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Jagdeep Dhankhar: 72 साल के इतिहास में पहली बार राज्यसभा के सभापति पर अविश्वास प्रस्ताव

Jagdeep Dhankhar: 72 साल के इतिहास में पहली बार राज्यसभा के सभापति पर अविश्वास प्रस्ताव
राज्यसभा के सभापति पर अविश्वास प्रस्ताव बाएं जगदीप धनकड़ दाएं जयराम रमेश (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

Jagdeep Dhankhar News

संसद के शीतकालीन सत्र (Winter Session) में लगातार गतिरोध के बीच विपक्ष लामबंद होकर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ (Jagdeep Dhankhar) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No confidence motion) का नोटिस जारी किया है.

Jagdeep Dhankhar News: भारत में 72 साल के इतिहास में पहली बाद राज्यसभा (Rajya Sabha) के सभापति पर आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) का नोटिस जारी किया गया है.

विपक्ष का आरोप है कि सभापति जगदीप धनकड़ (Jagdeep Dhankhar) पक्षपातपूर्ण तरीके से सदर की कार्यवाही करते हैं. विपक्षी दलों ने हस्ताक्षर करते हुए राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी को नोटिस सौंपा है. बताया जा रहा है कि विपक्षी दलों ने सभापति धनकड़ को हटाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 67(B) का सहारा लेते हुए नोटिस दिया है.

जगदीप धनकड़ से आखिर क्यों नाराज है विपक्ष? 

देश के सियासी गलियारों में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है. मंगलवार को लगातार गतिरोध और टकरार के बीच विपक्ष के करीब 60 सांसदों ने अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) पर हस्ताक्षर करते हुए सभापति जगदीप धनकड़ (Jagdeep Dhankhar) को पद से हटाने की मांग करते हुए राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी को नोटिस सौंपा है.

विपक्ष का आरोप है कि सदर के संचालन में सभापति धनकड़ पक्षपाती व्यवहार करते हैं. कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश एक्स पर पोस्ट करते हुए कहते हैं कि..

Read More: Mahoba News: बीच सड़क जलशक्ति मंत्री और भाजपा विधायक में तीखा विवाद ! काफिला रोकने से मचा बवाल, अखिलेश ने ली चुटकी

"राज्य सभा के माननीय सभापति के अत्यंत पक्षपातपूर्ण तरीक़े से उच्च सदन की कार्यवाही का संचालन करने के कारण इंडिया ग्रुप के सभी घटक दलों के पास उनके ख़िलाफ़ औपचारिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था."

जयराम राम रमेश आगे लिखते हैं कि इंडिया गठबंधन के दलों के लिए यह बेहद ही कष्टकारी निर्णय रहा है,लेकिन संसदीय लोकतंत्र के हित में यह अभूतपूर्व कदम उठाना पड़ा है. यह प्रस्ताव अभी राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल को सौंपा गया है.

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अडानी का मुद्दा उठाओगे तो नहीं चलने देंगे सदन 

न्यूज़ एजेंसी को दिए बयान में जयराम रमेश कहते हैं कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ख़ुद चेयरमैन साहब के सामने कहा कि जब तक आप लोकसभा में अडानी का मुद्दा उठाएंगे तब तक हम राज्यसभा को चलने नहीं देंगे और इसमें चेयरमैन साहब भी शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि चेयरमैन साहब को तो इसमें अडिग रहते हुए कहना चाहिए नहीं ऐसा नहीं होगा..रमेश कहते हैं कि वो बहुत सीनियर हैं राज्यपाल रहे हैं बहुत योग्य हैं लेकिन वो भी इन सबमें शामिल हैं..अब अविश्वास प्रस्ताव ही रास्ता है. 

क्या कहते हैं महाभियोग से जुड़े आंकड़े? 

अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से सभापति के खिलाफ राज्यसभा में बहुमत के हिसाब से महाभियोग लाया जा सकता है लेकिन अगर आंकड़ों की बात करें तो जब तक लोकसभा से प्रस्ताव पारित नहीं होगा इसकी कार्यवाही नहीं हो सकती.

