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UP:ख़ाकी के इकबाल पर कब कब भारी पड़े हैं गुंडे..कानपुर कांड है अब तक की सबसे बड़ी वारदात..!

UP:ख़ाकी के इकबाल पर कब कब भारी पड़े हैं गुंडे..कानपुर कांड है अब तक की सबसे बड़ी वारदात..!
सांकेतिक फ़ोटो-साभार-गूगल।

कानपुर कांड यूपी पुलिस के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा का कांड साबित हुआ है..इसने ख़ाकी के कई बड़े पुराने जख्मों को ताज़ा कर दिया है..पढ़े युगान्तर प्रवाह की एक रिपोर्ट।

लखनऊ:गुरुवार आधी रात कानपुर देहात ज़िले के चौबेपुर थाना क्षेत्र अन्तर्गत जो कुछ भी हुआ उसने सत्ता और यूपी पुलिस को हिलाकर रख दिया है।किसी ने कल्पना नहीं की थी कि मौजूदा वक़्त में भी सूबे में ऐसा कोई गुंडा बेखौफ हो इतनी दुर्दांत वारदात को अंजाम दे सकता है।

ये भी पढ़े-कानपुर कांड:प्रशासन ने बुलडोजर चलवा जमींदोंज कर दिया विकास दुबे का किला..!

यूपी पुलिस के इतिहास में ख़ाकी का इकबाल इसके पहले भी अपराधियों के दुस्साहस के आगे बौना साबित हुआ है।लेकिन कानपुर कांड अब तक का सबसे बड़ा आपराधिक कांड साबित हुआ है!इस कांड ने यूपी पुलिस के कई पुराने बड़े ज़ख्मों को ताज़ा कर दिया है।

दो जून, 2016 में मथुरा के जवाहरबाग कांड को कौन भूल सकता है। करीब 286 एकड़ भूमि पर कब्जा जमाए भूमाफिया रामवृक्ष यादव से जमीन खाली कराने पहुंची पुलिस पर उसके समर्थकों ने हमला बोल दिया था। हमले में एएसपी मुकुल द्विवेदी व एसओ संतोष कुमार शहीद हो गए थे।

ये भी पढ़े-कानपुर एनकाउंटर:विकास दुबे आख़िर है कौन..जिसने पूरे यूपी को हिला दिया है..!

22 जुलाई 2007 को हुई वारदात को कौन भूल सकता है जब कुख्यात दस्यु ददुआ गिरोह का खात्मा करने के बाद पुलिस जंगल में ठोकिया गिरोह की तलाश कर रही थी। तब बांदा के फतेहगंज क्षेत्र में अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिस टीम को घेर लिया था और ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं।उस वारदात में एसटीएफ के छह जवान शहीद हुए थे।हालांकि इस घटना के क़रीब एक साल बाद पुलिस मुठभेड़ में ठोकिया का भी खात्मा हो गया था।

ये भी पढ़े-कानपुर से बहुत बड़ी ख़बर-बदमाश विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला..सीओ, तीन एसओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद..कई घायल..!

16 जून, 2009 को कुख्यात दस्यु घनश्याम केवट से हुई मुठभेड़ में पीएसी के प्लाटून कमांडर समेत दो पुलिसकर्मी शहीद हो गये थे जबकि तत्कालीन डीआइजी वीके गुप्ता गोली लगने से घायल हुए थे।

प्रतापगढ़ का सीओ हत्याकांड दो मार्च, 2013 को हुआ था।प्रतापगढ़ के कुंडा में पुलिस पर किए गए हमले में सीओ जियाउल हक को मौत के घाट उतार दिया गया था।

ये भी पढ़े-कानपुर एनकाउंटर:दो बदमाश ढ़ेर..पुलिस का सर्च अभियान जारी..सारी सीमाएं सील..!

वर्ष 1997 में कुख्यात श्रीप्रकाश शुक्ला ने लखनऊ के हजरतगंज में उसे पकड़ने गई पुलिस टीम में शामिल उपनिरीक्षक आरके सिंह कीे गोली मारकर हत्या कर दी थी।लेकिन श्रीप्रकाश शुक्ला भी इसी मुठभेड़ में मारा गया था।

वर्ष 1994 में पडरौना में डकैतों के पुलिस टीम पर हमले में छह पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। वर्ष 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड में उनके दो सरकारी गनर शहीद हुए थे। वर्ष 2017 में डकैत बबली कोल के साथ हुई मुठभेड़ में इंस्पेक्टर जेपी सिंह शहीद हुए थे।

ये भी पढ़े-कानपुर कांड:विकास दुबे की माँ ने अपने बेटे के लिए जो बात कही है..वह बात शायद ही कोई माँ कह पाए..!

