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Shardiya Navratri Chandraghanta Devi: आज माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप देवी 'चंद्रघण्टा' की करें उपासना ! आने वाली बाधाओं से मिलती है मुक्ति

Shardiya Navratri Chandraghanta Devi: आज माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप देवी 'चंद्रघण्टा' की करें उपासना ! आने वाली बाधाओं से मिलती है मुक्ति
नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघण्टा की करें आराधना, फोटो साभार सोशल मीडिया

Navratri 3rd Day: यूं तो नवरात्रि के हर दिन के पूजन का विशेष महत्व है, माँ के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, आज माता के तीसरे स्वरूप मां चन्द्रघण्टा की पूजा की जाती है, चंद्रघंटा माता के मस्तक में अर्धचंद्र सुशोभित है, दस भुजाओं में अस्त्र और शस्त्र है, इसके साथ ही इनके स्वरूप की मुद्रा युद्ध की तरह है, इसलिए इनकी साधना और पूजन से भक्त बलशाली निर्भय और पराक्रमी बनता है, माँ के भोग के लिए दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं.


हाईलाइट्स

  • शारदीय नवरात्रि के 9 दिनों का विशेष महत्व, तीसरे दिन माँ चंद्रघण्टा के पूजन का महत्व
  • दुर्गा माँ का है तीसरा स्वरूप, अर्धचंद्र है मस्तक पर सुशोभित
  • माँ की उपासना से जीवन की बाधाएं होती है दूर, निर्भय और पराक्रमी बनते है भक्त

Worship Goddess Chandraghanta on the third day of Navratri : शारदीय नवरात्रि के पावन दिन चल रहे हैं, ऐसे में हम आपको हर दिन माता के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन करा रहे हैं, पूजन विधि की क्या मान्यता है, यह भी विस्तार से बता रहे हैं.आज हमारी टीम आपको माता के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा के दर्शन के साथ ही माता का पूजन किस तरह से करना चाहिए, और क्या है इस स्वरूप का महत्व यह भी बताएंगे. 

नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघण्टा की करें उपासना

शारदीय नवरात्रि के वैसे तो 9 दिन ही पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं, हर दिन की अलग-अलग मान्यता है, आज नवरात्रि के तीसरे दिन मां के चंद्रघण्टा स्वरूप के पूजन का महत्व है. इस स्वरूप में माँ के मस्तक में अर्धचंद्र सुशोभित है. इस वजह से माता का नाम चंद्रघण्टा पड़ा. कंठ में श्वेत पुष्प की माला और शीर्ष पर रत्नजड़ित मुकुट है. माता की सवारी शेर है, मां की सच्चे ह्रदय से उपासना करने से व्यक्ति साहसी और पराक्रमी बनता है, इसके साथ ही जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है.

जीवन में अनेक बाधाओं से मिलती है मुक्ति

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मां चन्द्रघण्टा का स्वरूप युद्ध मुद्रा जैसा है, दस भुजाओं वाला मां का यह स्वरूप जिसमें अस्त्र और शस्त्र वाला है, इनकी उपासना करना फलदायी है. जीवन में आने वाली अनेक बाधाओं से मुक्ति मिलती है, ग्रहों के उथल पुथल संकट व मानसिक समस्याओं से निजात मिलती है. जिनकी कुंडली में मंगल कमजोर है उन्हें अवश्य माता की उपासना करना चाहिए. परम शक्ति का अनुभव होता है. 

Read More: होली की भाई दूज 2026: कब है भारत्य द्वितीया, बहन के घर भोजन करने की परंपरा क्यों है खास? जानिए शुभ मुहूर्त

ऐसे करें पूजन

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सुबह स्नान कर माता का ध्यान व आराधना करें. लाल पुष्प, अक्षत और रोली व अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें. आरती करें और शंख और घण्टा अवश्य बजाएं, भोग लगाएं फिर आप दुर्गा स्तुति व दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं. माँ को सफेद कमल और पीले गुलाब की माला अर्पित करें, भोग के लिए दूध से बनी मिठाई या केसर की खीर का भोग लगाएं इससे माता प्रसन्न होती हैं भक्तो पर कृपा करती हैं.

इन मंत्र का करें जप

या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः।"

पिंडजप्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।

17 Oct 2023 By Vishal Shukla

Shardiya Navratri Chandraghanta Devi: आज माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप देवी 'चंद्रघण्टा' की करें उपासना ! आने वाली बाधाओं से मिलती है मुक्ति


हाईलाइट्स

  • शारदीय नवरात्रि के 9 दिनों का विशेष महत्व, तीसरे दिन माँ चंद्रघण्टा के पूजन का महत्व
  • दुर्गा माँ का है तीसरा स्वरूप, अर्धचंद्र है मस्तक पर सुशोभित
  • माँ की उपासना से जीवन की बाधाएं होती है दूर, निर्भय और पराक्रमी बनते है भक्त

Worship Goddess Chandraghanta on the third day of Navratri : शारदीय नवरात्रि के पावन दिन चल रहे हैं, ऐसे में हम आपको हर दिन माता के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन करा रहे हैं, पूजन विधि की क्या मान्यता है, यह भी विस्तार से बता रहे हैं.आज हमारी टीम आपको माता के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा के दर्शन के साथ ही माता का पूजन किस तरह से करना चाहिए, और क्या है इस स्वरूप का महत्व यह भी बताएंगे. 

नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघण्टा की करें उपासना

शारदीय नवरात्रि के वैसे तो 9 दिन ही पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं, हर दिन की अलग-अलग मान्यता है, आज नवरात्रि के तीसरे दिन मां के चंद्रघण्टा स्वरूप के पूजन का महत्व है. इस स्वरूप में माँ के मस्तक में अर्धचंद्र सुशोभित है. इस वजह से माता का नाम चंद्रघण्टा पड़ा. कंठ में श्वेत पुष्प की माला और शीर्ष पर रत्नजड़ित मुकुट है. माता की सवारी शेर है, मां की सच्चे ह्रदय से उपासना करने से व्यक्ति साहसी और पराक्रमी बनता है, इसके साथ ही जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है.

जीवन में अनेक बाधाओं से मिलती है मुक्ति

मां चन्द्रघण्टा का स्वरूप युद्ध मुद्रा जैसा है, दस भुजाओं वाला मां का यह स्वरूप जिसमें अस्त्र और शस्त्र वाला है, इनकी उपासना करना फलदायी है. जीवन में आने वाली अनेक बाधाओं से मुक्ति मिलती है, ग्रहों के उथल पुथल संकट व मानसिक समस्याओं से निजात मिलती है. जिनकी कुंडली में मंगल कमजोर है उन्हें अवश्य माता की उपासना करना चाहिए. परम शक्ति का अनुभव होता है. 

ऐसे करें पूजन

सुबह स्नान कर माता का ध्यान व आराधना करें. लाल पुष्प, अक्षत और रोली व अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें. आरती करें और शंख और घण्टा अवश्य बजाएं, भोग लगाएं फिर आप दुर्गा स्तुति व दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं. माँ को सफेद कमल और पीले गुलाब की माला अर्पित करें, भोग के लिए दूध से बनी मिठाई या केसर की खीर का भोग लगाएं इससे माता प्रसन्न होती हैं भक्तो पर कृपा करती हैं.

इन मंत्र का करें जप

या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः।"

पिंडजप्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।

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