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Makar Sankranti Ganga Snan: सर्दी पर भारी आस्था ! मकर संक्रांति को लेकर घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Makar Sankranti Ganga Snan: सर्दी पर भारी आस्था ! मकर संक्रांति को लेकर घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
आस्था की डुबकी, फोटो साभार सोशल मीडिया

मकर संक्रांति में आस्था की डुबकी

देशभर में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का पर्व बड़े ही उत्साह से मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में सूर्य भगवान जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं. तब यह त्योहार मनाया जाता हैं. उन्हीं में से एक मकर संक्रांति का पर्व भी है. मकर संक्रांति के दिन गंगा और पवित्र नदियों में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं. देश भर के तमाम प्रसिद्ध गंगा घाटों पर सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे हैं.

मकर संक्रांति पर आस्था की डुबकी लगाते श्रद्धालु

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के पावन पर्व को लेकर श्रद्धालुओं (Devotees) में काफी उत्साह भी देखा जा रहा है. भीषण ठंड (Severe Cold) और कोहरे के बीच सुबह 4 बजे से ही घाटों पर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे है. सुरक्षा के लिहाज से घाटों पर पुलिस का कड़ा पहरा है तो वहीं श्रद्धालुओं के साथ किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए गोताखोरों की टीम भी मुस्तैद की गई है. प्रयागराज के संगम व वाराणसी के घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है.

मकर संक्रांति पर क्यों किया जाता है गंगा स्नान

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurt) से ही पवित्र नदियों में स्नान शुरू हो जाता है. इस दिन गंगा स्नान का बहुत बड़ा महत्व है. मकर संक्रांति के दिन स्नान करने से सभी पाप मिट जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति भी होती है. शास्त्रों में ऐसा कहा गया है की गंगा स्नान करने से मोक्ष मिलता है. विष्णु पुराण में भी बताया गया है कि राजा भागीरथ अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए मां गंगा को अपने कठोर तप से पृथ्वी पर बुलाया था तब मां गंगा ब्रह्मा जी के कमंडल से निकलकर भगवान शिव की जटाओं में होती हुई हिमालय से पृथ्वी पर आई थी सूर्योदय से पहले स्नान करने से दस हजार गौ दान का फल भी मिलता है.

दान का महत्व

मकर संक्रांति पर स्नान करने के बाद पितरों का तर्पण और दान (Donate) करना चाहिए. इससे आपको अपने पितरों का आशीर्वाद भी मिलेगा जिससे आपका जीवन और भी ज्यादा सुखमय हो जाएगा मकर संक्रांति के स्नान के बाद गेहूं, गुण तिल, गर्म कपड़े, अनाज आदि का दान करना चाहिए. कहते हैं कि आज के दिन किए गए दान का 100 गुना वापस पुण्य मिलता है.

घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

गंगा स्नान (Ganga Snan) के लिए सुबह से ही वाराणसी (Varansi), प्रयागराज (Prayagraj) और हरिद्वार (Haridwar) के घाटों पर श्रद्धालुओं (Devotees)का जन सैलाब उमड़ पड़ा. सुबह से लेकर अभी तक इन घाटों पर भारी संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके हैं. इस दौरान चारों तरफ घाटों पर केवल जय गंगा मैया उद्घोष के जयकारे लग रहे हैं.

Read More: Mirzapur Vindhyavasini Temple: क्या है मां विंध्यवासिनी मंदिर और अष्टभुजा कालीखोह मन्दिर का इतिहास ! जानिए पौराणिक मान्यताओं के पीछे की कहानी

सुरक्षा की दृष्टि से भी घाट के चारों तरफ पुलिस का कड़ा पहरा है प्रशासन की ओर से जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. जिससे अराजक तत्वों पर नजर रखी जा सके. साथ ही श्रद्धालुओं के साथ किसी तरह की कोई अनहोनी ना हो इसके लिए गोताखोरों की टीम भी चप्पे चप्पे पर तैनात की गई है.

Read More: होली की भाई दूज 2026: कब है भारत्य द्वितीया, बहन के घर भोजन करने की परंपरा क्यों है खास? जानिए शुभ मुहूर्त

15 Jan 2024 By Vishal Shukla

Makar Sankranti Ganga Snan: सर्दी पर भारी आस्था ! मकर संक्रांति को लेकर घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

मकर संक्रांति में आस्था की डुबकी

मकर संक्रांति पर आस्था की डुबकी लगाते श्रद्धालु

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के पावन पर्व को लेकर श्रद्धालुओं (Devotees) में काफी उत्साह भी देखा जा रहा है. भीषण ठंड (Severe Cold) और कोहरे के बीच सुबह 4 बजे से ही घाटों पर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे है. सुरक्षा के लिहाज से घाटों पर पुलिस का कड़ा पहरा है तो वहीं श्रद्धालुओं के साथ किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए गोताखोरों की टीम भी मुस्तैद की गई है. प्रयागराज के संगम व वाराणसी के घाटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है.

मकर संक्रांति पर क्यों किया जाता है गंगा स्नान

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurt) से ही पवित्र नदियों में स्नान शुरू हो जाता है. इस दिन गंगा स्नान का बहुत बड़ा महत्व है. मकर संक्रांति के दिन स्नान करने से सभी पाप मिट जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति भी होती है. शास्त्रों में ऐसा कहा गया है की गंगा स्नान करने से मोक्ष मिलता है. विष्णु पुराण में भी बताया गया है कि राजा भागीरथ अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए मां गंगा को अपने कठोर तप से पृथ्वी पर बुलाया था तब मां गंगा ब्रह्मा जी के कमंडल से निकलकर भगवान शिव की जटाओं में होती हुई हिमालय से पृथ्वी पर आई थी सूर्योदय से पहले स्नान करने से दस हजार गौ दान का फल भी मिलता है.

दान का महत्व

मकर संक्रांति पर स्नान करने के बाद पितरों का तर्पण और दान (Donate) करना चाहिए. इससे आपको अपने पितरों का आशीर्वाद भी मिलेगा जिससे आपका जीवन और भी ज्यादा सुखमय हो जाएगा मकर संक्रांति के स्नान के बाद गेहूं, गुण तिल, गर्म कपड़े, अनाज आदि का दान करना चाहिए. कहते हैं कि आज के दिन किए गए दान का 100 गुना वापस पुण्य मिलता है.

घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

गंगा स्नान (Ganga Snan) के लिए सुबह से ही वाराणसी (Varansi), प्रयागराज (Prayagraj) और हरिद्वार (Haridwar) के घाटों पर श्रद्धालुओं (Devotees)का जन सैलाब उमड़ पड़ा. सुबह से लेकर अभी तक इन घाटों पर भारी संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके हैं. इस दौरान चारों तरफ घाटों पर केवल जय गंगा मैया उद्घोष के जयकारे लग रहे हैं.

सुरक्षा की दृष्टि से भी घाट के चारों तरफ पुलिस का कड़ा पहरा है प्रशासन की ओर से जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. जिससे अराजक तत्वों पर नजर रखी जा सके. साथ ही श्रद्धालुओं के साथ किसी तरह की कोई अनहोनी ना हो इसके लिए गोताखोरों की टीम भी चप्पे चप्पे पर तैनात की गई है.

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