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Hal Shashthi Lalahi Chhath Ki Kahani: हरछठ और ललही छठ की इस पौराणिक व्रत कथा को पढ़ने से आपकी संतान होगी दीर्घायु

Hal Shashthi Lalahi Chhath Ki Kahani: हरछठ और ललही छठ की इस पौराणिक व्रत कथा को पढ़ने से आपकी संतान होगी दीर्घायु
Hal Shashthi Vrat Katha In Hindi

lalahi chhath ki kahani

हलछ्ठ ललही छठ की व्रत कथा संतान की दीर्घायु की कामना के लिए होती है. महिलाएं हल षष्ठी का व्रत रखती हैं मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से संतान को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है. पढ़ें हरछठ की इस पौराणिक कथा को (Hal chhath Lalahi Chhath Mahua Chhath Balram Jayanti Vrat Katha In Hindi)

Hal Shashthi Lalahi Chhath Balram Jayanti Vrat Katha In Hindi: हिंदू धर्म में हर वर्ष भद्र पद मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हलछठ (हरछठ) ललही छठ या बलराम जयंती के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम का जन्म हुआ था. हरछठ का व्रत पुत्रों की दीर्घ आयु और उनकी संपन्नता के लिए पुत्रवती महिलाएं करतीं हैं. ऐसी मान्यता है की इस व्रत को करने से संतान के सभी संकट दूर हो जाते हैं. इस व्रत में पूजन विधि के उपरांत एक पौराणिक कथा जरूर पढ़ी जाती हैं. तो पढ़ें ये कथा जिससे आपके संतान के सारे कष्ट दूर हो जाएं. 

(Hal chhath Lalahi Chhath Mahua Chhath Balram Jayanti Vrat Katha In Hindi)

हलछठ ललही छठ की पौराणिक व्रत कथा ( Hal Chhath Vrat Katha In Hindi)

प्राचीन काल में एक ग्वालिन थी। उसका प्रसवकाल अत्यंत निकट था। एक ओर वह प्रसव से व्याकुल थी तो दूसरी ओर उसका मन गौ-रस (दूध-दही) बेचने में लगा हुआ था। उसने सोचा कि यदि प्रसव हो गया तो गौ-रस यूं ही पड़ा रह जाएगा।

यह सोचकर उसने दूध-दही के घड़े सिर पर रखे और बेचने के लिए चल दी किन्तु कुछ दूर पहुंचने पर उसे असहनीय प्रसव पीड़ा हुई। वह एक झरबेरी की ओट में चली गई और वहां एक बच्चे को जन्म दिया।

वह बच्चे को वहीं छोड़कर पास के गांवों में दूध-दही बेचने चली गई। संयोग से उस दिन हल षष्ठी थी। गाय-भैंस के मिश्रित दूध को केवल भैंस का दूध बताकर उसने सीधे-सादे गांव वालों में बेच दिया।

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उधर जिस झरबेरी के नीचे उसने बच्चे को छोड़ा था, उसके समीप ही खेत में एक किसान हल जोत रहा था। अचानक उसके बैल भड़क उठे और हल का फल शरीर में घुसने से वह बालक मर गया।

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इस घटना से किसान बहुत दुखी हुआ, फिर भी उसने हिम्मत और धैर्य से काम लिया। उसने झरबेरी के कांटों से ही बच्चे के चिरे हुए पेट में टांके लगाए और उसे वहीं छोड़कर चला गया।

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कुछ देर बाद ग्वालिन दूध बेचकर वहां आ पहुंची। बच्चे की ऐसी दशा देखकर उसे समझते देर नहीं लगी कि यह सब उसके पाप की सजा है।

वह सोचने लगी कि यदि मैंने झूठ बोलकर गाय का दूध न बेचा होता और गांव की स्त्रियों का धर्म भ्रष्ट न किया होता तो मेरे बच्चे की यह दशा न होती। अतः मुझे लौटकर सब बातें गांव वालों को बताकर प्रायश्चित करना चाहिए।

ऐसा निश्चय कर वह उस गांव में पहुंची, जहां उसने दूध-दही बेचा था। वह गली-गली घूमकर अपनी करतूत और उसके फलस्वरूप मिले दंड का बखान करने लगी। तब स्त्रियों ने स्वधर्म रक्षार्थ और उस पर रहम खाकर उसे क्षमा कर दिया और आशीर्वाद दिया।

बहुत-सी स्त्रियों द्वारा आशीर्वाद लेकर जब वह पुनः झरबेरी के नीचे पहुंची तो यह देखकर आश्चर्यचकित रह गई कि वहां उसका पुत्र जीवित अवस्था में पड़ा है। तभी उसने स्वार्थ के लिए झूठ बोलने को ब्रह्म हत्या के समान समझा और कभी झूठ न बोलने का प्रण कर लिया ।

(Hal chhath Lalahi Chhath Mahua Chhath Balram Jayanti Vrat Katha In Hindi)

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