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फ़तेहपुर:गांव में समस्याओं को लेकर फ़फ़क कर रो पड़ी बुजुर्ग महिला कहा 'हमको देखने कोई नहीं आता है।'

फ़तेहपुर:गांव में समस्याओं को लेकर फ़फ़क कर रो पड़ी बुजुर्ग महिला कहा 'हमको देखने कोई नहीं आता है।'
फोटो-युगान्तर प्रवाह

हम आपको ग्राउंड रिपोर्टिंग के ज़रिए मौजूदा सरकार के विकास मॉडल की हकीकत से रूबरू करा रहे हैं..आज हम पहुंचे एक ऐसे गाँव जहाँ चिराग़ तले ही अंधेरा है..और आज़ादी के इतने बरस बाद भी न तो वहाँ बिजली पहुंची है और न ही पानी की समुचित व्यवस्था है..पढ़े युगान्तर प्रवाह की एक्सक्लुसिव रिपोर्ट...

फ़तेहपुर: बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की जयंती पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाई गई।अंबेडकर के नाम का प्रयोग राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए पार्टियां समय समय पर करती हैं और मौजूदा समय मे भाजपा भी अंबेडकर के प्रति आस्था वान दिखने का प्रयास कर रही है। पर अम्बेडकर जिन दलितों, पिछडो और शोषित वर्ग के उत्थान के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहे।आज़ादी के 70 बरस बाद आज भी दलित आबादी वाले गावों में बिजली,पानी,स्वास्थ्य, शिक्षा सहित मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई है।जिसके चलते सरकारों और खासकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति लोगों का गुस्सा बना हुआ है।

लोकसभा चुनावों के मद्देनजर युगान्तर प्रवाह की टीम सीधे जनता के बीच पहुंचकर उनकी बुनियादी समस्याओं को उठाने का प्रयास कर रही है।आज हमारी टीम पहुंची एक ऐसे गाँव जो शहर क्षेत्र से जुड़ा होने के बावजूद अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।

ग्राउंड रिपोर्ट-1: सरांय मीना

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फतेहपुर नगर पालिका के अंर्तगत आने वाले गाँव सराय मीना में अब तक बिजली नहीं पहुंच सकी है क़रीब 100 घरों की बस्ती वाले इस गाँव में ज्यादातर घर दलितों के हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि कई नेता आए मौजूदा सांसद साध्वी निरंजन ज्योति भी गाँव आईं और वादा किया कि जल्द से जल्द इस गाँव मे बिजली की व्यवस्था कर दी जाएगी पर आज तक नहीं हो पाई है।मोदी सरकार से नाराज़ क़रीब 70 बरस के दिव्यांग इंदल ने कहा कि हम मोदी से बहुत ही ज्यादा नाराज़ है और यहाँ तक कह दिया कि मोदी हमारा दुश्मन है। इंदल ने बताया कि उसे कई दशकों से मिल रही विकलांग पेंशन को भी अब बन्द कर दिया गया है जिससे वह अब औऱ भी ज्यादा परेशान है।इंदल ने कहा कि न तो सरकारी आवास मिला है और न ही शौचालय और जो पेंशन मिल भी रही थी उसको अब सरकार ने बन्द कर दिया है।आपको बता दे कि इंदल का दाहिना हाँथ पूरी तरह से ख़राब है जिसके चलते वह कुछ काम भी नहीं कर पाता है।

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इसी तरह उसी गाँव की रहने वाली एक बुजुर्ग महिला कैमरे के सामने अपने आप को रोक न सकी और खूब फूट फूट कर रोई उस बुजुर्ग महिला ने बताया कि उसके पति और बेटा अब इस दुनियां में नहीं रहे खेती भी नही है पेंशन और आवास के लिए ऑफिसों के चक्कर काटते काटते थक चुकीं हूँ लेक़िन कोई सुनवाई नहीं हुई है गाँव वालों से मांगकर खाना खा किसी तरह पेट भर रही हूँ।

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इसी गांव के ही एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि शहर से जुड़ा हुआ है गाँव नगरपालिका के अंतर्गत आता है फिर भी गाँव तक आने के लिए कोई ठीक तरह का रास्ता भी नहीं है।और कोई भी जनप्रतिनिधि इस गाँव की सुधि नहीं लेता।

ग्राउंड रिपोर्ट-2:अब्दुल क़ासिमपुर

हमारी टीम फतेहपुर नगर पालिका के अंतर्गत ही आने वाले एक दूसरे गाँव अब्दुल क़ासिमपुर पहुंची।आपको बता दे कि यह गाँव भी शहर से जुड़ा हुआ है। क़रीब 1500 की आबादी वाले इस गाँव मे भी ज्यादातर घर दलितों और अति पिछड़ी जातियों के हैं।पर अब तक इस गाँव मे भी बिजली के दर्शन गाँव वालों को नहीं हो सके हैं।ग्रामीणों ने बताया कि क़रीब 6 माह पहले गाँव मे मौजूदा सांसद साध्वी निरंजन ज्योति आई हुई थी और कहा था कि चुनाव के पहले गाँव मे बिजली पहुंच जाएगी पर ऐसा नहीं हुआ।ग्रामीणों के अन्दर मौजूदा सांसद के प्रति खूब गुस्सा दिखा और मोदी सरकार के कामकाज से भी ग्रामीण खुश नहीं दिखे।

