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Bhojpur Shiv Temple : आज भी अधूरा है ये शिव मन्दिर, यहां है उत्तर भारत का सबसे विशाल शिवलिंग

Bhojpur Shiv Temple : आज भी अधूरा है ये शिव मन्दिर, यहां है उत्तर भारत का सबसे विशाल शिवलिंग
भोपाल में भोजपुर शिव मंदिर : फोटो साभार गूगल

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 30 किलोमीटर दूर बेतवा नदी के पास प्राचीन भोजपुर शिव मंदिर है, कहा जाता है कि इस मंदिर को एक रात में ही बनना था.लेकिन सूर्योदय होने तक इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका. जिसके बाद मंदिर अधूरा ही रह गया. आमदिनों के साथ सावन के दिनों में भक्तों का यहां तांता लगा रहता है.यहां भगवान शंकर का शिवलिंग उत्तर भारत का सबसे बड़ा शिवलिंग बताया जाता है. इस मन्दिर का निर्माण 11 वीं सदी के परमार वंश के राजा भोज ने कराया था.


हाईलाइट्स

  • भोपाल में भोजपुर शिव मंदिर आज भी अधूरा है यह मंदिर
  • मन्दिर का निर्माण आज तक अधूरा,उत्तर भारत का सबसे बड़ा शिवलिंग है यहां
  • बेतवा नदी के किनारे स्थित है अद्भुत शिव मंदिर,राजा भोज ने किया था निर्माण

the largest Shivling in North India the temple : हमारे देश में कई ऐसे अनूठे और रहस्यमई शिव मंदिर हैं. जिनका विशेष महत्व है. श्रावण मास में शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है. भक्त भोलेनाथ के जयकारों के साथ शिवालयों में पहुंच रहे हैं.जलाभिषेक कर घर की सुख समृद्धि की कामना करते हैं.मध्यप्रदेश के भोपाल में एक ऐसा शिवलिंग है, जिसे उत्तर भारत का सबसे बड़ा शिवलिंग कहा जाता है.लेकिन मन्दिर का निर्माण आजतक अधूरा है.चलिए आज आपको इस मंदिर के पौराणिक महत्व और उसकी क्या विशेषता है. इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.

 

राजा भोज के द्वारा किया गया था मन्दिर का निर्माण, यहां है विशाल शिवलिंग 

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 30 किलोमीटर की दूरी पर ऊंची पहाड़ियों और बेतवा नदी के पास एक अनूठा शिव मंदिर है. यह शिव मंदिर 11 वीं सदी के परमार वंश के राजा भोज के द्वारा निर्माण किया गया था. जिसके बाद से इसे भोजपुर शिव मंदिर कहा जाने लगा. आम दिनों के साथ श्रावण मास में भक्तों का तांता लगा रहता है. यहां का शिवलिंग उत्तर भारत का सबसे बड़ा शिवलिंग बताया जाता है. यह जो शिवलिंग है वह अद्भुत कलाकृति से बना हुआ है. शिवलिंग पत्थर से निर्माण किया गया है. महाभारत काल से भी इस मंदिर का नाता रहा है.

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एक रात में बनना था मन्दिर रह गया निर्माण कार्य अधूरा

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ऐसा भी कहा जाता है, कि इस शिव मंदिर का निर्माण एक रात में होना था, लेकिन सूर्योदय हो जाने की वजह से इस मंदिर का निर्माण पूरा नहीं हो सका.जिसकी वजह से मंदिर अधूरा ही रह गया, आज भी मंदिर अधूरा ही है. बताया जाता है कि मंदिर के गुंबद तक ही कार्य हो पाया था. यहां जो मंदिर का शिवलिंग है,106 फीट लंबा, 77 फीट चौड़ा है .जो 17 फीट ऊंचे चबूतरे पर बना है.मन्दिर के गर्भगृह के अंदर अधूरा 40 फुट की ऊंचाई पर गुंबद है.जो उत्तर भारत में इकलौता विशाल शिवलिंग है.यह शिवलिंग पत्थर से निर्माण किया गया है. किसी भी भक्त को यदि जलाभिषेक करना हो तो वह जलहरी पर चढ़कर ही जलाभिषेक कर सकते है. अब कुछ बर्षो से भक्तों के लिए जलहरी पर चढ़ने पर रोक लगा दी है. अब केवल मंदिर के महंत या पुजारी ही जलहरी पर चढ़कर पूजा करते हैं.भक्त नीचे से ही दर्शन करते हैं

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महाभारत काल से जुड़ा है महत्व,साल में दो बार लगता है मेला

पौराणिक कथाओं के अनुसार किवंदती है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां आए थे.उन्होंने माता कुंती के साथ शिवजी की पूजा की थी. सुबह होते ही पांडव विलुप्त हो गए थे. तब से यह मंदिर अधूरा रह गया. भक्तों की भीड़ बराबर बनी रहती है.यहां का भोजपुर मेला काफी प्रसिद्ध है. साल में दो बार यहां मेला लगता है.एक शिवरात्रि में और एक संक्रांति में इस मेले में को देखने के लिए दूर-दूर से भारी संख्या में लोग आते हैं.

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