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Delhi Service Bill : लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी दिल्ली सेवा विधेयक पारित,विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया

Delhi Service Bill : लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी दिल्ली सेवा विधेयक पारित,विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया
दिल्ली सेवा विधेयक राज्यसभा में भी पारित

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी बहुमत से दिल्ली सेवा विधेयक पारित करवा दिया गया. वहीं इस विधेयक के इस तरह से पारित होने को लेकर गठबन्धन इंडिया ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ़ बताया.


हाईलाइट्स

  • लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी हुआ दिल्ली सेवा विधेयक पास
  • विपक्ष ने विधेयक को लोकतंत्र के खिलाफ बताया,राज्यसभा में 131-102 मतों से पास
  • गृह मंत्री अमित शाह ने कहा ये विधेयक भ्रस्टाचार मुक्त शासन के लिए है

Delhi Service Bill passed in RajyaSabha : दिल्ली सेवा विधेयक लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पारित करवा दिया गया. केंद्र सरकार की ओर से गृहमंत्री अमित शाह ने इस विधेयक को लेकर चर्चा शुरू की.जिस पर विपक्षी दल ने इस विधेयक को लोकतंत्र के खिलाफ बताया.जिसके बाद वोटिंग का सहारा लिया गया. वोटिंग के दौरान विधेयक पास कराने के लिए बहुमत का आंकड़ा 119 था. भाजपा के सहयोगी दलों ने अपने समर्थन देकर आखिर इस विधेयक को राज्यसभा में भी पारित करा दिया.

दिल्ली सेवा विधेयक हुआ राज्यसभा में पारित

दिल्ली सेवा विधेयक राज्यसभा में पारित कर दिया गया.केंद्र की ओर से गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में दिल्ली सेवा विधेयक पर चर्चा शुरू की.उन्होंने कहा कि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है. भ्रष्टाचार मुक्त करना उद्देश्य है.विधेयक किसी भी तरह से सुप्रीम कोर्ट के कोई भी नियमों का उल्लंघन नहीं करता है.गृहमंत्री का दावा है कि यह विधेयक कांग्रेस के द्वारा लाए गए विधेयक से अलग नहीं है.इस बिल से दिल्ली की व्यवस्था में परिवर्तन नहीं हुआ है.

समय रहते अध्यादेश किया जारी नहीं तो होता एक और घोटाला

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विपक्ष की ओर से कांग्रेस सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने चर्चा की शुरुआत की. जहां उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली सरकार की शक्तियों को कम किया जा रहा है.इस मामले में केंद्र की ओर से गृह मंत्री शाह ने विपक्ष की सभी चर्चाओं का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली हर मायने में अन्य प्रदेशों से अलग है.उन्होंने आरोप लगाया की दिल्ली सरकार ने फैसले का इंतजार किए बिना ही अधिकारियों का ट्रांसफर शुरू कर दिया था. तमाम घोटाले से जुड़ी फाइलें मौजूद है. इसी के चलते यह अध्यादेश लाया गया. यदि उस समय अध्यादेश नहीं लाया जाता तो एक नया घोटाला हो जाता.

Read More: Mahoba News: बीच सड़क जलशक्ति मंत्री और भाजपा विधायक में तीखा विवाद ! काफिला रोकने से मचा बवाल, अखिलेश ने ली चुटकी

राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने जताया विरोध,पड़े समर्थन में 131 वोट

उधर राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने कहा कि हम इस खतरनाक विधेयक का पूरी तरह से विरोध करते हैं.दरसल विधेयक को पारित कराने के लिए बहुमत का आंकड़ा 119 होना चाहिए था. वर्तमान में राज्यसभा में 237 सदस्य हैं. जबकि भाजपा और सहयोगियों के पास 105 सदस्य हैं.इस विधेयक के समर्थन में 131 जबकि विरोध में 102 वोट पड़े.

दिल्ली सेवा विधेयक पर होता रहा पलटवार,अब बन गया कानून

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को एक आदेश पर कहा कि अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर दिल्ली सरकार का अधिकार है.इस बाबत केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटते हुए 19 मई को अध्यादेश जारी किया था और ये अधिकार उपराज्यपाल को दिए थे.यानी ट्रांसफर और पोस्टिंग अब दिल्ली सरकार नहीं, उपराज्यपाल करेंगे.फिलहाल इस विधेयक को दोनों सदनों में पारित करा दिया गया है.और कानून बन गया है.

