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Auraiya Devkali Temple : जौ के जितना साल में एक बार बढ़ता है शिवलिंग,यमुना किनारे घोर बीहड़ में कभी इस क्षेत्र में था कुख्यात डाकुओं का आतंक

Auraiya Devkali Temple : जौ के जितना साल में एक बार बढ़ता है शिवलिंग,यमुना किनारे घोर बीहड़ में कभी इस क्षेत्र में था कुख्यात डाकुओं का आतंक
औरैया का प्रसिद्ध देवकली मन्दिर

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में यमुना नदी के पास प्राचीन और रहस्यमयी शिव मंदिर है.जिसे देवकली मन्दिर कहा जाता है.कई दशक पहले यहां दुर्गम बीहड़ क्षेत्र था, यहां बड़ी-बड़ी गहरी घाटियों में डाकुओं का आतंक रहा.जिसकी वजह से लोग यहां आने में कतराते थे. इस मंदिर की मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन जौ बराबर शिवलिंग बढ़ता है. कई जनपदों से कावड़िये और भक्त यहां दर्शन के लिए पहुँचते हैं.


हाईलाइट्स

  • औरैया के प्रसिद्ध देवकली मन्दिर का रहस्यमयी इतिहास, कन्नौज के राजा जयचंद की बहन के नाम पर पड़ा मन्दिर
  • शिवरात्रि के दिन जौ बराबर बढ़ता है शिवलिंग,दूर दराज से दर्शन के लिए पहुंचते हैं भक्त
  • कभी यहां दुर्गम बीहड़ और कुख्यात डाकुओं का था आतंक,लोगो में बनी रहती थी दहशत

mysterious Devkali temple in auraiya : देश के कोने-कोने में शिव मंदिरों की अनोखी महिमा है. कई ऐसे रहस्यमयी स्थान है, जहां शिव मंदिर का पौराणिक महत्व कई रहस्यों से भरा हुआ है.कहते हैं कि सावन मास में शिव जी का जप और ध्यान करने से ही भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते है. आज हम औरैया जिले के एक ऐसे शिव मंदिर की बात करेंगे और उसके पौराणिक महत्व के बारे में बताएंगे, यहां शिवलिंग का आकार साल में जौ बराबर बढ़ता है.सावन मास के दिनों में कई जनपदों से भक्तों का तांता लगा रहता है. चलिए इस रहस्यमयीशिव मंदिर के बारे में आपको बताते हैं..

कन्नौज के राजा जयचंद की बहन देवकला के नाम पर पड़ा मन्दिर का नाम

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में यमुना नदी किनारे शेरगढ़ घाट स्थित प्राचीन देवकली मंदिर है. देवकली मंदिर का नाम एक स्त्री के नाम पर पड़ा था. यह मंदिर 11 वीं सदी के कन्नौज के राजा जयचंद की बहन के नाम पर पड़ा था.जयचंद की बहन देवकला की इस शिव मन्दिर में विशेष आस्था थी.उसकी आस्था को देखते हुए इस मंदिर का नाम भी देवकली पड़ गया.

कई दशक पहले इस बीहड़ क्षेत्र में आने से डरते थे लोग

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आज से कई दशक पहले यहां आना किसी खतरे से कम नहीं था. यमुना नदी किनारे घनघोर बीहड़ जंगल हुआ करता था.कुख्यात, दस्यु डाकुओं का आतंक था. यमुना के आसपास और गहरी घाटियों में ये डकैत रहा करते थे. देवकली मन्दिर और पास में ही मंगलाकाली मन्दिर में ये डकैत मन्दिर में झंडा चढ़ाने आते थे.डाकुओं के आतंक की वजह से लोगों को यहां पहुंचना काफी मुश्किल और चुनौती भरा होता था. लेकिन समय बीतता गया और डाकूओ का अंत होता हो गया.अब यहां पुलिस चौकियां है.

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जौ बराबर बढ़ता है शिवलिंग दूर-दूर से दर्शन के लिए पहुंचते हैं भक्त

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सावन के दिनों में यहां पर दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ बढ़ने लगी है.इस मंदिर के आसपास पहले 52 कुएँ हुआ करते थे.जिनमें काफी तो अब नहीं बचे ,लेकिन अभी भी कुछ पुराने कुँए मौजूद है.मंदिर के पुजारी का कहना है कि ऐसी मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन जौ के बराबर शिवलिंग बढ़ता है. शिवलिंग पर जो जल चढ़ता है वह कहा जाता है, आज तक रहस्य बना हुआ है.शिवरात्रि हो या सावन मास यहां भक्तों की भीड़ हमेशा ही बनी रहती है.भक्त बाबा को जल ,बेल पत्र अर्पित कर यहां पूजा करते हैं.यहां दर्शन करने वाले भक्तों की बाबा मनोकामना जरूर पूरी करते हैं. यहां कानपुर ,उरई ,जालौन, इटावा, कन्नौज व अन्य राज्यों से भी भक्त दर्शन के लिए आते हैं.

