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Nageshwar Jyotirling Temple : नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही समस्त पापों का हो जाता है अंत, जानिए पौराणिक महत्व

Nageshwar Jyotirling Temple : नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही समस्त पापों का हो जाता है अंत, जानिए पौराणिक महत्व
गुजरात के द्वारका से 16 किलोमीटर दूर है नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

हे शम्भू बाबा, मेरे भोलेनाथ तीनों लोक में तू ही तू ,श्रद्धा सुमन मन बेल पत्री जीवन सब अर्पण कर दूं.हे शिव शंकर तू ही जग का स्वामी है. सावन के दिनों में शिवभक्त शिवालयों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. आज हम बात करेंगे गुजरात के द्वारका से 16 किलोमीटर दूर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में..तो चलिए शुरू करते हैं.


हाईलाइट्स

  • गुजरात के द्वारका से 16 किलोमीटर दूर स्थित है नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
  • दारूका नाम की राक्षसी से जुड़ा है पौराणिक महत्व,सर्प दोष से मिलती है मुक्ति
  • सावन के दिनों में भक्तों का उमड़ता है सैलाब, दर्शन मात्र से होता है समस्त पापों का नाश

Magnificent glory of Nageshwar Jyotirlinga : श्रावण मास में शिवभक्त समस्त शिवालयों में बोल बम बम ,हर हर महादेव के जयकारों के साथ पहुंच रहे हैं.इस बार दो महीने का सावन है.भक्तों में शिव जी के दर्शन को लेकर उल्लास हर तरफ देखने बनता है.भक्त बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए भी सावन मास में निकले हुए हैं. आज हम आपको गुजरात के द्वारका से करीब 16 किलोमीटर दूर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के पौराणिक महत्त्व के बारे में बताएंगे और इस ज्योतिर्लिंग के पीछे क्या कथा प्रचलित है यह भी आपको विस्तारपूर्वक बताएंगे..

12 ज्योतिर्लिंग में से एक नागेश्वर ज्योतिर्लिंग अद्भुत महिमा

देश के कोने-कोने में प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक गुजरात के नागेश्वर ज्योतिर्लिंग हैं.यह ज्योतिर्लिंग द्वारका से 16 किलोमीटर दूर बाहरी क्षेत्र में स्थित है.नागेश्वर जिन्हें नागों के देवता कहा जाता है,नागों के स्वामी शिव शंकर.मान्यता है यहां दर्शन करने से सर्प दोष व समस्त पापों का अंत हो जाता है. श्रावण मास में यहां पर भक्तों का ताता लगा रहता है.

दारूका राक्षसी से जुड़ा है पौराणिक महत्व,कथा है प्रचलित

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इस ज्योतिर्लिंग के पौराणिक महत्व की बात करें तो एक कथा प्रचलित है.दारूका नाम की राक्षसी थी.वह माता पार्वती की भक्त थी. उसने कठिन तपस्या कर माता को प्रसन्न किया और वरदान मांगा.दारूका वन में समस्त राक्षस को जाने का वरदान मांगा.उस वन में दैवीय,चमत्कारी औषधीय थीं. माता के वरदान देते ही दारूका ने वन में उत्पात मचाना शुरू कर दिया और कई लोगों को बंदी बना लिया.

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सुप्रिया नाम की शिवभक्त ने की शिवजी की आराधना,राक्षसों का किया अंत

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सुप्रिया नाम की शिव भक्त थी, शिवजी की उसमें आस्था अटूट थी. दारूका ने उसे भी बंदी बना लिया. लेकिन उसकी आस्था कम नहीं हुई.बंदी रहते सुप्रिया ने शिवजी की कठोर तपस्या शुरू कर दी.और इन दैत्यों के अंत का आग्रह किया.तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उसे दर्शन दिए. जिसके बाद शिव जी ने दारूका समेत समस्त राक्षसों का अंत कर दिया. सुप्रिया ने शिवजी को यही रहने का आग्रह भी किया. भक्त की बात को स्वीकार करते हुए शिवजी नागेश्वर के रूप में वही विराजमान हो गए.तभी से यह ज्योतिर्लिंग नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाने लगा.

80 फिट ऊंची शिवजी की मूर्ति आकर्षण का केंद्र,ऐसे पहुंचे 

नागेश्वर मन्दिर के बाहर एक 80 फिट ऊंची विशाल शिव जी की मूर्ति आकर्षण का केंद्र है.मन्दिर सुबह 6 बजे खुलता है रात 9 बजे पट बंद होते हैं. 

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंचने के लिए आपको गुजरात के जामनगर एयरपोर्ट उतरना होगा,ट्रेनें तो द्वारका तक जाती हैं और यहां से नागेश्वर मन्दिर 16 किलोमीटर ही रह जाता है.आप द्वारका रेलवे स्टेशन से टैक्सी या बस भी ले सकते हैं.अपने साधन से भी जा सकते हैं.रुकने के लिए कई धर्मशाला ,होटल और लॉज भी है.यहां घूमने के लिए श्री द्वारकाधीश मन्दिर,प्रकाश स्तम्भ,द्वारका बीच,रुक्मणि देवी मंदिर,श्री स्वामीनारायण मन्दिर, सुदामा सेतु व अन्य कई जगह हैं.

