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फ़तेहपुर:बेहटा बवाल:गोकसी करने वाला मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में..1987 में हुई साम्प्रदायिक हिंसा से जुड़ा है ताल्लुक.!

फ़तेहपुर:बेहटा बवाल:गोकसी करने वाला मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में..1987 में हुई साम्प्रदायिक हिंसा से जुड़ा है ताल्लुक.!
फोटो-युगान्तर प्रवाह

फ़तेहपुर में पिछले चार दिन पहले हुई गोकसी का मुख्य आरोपी शुक्रवार को पुलिस की गिरफ्त में चढ़ गया..आरोपी ने जो वज़ह पुलिस को बताई उसको सुनकर आप हैरान हो जाएंगें..पढ़े युगान्तर प्रवाह की एक रिपोर्ट...

फ़तेहपुर:बेहटा गांव में सोमवार को हुई गोकसी की घटना के बाद दूसरे दिन गांव का मौहाल बिगड़ गया।और कुछ अराजकतत्वों ने मदरसे में प्रतिबंधित मांस मिलने के बाद वहां आगजनी और तोड़फोड़ कर दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह हालात को काबू में किया।

यह भी पढ़े:फतेहपुर:बेहटा बवाल-किसने लिखी बवाल की पटकथा.?ढाई दशक बाद फ़िर से बेहटा में साम्प्रदायिक हिंसा फैलाने की कोशिश.!

घटना के बाद देखते ही देखते पूरा गांव और आसपास का क्षेत्र छावनी में तब्दील हो गया। पुलिस ने काफी खोजबीन के बाद उस घटना से जुड़े दो आरोपी अलताफ और उमर अली को गिरफ्तार कर लिया था लेकिन मुख्य आरोपी घटना के बाद से ही गायब हो गया था। बताया जा रहा है कि पुलिस ने मुश्ताक को कानपुर देहात से गिरफ्तार कर लिया है लेकिन लिखापढ़ी में उसे जोनिहा चौकी क्षेत्र दर्शाया गया है।

मुख्य आरोपी ने बताई गोकसी की वज़ह...

मुश्ताक़ ने पुलिस को बताया कि उसको मांस खाने की इच्छा हो रही थी इसलिए उसने अपने साथियों अलताफ औऱ उमर के साथ मिलकर रविवार रात करीब दो बजे अपनी पालतू गाय को ही काट डाला और तीनों लोगों ने मिलकर अपना-अपना हिस्सा बांट लिया। और अवशेषों को तालाब किनारे फेंक दिया।

 यह भी पढ़े:फतेहपुर:दर्दनाक मुक़ाम पर ख़त्म हो गई आज एक और प्रेम कहानी!दोंनो के मुँह से झाग निकल रहा था.!

लेकिन जब दूसरे दिन गांव वालों को जब शंका हुई तो डर के मारे मांस को मदरसे में छिपा दिया।और वहां से भाग कर कानपुर देहात के गजनेर में अपने रिश्तेदार के यहां रहा।

1987 में हुई साम्प्रदायिक हिंसा से जुड़े हैं ताल्लुक...

ग्रामीणों ने बताया कि 1987 में मुश्ताक़ के पिता मुन्नू शाह ने भी गोकसी की थी जिसके बाद पूरे गांव सहित आसपास के क्षेत्र में साम्प्रदायिक हिंसा हुई थी और लगभग 6 महीने तक पूरा गांव छावनी में तब्दील था। और आज उसके बेटे ने भी यही किया जिसका खामियाजा पूरा गांव भुगत रहा है।

सालों बाद इसी घटना में लगी उस पीएसी के जवान की ड्यूटी...

1987 में हुए बवाल के इतने सालों बाद उसी जवान की ड्यूटी इसी गांव में फिर उसी वज़ह से लगाई गई।नाम न बताने पर उसने कहा कि सन 1987 में जब लगभग 6 माह तक यहां पीएसी रही थी तो वो एक माह तक इसी गांव में रहे।

19 Jul 2019 By Vishwa Deepak Awasthi

फ़तेहपुर:बेहटा बवाल:गोकसी करने वाला मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में..1987 में हुई साम्प्रदायिक हिंसा से जुड़ा है ताल्लुक.!

फ़तेहपुर:बेहटा गांव में सोमवार को हुई गोकसी की घटना के बाद दूसरे दिन गांव का मौहाल बिगड़ गया।और कुछ अराजकतत्वों ने मदरसे में प्रतिबंधित मांस मिलने के बाद वहां आगजनी और तोड़फोड़ कर दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह हालात को काबू में किया।

यह भी पढ़े:फतेहपुर:बेहटा बवाल-किसने लिखी बवाल की पटकथा.?ढाई दशक बाद फ़िर से बेहटा में साम्प्रदायिक हिंसा फैलाने की कोशिश.!

घटना के बाद देखते ही देखते पूरा गांव और आसपास का क्षेत्र छावनी में तब्दील हो गया। पुलिस ने काफी खोजबीन के बाद उस घटना से जुड़े दो आरोपी अलताफ और उमर अली को गिरफ्तार कर लिया था लेकिन मुख्य आरोपी घटना के बाद से ही गायब हो गया था। बताया जा रहा है कि पुलिस ने मुश्ताक को कानपुर देहात से गिरफ्तार कर लिया है लेकिन लिखापढ़ी में उसे जोनिहा चौकी क्षेत्र दर्शाया गया है।

मुख्य आरोपी ने बताई गोकसी की वज़ह...

मुश्ताक़ ने पुलिस को बताया कि उसको मांस खाने की इच्छा हो रही थी इसलिए उसने अपने साथियों अलताफ औऱ उमर के साथ मिलकर रविवार रात करीब दो बजे अपनी पालतू गाय को ही काट डाला और तीनों लोगों ने मिलकर अपना-अपना हिस्सा बांट लिया। और अवशेषों को तालाब किनारे फेंक दिया।

 यह भी पढ़े:फतेहपुर:दर्दनाक मुक़ाम पर ख़त्म हो गई आज एक और प्रेम कहानी!दोंनो के मुँह से झाग निकल रहा था.!

लेकिन जब दूसरे दिन गांव वालों को जब शंका हुई तो डर के मारे मांस को मदरसे में छिपा दिया।और वहां से भाग कर कानपुर देहात के गजनेर में अपने रिश्तेदार के यहां रहा।

1987 में हुई साम्प्रदायिक हिंसा से जुड़े हैं ताल्लुक...

ग्रामीणों ने बताया कि 1987 में मुश्ताक़ के पिता मुन्नू शाह ने भी गोकसी की थी जिसके बाद पूरे गांव सहित आसपास के क्षेत्र में साम्प्रदायिक हिंसा हुई थी और लगभग 6 महीने तक पूरा गांव छावनी में तब्दील था। और आज उसके बेटे ने भी यही किया जिसका खामियाजा पूरा गांव भुगत रहा है।

सालों बाद इसी घटना में लगी उस पीएसी के जवान की ड्यूटी...

1987 में हुए बवाल के इतने सालों बाद उसी जवान की ड्यूटी इसी गांव में फिर उसी वज़ह से लगाई गई।नाम न बताने पर उसने कहा कि सन 1987 में जब लगभग 6 माह तक यहां पीएसी रही थी तो वो एक माह तक इसी गांव में रहे।

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