गौरतलब है बीते गुरुवार की रात हिस्ट्रीशीटर बदमाश विकास दुबे को उसके घर पर दबिश डाल पकड़ने गई पुलिस टीम पर उसने साथियों संग मिलकर हमला कर दिया था।इस हमले में एक सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।जबकि 7 पुलिसकर्मी गम्भीर रूप से घायल हैं जिनका इलाज़ जारी है।

घटना को अंजाम देने के बाद से विकास फरार चल रहा है।उसको खोजने में एसटीएफ की आठ टीमों सहित पुलिस की 100 से ज़्यादा टीमें लगीं हुईं हैं।लेकिन अब तक उसका कोई पता नहीं चल सका है।

05 Jul 2020 By Shubham Mishra

UP:ख़ाकी के इकबाल पर कब कब भारी पड़े हैं गुंडे..कानपुर कांड है अब तक की सबसे बड़ी वारदात..!

लखनऊ:गुरुवार आधी रात कानपुर देहात ज़िले के चौबेपुर थाना क्षेत्र अन्तर्गत जो कुछ भी हुआ उसने सत्ता और यूपी पुलिस को हिलाकर रख दिया है।किसी ने कल्पना नहीं की थी कि मौजूदा वक़्त में भी सूबे में ऐसा कोई गुंडा बेखौफ हो इतनी दुर्दांत वारदात को अंजाम दे सकता है।

ये भी पढ़े-कानपुर कांड:प्रशासन ने बुलडोजर चलवा जमींदोंज कर दिया विकास दुबे का किला..!

यूपी पुलिस के इतिहास में ख़ाकी का इकबाल इसके पहले भी अपराधियों के दुस्साहस के आगे बौना साबित हुआ है।लेकिन कानपुर कांड अब तक का सबसे बड़ा आपराधिक कांड साबित हुआ है!इस कांड ने यूपी पुलिस के कई पुराने बड़े ज़ख्मों को ताज़ा कर दिया है।

दो जून, 2016 में मथुरा के जवाहरबाग कांड को कौन भूल सकता है। करीब 286 एकड़ भूमि पर कब्जा जमाए भूमाफिया रामवृक्ष यादव से जमीन खाली कराने पहुंची पुलिस पर उसके समर्थकों ने हमला बोल दिया था। हमले में एएसपी मुकुल द्विवेदी व एसओ संतोष कुमार शहीद हो गए थे।

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22 जुलाई 2007 को हुई वारदात को कौन भूल सकता है जब कुख्यात दस्यु ददुआ गिरोह का खात्मा करने के बाद पुलिस जंगल में ठोकिया गिरोह की तलाश कर रही थी। तब बांदा के फतेहगंज क्षेत्र में अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिस टीम को घेर लिया था और ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं।उस वारदात में एसटीएफ के छह जवान शहीद हुए थे।हालांकि इस घटना के क़रीब एक साल बाद पुलिस मुठभेड़ में ठोकिया का भी खात्मा हो गया था।

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16 जून, 2009 को कुख्यात दस्यु घनश्याम केवट से हुई मुठभेड़ में पीएसी के प्लाटून कमांडर समेत दो पुलिसकर्मी शहीद हो गये थे जबकि तत्कालीन डीआइजी वीके गुप्ता गोली लगने से घायल हुए थे।

प्रतापगढ़ का सीओ हत्याकांड दो मार्च, 2013 को हुआ था।प्रतापगढ़ के कुंडा में पुलिस पर किए गए हमले में सीओ जियाउल हक को मौत के घाट उतार दिया गया था।

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वर्ष 1997 में कुख्यात श्रीप्रकाश शुक्ला ने लखनऊ के हजरतगंज में उसे पकड़ने गई पुलिस टीम में शामिल उपनिरीक्षक आरके सिंह कीे गोली मारकर हत्या कर दी थी।लेकिन श्रीप्रकाश शुक्ला भी इसी मुठभेड़ में मारा गया था।

वर्ष 1994 में पडरौना में डकैतों के पुलिस टीम पर हमले में छह पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। वर्ष 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड में उनके दो सरकारी गनर शहीद हुए थे। वर्ष 2017 में डकैत बबली कोल के साथ हुई मुठभेड़ में इंस्पेक्टर जेपी सिंह शहीद हुए थे।

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गौरतलब है बीते गुरुवार की रात हिस्ट्रीशीटर बदमाश विकास दुबे को उसके घर पर दबिश डाल पकड़ने गई पुलिस टीम पर उसने साथियों संग मिलकर हमला कर दिया था।इस हमले में एक सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।जबकि 7 पुलिसकर्मी गम्भीर रूप से घायल हैं जिनका इलाज़ जारी है।

घटना को अंजाम देने के बाद से विकास फरार चल रहा है।उसको खोजने में एसटीएफ की आठ टीमों सहित पुलिस की 100 से ज़्यादा टीमें लगीं हुईं हैं।लेकिन अब तक उसका कोई पता नहीं चल सका है।

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