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Shardiya Navaratri Maa Mahagauri : नवरात्रि की अष्टमी के दिन माँ के इस स्वरूप 'महागौरी' की करें आराधना! पूजन से समस्त दुःख होंगे दूर

Shardiya Navaratri Maa Mahagauri : नवरात्रि की अष्टमी के दिन माँ के इस स्वरूप 'महागौरी' की करें आराधना! पूजन से समस्त दुःख होंगे दूर
नवरात्रि में मां के अष्टम स्वरूप महागौरी की पूजा, फोटो साभार सोशल मीडिया

Navratri 8th Day: शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन यानी माता का अष्टम स्वरूप महागौरी का है. महागौरी की पूजन का आज के दिन विधान है. इनके पूजन से समस्त प्रकार के दुखों व संकट का नाश होता है. भगवती का यह शक्ति विग्रह भक्तों को तत्काल अमोघ फल देता है. निर्मल गौर वर्ण वाली महागौरी के सभी वस्त्र, आभूषण और वाहन भी श्वेत है. अष्टम स्वरूप का विधि विधान से पूजन कर नारियल का भोग लगाएं.


हाईलाइट्स

  • शारदीय नवरात्रि के अष्टम स्वरूप महागौरी की करें आराधना
  • महागौरी के पूजन का विशेष महत्व, मां का निर्मल वर्ण और वाहन वृषभ
  • समस्त दुखो का निवारण, दुःख पास नहीं भटकता, माँ का स्वरूप है शांत

Worship Mahagauri the eighth form of Mother : शारदीय नवरात्रि के 9 दिनों के पूजन का विशेष महत्व है, हर दिन मां के अलग-अलग स्वरूपों का आवाहन कर पूजन किया जाता है. मां के यह 9 दिन पूजन विशेष रूप से अमोघ फल देने वाले हैं. आज भगवती माता के जिस स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है वह माता महागौरी है. जिनका अष्टम दिन पूजन का विशेष महत्व है.

महागौरी स्वरूप की करें आराधना

माँ भगवती, आदिशक्ति के हर स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है. भक्त नवरात्रि के इन 9 दिनों विधि-विधान से पूजन करते हैं. हर दिन माता के अलग स्वरूपों की उपासना कर भक्त मनवांछित फल की कामना करते हैं. नवरात्रि की अष्टमी का विशेष महत्व रहता है.इस दिन कन्याभोज भी आयोजित किया जाता है. माँ महागौरी स्वरूप में पूजी जाती हैं. माता का पूजन फलदायी है.

अमोघ फल देने वाला होता है पूजन

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मां का स्वरूप निर्मल-गौर वर्ण वाली , चार भुजाएं और सवारी बैल है. मां का स्वाभाव शांत,करुणामयी स्वरूप भक्तों की समस्त मनोकामना पूर्ण करता है. महागौरी का पूजन अमोघ फल देने वाला होता है. समस्त संकटों से निजात मिलती है, पाप, निर्धनता, दीनता और दुख पास नहीं भटकते हैं.

माता पार्वती ने शिवजी के लिए की थी तपस्या

पौराणिक कथा के मुताबिक माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कड़ी तपस्या की, माता पार्वती ने अन्न,जल भी छोड़ रखा था, इसकी वजह से उनका पूरा शरीर काला पड़ गया था. मां के इस कठिन तपस्या को देखकर शिव जी प्रसन्न हुए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया. तप के कारण काले पड़े शरीर को लेकर शिव जी ने उन्हें गंगा जल से पवित्र किया, जिसके बाद उनका शरीर फिर से निर्मल हो गया. इस दौरान उनका वर्ण सफेद हो गया जिस कारण वह महागौरी कहलाईं.

