
Fatehpur Nagar Nikay Chunav 2022 : सपा प्रसपा के विलय से फतेहपुर की राजनीति में बदलाव की आहट निकाय चुनाव में सीधा असर.!
गुरुवार को शिवपाल यादव की पार्टी प्रसपा का समाजवादी पार्टी में विलय हो गया. विलय का आधिकारिक ऐलान शिवपाल औऱ अखिलेश ने एकसाथ किया.इस विलय का फतेहपुर की राजनीति में क्या असर पड़ेगा आइए जानते हैं.
Fatehpur News : गुरुवार आठ दिसम्बर का दिन यूपी की राजनीति के लिए बड़ा महत्वपूर्ण साबित हुआ. मैनपुरी से डिंपल यादव की रिकार्ड मतों की जीत के साथ ही लंबे समय से दूर चल रहे चाचा भतीजा आधिकारिक रूप से एकसाथ आ गए.चाचा शिवपाल ने अपनी पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ( प्रसपा ) का सपा में विलय कर दिया.अब इस विलय का असर जिलों में काम कर रहे दोनों पार्टियों के नेताओं पर पड़ना तय है.फतेहपुर ज़िले में इस विलय से समाजवादी पार्टी के नेताओं को जहां फ़ायदा होगा वहीं नुकसान की भी आशंका है.

बाहरी तौर पर दो पार्टियां का विलय बड़ी पार्टी के लिए लाभकारी नज़र आता है.लेकिन अंदरखाने कई बड़ी दिक्कतें आ जाती हैं.फतेहपुर ज़िले की बात करें तो शिवपाल के सपा से अलग होने के साथ ही ज़िले के कई कद्दावर भी सपा से टूटकर शिवपाल के खेमे में चले गए थे.वह लगातार शिवपाल औऱ उनकी पार्टी प्रसपा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे.लेकिन अब जब शिवपाल ने अपनी पूरी पार्टी का ही विलय सपा में कर दिया तो शिवपाल के साथ रहे नेताओं का भविष्य क्या होगा.यह अपने आप में बड़ा सवाल है.हालांकि शिवपाल अपना राजनीतिक भविष्य देखते हुए यह कतई नहीं करेंगें की उनके संघर्ष में साथ डटे रहे नेता इधर उधर भटकें.यह भी कहा जा रहा है कि भले ही शिवपाल का वर्चस्व सपा में मुलायम के दौर वाला न हो पाए लेकिन इतना भी कम नहीं होगा कि वह चुनावों में दख़ल न दें.शिवपाल की अब सपा में सुनी और मानी दोनों जाएगी ऐसे में सपा के मौजूदा नेताओं के सामने भी संकट खड़ा हो गया है.



बहरहाल सपा प्रसपा के विलय ने यूपी के नगर निकाय चुनाव को औऱ दिलचस्प बना दिया है. ख़ासकर फतेहपुर में इस विलय के बाद से कई नेताओं के भीतर उथल पुथल मच गई है.
