फतेहपुर:ईंट भट्ठे में बंधक बनाए गए बिहार प्रान्त के मजदूर..ठेकेदार ने एसपी से लगाई मदद की गुहार.!
शनिवार को फतेहपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे बिहार प्रान्त के एक व्यक्ति ने शिकायती पत्र देते हुए पुलिस अधीक्षक से इंसाफ़ की गुहार लगाई है..पढ़े पूरी ख़बर युगान्तर प्रवाह पर।
फतेहपुर:बरसात शुरू होने के साथ ही ईंट भट्टों में ईंट बनने की प्रक्रिया रोक दी जाती है।काम बन्द होने के बाद मजदूर अपने घरों को वापस लौट जाते हैं।लेकिन ज़िले के एक ऐसे ईंट भट्टे का मामला सामने आया है जहाँ काम बन्द होने के बावजूद मजदूरों को जबरन रोक कर रखा गया है!उनकी बकाया मजदूरी भी नहीं दी जा रही है।सभी मजदूर बिहार प्रान्त के हैं।बिहार से मजदूरों को लेकर आए व्यक्ति ने मजदूरों को छुड़ाने के लिए एसपी से गुहार लगाई है।
शनिवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय शिकायती पत्र लेकर पहुँचे मंटू ने बताया कि वह बिहार प्रान्त के नवादा ज़िले का रहने वाला है।वह अक्टूबर माह में अपने साथ 22 मजदूरों को उनके परिवार सहित लेकर मजदूरी के लिए जे.एम.डी. ब्रिक फ़ील्ड (ईंट भट्ठा) औंग आया हुआ था।उसने बताया कि वह मजदूरों का ठेकेदार है।उसकी जवाबदेही पर ही मजदूर बिहार से यहाँ भट्टे में मजदूरी करने के लिए आए हुए हैं लेकिन भट्टे में उसका और उसके मजदूरों का लगातार शोषण किया गया।मंटू ने कहा कि यदि मजदूर ने 30 हज़ार ईंटो की पथाई की है तो उसको रजिस्टर में 15 हज़ार ही चढ़ाया गया है।मैंने इस बारे में भट्टा संचालक अवधेश मिश्रा से शिकायत की तो उल्टा मुझे ही धमकियां दी गईं।अब जबकि भट्टे का काम बन्द हो गया है और मजदूर घर जाना चाह रहें तो उन्हें जाने नहीं दिया जा रहा है।ज़बरन उनको भट्टे में रोके हुए हैं।और न ही उनके काम का पैसा दे रहे हैं।
इस मामले में हमने जे.एम.डी ब्रिक फ़ील्ड फर्म के मालिक जितेंद्र प्रताप सिंह से बात की तो उन्होंने बताया कि फर्म मेरी पत्नी के नाम है।इस भट्ठे को मैंने और अवधेश मिश्रा नाम के एक व्यक्ति ने मिलकर पार्टनरशिप में चालू किया था।लेकिन पिछले दिनों हमारा और उनका विवाद हुआ जिसके बाद पुलिस के एक अधिकारी ने हम दोनों का समझौता कराते हुए कहा कि 15 अगस्त तक भट्टे का संचालन अवधेश मिश्रा करेंगे।और तुम इस दौरान भट्टे की किसी भी गतिविधियों से कोई मतलब नहीं रखोगे।मैंने समझौता मान लिया और मैं इस समय भट्टे के काम से दूर हूँ।
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पुलिस अधीक्षक कार्यालय में उपस्थित ज़ाफ़रगंज क्षेत्राधिकारी अभिषेक त्रिपाठी को मजदूरों के ठेकेदार मंटू ने शिकायती पत्र सौंप न्याय की गुहार लगाई है।ज़ाफ़रगंज सीओ से जब इस प्रकरण में बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आया है।सम्बंधित सर्किल आफ़िसर को मामला भेज दिया गया है।पूरे प्रकरण की जाँच करा आगे की कार्यवाही की जाएगी।
इस प्रकरण में हमने भट्टे के वर्तमान संचालक अवधेश मिश्रा जिन पर मजदूरों को ज़बरन भट्टे में रोकने का आरोप लगा है उनसे बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि ठेकेदार मंटू स्वयं मजदूरों का हिसाब करने नहीं आ रहा है।उसको आठ लाख रुपया आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान किया जा चुका है।वह पैसा हड़पना चाहता है।इसी लिए भट्टा मालिक जितेंद्र सिंह के साथ मिलकर वह मेरे खिलाफ षणयंत्र रच रहा है।उन्होंने अपने ऊपर लगे सारे आरोपों को बेबुनियाद बताया।
फतेहपुर:ईंट भट्ठे में बंधक बनाए गए बिहार प्रान्त के मजदूर..ठेकेदार ने एसपी से लगाई मदद की गुहार.!
