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Holi Me Gobar badkulla Balle Ka Mahtva: जानिए होलिका दहन में गोबर के उपलों से बनी मालाओं का क्या है महत्व?

Holi Me Gobar badkulla Balle Ka Mahtva: जानिए होलिका दहन में गोबर के उपलों से बनी मालाओं का क्या है महत्व?
होलिका दहन के समय गोबर के उपलों की माला करें अर्पित, image credit original source

Holi Ke Upale

होलिका दहन (Holika Dahan) में गोबर के उपलों (Cow Dung Cake) और गोबर के गोल-गोल बलकुड़े (Badkulla) यानी बल्लों (Balle) की माला का भी विशेष महत्व है. गाय के गोबर से बने उपले बनाकर होलिका दहन में अर्पित किये जाते है इससे घर का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है. गेंहू (wheat) की बालियों को भी होली की अग्नि में डालने से सुख-समृद्धि बनी रहती है.

होलिका दहन में गाय के गोबर के उपलों का महत्व

हिन्दू धर्म में समस्त पर्वों का विशेष महत्व है. होलिका दहन (Holika Dahan) पर कुछ ऐसी भी चीज़ें है, जिनको जलती हुई होलिका की अग्नि में अर्पित करने से वातावरण (Atmosphere) में परिवर्तन हो जाता है. कहते हैं गाय के गोबर (Cow Dunk) के उपलों (Badkulla) को होलिका अग्नि (Holika Agni) में अर्पित करने से नकरात्मक वातावरण का नाश होता है. वैसे भी हिन्दू धर्म में गौ पूजनीय है, कहते हैं समस्त देवी-देवताओ का वास होता है. गाय के गोबर के उपयोग से उपले यानी बल्ले (Balle) बहुत ही शुभ माना गया है. होली आते ही गाय के गोबर से छोटे-छोटे गोल-गोल बल्ले बनाकर उनकी माला बनाते हैं. इसके बाद इसे होलिका दहन में अर्पित करते हैं.

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होली में गोबर के बलकुड़े की मालाएं, image credit original source

गोबर के बल्लों की माला होलिका में अर्पित की जाती है

इन गोबर से बने बल्लों को बलकुड़े (Balkude) भी कहा जाता है छोटे-छोटे गोल बल्ले बनाकर इसमें बीच में छेद कर दिया जाता है और फिर इसको धूप में सूखने दिया जाता है. होलिका दहन (Holika Dahan) वाले दिन इनकी माला बनाकर होलिका में अर्पित कर देते हैं.

कहते है ऐसा करने से घरों में आ रही परेशानियों से निजात मिलती है. इसका एक वैज्ञानिक महत्व भी निकलकर सामने आया है जैसे बताया गया है कि होली आते ही सर्दी के मौसम जाने लगता है और वातावरण में परिवर्तन होता है जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं, इसलिए गोबर के कंडे या उपलों को होलिका की अग्नि में डालने से वातावरण शुद्ध हो जाता है और समस्त बैक्टीरियाका भी समाप्त होते हैं.

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गेंहू की बालियों का महत्व, image credit original source
गेंहू की बालियों का महत्व

इसके साथ ही गेंहू की बालियों (Ear Of Wheats) का भी बड़ा महत्व है. यानी कहते हैं कि 7 बार गेंहू की इन बालियों की एक-एक बाली 7 बार होलिका की परिक्रमा कर उसे होलिका में डालते जाये. 7 बार बालियों की अग्नि में आहुति दी जाती है. मान्यता है कि पहली फसल का पहला गेहूं, भगवान और पूर्वजों को भेंट करने से पूरे साल घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.

Read More: Gudiya Kab Hai 2026: नाग पंचमी पर उत्तर प्रदेश में क्यों पीटी जाती है गुड़िया? जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त

गेहूं की बालियां अग्नि में अर्पित करने से आपकी आर्थित स्थिति में सुधार होता है. यही नहीं मां लक्ष्मी की कृपा अपने भक्तों पर सदैव बनी रहती है साथ ही घर में सुख-समृ्द्धि का वास होता है. इसके साथ ही 7 बालियों को अपने सिर के ऊपर घुमाकर भी होलिका की अग्नि में डाल दें.

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10 Mar 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

Holi Me Gobar badkulla Balle Ka Mahtva: जानिए होलिका दहन में गोबर के उपलों से बनी मालाओं का क्या है महत्व?

Holi Ke Upale

होलिका दहन में गाय के गोबर के उपलों का महत्व

हिन्दू धर्म में समस्त पर्वों का विशेष महत्व है. होलिका दहन (Holika Dahan) पर कुछ ऐसी भी चीज़ें है, जिनको जलती हुई होलिका की अग्नि में अर्पित करने से वातावरण (Atmosphere) में परिवर्तन हो जाता है. कहते हैं गाय के गोबर (Cow Dunk) के उपलों (Badkulla) को होलिका अग्नि (Holika Agni) में अर्पित करने से नकरात्मक वातावरण का नाश होता है. वैसे भी हिन्दू धर्म में गौ पूजनीय है, कहते हैं समस्त देवी-देवताओ का वास होता है. गाय के गोबर के उपयोग से उपले यानी बल्ले (Balle) बहुत ही शुभ माना गया है. होली आते ही गाय के गोबर से छोटे-छोटे गोल-गोल बल्ले बनाकर उनकी माला बनाते हैं. इसके बाद इसे होलिका दहन में अर्पित करते हैं.

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होली में गोबर के बलकुड़े की मालाएं, image credit original source

गोबर के बल्लों की माला होलिका में अर्पित की जाती है

इन गोबर से बने बल्लों को बलकुड़े (Balkude) भी कहा जाता है छोटे-छोटे गोल बल्ले बनाकर इसमें बीच में छेद कर दिया जाता है और फिर इसको धूप में सूखने दिया जाता है. होलिका दहन (Holika Dahan) वाले दिन इनकी माला बनाकर होलिका में अर्पित कर देते हैं.

कहते है ऐसा करने से घरों में आ रही परेशानियों से निजात मिलती है. इसका एक वैज्ञानिक महत्व भी निकलकर सामने आया है जैसे बताया गया है कि होली आते ही सर्दी के मौसम जाने लगता है और वातावरण में परिवर्तन होता है जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं, इसलिए गोबर के कंडे या उपलों को होलिका की अग्नि में डालने से वातावरण शुद्ध हो जाता है और समस्त बैक्टीरियाका भी समाप्त होते हैं.

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गेंहू की बालियों का महत्व, image credit original source
गेंहू की बालियों का महत्व

इसके साथ ही गेंहू की बालियों (Ear Of Wheats) का भी बड़ा महत्व है. यानी कहते हैं कि 7 बार गेंहू की इन बालियों की एक-एक बाली 7 बार होलिका की परिक्रमा कर उसे होलिका में डालते जाये. 7 बार बालियों की अग्नि में आहुति दी जाती है. मान्यता है कि पहली फसल का पहला गेहूं, भगवान और पूर्वजों को भेंट करने से पूरे साल घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.

गेहूं की बालियां अग्नि में अर्पित करने से आपकी आर्थित स्थिति में सुधार होता है. यही नहीं मां लक्ष्मी की कृपा अपने भक्तों पर सदैव बनी रहती है साथ ही घर में सुख-समृ्द्धि का वास होता है. इसके साथ ही 7 बालियों को अपने सिर के ऊपर घुमाकर भी होलिका की अग्नि में डाल दें.

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