Holi 2020:होलाष्टक पर क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य..इस बार कब से लग रहें हैं होलाष्टक..जानें..!
होली के कुछ दिन पहले से होलाष्टक के दिन चालू हो जाते हैं..क्या है होलाष्टक..पढ़े युगान्तर प्रवाह की एक रिपोर्ट।
डेस्क:होली के त्योहार से कुछ दिन पहले होलाष्टक के दिन प्रारम्भ हो जाते हैं।होलाष्टक के दिनों में शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है।इस साल होली 9 मार्च को होलिका दहन है।10 को धुलैडी है। (holasthak news in hindi)
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तीन मार्च से होलाष्टक की शुरुआत हो रही है। होली से पहले ये आठ दिनों का समय अशुभ माना गया है। इसलिए इस अवधि में शुभ कार्य को करने की मनाही होती है।
ज्योतिषाचार्यो के अनुसार, होलाष्टक के प्रथम दिन अर्थात फाल्गुन शुक्लपक्ष की अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु का उग्र रूप रहता है। इस वजह से इन आठों दिन में मानव मस्तिष्क तमाम विकारों, शंकाओं और दुविधाओं आदि से घिरा रहता है, जिसकी वजह से शुरू किए गए कार्य के बनने के बजाय बिगड़ने की संभावना ज्यादा रहती है।
चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को इन आठों ग्रहों की नकारात्मक शक्तियों के कमजोर होने की खुशी में लोग अबीर-गुलाल आदि छिड़ककर खुशियां मनाते हैं, जिसे होली कहते हैं।
Holi 2020:होलाष्टक पर क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य..इस बार कब से लग रहें हैं होलाष्टक..जानें..!
डेस्क:होली के त्योहार से कुछ दिन पहले होलाष्टक के दिन प्रारम्भ हो जाते हैं।होलाष्टक के दिनों में शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है।इस साल होली 9 मार्च को होलिका दहन है।10 को धुलैडी है। (holasthak news in hindi)
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तीन मार्च से होलाष्टक की शुरुआत हो रही है। होली से पहले ये आठ दिनों का समय अशुभ माना गया है। इसलिए इस अवधि में शुभ कार्य को करने की मनाही होती है।
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ज्योतिषाचार्यो के अनुसार, होलाष्टक के प्रथम दिन अर्थात फाल्गुन शुक्लपक्ष की अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु का उग्र रूप रहता है। इस वजह से इन आठों दिन में मानव मस्तिष्क तमाम विकारों, शंकाओं और दुविधाओं आदि से घिरा रहता है, जिसकी वजह से शुरू किए गए कार्य के बनने के बजाय बिगड़ने की संभावना ज्यादा रहती है।
चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को इन आठों ग्रहों की नकारात्मक शक्तियों के कमजोर होने की खुशी में लोग अबीर-गुलाल आदि छिड़ककर खुशियां मनाते हैं, जिसे होली कहते हैं।