Please enable JavaScript to support our website by allowing ads.

भारत का मिडिल क्लास अच्छा है..उसे भत्ता नहीं..बस व्हाट्सएप पर मीम और वीडियो चाहिए..!

भारत का मिडिल क्लास अच्छा है..उसे भत्ता नहीं..बस व्हाट्सएप पर मीम और वीडियो चाहिए..!
सांकेतिक फ़ोटो-साभार-गूगल।

कोरोना काल और लॉकडाउन में सबसे ज़्यादा प्रभावित मिडिल क्लास हुआ है।लेकिन मिडिल क्लास अपनी पीड़ा कहे तो किससे कहे और कहे भी तो उसकी सुनेगा कौन..देश के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार का यह लेख आप सभी पढ़े..

डेस्क:अमरीका में 36,000 पत्रकारों की नौकरी चली गई है या बिना सैलरी के छुट्टी पर भेज दिए गए हैं या सैलरी कम हो गई है। कोविड-19 के कारण। इसके जवाब में प्रेस फ्रीडम डिफेंस फंड बनाया जा रहा है ताकि ऐसे पत्रकारों की मदद की जा सके। यह फंड मीडिया वेबसाइट दि इंटरसेप्ट चलाने वाली कंपनी ने ही बनाया है। इस फंड के सहारे पत्रकारों को 1500 डॉलर की सहायता दी जाएगी। एक या दो बार। इस फंड के पास अभी तक 1000 आवेदन आ गए हैं।

ये भी पढ़े-कोरोना:शादी के दो दिनों बाद हुई दूल्हे की मौत से मचा हड़कम्प..समारोह से जुड़े 111 लोग अब तक संक्रमित..!

वैसे अमरीका ने जून के महीने में 100 अरब डॉलर का बेरोज़गारी भत्ता दिया है। अमरीका में यह सवाल उठ रहे हैं कि सरकार को बेरोज़गारों की संख्या को देखते हुए 142 अरब डॉलर खर्च करना चाहिए था ।

भारत का मिडिल क्लास अच्छा है। उसे किसी तरह का भत्ता नहीं चाहिए। बस व्हाट्स एप में मीम और वीडियो चाहिए। टीवी पर गुलामी। 

ये भी पढ़े-UP:फर्रुखाबाद के सरकारी अस्पताल में घुसकर गुंडों ने की तोड़फोड़..स्वास्थ्यकर्मी को पीटा..!

भारत में एडिटर्स गिल्ड, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को कम से कम सर्वे तो करना ही चाहिए कि कितने फ्री-लांस, पूर्णकालिक, रिटेनर, स्ट्रिंगर, अंशकालिक पत्रकारों की नौकरी गई है। सैलरी कटी है। उनकी क्या स्थिति है। इसमें टेक्निकल स्टाफ को भी शामिल किया जाना चाहिए। पत्रकारों के परिवार भी फीस और किराया नहीं दे पा रहे हैं। 

ये भी पढ़े-UP:कांग्रेसियों पर लाठीचार्ज..प्रदेश अध्यक्ष फिर हुए गिरफ्तार..!

ख़ैर ये मुसीबत अन्य की भी है। प्राइवेट नौकरी करने वाले सभी इसका सामना कर रहे हैं। एक प्राइवेट शिक्षक ने लिखा है कि सरकार उनकी सुध नहीं ले रही। जैसे सरकार सबकी सुध ले रही है। उन्हीं की क्यों, नए और युवा वकीलों की भी कमाई बंद हो गई है। उनकी भी हालत बुरी है। कई छोटे-छोटे रोज़गार करने वालों की कमाई बंद हो गई है। छात्र कहते हैं कि किराया नहीं दे पा रहे हैं। 

इसका मतलब यह नहीं कि 80 करोड़ लोगों को अनाज देने की योजना का मज़ाक उड़ाए। मिडिल क्लास यही करता रहा। इन्हीं सब चीज़ों से उसके भीतर की संवेदनशीलता समाप्त कर दी गई है। जो बेहद ग़रीब हैं उन्हें अनाज ही तो मिल रहा है। जो सड़ जाता है। बल्कि और अधिक अनाज मिलना चाहिए। सिर्फ 5 किलो चावल और एक किलो चना से क्या होगा।

