
Kanpur Tapeshwari Mata Temple: मां सीता के त्याग और तप से जुड़ा हुआ है इस मंदिर का इतिहास ! यहाँ लव-कुश का हुआ था मुंडन संस्कार
Kanpur News In Hindi
आज से चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) की शुरुआत हो चुकी है. देवी मां के मंदिरों में भक्तों की भीड़ (Devotees Crowd) तड़के सुबह से ही देखी जा रही है. कानपुर में भी देवी मां के बहुत से मंदिर है जिसमें से बिरहाना रोड (Birhana Road) स्थित मां तपेश्वरी (Tapeshwari Temple) का मंदिर है शास्त्रों के मुताबिक मटकेश्वरी माता सीता के बाद प्रकट हुई थी उनको मंदिर में पिंडी के रूप में स्थापित किया गया था आईए जानते हैं इस मंदिर के इतिहास के बारे में..
मंदिर में आकर भक्त ज्योत जलाकर मांगते है मनोकामना
देशभर में चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है आज से अगले 9 दिनों तक माता के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाएगी. देशभर में माता के अलग-अलग स्वरूपों के मंदिर स्थापित हैं तो वहीं औद्योगिक नगरी कानपुर (Kanpur) में भी माता रानी के ऐसे तमाम मंदिर हैं जहां पर नवरात्रि के दिनों में भक्तों (Devotees) का तांता लगा रहता है.

त्रेतायुग से जुड़ा है इतिहास
शास्त्रों के मुताबिक इस मंदिर का इतिहास त्रेतायुग (History Tretayug) से जुड़ा हुआ है इस मंदिर में दर्शन करने के साथ-साथ श्रद्धालु दूरदराज से आकर मुंडन संस्कार भी करवाते हैं. ऐसा कहा जाता है कि जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने मां सीता का त्याग कर दिया था तब वह काफी दिन बिठूर के आश्रम में रही थी यहीं पर उन्होंने अपने दो पुत्रों लव और कुश को जन्म दिया था इसके बाद उनका मुंडन संस्कार भी यहीं पर कराया था. तबसे यहां बच्चों के मुंडन की मान्यता भी बढ़ चली. यहां 101 दिये 9 दिनों तक जलते रहते हैं.
अखण्ड ज्योत जगाकर मांगते है मनोकामना

इस तरह माँ तपेश्वरी हुई थीं प्रकट


