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Sugar Price Hike: रक्षाबंधन से पहले छिनी लोगों की मिठास, चीनी 65 रुपये किलो के पार, जानिए क्यों बढ़ रहे दाम

Sugar Price Hike: रक्षाबंधन से पहले छिनी लोगों की मिठास, चीनी 65 रुपये किलो के पार, जानिए क्यों बढ़ रहे दाम
रक्षाबंधन से पहले आसमान छूने लगे चीनी के दाम, 65 के पार पहुंची शक्कर की मिठास (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

रक्षाबंधन से पहले चीनी की कीमतों में तेजी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. देश के कई बाजारों में शक्कर का खुदरा भाव 58 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. जुलाई से अगस्त के बीच औसत खुदरा कीमत भी बढ़ी है. कम स्टॉक, बढ़ती मांग और जमाखोरी की आशंका के बीच सरकार ने स्टॉक लिमिट घटाने का फैसला किया है.

Sugar Rate Hike: रक्षाबंधन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. देश के कई बाजारों में शक्कर का खुदरा भाव 58 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. पिछले एक महीने में औसत कीमत में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई है. कम स्टॉक और बढ़ती मांग के बीच सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए नए कदम उठाए हैं.

चीनी की कीमतों में अचानक क्यों आया उछाल?

चीनी हर घर की रोजमर्रा की जरूरत है. चाय से लेकर मिठाई और त्योहारों पर बनने वाले पकवानों तक इसकी खपत होती है. ऐसे में रक्षाबंधन जैसे त्योहार से पहले इसके दाम बढ़ना सीधे तौर पर घरेलू बजट को प्रभावित करता है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 19 जुलाई 2026 को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 47.82 रुपये प्रति किलो थी. 19 अगस्त 2026 तक यह बढ़कर 54.06 रुपये प्रति किलो हो गई. यानी करीब एक महीने में औसत खुदरा भाव में 6 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.

कई बाजारों में 65 रुपये किलो तक पहुंचा भाव

औसत कीमत में बढ़ोतरी के साथ देश के कई स्थानीय बाजारों में चीनी इससे भी महंगी बिक रही है. अलग-अलग क्षेत्रों में शक्कर का खुदरा भाव 58 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है.

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कुछ बाजारों में पिछले कुछ समय के दौरान चीनी की कीमत में करीब 15 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी होने की बात सामने आई है. वहीं थोक बाजार में भी भाव बढ़कर करीब 5,400 से 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं.

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थोक कीमत बढ़ने का असर आम तौर पर कुछ समय बाद खुदरा बाजार पर भी दिखाई देता है. यही वजह है कि आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं की नजर चीनी के भाव पर बनी रहेगी.

मई के बाद से ही बढ़ने लगी थी कीमत

चीनी के दाम में तेजी अचानक शुरू नहीं हुई है. मई 2026 के बाद से ही बाजार में कीमतें धीरे-धीरे ऊपर जाने लगी थीं. हालांकि पिछले करीब 15 दिनों में इसमें तेजी ज्यादा दिखाई दी है.

त्योहारी सीजन में चीनी की मांग बढ़ना भी कीमतों पर असर डाल रहा है. रक्षाबंधन के साथ आने वाले अन्य त्योहारों में मिठाइयों और घरों में बनने वाले पकवानों की मांग बढ़ती है. अगर इसी दौरान बाजार में उपलब्ध स्टॉक सीमित हो तो कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है.

चीनी का स्टॉक बना सबसे बड़ी चिंता

चीनी की मौजूदा कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह स्टॉक को बताया जा रहा है. इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक 30 सितंबर 2026 को मौजूदा शुगर सीजन खत्म होने तक देश में चीनी का स्टॉक करीब 30 से 35 लाख टन रह सकता है.

इंडस्ट्री की चिंता यह है कि नया सीजन शुरू होने और पर्याप्त नई चीनी बाजार में आने में समय लग सकता है. इस दौरान मौजूदा स्टॉक पर दबाव बढ़ सकता है.

अगर त्योहारों के दौरान मांग में तेजी आती है और सप्लाई उसी अनुपात में नहीं बढ़ती है तो बाजार में कीमतें और ऊपर जाने का खतरा बना रहेगा.

सरकार ने पहले 30 दिन की स्टॉक लिमिट तय की

बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने चीनी कारोबारियों के स्टॉक पर सीमा तय की थी.

1 अगस्त 2026 से डीलर्स और व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा 4,000 क्विंटल यानी 400 मीट्रिक टन निर्धारित की गई थी. इसके साथ कारोबारियों को किसी भी समय 30 दिनों से अधिक की जरूरत के बराबर चीनी रखने की अनुमति नहीं थी.

इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना और कारोबारी स्तर पर जरूरत से ज्यादा चीनी रोककर रखने की संभावना को कम करना था.

अब 30 दिन की जगह सिर्फ 15 दिन का स्टॉक

कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अब स्टॉक नियम और सख्त कर दिए हैं. बुधवार को जारी नई अधिसूचना के मुताबिक कारोबारी अब 15 दिनों से अधिक की जरूरत के बराबर चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे.

सरकार का मानना है कि स्टॉक की सीमा कम करने से जमाखोरी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. बाजार में चीनी की उपलब्धता बनी रहने पर कीमतों पर बनने वाला दबाव भी कम हो सकता है. हालांकि इस फैसले का वास्तविक असर खुदरा बाजार में आने वाले दिनों में ही साफ दिखाई देगा.

एक दशक बाद चीनी आयात की तैयारी

घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार आयात का रास्ता भी अपना सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत करीब एक दशक बाद चीनी के आयात की तैयारी कर रहा है.

सूत्रों के मुताबिक सरकार आयात शुल्क में 100 फीसदी तक की छूट देने पर विचार कर सकती है. अगर आयात शुल्क में बड़ी राहत मिलती है तो विदेशी बाजार से चीनी मंगाना अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है. इससे घरेलू बाजार में अतिरिक्त चीनी पहुंचने की संभावना बढ़ेगी और त्योहारी सीजन के दौरान सप्लाई बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

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