फतेहपुर:बरसात शुरू होने के साथ ही ईंट भट्टों में ईंट बनने की प्रक्रिया रोक दी जाती है।काम बन्द होने के बाद मजदूर अपने घरों को वापस लौट जाते हैं।लेकिन ज़िले के एक ऐसे ईंट भट्टे का मामला सामने आया है जहाँ काम बन्द होने के बावजूद मजदूरों को जबरन रोक कर रखा गया है!उनकी बकाया मजदूरी भी नहीं दी जा रही है।सभी मजदूर बिहार प्रान्त के हैं।बिहार से मजदूरों को लेकर आए व्यक्ति ने मजदूरों को छुड़ाने के लिए एसपी से गुहार लगाई है।
शनिवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय शिकायती पत्र लेकर पहुँचे मंटू ने बताया कि वह बिहार प्रान्त के नवादा ज़िले का रहने वाला है।वह अक्टूबर माह में अपने साथ 22 मजदूरों को उनके परिवार सहित लेकर मजदूरी के लिए जे.एम.डी. ब्रिक फ़ील्ड (ईंट भट्ठा) औंग आया हुआ था।उसने बताया कि वह मजदूरों का ठेकेदार है।उसकी जवाबदेही पर ही मजदूर बिहार से यहाँ भट्टे में मजदूरी करने के लिए आए हुए हैं लेकिन भट्टे में उसका और उसके मजदूरों का लगातार शोषण किया गया।मंटू ने कहा कि यदि मजदूर ने 30 हज़ार ईंटो की पथाई की है तो उसको रजिस्टर में 15 हज़ार ही चढ़ाया गया है।मैंने इस बारे में भट्टा संचालक अवधेश मिश्रा से शिकायत की तो उल्टा मुझे ही धमकियां दी गईं।अब जबकि भट्टे का काम बन्द हो गया है और मजदूर घर जाना चाह रहें तो उन्हें जाने नहीं दिया जा रहा है।ज़बरन उनको भट्टे में रोके हुए हैं।और न ही उनके काम का पैसा दे रहे हैं।
इस मामले में हमने जे.एम.डी ब्रिक फ़ील्ड फर्म के मालिक जितेंद्र प्रताप सिंह से बात की तो उन्होंने बताया कि फर्म मेरी पत्नी के नाम है।इस भट्ठे को मैंने और अवधेश मिश्रा नाम के एक व्यक्ति ने मिलकर पार्टनरशिप में चालू किया था।लेकिन पिछले दिनों हमारा और उनका विवाद हुआ जिसके बाद पुलिस के एक अधिकारी ने हम दोनों का समझौता कराते हुए कहा कि 15 अगस्त तक भट्टे का संचालन अवधेश मिश्रा करेंगे।और तुम इस दौरान भट्टे की किसी भी गतिविधियों से कोई मतलब नहीं रखोगे।मैंने समझौता मान लिया और मैं इस समय भट्टे के काम से दूर हूँ।
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इस प्रकरण में हमने भट्टे के वर्तमान संचालक अवधेश मिश्रा जिन पर मजदूरों को ज़बरन भट्टे में रोकने का आरोप लगा है उनसे बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि ठेकेदार मंटू स्वयं मजदूरों का हिसाब करने नहीं आ रहा है।उसको आठ लाख रुपया आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान किया जा चुका है।वह पैसा हड़पना चाहता है।इसी लिए भट्टा मालिक जितेंद्र सिंह के साथ मिलकर वह मेरे खिलाफ षणयंत्र रच रहा है।उन्होंने अपने ऊपर लगे सारे आरोपों को बेबुनियाद बताया।