यह बात गलत है कि मिडिल क्लास को कुछ नहीं मिल रहा है। व्हाट्स ऐप मीम और गोदी मीडिया के डिबेट से उसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। उसके बच्चों की शिक्षा और नौकरियों पर बात बंद हो चुकी है। ताकि वे मीम का मीमपान कर सकें। उसके भीतर जितनी तरह की धार्मिक और ग़ैर धार्मिक कुंठाएं हैं, संकीर्णताएं हैं उन सबको खुराक दिया गया है।  जिससे वह राजनीतिक तरीके से मानसिक सुख प्राप्त करता रहा है। 

ख़ुद यह क्लास मीडिया और अन्य संस्थाओं के खत्म करने वाली भीड़ का साथ देता रहा, अब मीडिया खोज रहा है। उसे पता है कि मीडिया को खत्म किए जाने के वक्त यही ताली बजा रहा था।मिडिल क्लास में ज़रा भी खुद्दारी बची है तो उसे बिल्कुल मीडिया से अपनी व्यथा नहीं कहनी चाहिए। उसे सिर्फ मीम की मांग करनी चाहिए। कुछ नहीं तो नेहरू को मुसलमान बताने वाला मीम ही दिन बार तीन बार मिले तो इसे चैन आ जाए। 

खुद्दार मिडिल क्लास को पता होना चाहिए कि प्रधानमंत्री ने उसका आभार व्यक्त किया है। ईमानदार आयकर दाताओं का अभिनंदन किया है। ऐसा नहीं है कि आप नोटिस में नहीं हैं।

(यह लेख मूल रूप से रवीश कुमार के फेसबुक पेज पर प्रकाशित हुआ है।)

01 Jul 2020 By Shubham Mishra

भारत का मिडिल क्लास अच्छा है..उसे भत्ता नहीं..बस व्हाट्सएप पर मीम और वीडियो चाहिए..!

डेस्क:अमरीका में 36,000 पत्रकारों की नौकरी चली गई है या बिना सैलरी के छुट्टी पर भेज दिए गए हैं या सैलरी कम हो गई है। कोविड-19 के कारण। इसके जवाब में प्रेस फ्रीडम डिफेंस फंड बनाया जा रहा है ताकि ऐसे पत्रकारों की मदद की जा सके। यह फंड मीडिया वेबसाइट दि इंटरसेप्ट चलाने वाली कंपनी ने ही बनाया है। इस फंड के सहारे पत्रकारों को 1500 डॉलर की सहायता दी जाएगी। एक या दो बार। इस फंड के पास अभी तक 1000 आवेदन आ गए हैं।

ये भी पढ़े-कोरोना:शादी के दो दिनों बाद हुई दूल्हे की मौत से मचा हड़कम्प..समारोह से जुड़े 111 लोग अब तक संक्रमित..!

वैसे अमरीका ने जून के महीने में 100 अरब डॉलर का बेरोज़गारी भत्ता दिया है। अमरीका में यह सवाल उठ रहे हैं कि सरकार को बेरोज़गारों की संख्या को देखते हुए 142 अरब डॉलर खर्च करना चाहिए था ।

भारत का मिडिल क्लास अच्छा है। उसे किसी तरह का भत्ता नहीं चाहिए। बस व्हाट्स एप में मीम और वीडियो चाहिए। टीवी पर गुलामी। 

ये भी पढ़े-UP:फर्रुखाबाद के सरकारी अस्पताल में घुसकर गुंडों ने की तोड़फोड़..स्वास्थ्यकर्मी को पीटा..!

भारत में एडिटर्स गिल्ड, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को कम से कम सर्वे तो करना ही चाहिए कि कितने फ्री-लांस, पूर्णकालिक, रिटेनर, स्ट्रिंगर, अंशकालिक पत्रकारों की नौकरी गई है। सैलरी कटी है। उनकी क्या स्थिति है। इसमें टेक्निकल स्टाफ को भी शामिल किया जाना चाहिए। पत्रकारों के परिवार भी फीस और किराया नहीं दे पा रहे हैं। 

ये भी पढ़े-UP:कांग्रेसियों पर लाठीचार्ज..प्रदेश अध्यक्ष फिर हुए गिरफ्तार..!

