
Sant Ravidas Jayanti: 'मन चंगा तो कठौती में गंगा', जानिए संत रविदास कौन थे ! क्यों मनाई जाती है रविदास जयंती?
संत रविदास जीवन परिचय
हमारा देश संत-महात्माओं और महापुरुषों से जुड़ा हुआ है. एक से एक प्रभावशाली सन्त-महात्माओं के मार्गदर्शन की बदौलत लोगों ने अपने जीवन की नई दिशा चुनी. बिना संतों और गुरुओं के आशीर्वाद से जीवन की कल्पना करना ही बेकार है. एक ऐसे महान संत जो राम और कृष्ण के परम भक्त थे संत रविदास जी (Saint रविदास ji) आज उनकी जयंती है उन्होंने जात-पात और ऊंच-नीच के भेदभाव को दूर कर समाज को एकता सूत्र में बांधने का कार्य किया.
सन्त रविदास जी की आज मनाई जा रही जयंती
शनिवार यानी आज पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ संत रविदास जयंती (Saint Ravidas Jayanti) मनाई जा रही है. जगह-जगह रविदास जी की भव्य शोभा यात्राएं और भजन-कीर्तन गाते हुए उनके अनुयायी शोभायात्राएं निकाल रहे हैं. चलिए आपको इस आर्टिकल के जरिए बताएंगे संत रविदास जयंती कौन थे और उनके जीवन काल से जुड़ी एक कथा व उनका क्या योगदान रहा यह सब आपतक पहुँचाएंगे.
माघ पूर्णिमा को हुआ था सन्त रविदास जी का जन्म

रविदास जी प्रभु की भक्ति में लीन होते गए उनके मन में ही बस अपने आराध्य की छवि बस गई थी फिर आगे उन्होंने अध्यात्म और संत सेवा को माध्यम बनाया. उन्हें संत कबीर दास का शिष्य भी कहा जाता है. रविदास जयंती खास तौर पर सिख धर्म का मुख्य त्योहार माना जाता है और यह पूरे संपूर्ण भारत में मनाया जाता है. व्यवसाय में जो कमाई होती थी उसे सन्त सेवा में लगाया.
उनका ये दोहा बेहद प्रचलित, अलौकिक शक्तियां थीं प्राप्त

एक कथा और चमत्कार है प्रचलित


ब्राह्मण को दर्शन देने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई. लोगों ने इसे पाखंड समझा और उनकी परीक्षा लेना शुरू कर दी लेकिन रविदास जी सारी बातों को सुनते रहे और अपने भजन कीर्तन में लगे रहे. एक बर्तन में वह जल भरकर हमेशा रखते थे. एक दिन गंगा मैया प्रकट हुई और दूसरा सोने का कड़ा भी उन्होंने रविदास जी को भेंट कर दिया. तभी लोगों में उन पर विश्वास बहुत बढ़ गया और उनकी हर तरफ जय जयकार होने लगी.
