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भारत में अगले कुछ महीनों के अंदर हो सकती है क़रीब 3 लाख बच्चों की मौत:रिपोर्ट

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कोरोना के चलते प्रभावित अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का असर सबसे ज़्यादा भारत में बच्चों की सेहत पर पड़ने वाला है.इसका खुलासा यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में हुआ है.पढ़े पूरी खबर युगान्तर प्रवाह पर..

डेस्क:पूरे विश्व में तबाही का पर्याय बन चुके कोरोना से भारत भी अछूता नहीं है।लेक़िन भारत के लिए इस कोरोना काल में कोरोना से भी ज़्यादा ख़तरनाक स्थिति बन रही है।

कोरोना के चलते देश का सारा स्वास्थ्य विभाग उसी में लगा हुआ है।जिसके चलते छोटे बच्चों को पर्याप्त स्वास्थ सुविधाएं न मिलने के चलते उनकी सेहत पर गम्भीर असर पड़ रहा है।जिसके नतीज़े गम्भीर हो सकते हैं।

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इसी के चलते संयुक्त राष्ट्र के संगठन यूनिसेफ़ (यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रेन्स इमर्जेंसी फ़ंड) ने इसी की आशंका जताई है.यूनिसेफ के हवाले से बीबीसी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार यूनिसेफ़ ने कहा है कि भारत में अगले छह महीनों में पांच साल से कम उम्र के तीन लाख बच्चों की मौत हो सकती है.बाल मृत्यु का ये आँकड़ा उन मौतों से अलग होगा जो कोविड-19 के कारण हो रही हैं.

यूनिसेफ़ के मुताबिक पूरे दक्षिण एशिया में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का आँकड़ा चार लाख 40 हज़ार तक पहुंच सकता है. इनमें सबसे ज़्यादा मौतें भारत में ही होने का अनुमान लगाया गया है.

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लॉकडाउन, कर्फ़्यू और परिवहन पर रोक के कारण स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में लोग कम जा रहे हैं. लोगों को संक्रमण होने का ख़तरा भी महसूस हो रहा है.इंडिया मे भी टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित था.अब टीकाकरण शुरू भी हुआ है तो उसमें लगे स्वास्थ्यकर्मियों के लापरवाह पूर्ण रैवये के चलते सुचारु रूप से चल नहीं पा रहा है.

इसको एक उदाहरण से समझते हैं बुधवार को फतेहपुर जनपद के हँसवा विकास खण्ड के टीसी गाँव में एएनएम अलका जौहरी औऱ उनकी स्वास्थ्य टीम टीकाकरण करने के लिए पहुँची थीं।इस दौरान ज्यादातर लोग कोरोना के चलते अपने बच्चों को लेकर टीकाकरण कराने नहीं पहुँचे।लोगों का कहना था कि एएनएम को घर घर जाकर टीकाकरण करना चाहिए।वहीं एएनएम का कहना था कि वह घर घर जाकर टीकाकरण नहीं करेगी।

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मैक्स अस्पताल में बालरोग विभाग की प्रमुख डॉक्टर बबीता जैन कहती हैं, “इसमें सबसे बड़ा डर यही है कि बच्चों का टीकाकरण देर से हो पाएगा. अगर समय पर टीकाकरण नहीं हो पाता है तो वो कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है. लोग डॉक्टर के पास जाने से डर रहे हैं और ख़ुद डॉक्टर्स ने अपने क्लीनिक बंद किए हुए हैं. जन्म के पहले साल में लगने वाले टीके बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. टीकाकरण में एक सीमित समय तक देरी तो चल सकती है लेकिन उसके बाद टीका लगाना अनिवार्य हो जाता है.”


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