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Independence Day 2023: अंग्रेजी हुकूमत के सामने चट्टान की तरह खड़े रहे भारत के ये वीर सपूत ! जानिए इनके बलिदान के बारे में

Independence Day 2023: अंग्रेजी हुकूमत के सामने चट्टान की तरह खड़े रहे भारत के ये वीर सपूत ! जानिए इनके बलिदान के बारे में
आज़ाद भारत के लिए बलिदान देने वाले वीरों को नमन,फोटो साभार सोशल मीडिया

देश स्वतन्त्रता दिवस की तैयारी में जुटा हुआ है.15 अगस्त 1947 का वह आज़ादी का दिन हर हिंदुस्तानी के दिलों में है.आज़ादी के अनगिनत मतवालों ने अंग्रेजी हुकूमत की चूल्हे हिला दी थी.हमेशा उनके सामने चुनौती बनकर डट कर खड़े रहे.आज़ाद भारत का सपना देखने वाले जेल जाने में भी पीछे नहीं रहे.और तो और हंसते-हंसते देश के लिए बलिदान भी दे दिया.


हाईलाइट्स

  • आज़ादी के उन मतवालों को देश कर रहा याद,जिन्होंने देश की आज़ादी का देखा था सपना
  • 1857 की क्रांति से शूरु हुआ विद्रोह,कई क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता की जगाई अलख
  • अनगिनत क्रांतिकारियों का देश की आज़ादी में रहा अहम योगदान,मंगल पांडे,भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु,चंद्रशेख

The story of those heroes who played an important role : स्वतंत्रता दिवस 2023 के रंग में देश रंगने लगा है.ऐसे में उन वीर क्रांतिकारियों को हम जरूर याद करते हैं. जिन्होंने आज़ाद भारत का सपना देखा था.शहीद भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु,चन्द्र शेखर आज़ाद,अशफ़ाक अल्ला खां, वीरांगना लक्ष्मी बाई और मंगल पांडे वैसे तो देश की आज़ादी के लिए अनगिनत क्रांतिकारियों ने कुर्बानियां दी.1857 की क्रांति से शुरू हुआ विद्रोह का बिगुल बजता ही रहा. आजादी के मतवालों ने अंग्रेजो की खुली चुनौती स्वीकार करते हुए उन्हें कई बार पटखनी दी.

मंगल पांडे ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की चलाई पहली गोली

सबसे पहले बात करते हैं मंगल पांडे की 1857 की पहली लड़ाई की शुरुआत मंगल पांडे के विद्रोह से ही शुरू हुई.मंगल पांडे ईस्ट इंडिया कंपनी में फौजी के रूप में एक सिपाही थे. मंगल पांडे ने देश की आज़ादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की पहली गोली चलाई थी.फिरंगियों के विरुद्ध बड़ा आंदोलन चलाया.'मारो फिरंगी' का नारा उन्हीं ने दिया.यह आज़ादी की पहली लड़ाई का बिगुल यही से बजा था.

फांसी के वक्त जल्लादों ने भी गर्दन झुका ली थी

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अंग्रेज भी मंगल पांडे की बहादुरी देख दहशत में रहने लगे थे.29 मार्च 1857 को अंग्रेजो के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल बजाया.इसमें मंगलपांडे को अंग्रेजों ने गिरफ्तार किया और उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई.कहते हैं कि मंगल पांडे को फांसी देते वक्त जल्लादों ने गर्दन झुकाकर फांसी से इनकार कर दिया था.अंग्रेज शुरू से ही चालाक रहे उन्होंने पांडे को 10 दिन पहले ही 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गयी.

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भगत सिंह ने कहा था अगर गुलाम भारत में हुई शादी तो मेरी दुल्हन मौत होगी

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छोटी सी उम्र में देश की आज़ादी का ऐसा सपना ऐसा किसी भी क्रांतिकारी ने नहीं देखा.भगत सिंह एक ऐसा नाम जिसने अंग्रेजों की अकेले ही नींव हिला दी.15 वर्ष की उम्र में घर छोड़ दिया,घर वालो ने शादी करवाना चाही,भगत ने कहा कि 'इस गुलाम भारत मे मेरी शादी होगी तो मेरी मौत दुल्हन होगी'. उनका बस एक सपना था आज़ादी, उन्होंने इंकलाब जिंदाबाद का नारा असेम्बली में बम फेंकने के बाद दिया.हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन में शामिल हो गए.अंग्रेजों की असेम्बली में बम फेंका जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई.जेल में उनके साथ बुरा बर्ताव किया गया.

हंसते-हंसते फंदे पर झूले भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव

116 दिनों तक वे बिना खाए, पिये रहे.और इस भारत के वीर भगत सिंह को 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी गई.इधर भी अंग्रेजो ने चालाकी से रात में ही भगत सिंह को फांसी दे दी.महज 23 वर्ष की उम्र में भगत सिंह हंसते हुए फांसी के फंदे पर झूल गए.यह देख अंग्रेज के अधिकारी भी सन्न थे कि मौत के करीब है और ऐसे हंस रहा है.भगत सिंह के साथ राजगुरु और सुखदेव भी हंसते हुए फांसी पर झूल गए थे.ये दोनों भी बराबर अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देते रहे. सांडर्स की हत्या में राजगुरु शामिल थे.जिसमें उनकी गिरफ्तारी हुई थी. अंग्रेजी हुकूमत के लिए ये तीनो ही सबसे बड़ी चुनौती बनते रहे.

चंद्रशेखर आज़ाद अंग्रेजों को देते रहे चकमा

देश की आजादी में एक और बड़ा नाम चंद्रशेखर आजाद जिन्हें पंडित जी कहते थे. चंद्र शेखर आजाद जिन्होंने संगठन बनाया था. जिसमें बाद में भगत सिंह भी शामिल हुए. कभी अंग्रेजों के हाथ ना आने वाले चंद्र शेखर आजाद ने आजाद भारत का सपना देखने के लिए अंग्रेजों को खूब छकाया.और कड़ी चुनौतियां दी.गोरों को लाखो चने चबवा दिए.

मिट्टी से किया तिलक और दी खुद कुर्बानी

अंत में उनकी मुखबिरी करने वाले एक शख्स ने ब्रिटिश पुलिस को सूचना दी ,कि पंडित जी इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में मौजूद है.जिसके बाद ब्रिटिश पुलिस ने पार्क में पहुंचकर घेराबंदी की.दोनों ओर से फायरिंग हुई. आजाद जी के पास केवल एक गोली बची थी. ऐसे में उन्होंने अंग्रेजो के हाथों से मरने के बजाय खुद को गोली मारना ज्यादा बेहतर समझा.आज़ाद जी ने धरती माता की मिट्टी को उठाकर माथे से लगाया और खुद को गोली मार ली.देश की स्वतंत्रता में अहम भूमिका निभाई. 

रानी लक्ष्मीबाई का रहा अहम योगदान

देश में कई ऐसी वीरांगनाएं भी रही, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए क्या कुछ नहीं किया. इनमें से एक झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जिन्होंने अंग्रेजों से अपनी शहादत तक युद्ध जारी रखा था और अंग्रेजो को  घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था.ऐसी वीरांगना लक्ष्मीबाई को देश हमेशा याद करता रहता है.स्वतन्त्रता को लेकर इन वीरों का देश की आज़ादी के लिए जो योगदान रहा वह अतुलनीय है.ऐसे वीर शहीदों को हम सभी नमन करते हैं.

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