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Navaratri Siddhidatri Devi: माँ दुर्गा की नवीं शक्ति 'सिद्धिदात्री' की करें उपासना ! महानवमी में कन्या पूजन का है विशेष महत्व

Navaratri Siddhidatri Devi: माँ दुर्गा की नवीं शक्ति 'सिद्धिदात्री' की करें उपासना ! महानवमी में कन्या पूजन का है विशेष महत्व
नवमी माँ सिद्धिदात्री की करें आराधना, फोटो साभार सोशल मीडिया

Navratri 9th Day: मां दुर्गा के नवें स्वरूप सिद्धिदात्री देवी के पूजन का विशेष महत्व है. इनके विधि विधान से पूजन करने से समस्त सिद्धियां प्राप्त होती हैं. यह नवरात्रि का आख़िरी दिन यानी नवमी और माता की नवीं शक्ति के रूप में जानी जातीं हैं. नवरात्रि में महानवमी के दिन को बहुत ही आवश्यक बताया है. नवमी में सिद्धिदात्री का पूजन करने के बाद कन्या पूजन अवश्य करें.इससे घर मे सुख-शांति आती है.


हाईलाइट्स

  • नवरात्रि की नवमी को करें माँ की नवीं शक्ति की पूजा,फलदायी है पूजन
  • सिद्धिदात्री देवी के पूजन का है महत्व, मां दुर्गा की नवीं शक्ति का करें पूजन
  • इनके पूजन से सभी प्रकार के दुखों का निवारण होता है, मां को सफेद रंग और हलवा,चना, पूरी ,खीर का भोग लग

Know the mythological significance of worshiping Siddhidatri : कमल पर विराजमान माँ हमेशा अपने भक्तों पर कृपा करती है.माता का यह रूप अत्यंत दिव्य है. माँ शक्ति के इस नवें स्वरूप के पूजन का बड़ा विशेष महत्व है. जानिये माँ शक्ति के नवें स्वरूप सिद्धिदात्री के पूजन का क्या महत्व है. मां के इस दिव्य स्वरूप के पीछे का महत्व भी आपको बत्ताएंगे.

नवमी में करें माँ सिद्धादात्री की पूजा

देशभर में शादी-नवरात्र की धूम मची हुई है, मां दुर्गा के हर दिन अलग-अलग स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व होता है.  नवरात्र के अंतिम दिन माता के नए स्वरूप के पूजन का विशेष महत्व है. माता का नया स्वरूप सिद्धादात्री जो बेहद दिव्य है. माता के विधि विधान से उपासना और जाप करने से माता प्रसन्न होती है और अपने भक्तों पर कृपा करती है.

भगवान शिव ने की थी सिद्धादात्री की कठोर तपस्या

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मां सिद्धिदात्री की पूजा विशेष फलदाई है, इसके पीछे एक कथा प्रचलित है, कहते हैं कि भगवान शंकर ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद भोलेनाथ ने आठों सिद्धियों को प्राप्त कर लिया था. माता सिद्धिदात्री का यहां भी वर्णन आया है. उनकी अनुकम्पा से एक बार भोलेनाथ का आधा शरीर देवी रूप हो गया था जिसके बाद वे अर्धनारीश्वर कहलाएं. मां दुर्गा के नौ रूपों में यह रूप अत्यंत ही शक्तिशाली रूप है.

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देवताओं में तेज उतपन्न हुआ

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कहा जाता है कि, मां दुर्गा का यह रूप सभी देवी-देवताओं के तेज से प्रकट हुआ है. एक कथा में है कि जब देवता महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे. उसी समय वहां मौजूद देवतागण से एक तेज उत्पन्न हुआ और उसी तेज से एक दिव्य शक्ति का निर्माण हुआ, जिसे मां सिद्धिदात्री कहा जाता है.

मां की उपासना से सिद्धियां प्राप्त होती हैं

माँ सिद्धिदात्री का स्वरूप बहुत दिव्य और शक्तिशाली है. माता का वाहन सिंह है, माता कमल पर विराजती है.चार भुजाओं वाली मां हमेशा भक्तों पर कृपा करती हैं. मां को सरस्वती देवी का भी स्वरूप मानते हैं. सिद्धिदात्री की पूजा का नवरात्रि के नवें दिन का महत्व है इस दिन महानवमी होती है. मां की विधि विधान से आराधना उपासना करने से सिद्धियां प्राप्त भी होती है

कन्या पूजन अवश्य करें और हलवा,चना और पूरी का लगाए भोग

सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान करते हुए बेगनी और जमुनी वस्त्र धारण कर मां सिद्धिदात्री की आराधना करें और पूजन की तैयारी शुरू करें. नवमी होने के चलते इस दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व बढ़ जाता है. देवी पूजन के बाद कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए. पूजन के लिए माँ को सफेद पुष्प अर्पित करना चाहिए फिर कुमकुम और रोली लगाकर पंचमेवा, मिष्ठान और फल अर्पित करें माता सिद्धिदात्री को हलवा ,चना, पूरी और खीर अत्यंत प्रिय है.

इसलिए माता को भोग के लिए यही चीज़ बनानी चाहिए. इन चीजों का भोग लगाने से मां पसंद होती हैं जिससे मां अत्यंत प्रसन्न होती हैं. शास्त्रों में मां सिद्धिदात्री को सिद्धि और मोक्ष की देवी कहा जाता है धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मां सिद्धिदात्री की विधि विधान से पूजन करने वाले भक्तों को यश,बल, धन,सुख-समृद्धि मिलती है.

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