IAS Ravindra Kumar Biography: कौन हैं IAS अफसर रविन्द्र कुमार ! जिन्होंने एवरेस्ट की चढ़ाई कर कैम्प की करी थी सुरक्षा

IAS Ravindra Kumar Biography: आईएएस बनने की चाह न जाने कितने उम्मीदवारों को होती है, कड़ी मेहनत और निश्चयी दृढ़ संकल्प की बदौलत यहां तक पहुंचा जा सकता है. बीते दिनों शासन की ओर से कई आईएएस अफसरों के तबादले किये गए. इनमें से एक ऐसे 2011 बैच के IAS अफसर हैं, जो कड़ी मेहनत के बल पर अफसर बने और इतना ही नहीं एवरेस्ट के शिखर पर चढ़कर फतेह किया. ये आईएएस अफसर रविन्द्र कुमार है, जिन्हें अब बरेली (Bareilly News ) का जिलाधिकारी बनाकर भेजा गया है. इससे पहले वे झांसी के जिलाधिकारी थे. उनके आईएएस के सफर की कहानी

IAS Ravindra Kumar Biography: कौन हैं IAS अफसर रविन्द्र कुमार ! जिन्होंने एवरेस्ट की चढ़ाई कर कैम्प की करी थी सुरक्षा
आईएएस रविन्द्र कुमार : फोटो साभार सोशल मीडिया

हाईलाइट्स

  • 2011 बैच के आईएएस अफसर रविन्द्र कुमार बने बरेली के जिलाधिकारी
  • 2002-2008 तक मर्चेंट नेवी में की नौकरी, फिर दिया यूपीएससी का एक्जाम किया पास
  • दो बार एवरेस्ट की चढ़ाई भी की, कई उत्कृष्ट कार्यो में दिया गया पुरुष्कार

Who is IAS Officer Ravindra Kumar : आईएएस अफसर बनना आसान नहीं है, कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प के साथ यदि ठान लिया कि यूपीएससी परीक्षा में कामयाबी हासिल करनी है, तो सफलता अवश्य मिलेगी. आईएएस अफसरों से जुड़ी प्रेरणादायक स्टोरियां सामने आती रहती है, जो इस क्षेत्र में आने वाले उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा का काम करती है. आइये एक ऐसे आईएएस अफ़सर के बारे में आपको बताते हैं, जिनकी स्टोरी काफी प्रेरणादायक है, और लोगों में विश्वास और जागरूकता बढ़ाने वाली है.

आईएएस अफसर रविन्द्र कुमार बरेली के डीएम

2011 बैच के आईएएस अफसर रविन्द्र कुमार की कार्यशैली काफी अच्छी मानी जाती है, उन्होंने कई जिलों में डीएम, एसडीएम व आयुक्त मनोरन्जन कर सहित विभिन्न पदों पर कार्य किया है. आईएएस रविन्द्र कुमार किसान परिवार से आते हैं, उन्हें बरेली का डीएम बनाया गया है.

कौन हैं आईएएस अफसर रविन्द्र कुमार

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आईएएस अफसर रविन्द्र कुमार 2011 बैच के अफसर हैं, इनका जन्म 1981 में बिहार के बेगूसराय के बसही गांव में किसान परिवार में हुआ था, रविन्द्र बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज रहे. उनकी दसवीं की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय बेगूसराय से हुई, फिर 12वीं की पढ़ाई रांची से पूरी की. 12 वीं के बाद आईआईटी की परीक्षा में हिस्सा लिया और पास कर ली, लेकिन इससे मन नही भरा तो बाद में रविन्द्र मर्चेंट नेवी में शामिल हो गए. करीब 6 वर्ष यानी वर्ष 2002 से 2008 तक वे मर्चेंट नेवी में नौकरी की, फिर उनकी इच्छा प्रशासनिक सेवा के लिए होने लगी,

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नेवी की छोड़ी नौकरी फिर किया यूपीएससी पास

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2009 में उन्होंने नेवी की नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली पहुंच गए. यूपीएससी पास करने के बाद सिक्किम कैडर देते हुए उन्हें नियुक्ति दी गई. वहां 2013 से 2014 तक दक्षिण सिक्किम के नामची उपमण्डल में बतौर एसडीएम रहे. 2014 में ही उन्होंने दिल्ली में स्वास्थ्य राज्य मंत्री के साथ कार्य किया. फिर 2016 में उनका कैडर सिक्किम से यूपी कर दिया गया. 2017-19 में स्वच्छता मंत्री उमा भारती के निजी सचिव भी रहे. बुलंदशहर के भी डीएम रहे.

 दो बार एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचे

आईएएस अफसर रविन्द्र कुमार वर्ष 2013 में सिक्किम में तैनाती के दौरान सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट के शिखर भी पहुंचे, स्वच्छ भारत अभियान के तहत 2015 में दूसरी बार उन्होंने एवरेस्ट पर चढ़ाई की. मकसद था कि लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़े. उनके इस कार्य की सभी ने प्रशंसा की थी. यही नहीं इस अभियान के दौरान ही रविन्द्र कुमार ने खुद को खतरे में डाला,क्योंकि भूकम्प और हिमस्खलन के बाद उन्हें अपने एवरेस्ट बेस कैंप की सुरक्षा करनी थी, जिसमें उन्होंने कई की जान बचाई.

इस यात्रा पर उन्होंने पुस्तक भी लिखी

अपनी पर्वतारोहण की इस महत्वपूर्ण यात्रा पर दो किताबे भी आईएएस रविन्द्र कुमार ने लिखी. जिसमें एक पुस्तक 'Many everest an inspiring journey of transforming dreams into reality' इसका जो हिंदी संस्करण था वह कुछ इस तरह का था, 'एवरेस्ट,सपनों की उड़ान,सिफर से शिखर तक' पुस्तक लिखी. 'एडवांस पॉजिटिव विजुअलाइजेशन' इसमें तकनिकी और वैज्ञानिक रूप से अपनी तकनीकी को पाठकों को पहुंचाता है. उनकी पुस्तकें लोगों में प्रेरणा का काम कर रही है. 

उत्कृष्ट कार्यों को लेकर किया गया सम्मानित

आईएएस अफसर डॉक्टर रविन्द्र कुमार को उनके द्वारा किये गए उत्कृष्ट कार्यों को लेकर सम्मानित किया गया. सिक्किम खेल रत्न, बिहार में विशेष खेल सम्मान, कुश्ती रत्न, सेलर टुडे सी,शोर पुरूष्कार, समुद्र मंथन सम्मान, जयमंगला काबर सम्मान, अटल मिथिला और भारत गौरव पुरुष्कार से सम्मानित किया जा चुका है.

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