
वाराणसी:तेज़ बहादुर का नामांकन रद्द होने के पीछे ये वजह बताई जा रही है.लेक़िन तेज़ बहादुर इसे मोदी की तानाशाही बता रहे हैं!
बनारस लोकसभा सीट से गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर पर्चा दाख़िल करने वाले जवान तेज़ बहादुर का नामांकन रद्द हो गया है..पढ़े युगान्तर प्रवाह की इस रिपोर्ट में पूरी खबर।
वाराणसी: मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान कर दोबारा चर्चा में आए बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर का नामांकन जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा रद्द कर दिया गया है।

आपको बता दे कि पहले तेज बहादुर ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा भरा था इसके बाद सपा बसपा गठबंधन ने शालिनी यादव का टिकट काट तेजबहादुर को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था।हालांकि गठबंधन की तरफ़ से शालनी यादव ने भी अपना नामांकन कर दिया था जिससे अब तेज बहादुर का नामांकन रद्द होने के बाद वह फ़िर से गठबंधन की उम्मीदवार हो गई हैं।



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नामांकन रद्द कर की गई तानाशाही-तेजबहादुर...
नामांकन रद्द होने के बाद सपा प्रत्याशी तेज बहादुर यादव ने कहा, 'मेरा नामांकन रद्द हुआ, जो पूरी तरह से गलत था।प्रशासन का तर्क है कि जो सबूत मांगा गया था, वह आप पेश नहीं कर पाए, जबकि हमसे जो सबूत मांगे गए थे, वह शाम को 6.15 बजे मांगे गए थे, मैंने कहा कि मैं कोई अंबानी या अडाणी नहीं हूं, जो चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली जाऊंगा, लेकिन फिर भी मैंने कोशिश की और हमारे सबूत भी आ गए, लेकिन मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया, जो कि तानाशाही रवैया है'उन्होंने और उनके वकील ने यह भी कहा कि वह नामांकन रद्द होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।
