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Criminal Nagendra Reddy News: IIT मद्रास का होनहार छात्र 'नागेंद्र रेड्डी' कैसे बना खौफ़नाक अपराधी ! ब्रिटेन से लेकर भारत तक पुलिस को देता रहा चकमा

Criminal Nagendra Reddy News: IIT मद्रास का होनहार छात्र 'नागेंद्र रेड्डी' कैसे बना खौफ़नाक अपराधी ! ब्रिटेन से लेकर भारत तक पुलिस को देता रहा चकमा
IIT का छात्र कैसे बना बड़ा अपराधी : Image Credit Original Source

Nagendra Reddy Hindi News

आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के एक साधारण परिवार से आने वाला आईआईटी मद्रास (IIT Madras) का एक होनहार छात्र (Brilliant Student) नागेंद्र रेड्डी (Nagendra Reddy) जिसने बेंगलुरु समेत आईटी कम्पनियों के साथ विदेश में भी नौकरी की. रेड्डी की कहानी बेहद खौफ़नाक और चौकाने (Shocking Story) वाली है. उसे एक परेशानी थी पर्सनेलिटी डिसऑर्डर (Personality Disorder) की, एक कमजोरी थी छोटी बहन कोई घूर दे या बात कर ले तो उससे बर्दास्त नहीं होता उसकी यही आदत उसे क्रूर बना देती थी. लंदन से लेकर कर्नाटक व अन्य राज्यों में पुलिस उसे ढूंढ रही थी. हर बार पुलिस को चकमा देता रहा, आखिरकार 30 वर्ष की उम्र में यह शख्श पुलिस मुठभेड़ (Encounter) में मारा गया.

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आंध्रप्रदेश के नागेंद्र रेड्डी की चौका देने वाली कहानी

आज हम आपको एक ऐसे शख्श के बारे में बताएंगे जिसकी कहानी बड़ी ही खौफ़नाक (Dreaded Story) और दिल को झकझोर देने वाली है. यह कहानी आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के निजामाबाद जिले के रहने वाले मनमोहन रेड्डी के बेटे नागेंद्र रेड्डी (Nagendra Reddy) की है, जो बचपन से ही पढ़ाई में होनहार (Brilliant) था. बस उसकी एक कमजोरी (Weakness) थी वह थी उसकी छोटी बहन, दरअसल नागेंद्र पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Personality Disorder) यानी व्यक्तित्व विकार से पीड़ित था. मतलब खुद में कंट्रोल न होना. वह अपनी बहन को लेकर पजेसिव था. बहन से कोई लड़का बात कर ले तो उसका खून खौल उठता था. उसकी यही आदत ने उसे होनहार से बड़ा क्रिमिनल बना दिया. 

कौन था नागेंद्र रेड्डी, क्या थी उसकी कमजोरी?

हर किसी का सपना होता है आईआईटी मद्रास से इंजीनियरिंग (Engineering From Iit Madras) करने का, वहां तक बेहद होनहार ही लोग पहुंच पाते हैं. इनमें से एक होनहार छात्र आंध्र प्रदेश का नागेंद्र रेड्डी भी था. जिसने आईआईटी मद्रास से वर्ष 2001 में इंजीनियरिंग की. घर में नागेंद्र सबसे होनहार था. उसकी बहन (Sister) उसकी सबसे बड़ी कमजोरी (Weakness) थी. कोई लड़का घूर दे या बात कर ले तो उसका खून खौल उठता था. नागेंद्र के अंदर एक कमी थी या कहें एक बीमारी उसे थी. रेड्डी को व्यक्तित्व विकार यानी पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Personality Disorder) था. जिसकी काउंसिलिंग भी परिजनों ने कराई चिकित्सकों ने कहा ठीक हो जाएगा. लेकिन समय बढ़ा उसकी यह बीमारी भी बढ़ने लगी. 

जुर्म की दुनिया में रखा पहला कदम

खैर आईआईटी मद्रास से इंजीनियरिंग करने के बाद जॉब के बड़े ऑफर आने लगे. पहले रेड्डी ने हैदराबाद से नौकरी की, फिर नौकरी से अलग हटकर खुद की एक फर्म शुरू की. कुछ दिन तो ठीक चला जब रिस्पांस नही मिला तो इसे भी बंद कर दिया और वह 2003 में लंदन (Uk) जाकर नौकरी (Job) करने लगा. लंदन में वह आंध्रा के ही एक शख्श राधा कृष्ण चेपुर (Radha Krishna) के साथ उसकी दोस्ती (Friendship) हो गयी. दोनों में दोस्ती हो गयी फिर साथ रहने लगे. किसी बात पर दोनों में खटास आने लगी.

