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Hal sasthi 2021 Date:हरछठ की कथा क्यों मनाया जाता है पर्व

Hal sasthi 2021 Date:हरछठ की कथा क्यों मनाया जाता है पर्व
Hal Sasthi 2021 Date: सांकेतिक तस्वीर

हरछठ, हलछठ, बलराम जयंती औऱ कुछ जगहों पर ललही छठ के नाम से इस पर्व को जाना जाता है। पुत्र वतीं महिलाएं पुत्रों की लम्बी आयु के लिए इस दिन व्रत रखती हैं औऱ हरछठ माता की पूजा करती हैं. Hal sasthi 2021 Date lalahi chhath 2021 me kab hai

Hal Sasthi 2021:हरछठ का पर्व 2021 में 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इसे हलछठ, हलषष्ठी, बलराम जयंती औऱ कंही कंही ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पुत्र वती मां अपने पुत्रों की लंबी आयु के लिए हरछठ माता का व्रत रखते हुए पूजा अर्चना करती हैं। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी जन्म हुआ था। तभी से इस पर्व को बलराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।Hal Sasthi 2021 date Har chhath Lalahi chhath 2021 balram jaynati 2021

हरछठ की कथा.. Hal Chhath Vrat Katha In Hindi..

प्राचीन काल में एक ग्वालिन थी। उसका प्रसवकाल अत्यंत निकट था। एक ओर वह प्रसव से व्याकुल थी तो दूसरी ओर उसका मन गौ-रस (दूध-दही) बेचने में लगा हुआ था। उसने सोचा कि यदि प्रसव हो गया तो गौ-रस यूं ही पड़ा रह जाएगा। यह सोचकर उसने दूध-दही के घड़े सिर पर रखे और बेचने के लिए चल दी किन्तु कुछ दूर पहुंचने पर उसे असहनीय प्रसव पीड़ा हुई। वह एक झरबेरी की ओट में चली गई और वहां एक बच्चे को जन्म दिया। Har Chhath 2021 katha 

वह बच्चे को वहीं छोड़कर पास के गांवों में दूध-दही बेचने चली गई। संयोग से उस दिन हल षष्ठी थी। गाय-भैंस के मिश्रित दूध को केवल भैंस का दूध बताकर उसने सीधे-सादे गांव वालों में बेच दिया।उधर जिस झरबेरी के नीचे उसने बच्चे को छोड़ा था, उसके समीप ही खेत में एक किसान हल जोत रहा था। अचानक उसके बैल भड़क उठे और हल का फल शरीर में घुसने से वह बालक मर गया।इस घटना से किसान बहुत दुखी हुआ, फिर भी उसने हिम्मत और धैर्य से काम लिया। उसने झरबेरी के कांटों से ही बच्चे के चिरे हुए पेट में टांके लगाए और उसे वहीं छोड़कर चला गया।Hal chhath 2021 date

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कुछ देर बाद ग्वालिन दूध बेचकर वहां आ पहुंची। बच्चे की ऐसी दशा देखकर उसे समझते देर नहीं लगी कि यह सब उसके पाप की सजा है। वह सोचने लगी कि यदि मैंने झूठ बोलकर गाय का दूध न बेचा होता और गांव की स्त्रियों का धर्म भ्रष्ट न किया होता तो मेरे बच्चे की यह दशा न होती। अतः मुझे लौटकर सब बातें गांव वालों को बताकर प्रायश्चित करना चाहिए।ऐसा निश्चय कर वह उस गांव में पहुंची, जहां उसने दूध-दही बेचा था। वह गली-गली घूमकर अपनी करतूत और उसके फलस्वरूप मिले दंड का बखान करने लगी। तब स्त्रियों ने स्वधर्म रक्षार्थ और उस पर रहम खाकर उसे क्षमा कर दिया और आशीर्वाद दिया।बहुत-सी स्त्रियों द्वारा आशीर्वाद लेकर जब वह पुनः झरबेरी के नीचे पहुंची तो यह देखकर आश्चर्यचकित रह गई कि वहां उसका पुत्र जीवित अवस्था में पड़ा है। तभी उसने स्वार्थ के लिए झूठ बोलने को ब्रह्म हत्या के समान समझा और कभी झूठ न बोलने का प्रण कर लिया। Hal Sasthi 2021 Date

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उल्लेखनीय है कि हलछठ का व्रत पुत्रवती महिलाएं अपने पुत्रों की लंबी आयु के लिए रखती हैं।इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं बिना हल चले धरती का अन्न, पसई के चावल, भैंस का दूध दही, महुआ आदि वस्तुएं खाती हैं। इस दिन गाय का दूध या उससे बनी चीजों के खाने की मनाही होती है।इस व्रत में महिलाएं प्रति पुत्र के हिसाब से छह छोटे मिटटी या शक्कर से बने कुंढो  में पांच या सात भुने हुए अनाज या मेवा भरतीं हैं।Har chhath 2021 Hal Sasthi Lalahi Chhath 2021 Balram Jayanti

