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काम की खबर ! साइबर फ्रॉड के शिकार लोगों को राहत, RBI देगा आपको हर्जाना, जानिए क्या है पूरा नियम

काम की खबर ! साइबर फ्रॉड के शिकार लोगों को राहत, RBI देगा आपको हर्जाना, जानिए क्या है पूरा नियम
साइबर फ्रॉड का शिकार होने पर RBI करेगा भुगतान जानिए क्या हैं नियम (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच RBI ने बड़ा कदम उठाया है. अब 50 हजार रुपये तक की धोखाधड़ी में पीड़ित ग्राहक को 25 हजार रुपये तक का हर्जाना मिलेगा. यह सुविधा जीवन में सिर्फ एक बार मिलेगी.

Cyber Fraud RBI Pay: डिजिटल पेमेंट के दौर में साइबर फ्रॉड आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुका है. इसी समस्या को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया है. इसके तहत कम राशि के साइबर फ्रॉड मामलों में पीड़ित ग्राहकों को सीधे आर्थिक राहत दी जाएगी, जिससे भरोसा दोबारा कायम हो सके.

साइबर फ्रॉड पीड़ितों के लिए RBI का बड़ा फैसला

भारतीय रिजर्व बैंक ने पहली बार साइबर फ्रॉड के शिकार ग्राहकों के लिए मुआवजा देने का ठोस फ्रेमवर्क तैयार करने का प्रस्ताव रखा है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद बताया कि डिजिटल लेनदेन में धोखाधड़ी का शिकार होने वाले ग्राहकों को अब राहत मिल सकेगी.

यह प्रस्ताव खास तौर पर उन मामलों के लिए है जिनमें फ्रॉड की राशि 50 हजार रुपये या उससे कम है. इसका उद्देश्य छोटे लेकिन बड़ी संख्या में होने वाले साइबर अपराधों से आम ग्राहकों को मानसिक और आर्थिक सुरक्षा देना है. RBI का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित राहत भरोसा बहाल करने में अहम भूमिका निभाएगी.

कैसे मिलेगा 25 हजार रुपये तक का हर्जाना

RBI के प्रस्ताव के मुताबिक साइबर फ्रॉड की राशि में से 85 प्रतिशत तक ग्राहक को वापस किया जाएगा, लेकिन अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये तय की गई है. यानी अगर किसी ग्राहक के साथ 30 हजार रुपये की धोखाधड़ी होती है, तो उसे 25,000 रुपये तक की भरपाई मिल सकती है. हालांकि, हर स्थिति में ग्राहक को कम से कम 15 प्रतिशत नुकसान खुद उठाना होगा. इस योजना को "नो क्वेश्चन आस्क्ड" आधार पर लागू करने की तैयारी है, ताकि पीड़ित को लंबी जांच और औपचारिकताओं से न गुजरना पड़े.

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RBI, बैंक और ग्राहक के बीच नुकसान का बंटवारा

इस नए फ्रेमवर्क में नुकसान को तीन हिस्सों में बांटा गया है. कुल धोखाधड़ी की राशि में से 70 प्रतिशत का बोझ RBI उठाएगा, 15 प्रतिशत संबंधित बैंक वहन करेगा और शेष 15 प्रतिशत नुकसान ग्राहक को सहना होगा. इस मॉडल के जरिए RBI यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बैंकों की जिम्मेदारी भी तय हो और ग्राहक भी पूरी तरह लापरवाह न रहें. हालांकि, ग्राहक को मिलने वाली अधिकतम राशि किसी भी स्थिति में 25 हजार रुपये से ज्यादा नहीं होगी.

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OTP साझा करने पर भी मिलेगा मुआवजा

इस प्रस्ताव की सबसे अहम बात यह है कि यदि ग्राहक ने गलती से ठगों को OTP भी बता दिया हो, तब भी वह मुआवजे का हकदार होगा. RBI गवर्नर ने साफ कहा कि डिजिटल फ्रॉड के मामलों में अक्सर सामाजिक इंजीनियरिंग और डर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें आम लोग फंस जाते हैं. ऐसे में पीड़ित को पूरी तरह दोषी ठहराना सही नहीं है. यह फैसला लाखों डिजिटल यूजर्स के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.

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जीवन में सिर्फ एक बार मिलेगा यह लाभ

RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सुविधा किसी भी ग्राहक को उसके जीवनकाल में सिर्फ एक बार ही मिलेगी. गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक इसका मकसद यह है कि ग्राहक पहली गलती से सीख लें और भविष्य में अधिक सतर्क रहें. RBI का मानना है कि बार-बार मुआवजा देने से लापरवाही बढ़ सकती है, इसलिए इस पर सीमा जरूरी है. यह नियम योजना को संतुलित और जिम्मेदार बनाता है.

साइबर फ्रॉड के आंकड़े क्यों बने चिंता की वजह

RBI के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में कार्ड और इंटरनेट आधारित ट्रांजैक्शन से जुड़े 13,469 साइबर फ्रॉड दर्ज किए गए, जिनमें करीब 520 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा और भी डरावना था, जब 29,080 मामलों में 1,457 करोड़ रुपये की चपत लगी. दिलचस्प बात यह है कि 50 हजार रुपये तक के फ्रॉड मामले संख्या के लिहाज से 65 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल राशि में उनका हिस्सा कम है. इसी वजह से RBI ने इन्हें प्राथमिकता दी है.