नागेंद्र के परिजनों ने राधा कृष्ण से उसका हाल जाना. राधा कृष्ण ने कहा कि आप लोग चिंता न करे सब ठीक है. फिर दोनों के बीच ठीक होने लगा. इसी बीच नागेंद्र के परिजनों ने अपनी बेटी से कहा कि राधा कृष्ण ने काफी सहायता की है, उसे धन्यवाद बोलना चाहिए. बेटी ने राधा कृष्ण को पत्र लिखकर धन्यवाद कहा. अब यह बात नागेंद्र को पता चली कि बहन ने पत्र लिखा है, हालांकि राधा कृष्ण ने नागेंद्र को बताया था कि तुम्हारे घर वालो ने पत्र लिखकर भेजा है. नागेंद्र तो पहले से ही बहन को लेकर पजेसिव था. रेड्डी को राधा कृष्ण यानी अपने दोस्त पर शक हुआ उसे लगा कि यह मेरी बहन से नजदीकियां बढ़ाना चाहता है. बस बहन को लेकर पजेसिव नागेंद्र का अपने दोस्त के प्रति गुस्सा बढ़ता गया. यही से उसने जुर्म की दुनिया में कदम रखा.

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सिर धड़ से था अलग हाथों के अंगूठे व उंगलियां कटी थी, निकली दोस्त की लाश

29 अक्टूबर 2004 को एक दिन यूके की स्कॉटलैंड पुलिस को सुनसान जगह पर एक युवक का जला हुआ शव मिला. जिसका सिर अलग था और उसकी उंगलियां कटी हुई थी. शव को देखकर ही लग रहा था किसी ने सबूत मिटाने के लिए सिर और उंगलियां काट दी है. फिलहाल स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस शव की शिनाख्त न कर सकी. हत्या के ठीक एक दिन बाद नागेंद्र रेड्डी फ्लाइट से बेंगलुरु लौट आया. बाद में विदेशी पुलिस को शव के बारे में कुछ जानकारी हुई तो पता चला कि यह शख्श और कोई नहीं बल्कि नागेंद्र रेड्डी का दोस्त राधा कृष्ण था. पुलिस का शक तब और गहराया जब रेड्डी हत्या के एक दिन बाद ही फ़्लाइट से बेंगलुरू निकल गया. विदेशी पुलिस ने बेंगलुरु पुलिस को इस बात की जानकारी दी. लेकिन पुलिस को सफलता हाथ नहीं लगी.

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रेड्डी का जुर्म की दुनिया में दूसरा कदम

फिर 2005 में बेंगलुरु में एक लॉज में एक शव बरामद हुआ जिसका सिर धड़ से अलग था और उंगलियां कटी हुईं थीं. पुलिस शव की शिनाख्त नहीं कर सकी. कुछ दिन पहले ही गुमशुदगी दर्ज हुई थी. जैसे-तैसे पुलिस को उसकी पतलून के जरिये अहम सुराग हाथ लगे. तब पता चला कि यह शव राजेश अर्थम (Rajesh Artham) का है जो सत्यम कम्पनी में कार्यरत था. खास बात यह थी कि  पुलिस को जानकारी हुई थी कि एक वकील उस लॉज में अर्थम से मिलने आया था. दरअसल राजेश अर्थम का मर्डर करने वाला और कोई नहीं बल्कि रेड्डी था. बताते हैं कि उसकी बहन मिलने लॉज आयी थी, वहां राजेश अर्थम भी था. दोनों के बीच बात हुई तो रेड्डी को अच्छा नहीं लगा और उसे भी राधा कृष्ण की तरह रास्ते से हटा दिया. 

