन्होंने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की थी औऱ अंत समय तक कांग्रेसी ही रहे।साल 1957 से 1974 तक ज़िले की शाहगंज विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।इसके बाद विधानपरिषद सदस्य चुने गए औऱ प्रदेश की नारायण दत्त तिवारी सरकार में मंत्री बने।

कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार में माता प्रसाद को अरुणाचल प्रदेश का राज्यपाल बना दिया गया था।जानकार बताते हैं कि भारतीय राजनीति में माता प्रसाद की छवि बेहद सादगीपूर्ण थी उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से काटा है।

राजनीति के साथ साथ उन्हें साहित्य के क्षेत्र में भी रूचि थी।उन्होंने एकलव्य खंडकाव्य, राजनीति की अर्थ सतसई, परिचय सतसई, दिग्विजयी रावण जैसी काव्य कृतियों की रचना भी की।

Read More: Uttar Pradesh: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, सहायक अध्यापक बनने के लिए बीएड अनिवार्य, क्यों दी गई थी चुनौती

20 Jan 2021 By Shubham Mishra

uttar pradesh news:पूर्व राज्यपाल का लखनऊ के पीजीआई में निधन

लखनऊ:अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद का लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में निधन हो गया।माता प्रसाद 1993 से 1999 तक अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल रहें हैं।mata prasad governor

माता प्रसाद(mata prasad) यूपी के जौनपुर ज़िले के मछली शहर के रहने वाले थे।उन्होंने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की थी औऱ अंत समय तक कांग्रेसी ही रहे।साल 1957 से 1974 तक ज़िले की शाहगंज विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।इसके बाद विधानपरिषद सदस्य चुने गए औऱ प्रदेश की नारायण दत्त तिवारी सरकार में मंत्री बने।

कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार में माता प्रसाद को अरुणाचल प्रदेश का राज्यपाल बना दिया गया था।जानकार बताते हैं कि भारतीय राजनीति में माता प्रसाद की छवि बेहद सादगीपूर्ण थी उन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से काटा है।

राजनीति के साथ साथ उन्हें साहित्य के क्षेत्र में भी रूचि थी।उन्होंने एकलव्य खंडकाव्य, राजनीति की अर्थ सतसई, परिचय सतसई, दिग्विजयी रावण जैसी काव्य कृतियों की रचना भी की।

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