08 Aug 2023 By Vishal Shukla

Delhi Service Bill : लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी दिल्ली सेवा विधेयक पारित,विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया


हाईलाइट्स

  • लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी हुआ दिल्ली सेवा विधेयक पास
  • विपक्ष ने विधेयक को लोकतंत्र के खिलाफ बताया,राज्यसभा में 131-102 मतों से पास
  • गृह मंत्री अमित शाह ने कहा ये विधेयक भ्रस्टाचार मुक्त शासन के लिए है

Delhi Service Bill passed in RajyaSabha : दिल्ली सेवा विधेयक लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पारित करवा दिया गया. केंद्र सरकार की ओर से गृहमंत्री अमित शाह ने इस विधेयक को लेकर चर्चा शुरू की.जिस पर विपक्षी दल ने इस विधेयक को लोकतंत्र के खिलाफ बताया.जिसके बाद वोटिंग का सहारा लिया गया. वोटिंग के दौरान विधेयक पास कराने के लिए बहुमत का आंकड़ा 119 था. भाजपा के सहयोगी दलों ने अपने समर्थन देकर आखिर इस विधेयक को राज्यसभा में भी पारित करा दिया.

दिल्ली सेवा विधेयक हुआ राज्यसभा में पारित

दिल्ली सेवा विधेयक राज्यसभा में पारित कर दिया गया.केंद्र की ओर से गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में दिल्ली सेवा विधेयक पर चर्चा शुरू की.उन्होंने कहा कि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है. भ्रष्टाचार मुक्त करना उद्देश्य है.विधेयक किसी भी तरह से सुप्रीम कोर्ट के कोई भी नियमों का उल्लंघन नहीं करता है.गृहमंत्री का दावा है कि यह विधेयक कांग्रेस के द्वारा लाए गए विधेयक से अलग नहीं है.इस बिल से दिल्ली की व्यवस्था में परिवर्तन नहीं हुआ है.

समय रहते अध्यादेश किया जारी नहीं तो होता एक और घोटाला

विपक्ष की ओर से कांग्रेस सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने चर्चा की शुरुआत की. जहां उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली सरकार की शक्तियों को कम किया जा रहा है.इस मामले में केंद्र की ओर से गृह मंत्री शाह ने विपक्ष की सभी चर्चाओं का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली हर मायने में अन्य प्रदेशों से अलग है.उन्होंने आरोप लगाया की दिल्ली सरकार ने फैसले का इंतजार किए बिना ही अधिकारियों का ट्रांसफर शुरू कर दिया था. तमाम घोटाले से जुड़ी फाइलें मौजूद है. इसी के चलते यह अध्यादेश लाया गया. यदि उस समय अध्यादेश नहीं लाया जाता तो एक नया घोटाला हो जाता.

राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने जताया विरोध,पड़े समर्थन में 131 वोट

उधर राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने कहा कि हम इस खतरनाक विधेयक का पूरी तरह से विरोध करते हैं.दरसल विधेयक को पारित कराने के लिए बहुमत का आंकड़ा 119 होना चाहिए था. वर्तमान में राज्यसभा में 237 सदस्य हैं. जबकि भाजपा और सहयोगियों के पास 105 सदस्य हैं.इस विधेयक के समर्थन में 131 जबकि विरोध में 102 वोट पड़े.

दिल्ली सेवा विधेयक पर होता रहा पलटवार,अब बन गया कानून

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को एक आदेश पर कहा कि अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर दिल्ली सरकार का अधिकार है.इस बाबत केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटते हुए 19 मई को अध्यादेश जारी किया था और ये अधिकार उपराज्यपाल को दिए थे.यानी ट्रांसफर और पोस्टिंग अब दिल्ली सरकार नहीं, उपराज्यपाल करेंगे.फिलहाल इस विधेयक को दोनों सदनों में पारित करा दिया गया है.और कानून बन गया है.

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