खतरनाक कैदियों के साथ जेल में बिताया वक्त, पुलिस को चकमा देकर फरार

जब यह जानकारी स्कॉटलैंड पुलिस को लगी कि ऐसा ही केस यहां भी हुआ था. तब उसने बेंगलुरु पुलिस से बात की और रेड्डी को पकड़ने के लिए कहा. यहां की पुलिस ने रेड्डी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया और उसे पकड़ लिया. जिसके बाद उसे बेंगलुरु की जेल भेजा गया जहां उसने अब सही से जुर्म की दुनिया मे कदम रखा. यही से उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और  यहां मौजूद बड़े कैदियों संग अपना खुद का गिरोह तैयार किया. वर्ष 2006 में रेड्डी ने जेल से भागने का प्लान बनाया उसने बीमारी का बहाना बनाया और अस्पताल में भर्ती हो गया. वहां से पुलिस को चकमा देकर भाग निकला.

तिरुपति पहुँचकर शादी की, फिर बन गया कांट्रेक्ट किलर

फिर रेड्डी तिरुपति (Tirupati) पहुंच गया. यहाँ लेक्चरर बनकर नौकरी की. यहां एक महिला से उसे प्रेम (Love) हो गया उससे शादी (Marriage) कर ली. जुर्म तो उसके नस में भर चुका था. अब रेड्डी लोगों की मौत की सुपारी (Contract Killer) लेने लगा यानी कांट्रेक्ट किलर बन गया. यहां रेड्डी ने एक बिजनेसमैन और युवा जोड़े की हत्या की थी. रेड्डी हर बार जगह बदल देता था जिससे किसी को कोई शक न हो. अबकी बार रेड्डी विशाखापत्तनम (Vishakapatannam) पहुंच गया. यहां उसे डकैती के जुर्म में उसे गिरफ्तार किया गया बाद में रिहा कर दिया गया. यहां के बाद रेड्डी फिर कर्नाटक आ गया और अपने गिरोह के साथ लूट डकैती शुरू कर दी. किसी खास ने मुखबिरी कर दी और पुलिस की गिरफ्त में रेड्डी फिर आया. वर्ष 2009 में उसे बेलगावी की जेल भेजा गया.

अस्पताल से फरार होने के लिए रेड्डी ने डीएआर सिपाही की कर डाली हत्या

अब रेड्डी एक पेशेवर अपराधी बन चुका था उसे पता था अब पीछे तो जा नहीं सकते. उसने जेल में बंद अमीर कैदियों को अपने चंगुल में फंसाया और अपने सहयोगियों की मदद से उनके खातों से रकम निकालने लगे. 10 मई 2009 को रेड्डी अबकी दफा सच मे बीमार हुआ पुलिस ने उसे कड़ी निगरानी में अस्पताल भेजा. वहां डीएआर फोर्स को डिप्लॉय किया. कुछ दिन बाद जब रेड्डी की हालत में सुधार हुआ तो उसने फिर यहां से निकलने का प्लान बनाया उसने डीएआर के कांस्टेबल काम्बले की हत्या कर दी और फरार हो गया. कई दिनों तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा. रेड्डी के घर पर भी दबिश दी गयी उसका पता नहीं चला. 

30 वर्ष की उम्र में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया रेड्डी

वर्ष 1 फरवरी 2011 को पुलिस को मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि रेड्डी बेंगलुरु में हैं. वह एसयूवी कार से राममूर्ति नगर की तरफ आ रहा है. तत्काल सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर उस रोड को ब्लाक किया. पुलिस को देखते ही रेड्डी ने गोलियां चलाना शुरू कर दी. जवाबी फायरिंग में पुलिस की एक गोली नागेंद्र रेड्डी के गर्दन में जा लगी और वह वही ढेर हो गया. रेड्डी की जब मौत हुई तो वह महज 30 साल का था.

7 वर्षो में वह जुर्म की दुनिया मे कहाँ से कहा पहुंच गया, इसकी कहानी बेहद चौकाने वाली और खौफ़नाक है. नागेंद्र के परिजनों ने उसका शव लेने से इनकार कर दिया. फिर पुलिस ने ही अंतिम संस्कार किया. आपको बता दें कि रेड्डी पर हत्या व डकैती के 13 मुकदमे दर्ज थे जो ट्रायल स्टेज पर थे. खास बात यह कि उसे किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया जा सका.

बेशक नागेंद्र रेड्डी एक होनहार छात्र था, मगर पर्सनालिटी डिसऑर्डर ने उसे जुर्म की दुनिया में प्रवेश करा दिया. पुलिस की नजर में लंदन से लेकर कर्नाटक, व अन्य राज्यो में वांछित अपराधी बन गया. फिलहाल रिकॉर्ड में नागेंद्र रेड्डी पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है.

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