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उन्नाव रेप केस:फतेहपुर का मूल निवासी कुलदीप सेंगर कैसे पहुंचा फर्श से अर्श पर और फ़िर हुआ ये कांड.!

उन्नाव रेप केस:फतेहपुर का मूल निवासी कुलदीप सेंगर कैसे पहुंचा फर्श से अर्श पर और फ़िर हुआ ये कांड.!
कुलदीप सेंगर फ़ाइल फ़ोटो साभार गूगल

देश के बहुचर्चित उन्नाव रेप कांड में आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने दोषी करार दे दिया है।अब उम्मीद की जा रही है कि 20 दिसम्बर को कोर्ट इस मामले में सजा का ऐलान करें..सेंगर के राजनीतिक सफ़र की पूरी कहानी पढें युगान्तर प्रवाह की इस रिपोर्ट में।

फतेहपुर:उन्नाव का भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर लड़की से रेप और अपरहण मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में दोषी सिद्ध हो गया है।अब उसके लिए कोर्ट बीस दिसम्बर को सजा सुना सकती है।यह सजा उम्र कैद से लेकर मौत तक की हो सकती है!

ये भी पढें-उन्नाव केस:लड़की से दुष्कर्म और अपरहण मामले में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर दोषी क़रार...इस दिन होगा सजा का ऐलान..!

कुलदीप सिंह सेंगर के पिता मुलायम सिंह मूल रूप से फतेहपुर जिले के हथगाम थाना क्षेत्र के मुक्तीपुर गांव के रहने वाले थे।नाना वीरेंद्र सिंह के कोई बेटा नहीं था। केवल दो बेटियां चुन्नी देवी (विधायक की मां) और सरोजनी देवी हैं। चुन्नी देवी अपनी शादी के बाद से अपने परिवार के साथ पिता के संग रहने लगीं।और कुलदीप सेंगर का पूरा परिवार उन्नाव का निवासी बन गया।

चार भाइयों में कुलदीप सबसे बड़ा मनोज (अब मृतक) दूसरे नंबर का और अतुल तीसरे नंबर का है। सबसे छोटे भाई विपुल सिंह की दस साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी।और मनोज की इसी साल अक्टूबर में बीमारी के चलते मौत हुई थी। सभी का जन्म भी यहीं उन्नाव के उसी गांव में हुआ था।कुलदीप के पिता भले ही फतेहपुर के रहने वाले हो लेक़िन शादी के बाद ही उन्नाव में बसने के बाद यहां आना जाना कम हो गया था और अब तो पिछले कई सालों से कुलदीप के परिवार का कोई भी सदस्य फतेहपुर के अपने पैतृक गांव नहीं आया है।

ग्राम प्रधानी के चुनाव से शुरू हुआ कुलदीप का राजनीतिक सफ़र जीत के साथ शुरू हुआ और फिर उसे लगातार सफ़लता मिलती गई वर्तमान में सेंगर लगातार चौथी बार विधायक चुना गया है।

वर्ष 2002 में कुलदीप ने बसपा से उन्नाव सदर सीट से पहली बार सक्रिय राजनीति में कदम रखा और विधायक चुना गया। 2007 में उसने सपा का दामन थामा और बांगरमऊ से विधायक बना।2012 में फिर सपा के टिकट पर भगवंतनगर से विधायक निर्वाचित हुआ।2016 में सपा में रहते हुए पार्टी से बगावत करके जिला पंचायत चुनाव में अपनी पत्नी संगीता सेंगर को उतार दिया।और वो चुनाव जीत गई इसके बाद सेंगर ने साल 2017 विधानसभा चुनावों के पहले भाजपा का दामन थामा और फिर विधायक बन गया।

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