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26 Aug 2021 By Shubham Mishra

Hal sasthi 2021 Date:हरछठ की कथा क्यों मनाया जाता है पर्व

Hal Sasthi 2021:हरछठ का पर्व 2021 में 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इसे हलछठ, हलषष्ठी, बलराम जयंती औऱ कंही कंही ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पुत्र वती मां अपने पुत्रों की लंबी आयु के लिए हरछठ माता का व्रत रखते हुए पूजा अर्चना करती हैं। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी जन्म हुआ था। तभी से इस पर्व को बलराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।Hal Sasthi 2021 date Har chhath Lalahi chhath 2021 balram jaynati 2021

हरछठ की कथा.. Hal Chhath Vrat Katha In Hindi..

प्राचीन काल में एक ग्वालिन थी। उसका प्रसवकाल अत्यंत निकट था। एक ओर वह प्रसव से व्याकुल थी तो दूसरी ओर उसका मन गौ-रस (दूध-दही) बेचने में लगा हुआ था। उसने सोचा कि यदि प्रसव हो गया तो गौ-रस यूं ही पड़ा रह जाएगा। यह सोचकर उसने दूध-दही के घड़े सिर पर रखे और बेचने के लिए चल दी किन्तु कुछ दूर पहुंचने पर उसे असहनीय प्रसव पीड़ा हुई। वह एक झरबेरी की ओट में चली गई और वहां एक बच्चे को जन्म दिया। Har Chhath 2021 katha 

वह बच्चे को वहीं छोड़कर पास के गांवों में दूध-दही बेचने चली गई। संयोग से उस दिन हल षष्ठी थी। गाय-भैंस के मिश्रित दूध को केवल भैंस का दूध बताकर उसने सीधे-सादे गांव वालों में बेच दिया।उधर जिस झरबेरी के नीचे उसने बच्चे को छोड़ा था, उसके समीप ही खेत में एक किसान हल जोत रहा था। अचानक उसके बैल भड़क उठे और हल का फल शरीर में घुसने से वह बालक मर गया।इस घटना से किसान बहुत दुखी हुआ, फिर भी उसने हिम्मत और धैर्य से काम लिया। उसने झरबेरी के कांटों से ही बच्चे के चिरे हुए पेट में टांके लगाए और उसे वहीं छोड़कर चला गया।Hal chhath 2021 date

कुछ देर बाद ग्वालिन दूध बेचकर वहां आ पहुंची। बच्चे की ऐसी दशा देखकर उसे समझते देर नहीं लगी कि यह सब उसके पाप की सजा है। वह सोचने लगी कि यदि मैंने झूठ बोलकर गाय का दूध न बेचा होता और गांव की स्त्रियों का धर्म भ्रष्ट न किया होता तो मेरे बच्चे की यह दशा न होती। अतः मुझे लौटकर सब बातें गांव वालों को बताकर प्रायश्चित करना चाहिए।ऐसा निश्चय कर वह उस गांव में पहुंची, जहां उसने दूध-दही बेचा था। वह गली-गली घूमकर अपनी करतूत और उसके फलस्वरूप मिले दंड का बखान करने लगी। तब स्त्रियों ने स्वधर्म रक्षार्थ और उस पर रहम खाकर उसे क्षमा कर दिया और आशीर्वाद दिया।बहुत-सी स्त्रियों द्वारा आशीर्वाद लेकर जब वह पुनः झरबेरी के नीचे पहुंची तो यह देखकर आश्चर्यचकित रह गई कि वहां उसका पुत्र जीवित अवस्था में पड़ा है। तभी उसने स्वार्थ के लिए झूठ बोलने को ब्रह्म हत्या के समान समझा और कभी झूठ न बोलने का प्रण कर लिया। Hal Sasthi 2021 Date

उल्लेखनीय है कि हलछठ का व्रत पुत्रवती महिलाएं अपने पुत्रों की लंबी आयु के लिए रखती हैं।इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं बिना हल चले धरती का अन्न, पसई के चावल, भैंस का दूध दही, महुआ आदि वस्तुएं खाती हैं। इस दिन गाय का दूध या उससे बनी चीजों के खाने की मनाही होती है।इस व्रत में महिलाएं प्रति पुत्र के हिसाब से छह छोटे मिटटी या शक्कर से बने कुंढो  में पांच या सात भुने हुए अनाज या मेवा भरतीं हैं।Har chhath 2021 Hal Sasthi Lalahi Chhath 2021 Balram Jayanti

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