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सुषमा का सफ़र-एबीवीपी से शुरू हुआ राजनीतिक सफ़र भारत की विदेश मंत्री बनने तक कुछ यूं रहा!

सुषमा का सफ़र-एबीवीपी से शुरू हुआ राजनीतिक सफ़र भारत की विदेश मंत्री बनने तक कुछ यूं रहा!
सुषमा स्वराज के बचपन की फ़ोटो

भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार देर रात दिल्ली के एम्स अस्पताल में हार्ट अटैक के चलते निधन हो गया..आइए जानते हैं युगान्तर प्रवाह की इस रिपोर्ट में उनके पूरे जीवन के सफ़र को।

डेस्क:प्रखर वक़्ता व अपने शालीन स्वभाव की वजह से जानी जाने वाली भारत की पूर्व विदेश मंत्री व भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज के निधन से पूरे देश मे शोक की लहर है।प्रधानमंत्री मोदी सहित देश के तमाम बड़े नेताओं ने सुषमा की मौत पर दुःख जताते हुए भारतीय राजनीति की एक बड़ी हानि बताया है।

एबीवीपी कार्यकर्ता से भारत की विदेश मंत्री तक...

14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला में रहने वाले हरदेव शर्मा के यहां जन्मी सुषमा की शुरुआती शिक्षा अंबाला में ही हुई इसके बाद अम्बाला  छावनी के एसडी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री ली। सुषमा भाषण और वाद विवाद में हमेशा से आगे रहीं।इसके लिए उन्होंने ऐसी कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार भी हासिल किए थे।

साल 1970 में सुषमा स्वराज ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से अपना राजनीतिक करियर शुरू किया।उनके पति स्वराज कौशल सोशलिस्ट लीडर जॉर्ज फर्नांडिस से जुड़े हुए थे और सुषमा स्वराज साल 1975 में फर्नांडिस की लीगल डिफेंस टीम का हिस्सा बन गईं।इससे पहले 1973 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस शुरू की थी।जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भी उन्होंने बढ़ा चढ़कर हिस्सा लिया।

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ये भी पढ़े-पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का गम्भीर बीमारी के बाद देर रात एम्स में निधन!

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सुषमा स्वराज ने साल 1977 से राजनीतिक करियर की शुरूआत कर पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा था। जिसके बाद उन्हें चौधरी देवीलाल की सरकार में कैबिनेट का मंत्री बनाया गया।

Read More: केंद्रीय मंत्री को 99.60 लाख की सब्सिडी: अपने ही मंत्रालय की योजना से लाभ मिलने पर उठा विवाद, जानिए पूरा मामला

सुषमा स्वराज ने अप्रैल 1990 में राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा।उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया गया।1996 में वह दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र से सांसद चुनी गईं।उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया। अक्टूबर 1998 में उन्होंने केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।लेकिन बढ़ती महंगाई के कारण बीजेपी विधानसभा चुनाव हार गई और सुषमा स्वराज ने दोबारा राष्ट्रीय राजनीति में वापसी की। 

नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सुषमा स्वराज को विदेश मंत्री बनाया गया।पीएम मोदी की विदेश नीति को लागू कराने में उनकी अहम भूमिका रही।संयुक्त राष्ट्र में उनके भाषण की काफी तारीफ हुई थी, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को जमकर खरी-खरी सुनाई थी।सुषमा स्वराज 7 बार सांसद और तीन बार विधायक रहीं।

गौरतलब है कि स्वास्थ्य कारणों के चलते सुषमा स्वराज ने इसी वर्ष हुए आम चुनाव में नहीं उतरने का फैसला लिया था। जबकि साल 2014 के चुनाव में वे मध्यप्रदेश के विदिशा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीत संसद पहुंची थीं।

06 Aug 2019 By Shubham Mishra

सुषमा का सफ़र-एबीवीपी से शुरू हुआ राजनीतिक सफ़र भारत की विदेश मंत्री बनने तक कुछ यूं रहा!

डेस्क:प्रखर वक़्ता व अपने शालीन स्वभाव की वजह से जानी जाने वाली भारत की पूर्व विदेश मंत्री व भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज के निधन से पूरे देश मे शोक की लहर है।प्रधानमंत्री मोदी सहित देश के तमाम बड़े नेताओं ने सुषमा की मौत पर दुःख जताते हुए भारतीय राजनीति की एक बड़ी हानि बताया है।

एबीवीपी कार्यकर्ता से भारत की विदेश मंत्री तक...

14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला में रहने वाले हरदेव शर्मा के यहां जन्मी सुषमा की शुरुआती शिक्षा अंबाला में ही हुई इसके बाद अम्बाला  छावनी के एसडी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री ली। सुषमा भाषण और वाद विवाद में हमेशा से आगे रहीं।इसके लिए उन्होंने ऐसी कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार भी हासिल किए थे।

साल 1970 में सुषमा स्वराज ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से अपना राजनीतिक करियर शुरू किया।उनके पति स्वराज कौशल सोशलिस्ट लीडर जॉर्ज फर्नांडिस से जुड़े हुए थे और सुषमा स्वराज साल 1975 में फर्नांडिस की लीगल डिफेंस टीम का हिस्सा बन गईं।इससे पहले 1973 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस शुरू की थी।जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भी उन्होंने बढ़ा चढ़कर हिस्सा लिया।

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सुषमा स्वराज ने साल 1977 से राजनीतिक करियर की शुरूआत कर पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा था। जिसके बाद उन्हें चौधरी देवीलाल की सरकार में कैबिनेट का मंत्री बनाया गया।

सुषमा स्वराज ने अप्रैल 1990 में राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा।उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया गया।1996 में वह दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र से सांसद चुनी गईं।उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया। अक्टूबर 1998 में उन्होंने केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।लेकिन बढ़ती महंगाई के कारण बीजेपी विधानसभा चुनाव हार गई और सुषमा स्वराज ने दोबारा राष्ट्रीय राजनीति में वापसी की। 

नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सुषमा स्वराज को विदेश मंत्री बनाया गया।पीएम मोदी की विदेश नीति को लागू कराने में उनकी अहम भूमिका रही।संयुक्त राष्ट्र में उनके भाषण की काफी तारीफ हुई थी, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को जमकर खरी-खरी सुनाई थी।सुषमा स्वराज 7 बार सांसद और तीन बार विधायक रहीं।

गौरतलब है कि स्वास्थ्य कारणों के चलते सुषमा स्वराज ने इसी वर्ष हुए आम चुनाव में नहीं उतरने का फैसला लिया था। जबकि साल 2014 के चुनाव में वे मध्यप्रदेश के विदिशा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीत संसद पहुंची थीं।

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