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                <title>राजनीति - Yugantar Pravah </title>
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                <description>राजनीति RSS Feed</description>
                
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                <title>UP Chunav 2027: क्या मायावती एक बार फिर लगाएंगी ब्राह्मणों पर दांव, 2007 दोहराने की है तैयारी, जानिए रणनीति</title>
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                        <![CDATA[बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूपी चुनाव 2027 को लेकर बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है. ब्राह्मण समाज को केंद्र में रखकर वह 2007 जैसी सामाजिक इंजीनियरिंग दोहराने की तैयारी में हैं. भाजपा की नीतियों, यूसीसी, आरक्षण और संगठनात्मक बदलावों पर उन्होंने खुलकर हमला बोला.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/politics/up-chunav-2027-mayawati-brahmin-strategy-bsp-mission-2007/article-8680"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-02/up-chunav-2027-mayawati-bsp.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Uttar Pradesh Elections 2027: </strong>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने सियासी शंखनाद कर दिया है. लखनऊ में पार्टी की अहम बैठक से पहले प्रेस को संबोधित करते हुए उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला और साफ संकेत दिया कि इस बार ब्राह्मण समाज बसपा की रणनीति के केंद्र में है.</p>
<h3><strong>भाजपा की नीतियों से नाराज समाज, ब्राह्मणों की मुखरता बनी चर्चा</strong></h3>
<p>मायावती ने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार की नीतियों से समाज का बड़ा तबका निराश और परेशान है. सरकार कुछ गिने-चुने लोगों के हित साधने में लगी है, जबकि आम जनता की समस्याओं की अनदेखी हो रही है. उन्होंने खासतौर पर ब्राह्मण समाज का जिक्र करते हुए कहा कि यह वर्ग अपनी उपेक्षा, असुरक्षा और अपमान को लेकर आज सबसे ज्यादा मुखर है. यही वजह है कि इसकी चर्चा हर स्तर पर हो रही है. मायावती के मुताबिक भाजपा इस स्थिति से असहज और चिंतित नजर आ रही है. उन्होंने दावा किया कि बसपा ने ही ब्राह्मण समाज को असली सम्मान और न्याय दिया है.</p>
<h4><strong>2007 मॉडल की वापसी के संकेत, ब्राह्मण बने रणनीति की धुरी</strong></h4>
<p>बीते कुछ महीनों में मायावती के बयानों में ब्राह्मण समाज का जिक्र लगातार बढ़ा है. हर प्रेस वार्ता में वह इस वर्ग की पीड़ा और नाराजगी को सामने रख रही हैं. बसपा का आकलन है कि यूपी चुनाव 2027 में सवर्ण वोट निर्णायक भूमिका निभा सकता है.</p>
<p>इसमें ब्राह्मण समाज सबसे अहम कड़ी है. वर्ष 2007 में जिस सामाजिक समीकरण ने बसपा को सत्ता तक पहुंचाया था, उसी मॉडल को नए सिरे से साधने की तैयारी की जा रही है. मायावती का मानना है कि ब्राह्मणों के साथ संतुलन बनाकर ही सत्ता का रास्ता दोबारा खुल सकता है.</p>
<h5><strong>संगठन में बड़ा फेरबदल, मिशन-2027 की जमीन तैयार</strong></h5>
<p>चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए बसपा संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं. मंडल, जिला और विधानसभा स्तर पर नए प्रभारियों की नियुक्ति की गई है. मायावती ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता विपक्षी दलों की साजिशों और हथकंडों से पूरी तरह वाकिफ हैं और उनका मजबूती से सामना कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा कि मिशन-2027 को मिशन-2007 की तर्ज पर ही पूरा किया जाएगा. लक्ष्य साफ है, पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना और बसपा को दोबारा सत्ता में लाना.</p>
<h6><strong>यूसीसी और आरक्षण पर भाजपा सरकार पर सीधा हमला</strong></h6>
<p>मायावती ने भाजपा सरकार पर एससी, एसटी और ओबीसी विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि आरक्षण से जुड़े फैसलों की वजह से इन वर्गों के युवाओं को नौकरी और प्रमोशन में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.</p>
