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Cardiac Arrest Treatment: कार्डियक अरेस्ट आने पर नहीं मिलता है जान बचाने का मौका ! इसलिए हो जाइए सचेत

Cardiac Arrest Treatment: कार्डियक अरेस्ट आने पर नहीं मिलता है जान बचाने का मौका ! इसलिए हो जाइए सचेत
कार्डिएक अरेस्ट, image credit original source

Cardiac Arrest Symptoms

बीते दिनों कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) की वजह से टीवी जगत के जाने माने 59 वर्षीय एक्टर ऋतुराज सिंह की मौत हो गयी थी कार्डियक अरेस्ट दिल से जुड़ी एक ऐसी गम्भीर बीमारी (Serious Disease) है जिसमें हमारा दिल एकाएक धड़कना बन्द कर देता है. ऐसे में इस स्थिति में यदि मरीज को इमरजेंसी में सीपीआर न मिला तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते है.

समय पर इलाज न मिले तो जा सकती है जान

कार्डियेक अरेस्ट (Cardiac Arrest) की वजह से ही एक्टर ऋतुराज की मौत हो गयी थी वह महज 59 साल के थे उनकी मौत के बाद अब मेडिकल जगत में कार्डियक अरेस्ट बीमारी को लेकर चर्चा तेज हो गयी है इस सिचवेशन मे दिल काम करना बंद कर देता है जिससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन सहित खून नहीं पहुंचता है ये बीमारी बेहद ही खतरनाक है क्योंकि ये अचानक होता है और समय पर इलाज न मिला तो मरीज की जान भी जा सकती है.

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कार्डिएक अरेस्ट, image credit original source

कार्डियक अरेस्ट है जानलेवा

कार्डियक अरेस्ट का दिल की लंबी बीमारी से कोई संबंध नही है क्योंकि ये एकाएक होता है, जिससे दिल खून को पम्प करना बंद कर देता है. जिसके पश्चात दिल के अंदर वेन्ट्रीकुलर फ्राईब्रिलेशन को उत्पन्न होने लगता है जिससे हार्ट बीट रुक जाती है इसके अटैक करते ही चन्द मिनटों के अंदर ही व्यक्ति की मौत हो जाती है इसी कारण अभिनेता ऋतुराज सिंह की मौत हुई है.

क्या होते है लक्षण?

कार्डियक अरेस्ट ह्रदय की दूसरी बीमारियों से बिल्कुल अलग है ये एकदम से होता है यही कारण है कि इसके कुछ भी लक्षण नजर नही आते है लेकिन जिन्हें भी दिल से जुड़ी कोई भी बीमारी है तो ऐसे व्यक्तियों में इसका खतरा सबसे ज्यादा रहता है फिर भी कार्डियक अरेस्ट आने से पूर्व सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, थकान, चक्कर आना या आंखों के आगे अंधेरा छा जाना इस तरह के लक्षण होते है.

इस स्थिति में क्या करें?

यदि किसी भी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट आया है तो एमरजेंसी में उसे CPR देने की आवश्यकता होती है इससे यदि हार्ट बीट रुक रही है तो वह सुचारू रूप से काम करना शुरू कर देगी यदि इससे भी काम नही बन रहा है डॉक्टरों द्वारा उसे इलेक्ट्रिक शॉक्ड देकर भी रुकी हुई धड़कनो को पुनः शुरू किया जा सकता है.

रोकथाम और बचाव

इसके लिए सबसे पहले अपनी दिनचर्या में बदलाव करें समय पर हेल्दी डाइट लें और ये जरूर ध्यान दें कि आप क्या और कितना खा रहे है एक बात का जरूर ध्यान रखे कि जितनी भूख हो उससे कुछ कम ही खाये. प्रॉसेस्ड पैक्ड फूड्स लेने से पूरी तरह से परहेज करें जंक फूड को कहे बाय-बाय फल और सब्जियों का सेवन करें रोज सुबह एक्सरसाइज जरूर करें साथ हो सके तो साल में एक बार फुल बॉडी चेकअप जरूर करवाये.

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