बताया जा रहा है कि राज्यसभा में विपक्ष का अकड़ा 103 है जबकि NDA के पास 126 सदस्य हैं ऐसे में इस प्रस्ताव का पारित होना नामुमकिन लग रहा है. साथ ही नोटिस 14 दिन पहले दिया जाना चाहिए लेकिन 20 दिसंबर को शीतकालीन सत्र समाप्त हो रहा है ऐसे में केवल 9 दिन ही शेष रह जाते हैं.

11 Dec 2024 By Vishwa Deepak Awasthi

Jagdeep Dhankhar: 72 साल के इतिहास में पहली बार राज्यसभा के सभापति पर अविश्वास प्रस्ताव

Jagdeep Dhankhar News

Jagdeep Dhankhar News: भारत में 72 साल के इतिहास में पहली बाद राज्यसभा (Rajya Sabha) के सभापति पर आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) का नोटिस जारी किया गया है.

विपक्ष का आरोप है कि सभापति जगदीप धनकड़ (Jagdeep Dhankhar) पक्षपातपूर्ण तरीके से सदर की कार्यवाही करते हैं. विपक्षी दलों ने हस्ताक्षर करते हुए राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी को नोटिस सौंपा है. बताया जा रहा है कि विपक्षी दलों ने सभापति धनकड़ को हटाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 67(B) का सहारा लेते हुए नोटिस दिया है.

जगदीप धनकड़ से आखिर क्यों नाराज है विपक्ष? 

देश के सियासी गलियारों में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है. मंगलवार को लगातार गतिरोध और टकरार के बीच विपक्ष के करीब 60 सांसदों ने अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) पर हस्ताक्षर करते हुए सभापति जगदीप धनकड़ (Jagdeep Dhankhar) को पद से हटाने की मांग करते हुए राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी को नोटिस सौंपा है.

विपक्ष का आरोप है कि सदर के संचालन में सभापति धनकड़ पक्षपाती व्यवहार करते हैं. कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश एक्स पर पोस्ट करते हुए कहते हैं कि..

"राज्य सभा के माननीय सभापति के अत्यंत पक्षपातपूर्ण तरीक़े से उच्च सदन की कार्यवाही का संचालन करने के कारण इंडिया ग्रुप के सभी घटक दलों के पास उनके ख़िलाफ़ औपचारिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था."

जयराम राम रमेश आगे लिखते हैं कि इंडिया गठबंधन के दलों के लिए यह बेहद ही कष्टकारी निर्णय रहा है,लेकिन संसदीय लोकतंत्र के हित में यह अभूतपूर्व कदम उठाना पड़ा है. यह प्रस्ताव अभी राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल को सौंपा गया है.

अडानी का मुद्दा उठाओगे तो नहीं चलने देंगे सदन 

न्यूज़ एजेंसी को दिए बयान में जयराम रमेश कहते हैं कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ख़ुद चेयरमैन साहब के सामने कहा कि जब तक आप लोकसभा में अडानी का मुद्दा उठाएंगे तब तक हम राज्यसभा को चलने नहीं देंगे और इसमें चेयरमैन साहब भी शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि चेयरमैन साहब को तो इसमें अडिग रहते हुए कहना चाहिए नहीं ऐसा नहीं होगा..रमेश कहते हैं कि वो बहुत सीनियर हैं राज्यपाल रहे हैं बहुत योग्य हैं लेकिन वो भी इन सबमें शामिल हैं..अब अविश्वास प्रस्ताव ही रास्ता है. 

क्या कहते हैं महाभियोग से जुड़े आंकड़े? 

अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से सभापति के खिलाफ राज्यसभा में बहुमत के हिसाब से महाभियोग लाया जा सकता है लेकिन अगर आंकड़ों की बात करें तो जब तक लोकसभा से प्रस्ताव पारित नहीं होगा इसकी कार्यवाही नहीं हो सकती.

बताया जा रहा है कि राज्यसभा में विपक्ष का अकड़ा 103 है जबकि NDA के पास 126 सदस्य हैं ऐसे में इस प्रस्ताव का पारित होना नामुमकिन लग रहा है. साथ ही नोटिस 14 दिन पहले दिया जाना चाहिए लेकिन 20 दिसंबर को शीतकालीन सत्र समाप्त हो रहा है ऐसे में केवल 9 दिन ही शेष रह जाते हैं.

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