14 Apr 2019 By Vishwa Deepak Awasthi

फ़तेहपुर:गांव में समस्याओं को लेकर फ़फ़क कर रो पड़ी बुजुर्ग महिला कहा 'हमको देखने कोई नहीं आता है।'

फ़तेहपुर: बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की जयंती पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाई गई।अंबेडकर के नाम का प्रयोग राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए पार्टियां समय समय पर करती हैं और मौजूदा समय मे भाजपा भी अंबेडकर के प्रति आस्था वान दिखने का प्रयास कर रही है। पर अम्बेडकर जिन दलितों, पिछडो और शोषित वर्ग के उत्थान के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहे।आज़ादी के 70 बरस बाद आज भी दलित आबादी वाले गावों में बिजली,पानी,स्वास्थ्य, शिक्षा सहित मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई है।जिसके चलते सरकारों और खासकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति लोगों का गुस्सा बना हुआ है।

लोकसभा चुनावों के मद्देनजर युगान्तर प्रवाह की टीम सीधे जनता के बीच पहुंचकर उनकी बुनियादी समस्याओं को उठाने का प्रयास कर रही है।आज हमारी टीम पहुंची एक ऐसे गाँव जो शहर क्षेत्र से जुड़ा होने के बावजूद अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।

ग्राउंड रिपोर्ट-1: सरांय मीना

फतेहपुर नगर पालिका के अंर्तगत आने वाले गाँव सराय मीना में अब तक बिजली नहीं पहुंच सकी है क़रीब 100 घरों की बस्ती वाले इस गाँव में ज्यादातर घर दलितों के हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि कई नेता आए मौजूदा सांसद साध्वी निरंजन ज्योति भी गाँव आईं और वादा किया कि जल्द से जल्द इस गाँव मे बिजली की व्यवस्था कर दी जाएगी पर आज तक नहीं हो पाई है।मोदी सरकार से नाराज़ क़रीब 70 बरस के दिव्यांग इंदल ने कहा कि हम मोदी से बहुत ही ज्यादा नाराज़ है और यहाँ तक कह दिया कि मोदी हमारा दुश्मन है। इंदल ने बताया कि उसे कई दशकों से मिल रही विकलांग पेंशन को भी अब बन्द कर दिया गया है जिससे वह अब औऱ भी ज्यादा परेशान है।इंदल ने कहा कि न तो सरकारी आवास मिला है और न ही शौचालय और जो पेंशन मिल भी रही थी उसको अब सरकार ने बन्द कर दिया है।आपको बता दे कि इंदल का दाहिना हाँथ पूरी तरह से ख़राब है जिसके चलते वह कुछ काम भी नहीं कर पाता है।

इसी तरह उसी गाँव की रहने वाली एक बुजुर्ग महिला कैमरे के सामने अपने आप को रोक न सकी और खूब फूट फूट कर रोई उस बुजुर्ग महिला ने बताया कि उसके पति और बेटा अब इस दुनियां में नहीं रहे खेती भी नही है पेंशन और आवास के लिए ऑफिसों के चक्कर काटते काटते थक चुकीं हूँ लेक़िन कोई सुनवाई नहीं हुई है गाँव वालों से मांगकर खाना खा किसी तरह पेट भर रही हूँ।

इसी गांव के ही एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि शहर से जुड़ा हुआ है गाँव नगरपालिका के अंतर्गत आता है फिर भी गाँव तक आने के लिए कोई ठीक तरह का रास्ता भी नहीं है।और कोई भी जनप्रतिनिधि इस गाँव की सुधि नहीं लेता।

ग्राउंड रिपोर्ट-2:अब्दुल क़ासिमपुर

हमारी टीम फतेहपुर नगर पालिका के अंतर्गत ही आने वाले एक दूसरे गाँव अब्दुल क़ासिमपुर पहुंची।आपको बता दे कि यह गाँव भी शहर से जुड़ा हुआ है। क़रीब 1500 की आबादी वाले इस गाँव मे भी ज्यादातर घर दलितों और अति पिछड़ी जातियों के हैं।पर अब तक इस गाँव मे भी बिजली के दर्शन गाँव वालों को नहीं हो सके हैं।ग्रामीणों ने बताया कि क़रीब 6 माह पहले गाँव मे मौजूदा सांसद साध्वी निरंजन ज्योति आई हुई थी और कहा था कि चुनाव के पहले गाँव मे बिजली पहुंच जाएगी पर ऐसा नहीं हुआ।ग्रामीणों के अन्दर मौजूदा सांसद के प्रति खूब गुस्सा दिखा और मोदी सरकार के कामकाज से भी ग्रामीण खुश नहीं दिखे।

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