ख़ैर ये मुसीबत अन्य की भी है। प्राइवेट नौकरी करने वाले सभी इसका सामना कर रहे हैं। एक प्राइवेट शिक्षक ने लिखा है कि सरकार उनकी सुध नहीं ले रही। जैसे सरकार सबकी सुध ले रही है। उन्हीं की क्यों, नए और युवा वकीलों की भी कमाई बंद हो गई है। उनकी भी हालत बुरी है। कई छोटे-छोटे रोज़गार करने वालों की कमाई बंद हो गई है। छात्र कहते हैं कि किराया नहीं दे पा रहे हैं। 

इसका मतलब यह नहीं कि 80 करोड़ लोगों को अनाज देने की योजना का मज़ाक उड़ाए। मिडिल क्लास यही करता रहा। इन्हीं सब चीज़ों से उसके भीतर की संवेदनशीलता समाप्त कर दी गई है। जो बेहद ग़रीब हैं उन्हें अनाज ही तो मिल रहा है। जो सड़ जाता है। बल्कि और अधिक अनाज मिलना चाहिए। सिर्फ 5 किलो चावल और एक किलो चना से क्या होगा।

यह बात गलत है कि मिडिल क्लास को कुछ नहीं मिल रहा है। व्हाट्स ऐप मीम और गोदी मीडिया के डिबेट से उसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। उसके बच्चों की शिक्षा और नौकरियों पर बात बंद हो चुकी है। ताकि वे मीम का मीमपान कर सकें। उसके भीतर जितनी तरह की धार्मिक और ग़ैर धार्मिक कुंठाएं हैं, संकीर्णताएं हैं उन सबको खुराक दिया गया है।  जिससे वह राजनीतिक तरीके से मानसिक सुख प्राप्त करता रहा है। 

ख़ुद यह क्लास मीडिया और अन्य संस्थाओं के खत्म करने वाली भीड़ का साथ देता रहा, अब मीडिया खोज रहा है। उसे पता है कि मीडिया को खत्म किए जाने के वक्त यही ताली बजा रहा था।मिडिल क्लास में ज़रा भी खुद्दारी बची है तो उसे बिल्कुल मीडिया से अपनी व्यथा नहीं कहनी चाहिए। उसे सिर्फ मीम की मांग करनी चाहिए। कुछ नहीं तो नेहरू को मुसलमान बताने वाला मीम ही दिन बार तीन बार मिले तो इसे चैन आ जाए। 

खुद्दार मिडिल क्लास को पता होना चाहिए कि प्रधानमंत्री ने उसका आभार व्यक्त किया है। ईमानदार आयकर दाताओं का अभिनंदन किया है। ऐसा नहीं है कि आप नोटिस में नहीं हैं।

(यह लेख मूल रूप से रवीश कुमार के फेसबुक पेज पर प्रकाशित हुआ है।)

Tags:

Related Posts

Latest News

UPPCL News: फतेहपुर के बिजली विभाग में बड़ा फेरबदल ! एक्सईएन समेत पांच एसडीओ के तबादले, दो पद अब भी खाली UPPCL News: फतेहपुर के बिजली विभाग में बड़ा फेरबदल ! एक्सईएन समेत पांच एसडीओ के तबादले, दो पद अब भी खाली
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने फतेहपुर के बिजली विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है. एक्सईएन प्रथम समेत...
Gudiya Kab Hai 2026: नाग पंचमी पर उत्तर प्रदेश में क्यों पीटी जाती है गुड़िया? जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त
Fatehpur News: फतेहपुर में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन, दो अस्पताल और क्लीनिक सीज, अवैध संचालन पर कसा शिकंजा
Uttar Pradesh Circle Rate: यूपी में बदलने जा रहे सर्किल रेट के नियम, अब 3 मीटर चौड़ी गलियों की संपत्तियों का भी होगा अलग मूल्यांकन
Sonam Wangchuk Hunger Strike: संसद मार्च से पहले सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान, अनशन खत्म करने के लिए रखीं तीन शर्तें
Gold-Silver Rate In India: पश्चिम एशिया तनाव के बीच कितना महंगा और हुआ सोने-चांदी दाम, जानिए आज का भाव
Fatehpur UP News: फतेहपुर के इस मार्ग पर खर्च होंगे 18 करोड़ ! जर्जर सड़क से जल्द मिलेगी राहत, जानिए प्रस्ताव

Follow Us