09 Aug 2023 By Vishal Shukla

Auraiya Devkali Temple : जौ के जितना साल में एक बार बढ़ता है शिवलिंग,यमुना किनारे घोर बीहड़ में कभी इस क्षेत्र में था कुख्यात डाकुओं का आतंक


हाईलाइट्स

  • औरैया के प्रसिद्ध देवकली मन्दिर का रहस्यमयी इतिहास, कन्नौज के राजा जयचंद की बहन के नाम पर पड़ा मन्दिर
  • शिवरात्रि के दिन जौ बराबर बढ़ता है शिवलिंग,दूर दराज से दर्शन के लिए पहुंचते हैं भक्त
  • कभी यहां दुर्गम बीहड़ और कुख्यात डाकुओं का था आतंक,लोगो में बनी रहती थी दहशत

mysterious Devkali temple in auraiya : देश के कोने-कोने में शिव मंदिरों की अनोखी महिमा है. कई ऐसे रहस्यमयी स्थान है, जहां शिव मंदिर का पौराणिक महत्व कई रहस्यों से भरा हुआ है.कहते हैं कि सावन मास में शिव जी का जप और ध्यान करने से ही भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते है. आज हम औरैया जिले के एक ऐसे शिव मंदिर की बात करेंगे और उसके पौराणिक महत्व के बारे में बताएंगे, यहां शिवलिंग का आकार साल में जौ बराबर बढ़ता है.सावन मास के दिनों में कई जनपदों से भक्तों का तांता लगा रहता है. चलिए इस रहस्यमयीशिव मंदिर के बारे में आपको बताते हैं..

कन्नौज के राजा जयचंद की बहन देवकला के नाम पर पड़ा मन्दिर का नाम

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में यमुना नदी किनारे शेरगढ़ घाट स्थित प्राचीन देवकली मंदिर है. देवकली मंदिर का नाम एक स्त्री के नाम पर पड़ा था. यह मंदिर 11 वीं सदी के कन्नौज के राजा जयचंद की बहन के नाम पर पड़ा था.जयचंद की बहन देवकला की इस शिव मन्दिर में विशेष आस्था थी.उसकी आस्था को देखते हुए इस मंदिर का नाम भी देवकली पड़ गया.

कई दशक पहले इस बीहड़ क्षेत्र में आने से डरते थे लोग

आज से कई दशक पहले यहां आना किसी खतरे से कम नहीं था. यमुना नदी किनारे घनघोर बीहड़ जंगल हुआ करता था.कुख्यात, दस्यु डाकुओं का आतंक था. यमुना के आसपास और गहरी घाटियों में ये डकैत रहा करते थे. देवकली मन्दिर और पास में ही मंगलाकाली मन्दिर में ये डकैत मन्दिर में झंडा चढ़ाने आते थे.डाकुओं के आतंक की वजह से लोगों को यहां पहुंचना काफी मुश्किल और चुनौती भरा होता था. लेकिन समय बीतता गया और डाकूओ का अंत होता हो गया.अब यहां पुलिस चौकियां है.

जौ बराबर बढ़ता है शिवलिंग दूर-दूर से दर्शन के लिए पहुंचते हैं भक्त

सावन के दिनों में यहां पर दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ बढ़ने लगी है.इस मंदिर के आसपास पहले 52 कुएँ हुआ करते थे.जिनमें काफी तो अब नहीं बचे ,लेकिन अभी भी कुछ पुराने कुँए मौजूद है.मंदिर के पुजारी का कहना है कि ऐसी मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन जौ के बराबर शिवलिंग बढ़ता है. शिवलिंग पर जो जल चढ़ता है वह कहा जाता है, आज तक रहस्य बना हुआ है.शिवरात्रि हो या सावन मास यहां भक्तों की भीड़ हमेशा ही बनी रहती है.भक्त बाबा को जल ,बेल पत्र अर्पित कर यहां पूजा करते हैं.यहां दर्शन करने वाले भक्तों की बाबा मनोकामना जरूर पूरी करते हैं. यहां कानपुर ,उरई ,जालौन, इटावा, कन्नौज व अन्य राज्यों से भी भक्त दर्शन के लिए आते हैं.

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