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santan saptami kab Hai:ऋषि पंचमी के बाद होता है संतान सप्तमी का व्रत जानें सही डेट मुहूर्त औऱ विधि

santan saptami kab Hai:ऋषि पंचमी के बाद होता है संतान सप्तमी का व्रत जानें सही डेट मुहूर्त औऱ विधि
santan saptami kab Hai

ऋषि पंचमी (rishi panchmi) के दो दिन बाद बच्चों की लंबी उम्र के लिए माताओं द्वारा किया जाने वाला संतान सप्तमी (santan saptami 2022 Date) का व्रत कल यानि 3 सितंबर को मनाया जाएगा.

Santan Saptami 2022: संतान सप्तमी का व्रत हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व रखता है.यह व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है.इस वर्ष ये विशेष दिन 3 सितंबर 2022 को मनाया जाएगा.इस संतान सप्तमी (Santan Saptami 2022 Date) को ललिता सप्तमी, अपराजिता सप्तमी और मुक्ताभरण सप्तमी औऱ संतान साते के रूप में भी मनाया जाता है.

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 2 सितंबर, शुक्रवार को दोपहर 12:28 से शुरू होकर 3 सितंबर, शनिवार दोपहर 12:28 तक रहेगी.शनिवार को अनुराधा नक्षत्र होने से अमृत नाम का शुभ योग इस दिन बनेगा.इस योग में संतान सातें का व्रत करना बहुत ही शुभ रहेगा.

सबसे पहले भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा लगाएं.अब नारियल के पत्तों के साथ कलश स्थापित करें.इसके बाद दीपक जलाएं.

अब आरती की थाली में हल्दी, चंदन, कुमकुम, फूल, कलावा, अक्षत और भोग आदि सामग्री रखें.संतान की रक्षा और उसकी खुशहाली की कामना करते हुए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें.

02 Sep 2022 By Shubham Mishra

santan saptami kab Hai:ऋषि पंचमी के बाद होता है संतान सप्तमी का व्रत जानें सही डेट मुहूर्त औऱ विधि

Santan Saptami 2022: संतान सप्तमी का व्रत हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व रखता है.यह व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है.इस वर्ष ये विशेष दिन 3 सितंबर 2022 को मनाया जाएगा.इस संतान सप्तमी (Santan Saptami 2022 Date) को ललिता सप्तमी, अपराजिता सप्तमी और मुक्ताभरण सप्तमी औऱ संतान साते के रूप में भी मनाया जाता है.

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 2 सितंबर, शुक्रवार को दोपहर 12:28 से शुरू होकर 3 सितंबर, शनिवार दोपहर 12:28 तक रहेगी.शनिवार को अनुराधा नक्षत्र होने से अमृत नाम का शुभ योग इस दिन बनेगा.इस योग में संतान सातें का व्रत करना बहुत ही शुभ रहेगा.

सबसे पहले भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा लगाएं.अब नारियल के पत्तों के साथ कलश स्थापित करें.इसके बाद दीपक जलाएं.

अब आरती की थाली में हल्दी, चंदन, कुमकुम, फूल, कलावा, अक्षत और भोग आदि सामग्री रखें.संतान की रक्षा और उसकी खुशहाली की कामना करते हुए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें.

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