15 Feb 2026 By Vishwa Deepak Awasthi

काम की खबर ! साइबर फ्रॉड के शिकार लोगों को राहत, RBI देगा आपको हर्जाना, जानिए क्या है पूरा नियम

Cyber Fraud RBI Pay: डिजिटल पेमेंट के दौर में साइबर फ्रॉड आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुका है. इसी समस्या को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया है. इसके तहत कम राशि के साइबर फ्रॉड मामलों में पीड़ित ग्राहकों को सीधे आर्थिक राहत दी जाएगी, जिससे भरोसा दोबारा कायम हो सके.

साइबर फ्रॉड पीड़ितों के लिए RBI का बड़ा फैसला

भारतीय रिजर्व बैंक ने पहली बार साइबर फ्रॉड के शिकार ग्राहकों के लिए मुआवजा देने का ठोस फ्रेमवर्क तैयार करने का प्रस्ताव रखा है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद बताया कि डिजिटल लेनदेन में धोखाधड़ी का शिकार होने वाले ग्राहकों को अब राहत मिल सकेगी.

यह प्रस्ताव खास तौर पर उन मामलों के लिए है जिनमें फ्रॉड की राशि 50 हजार रुपये या उससे कम है. इसका उद्देश्य छोटे लेकिन बड़ी संख्या में होने वाले साइबर अपराधों से आम ग्राहकों को मानसिक और आर्थिक सुरक्षा देना है. RBI का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित राहत भरोसा बहाल करने में अहम भूमिका निभाएगी.

कैसे मिलेगा 25 हजार रुपये तक का हर्जाना

RBI के प्रस्ताव के मुताबिक साइबर फ्रॉड की राशि में से 85 प्रतिशत तक ग्राहक को वापस किया जाएगा, लेकिन अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये तय की गई है. यानी अगर किसी ग्राहक के साथ 30 हजार रुपये की धोखाधड़ी होती है, तो उसे 25,000 रुपये तक की भरपाई मिल सकती है. हालांकि, हर स्थिति में ग्राहक को कम से कम 15 प्रतिशत नुकसान खुद उठाना होगा. इस योजना को "नो क्वेश्चन आस्क्ड" आधार पर लागू करने की तैयारी है, ताकि पीड़ित को लंबी जांच और औपचारिकताओं से न गुजरना पड़े.

RBI, बैंक और ग्राहक के बीच नुकसान का बंटवारा

इस नए फ्रेमवर्क में नुकसान को तीन हिस्सों में बांटा गया है. कुल धोखाधड़ी की राशि में से 70 प्रतिशत का बोझ RBI उठाएगा, 15 प्रतिशत संबंधित बैंक वहन करेगा और शेष 15 प्रतिशत नुकसान ग्राहक को सहना होगा. इस मॉडल के जरिए RBI यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बैंकों की जिम्मेदारी भी तय हो और ग्राहक भी पूरी तरह लापरवाह न रहें. हालांकि, ग्राहक को मिलने वाली अधिकतम राशि किसी भी स्थिति में 25 हजार रुपये से ज्यादा नहीं होगी.

OTP साझा करने पर भी मिलेगा मुआवजा

इस प्रस्ताव की सबसे अहम बात यह है कि यदि ग्राहक ने गलती से ठगों को OTP भी बता दिया हो, तब भी वह मुआवजे का हकदार होगा. RBI गवर्नर ने साफ कहा कि डिजिटल फ्रॉड के मामलों में अक्सर सामाजिक इंजीनियरिंग और डर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें आम लोग फंस जाते हैं. ऐसे में पीड़ित को पूरी तरह दोषी ठहराना सही नहीं है. यह फैसला लाखों डिजिटल यूजर्स के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.

जीवन में सिर्फ एक बार मिलेगा यह लाभ

RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सुविधा किसी भी ग्राहक को उसके जीवनकाल में सिर्फ एक बार ही मिलेगी. गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक इसका मकसद यह है कि ग्राहक पहली गलती से सीख लें और भविष्य में अधिक सतर्क रहें. RBI का मानना है कि बार-बार मुआवजा देने से लापरवाही बढ़ सकती है, इसलिए इस पर सीमा जरूरी है. यह नियम योजना को संतुलित और जिम्मेदार बनाता है.

साइबर फ्रॉड के आंकड़े क्यों बने चिंता की वजह

RBI के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में कार्ड और इंटरनेट आधारित ट्रांजैक्शन से जुड़े 13,469 साइबर फ्रॉड दर्ज किए गए, जिनमें करीब 520 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा और भी डरावना था, जब 29,080 मामलों में 1,457 करोड़ रुपये की चपत लगी. दिलचस्प बात यह है कि 50 हजार रुपये तक के फ्रॉड मामले संख्या के लिहाज से 65 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल राशि में उनका हिस्सा कम है. इसी वजह से RBI ने इन्हें प्राथमिकता दी है.

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