<p>यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर भी उन्होंने कहा कि इसे सामाजिक समरसता के नाम पर लागू करने की बजाय सामाजिक तनाव का कारण बना दिया गया है. केंद्र और राज्य सरकारें जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाकर जाति और धर्म की राजनीति कर रही हैं, जो देश के लिए घातक है.</p>
<h6><strong>वोटर लिस्ट से कोई योग्य नाम न छूटे, अधिकारियों को चेतावनी</strong></h6>
<p>एसआईआर के मुद्दे पर मायावती ने कहा कि किसी भी हाल में योग्य नागरिक वोटर बनने से न छूटे. उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि गरीब, मजदूर, महिलाएं और अशिक्षित लोग अक्सर जानकारी के अभाव में मतदाता सूची से बाहर रह जाते हैं. ऐसे लोगों से सीधे संपर्क कर उनके नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाए जाएं. उन्होंने कहा कि मजबूत लोकतंत्र की नींव मजबूत मतदाता सूची से ही रखी जा सकती है.</p>
<h6><strong>संसद का हंगामा और टैरिफ मुद्दों पर जताई नाराजगी</strong></h6>
<p>मायावती ने संसद के मौजूदा बजट सत्र को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि सत्ता और विपक्ष देश और जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हैं.</p>
<p>संसद की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है. टैरिफ जैसे अहम मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए थी, लेकिन राजनीतिक टकराव के कारण ये सवाल पीछे छूट गए. जनता सब देख रही है और इसका जवाब चुनाव में देगी.</p>
<h6><strong>बसपा ने किए अहम मंडल और विधानसभा प्रभारी नियुक्त</strong></h6>
<p>चुनावी रणनीति के तहत बसपा ने कई अहम नियुक्तियां की हैं. मौजीलाल गौतम और विनय कश्यप को लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली की जिम्मेदारी दी गई है. डॉ सुशील कुमार मुन्ना और राकेश गौतम को सीतापुर, हरदोई और लखीमपुर खीरी का प्रभारी बनाया गया है.</p>
<p>मुनकाद अली मेरठ, गिरीश चंद्र मुरादाबाद और सूरज सिंह जाटव अलीगढ़ मंडल में पार्टी का काम संभालेंगे. लखनऊ की सभी नौ विधानसभा सीटों के लिए भी अलग-अलग प्रभारी नियुक्त किए गए हैं.</p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 01:03:42 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]>
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                <title>Mahoba News: बीच सड़क जलशक्ति मंत्री और भाजपा विधायक में तीखा विवाद ! काफिला रोकने से मचा बवाल, अखिलेश ने ली चुटकी</title>
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                        <![CDATA[महोबा में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने ग्राम प्रधानों के साथ बीच सड़क रोक दिया. जल जीवन मिशन के तहत खोदी गई सड़कों की बदहाली और गांवों में पानी न पहुंचने को लेकर विवाद बढ़ गया. अखिलेश यादव ने तंज कसा.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/politics/mahoba-swatantra-dev-singh-brijbhushan-rajput-road-dispute/article-8659"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-01/mahoba-swantra-dev-bjp-mla.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Mahoba News: </strong>उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में शुक्रवार को भाजपा के भीतर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत ने जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला बीच सड़क पर रोक दिया. जल जीवन मिशन के तहत गांवों में पानी न पहुंचने और सड़कों की बदहाली को लेकर विधायक और समर्थकों ने विरोध किया. मामला इतना बढ़ा कि पुलिस और कार्यकर्ताओं में झड़प हो गई.</p>
<h3><strong>बीच सड़क मंत्री का काफिला रोकने से मचा हड़कंप</strong></h3>
<p>महोबा जिले में एक दिवसीय दौरे पर आए कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला रामश्री महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम से लौट रहा था. तभी कलक्ट्रेट मार्ग पर पहले से मौजूद भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत और उनके समर्थकों ने अचानक काफिला रोक दिया.</p>