मां की ऐसे करें आराधना,कन्या भोज कराएं, विवाह सम्बन्धी परेशानी होती है दूर

सुबह जल्द उठकर माता का स्नान करें. माँ की प्रतिमा को गंगा जल से स्नान कराएं. सफेद पुष्प अर्पित करें. माँ को रोली,कुमकुम लगाएं. मिष्ठान,पंचमेवा और फल अर्पित करें.महागौरी को काले चने का भोग अवश्य लगायें, नारियल अर्पित करें. माँ की आराधना करें.अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है. महागौरी मंत्र का ध्यान करें. 'या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः'

महागौरी की पूजा से विवाह में आ रही समस्याएं दूर होती हैं, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. मनपसन्द जीवनसाथी मिलता है.मां की आराधना से समस्त संकट दूर होते हैं.

22 Oct 2023 By Vishal Shukla

Shardiya Navaratri Maa Mahagauri : नवरात्रि की अष्टमी के दिन माँ के इस स्वरूप 'महागौरी' की करें आराधना! पूजन से समस्त दुःख होंगे दूर


हाईलाइट्स

  • शारदीय नवरात्रि के अष्टम स्वरूप महागौरी की करें आराधना
  • महागौरी के पूजन का विशेष महत्व, मां का निर्मल वर्ण और वाहन वृषभ
  • समस्त दुखो का निवारण, दुःख पास नहीं भटकता, माँ का स्वरूप है शांत

Worship Mahagauri the eighth form of Mother : शारदीय नवरात्रि के 9 दिनों के पूजन का विशेष महत्व है, हर दिन मां के अलग-अलग स्वरूपों का आवाहन कर पूजन किया जाता है. मां के यह 9 दिन पूजन विशेष रूप से अमोघ फल देने वाले हैं. आज भगवती माता के जिस स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है वह माता महागौरी है. जिनका अष्टम दिन पूजन का विशेष महत्व है.

महागौरी स्वरूप की करें आराधना

माँ भगवती, आदिशक्ति के हर स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है. भक्त नवरात्रि के इन 9 दिनों विधि-विधान से पूजन करते हैं. हर दिन माता के अलग स्वरूपों की उपासना कर भक्त मनवांछित फल की कामना करते हैं. नवरात्रि की अष्टमी का विशेष महत्व रहता है.इस दिन कन्याभोज भी आयोजित किया जाता है. माँ महागौरी स्वरूप में पूजी जाती हैं. माता का पूजन फलदायी है.

अमोघ फल देने वाला होता है पूजन

मां का स्वरूप निर्मल-गौर वर्ण वाली , चार भुजाएं और सवारी बैल है. मां का स्वाभाव शांत,करुणामयी स्वरूप भक्तों की समस्त मनोकामना पूर्ण करता है. महागौरी का पूजन अमोघ फल देने वाला होता है. समस्त संकटों से निजात मिलती है, पाप, निर्धनता, दीनता और दुख पास नहीं भटकते हैं.

माता पार्वती ने शिवजी के लिए की थी तपस्या

पौराणिक कथा के मुताबिक माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कड़ी तपस्या की, माता पार्वती ने अन्न,जल भी छोड़ रखा था, इसकी वजह से उनका पूरा शरीर काला पड़ गया था. मां के इस कठिन तपस्या को देखकर शिव जी प्रसन्न हुए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया. तप के कारण काले पड़े शरीर को लेकर शिव जी ने उन्हें गंगा जल से पवित्र किया, जिसके बाद उनका शरीर फिर से निर्मल हो गया. इस दौरान उनका वर्ण सफेद हो गया जिस कारण वह महागौरी कहलाईं.

मां की ऐसे करें आराधना,कन्या भोज कराएं, विवाह सम्बन्धी परेशानी होती है दूर

सुबह जल्द उठकर माता का स्नान करें. माँ की प्रतिमा को गंगा जल से स्नान कराएं. सफेद पुष्प अर्पित करें. माँ को रोली,कुमकुम लगाएं. मिष्ठान,पंचमेवा और फल अर्पित करें.महागौरी को काले चने का भोग अवश्य लगायें, नारियल अर्पित करें. माँ की आराधना करें.अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है. महागौरी मंत्र का ध्यान करें. 'या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः'

महागौरी की पूजा से विवाह में आ रही समस्याएं दूर होती हैं, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. मनपसन्द जीवनसाथी मिलता है.मां की आराधना से समस्त संकट दूर होते हैं.

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