23 Jul 2023 By Vishal Shukla

Nageshwar Jyotirling Temple : नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही समस्त पापों का हो जाता है अंत, जानिए पौराणिक महत्व


हाईलाइट्स

  • गुजरात के द्वारका से 16 किलोमीटर दूर स्थित है नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
  • दारूका नाम की राक्षसी से जुड़ा है पौराणिक महत्व,सर्प दोष से मिलती है मुक्ति
  • सावन के दिनों में भक्तों का उमड़ता है सैलाब, दर्शन मात्र से होता है समस्त पापों का नाश

Magnificent glory of Nageshwar Jyotirlinga : श्रावण मास में शिवभक्त समस्त शिवालयों में बोल बम बम ,हर हर महादेव के जयकारों के साथ पहुंच रहे हैं.इस बार दो महीने का सावन है.भक्तों में शिव जी के दर्शन को लेकर उल्लास हर तरफ देखने बनता है.भक्त बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए भी सावन मास में निकले हुए हैं. आज हम आपको गुजरात के द्वारका से करीब 16 किलोमीटर दूर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के पौराणिक महत्त्व के बारे में बताएंगे और इस ज्योतिर्लिंग के पीछे क्या कथा प्रचलित है यह भी आपको विस्तारपूर्वक बताएंगे..

12 ज्योतिर्लिंग में से एक नागेश्वर ज्योतिर्लिंग अद्भुत महिमा

देश के कोने-कोने में प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक गुजरात के नागेश्वर ज्योतिर्लिंग हैं.यह ज्योतिर्लिंग द्वारका से 16 किलोमीटर दूर बाहरी क्षेत्र में स्थित है.नागेश्वर जिन्हें नागों के देवता कहा जाता है,नागों के स्वामी शिव शंकर.मान्यता है यहां दर्शन करने से सर्प दोष व समस्त पापों का अंत हो जाता है. श्रावण मास में यहां पर भक्तों का ताता लगा रहता है.

दारूका राक्षसी से जुड़ा है पौराणिक महत्व,कथा है प्रचलित

इस ज्योतिर्लिंग के पौराणिक महत्व की बात करें तो एक कथा प्रचलित है.दारूका नाम की राक्षसी थी.वह माता पार्वती की भक्त थी. उसने कठिन तपस्या कर माता को प्रसन्न किया और वरदान मांगा.दारूका वन में समस्त राक्षस को जाने का वरदान मांगा.उस वन में दैवीय,चमत्कारी औषधीय थीं. माता के वरदान देते ही दारूका ने वन में उत्पात मचाना शुरू कर दिया और कई लोगों को बंदी बना लिया.

सुप्रिया नाम की शिवभक्त ने की शिवजी की आराधना,राक्षसों का किया अंत

सुप्रिया नाम की शिव भक्त थी, शिवजी की उसमें आस्था अटूट थी. दारूका ने उसे भी बंदी बना लिया. लेकिन उसकी आस्था कम नहीं हुई.बंदी रहते सुप्रिया ने शिवजी की कठोर तपस्या शुरू कर दी.और इन दैत्यों के अंत का आग्रह किया.तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उसे दर्शन दिए. जिसके बाद शिव जी ने दारूका समेत समस्त राक्षसों का अंत कर दिया. सुप्रिया ने शिवजी को यही रहने का आग्रह भी किया. भक्त की बात को स्वीकार करते हुए शिवजी नागेश्वर के रूप में वही विराजमान हो गए.तभी से यह ज्योतिर्लिंग नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाने लगा.

80 फिट ऊंची शिवजी की मूर्ति आकर्षण का केंद्र,ऐसे पहुंचे 

नागेश्वर मन्दिर के बाहर एक 80 फिट ऊंची विशाल शिव जी की मूर्ति आकर्षण का केंद्र है.मन्दिर सुबह 6 बजे खुलता है रात 9 बजे पट बंद होते हैं. 

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंचने के लिए आपको गुजरात के जामनगर एयरपोर्ट उतरना होगा,ट्रेनें तो द्वारका तक जाती हैं और यहां से नागेश्वर मन्दिर 16 किलोमीटर ही रह जाता है.आप द्वारका रेलवे स्टेशन से टैक्सी या बस भी ले सकते हैं.अपने साधन से भी जा सकते हैं.रुकने के लिए कई धर्मशाला ,होटल और लॉज भी है.यहां घूमने के लिए श्री द्वारकाधीश मन्दिर,प्रकाश स्तम्भ,द्वारका बीच,रुक्मणि देवी मंदिर,श्री स्वामीनारायण मन्दिर, सुदामा सेतु व अन्य कई जगह हैं.

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