<p>विधायक के साथ करीब 100 ग्राम प्रधान भी मौजूद थे. सभी का आरोप था कि जल जीवन मिशन के तहत खोदी गई सड़कों की हालत बेहद खराब हो चुकी है और कई गांवों में तीन साल से पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है. बीच सड़क काफिला रुकने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया.</p>
<h4><strong>जल जीवन मिशन और बदहाल सड़कों को लेकर विधायक का गुस्सा</strong></h4>
<p>विधायक बृजभूषण राजपूत का कहना था कि उनकी विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीण जनता पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है. गांवों में पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़कें खोद दी गईं लेकिन आज तक मरम्मत नहीं कराई गई. जगह-जगह गड्ढे और टूटी सड़कें लोगों के लिए दुर्घटना का कारण बन रही हैं.</p>
<p>विधायक का आरोप था कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे, जिससे जनता का आक्रोश बढ़ रहा है. इसी नाराजगी के चलते उन्होंने मंत्री से सीधे जवाब मांगने का फैसला किया.</p>
<h5><strong>समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी झड़प, माहौल तनावपूर्ण</strong></h5>
<p>काफिला रोकने के दौरान मंत्री के सुरक्षाकर्मियों, पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई. देखते ही देखते झड़प का माहौल बन गया. समर्थकों का कहना था कि जब तक मंत्री समस्याओं का समाधान नहीं सुनेंगे, वे पीछे नहीं हटेंगे.</p>
<p>वहीं पुलिस प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में करने में जुटा रहा. एक समर्थक द्वारा इंस्पेक्टर से बहस करते हुए कहा गया, आंख क्यों दिखा रहे हो, खा जाओगे क्या. इस घटना ने मौके पर तनाव और बढ़ा दिया.</p>
<h6><strong>मंत्री को खुद वाहन से उतरना पड़ा, हुई तीखी नोकझोंक</strong></h6>
<p>स्थिति बिगड़ने के बाद मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को खुद वाहन से नीचे उतरकर सामने आना पड़ा. इसके बाद विधायक और मंत्री के बीच तीखी बातचीत हुई. बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम पहले से प्लानिंग के तहत हुआ क्योंकि बड़ी संख्या में समर्थक पहले से ही सड़क पर गाड़ियां लगाकर मौजूद थे.</p>
<p>मंत्री और विधायक की नोकझोंक ने भाजपा के अंदरूनी मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया. मौके पर सीओ सदर अरुण कुमार सिंह और एसडीएम शिवध्यान पांडेय ने हालात संभालने की कोशिश की.</p>
<h6><strong>मंत्री का आश्वासन, अफसरों पर कार्रवाई की चेतावनी</strong></h6>
<p>विवाद बढ़ने के बाद मंत्री ने विधायक को साथ लेकर डीएम कार्यालय पहुंचने का निर्णय लिया. वहां ग्राम प्रधानों और विधायक की शिकायतों को सुनने के लिए घंटों बैठक चली. मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि जहां भी शिकायत है, वहां वे खुद जाकर जांच करेंगे.</p>
<p>उन्होंने यहां तक कहा कि अगर किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आई तो उसे सस्पेंड कर दिया जाएगा. मंत्री ने विधायक से कहा कि 40 गांवों में कहोगे तो मैं सभी जगह चेक करने चलूंगा. इससे साफ हुआ कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है.</p>
<h6><strong>अखिलेश यादव का तंज, भाजपा पर बड़ा हमला</strong></h6>
<p>इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा तंज कसा. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भाजपा के डबल इंजन ही नहीं, डिब्बे भी आपस में टकरा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के मंत्री और विधायक जनता की समस्याओं पर काम करने के बजाय पैसे कमाने और जमीन कब्जाने में लगे हैं.</p>
<p>अखिलेश ने कहा कि अपनी ही सरकार के मंत्री को विधायक द्वारा बंधक बनाना दर्शाता है कि भाजपा के विधायक अगले चुनाव में हारने वाले हैं. उन्होंने इसे हर विधानसभा क्षेत्र की हालत का नमूना बताया.</p>
<h6><strong>प्रशासन ने हटवाया जाम, काफिला आगे बढ़ा</strong></h6>
<p>घटना के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए समर्थकों को सड़क से हटाया और काफिला आगे बढ़वाया. एसडीएम शिवध्यान पांडेय ने बताया कि समर्थकों ने मंत्री को रोककर अपनी समस्याएं बताई थीं, जिसके बाद उन्हें समझाकर अलग किया गया. हालांकि इस घटनाक्रम ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है और भाजपा के भीतर असंतोष को उजागर कर दिया है.</p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 21:25:18 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]>
