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नवरात्रि विशेष:आठवें दिन माँ दुर्गा की महागौरी स्वरूप में होगी पूजा..जाने महत्व और पूजा विधि.!

नवरात्रि विशेष:आठवें दिन माँ दुर्गा की महागौरी स्वरूप में होगी पूजा..जाने महत्व और पूजा विधि.!
फ़ोटो साभार गूगल

शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन माँ दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा होती है।क्या है पूजन का शुभ समय और क्या है महत्व पढ़े युगान्तर प्रवाह की यह रिपोर्ट।

अध्यात्म:आज शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन है।इस दिन माँ दुर्गा अपने भक्तों को महागौरी स्वरूप में दर्शन देती हैं।माता दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है।

ये भी पढ़े-मां के इस स्वरूप की इस विधि विधान से करे पूजा..

भगवान शिव की प्राप्ति के लिए मां गौरी ने कठोर पूजा की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था। जब भगवान शिव ने इन्हें दर्शन दिए तो उनकी कृपा से इनका शरीर अत्यंत गोरा हो गया और इनका नाम गौरी हो गया।

पूजन का शुभ समय..

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पाठ का समय संधि पूजा के समय हो तो बेहतर। अष्टमी, नवमी तिथि एकसाथ होने पर संधि पूजा काल आता है।48 मिनट की संधि होती है। अष्टमी जाती है और नवमी आती है।पूजा की दृष्टि से सबसे अहम होता है संधि काल।ऋतु, दिवा, मुहूर्त की संधि बहुत महत्वपूर्ण होती है।10:30 से 11:18 बजे तक समय है।11:46 बजे से कभी भी पूजा कर सकते हैं।तीसरा समय सूर्यास्त के बाद रात 09:48 बजे तक. साढ़े 9 से 10:18 बजे के बीच का समय संधि समय है।

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क्या है महत्ता..

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माना जाता है कि माता सीता ने श्रीराम की प्राप्ति के लिए मां गौरी की ही पूजा की थी।विवाह संबंधी तमाम समस्याएं इनकी पूजा से हल हो जाती हैं। जिन कन्याओं का विवाह नहीं होता है तो उनके लिए गौरी पूजन विधान किया जाता है।जब भगवती सीता का एक साल तक स्वंयवर होने के बाद भी विवाह नहीं हो रहा था तो जनक जी ने माता सीता को इन्हीं की पूजा करने मंदिर भेजा था।

मां गौरी के लिए मंत्र- मां गौरी को प्रसन्न करने के लिए ‘ऊँ भगवते महागौर्यै नमः’ इसी मंत्र का जाप करना चाहिए।

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