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Adhik Maas 2023 : आने वाले साल 2023 में 12 नहीं, होंगें 13 महीने.!

Adhik Maas 2023 : आने वाले साल 2023 में 12 नहीं, होंगें 13 महीने.!
Adhik Maas 2023

साल 2023 में 12 महीने 13 महीने होंगें पढ़कर थोड़ा हैरान हैं न आप, लेकिन यह सच है, दरअसल हिंदी कलेंडर के अनुसार 2023 में अधिक मास होने के चलते 13 महीनों का वर्ष होगा.

Adhik Maas 2023 : आने वाला वर्ष 2023 कई मायनों में बेहद ख़ास माना जा रहा है. हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल 12 नहीं कुल 13 महीने होंगें. दो सावन माह होंगें.इस अधिक माह को पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है.

अधिक मास होने के चलते इस साल होने वाले सभी व्रत त्योहार पिछले वर्षों की तुलना में 15-20 दिनों की देरी से होंगें.साल 2023 में अधिकमास 18 जुलाई से प्रारंभ होगा और 16 अगस्त 2023 तक रहेगा. इस महीने को भगवान विष्णु की भक्ति का मास माना जाता है. चूंकि ये महीना श्रावण मास के साथ लग रहा है, इसलिए भगवान शिव की उपासना करने वालों को भी उनकी उपासना के लिए ज्यादा समय मिलेगा.

हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है, जिसे अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम कहते हैं. सूर्य वर्ष 365 दिन और 6 घंटे का होता है. वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है. दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है. हर साल घटने वाले इन 11 दिनों को जोड़ा जाए तो ये एक माह के बराबर होते हैं. इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अधिकमास कहते हैं.

वर्जित रहते हैं शुभ कार्य..

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अधिक मास या मलमास में शुभ कार्य जैसे शादी विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य वर्जित रहते हैं. इस महीने किसी नए काम के शुरुआत करने की भी मनाही रहती है.

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18 Dec 2022 By Shubham Mishra

Adhik Maas 2023 : आने वाले साल 2023 में 12 नहीं, होंगें 13 महीने.!

Adhik Maas 2023 : आने वाला वर्ष 2023 कई मायनों में बेहद ख़ास माना जा रहा है. हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल 12 नहीं कुल 13 महीने होंगें. दो सावन माह होंगें.इस अधिक माह को पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है.

अधिक मास होने के चलते इस साल होने वाले सभी व्रत त्योहार पिछले वर्षों की तुलना में 15-20 दिनों की देरी से होंगें.साल 2023 में अधिकमास 18 जुलाई से प्रारंभ होगा और 16 अगस्त 2023 तक रहेगा. इस महीने को भगवान विष्णु की भक्ति का मास माना जाता है. चूंकि ये महीना श्रावण मास के साथ लग रहा है, इसलिए भगवान शिव की उपासना करने वालों को भी उनकी उपासना के लिए ज्यादा समय मिलेगा.

हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है, जिसे अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम कहते हैं. सूर्य वर्ष 365 दिन और 6 घंटे का होता है. वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है. दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है. हर साल घटने वाले इन 11 दिनों को जोड़ा जाए तो ये एक माह के बराबर होते हैं. इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अधिकमास कहते हैं.

वर्जित रहते हैं शुभ कार्य..

अधिक मास या मलमास में शुभ कार्य जैसे शादी विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य वर्जित रहते हैं. इस महीने किसी नए काम के शुरुआत करने की भी मनाही रहती है.

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