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कोरोना:यूपी सरकार ने विरोध के बाद मोबाइल फोन बैन का फ़ैसला वापस लिया..अखिलेश ने किया था विरोध..!

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शनिवार को चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ. के.के. गुप्ता ने राज्य के सभी चिकित्सा विश्वविद्यालयों, चिकित्सा संस्थानों और सभी सरकारी व निजी मेडिकल कालेजों के प्रमुखों को आदेश जारी करते हुए कहा है कि मोबाइल से संक्रमण फैलता है।इस लिए इसे आइसोलेशन वार्ड में बैन किया जाता है..इस फरमान के बाद लोग इसका विरोध जता रहे हैं.रविवार को इस फैसले को सरकार ने वापस ले लिया है..पढ़े पूरी ख़बर युगान्तर प्रवाह पर।

लखनऊ:शनिवार को राज्य सरकार की तरफ़ से प्रदेश के समस्त कोविड 19 के L 2 और L3 अस्पतालों के आईसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों के मोबाइल फ़ोन प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।लेक़िन विरोध के चलते इस फैसले को वापस ले लिया गया है।

क्या था पूरा मामला..

शनिवार को चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ. के.के. गुप्ता ने राज्य के सभी चिकित्सा विश्वविद्यालयों, चिकित्सा संस्थानों और सभी सरकारी व निजी मेडिकल कालेजों के प्रमुखों को आदेश जारी करते हुए कहा है कि मोबाइल से संक्रमण फैलता है।इस लिए इसे बैन किया जाता है।इस आदेश के जारी होने के बाद विवाद छिड़ गया है।लोग इसे तुग़लकी फरमान बता रहे हैं।

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा है कि अगर मोबाइल से संक्रमण फैलता है तो आइसोलेशन वार्ड के साथ पूरे देश में इसे बैन कर देना चाहिए। यही तो अकेले में मानसिक सहारा बनता है। वस्तुतः अस्पतालों की दुर्व्यवस्था व दुर्दशा का सच जनता तक न पहुँचे, इसीलिए ये पाबंदी है।ज़रूरत मोबाइल की पाबंदी की नहीं बल्कि सैनेटाइज़ करने की है।

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इस फ़ैसले को लेकर सरकार की चौतरफ़ा किरकिरी होने के बाद रविवार को इसे वापस ले लिया गया है।वार्ड में भर्ती मरीज़ अब सामान्य नियमों का पालन करते हुए मोबाइल फोन प्रयोग कर सकेंगे।


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