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                <title>पंकज चौधरी को प्रदेश और नितिन नबीन को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी ! जानिए दोनों नेताओं की कुल संपत्ति कितनी है</title>
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                        <![CDATA[भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए दो अहम नियुक्तियां की हैं. उत्तर प्रदेश में पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष और बिहार के नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. दोनों नेताओं की राजनीतिक पकड़ के साथ उनकी संपत्ति भी चर्चा में है.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/politics/bjp-pankaj-chaudhary-nitin-nabin-net-worth/article-8562"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-12/pankaj_and_nitin_nabin_net_worth.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Pankaj Chaudhary Nitin Nabin Net Worth: </strong>बीजेपी ने 2025 के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फैसला लिया है. उत्तर प्रदेश की कमान अनुभवी सांसद पंकज चौधरी को सौंपी गई है, जबकि बिहार से उभरे नेता नितिन नबीन को राष्ट्रीय जिम्मेदारी मिली है. इन नियुक्तियों के साथ ही दोनों नेताओं की दौलत और राजनीतिक कद पर भी नजरें टिकी हैं.</p>
<h3><strong>यूपी बीजेपी अध्यक्ष बने पंकज चौधरी, हुआ ऐलान</strong></h3>
<p>रविवार को लखनऊ में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने औपचारिक रूप से पंकज चौधरी के नाम की घोषणा की. पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश की महाराजगंज लोकसभा सीट से लगातार सात बार सांसद चुने जा चुके हैं.</p>
<p>कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को सामाजिक संतुलन साधने वाला चेहरा माना जाता है. संगठन और सरकार दोनों में उनके अनुभव के कारण पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया है. यूपी जैसे बड़े राज्य में आगामी चुनावों को देखते हुए यह नियुक्ति रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है.</p>
<h4><strong>केंद्र में मंत्री और कारोबार में मजबूत पहचान</strong></h4>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंकज चौधरी मौजूदा समय में केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं. राजनीति के साथ-साथ उनकी पहचान एक बड़े कारोबारी के तौर पर भी है. उनकी कंपनी हरवंश राम भगवान दास तेल कारोबार से जुड़ी हुई है और उत्तर भारत में इसकी मजबूत पकड़ मानी जाती है.</p>
<p>यही वजह है कि पंकज चौधरी न केवल राजनीतिक बल्कि आर्थिक रूप से भी प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. पार्टी के भीतर उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जो संगठन को संसाधन और रणनीति दोनों स्तरों पर मजबूत कर सकते हैं.</p>
<h5><strong>पंकज चौधरी की कुल संपत्ति कितनी है</strong></h5>
<p>लोकसभा चुनाव के दौरान दाखिल हलफनामे के अनुसार पंकज चौधरी की कुल संपत्ति 41 करोड़ 90 लाख 10 हजार 509 रुपये है. इसमें करीब 36 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति और 5 करोड़ रुपये से अधिक की चल संपत्ति शामिल है.</p>
<p>उनके पास 57,825 रुपये नकद दर्ज हैं, जबकि उनकी पत्नी के पास 1,04,815 रुपये कैश है. अलग-अलग कंपनियों में उनके करीब 28.13 लाख रुपये के शेयर और बॉन्ड हैं. पोस्ट ऑफिस और एनएसएस में 26 लाख रुपये से ज्यादा का निवेश भी उनके नाम दर्ज है.</p>
<h6><strong>आभूषण और पारिवारिक संपत्ति का ब्योरा</strong></h6>
<p>पंकज चौधरी के पास लगभग 120 ग्राम सोने के आभूषण हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 8.40 लाख रुपये बताई गई है. वहीं उनकी पत्नी भाग्यश्री के पास 285 ग्राम सोने के जेवर हैं, जिनकी कीमत करीब 19.95 लाख रुपये आंकी गई है. हलफनामे में दर्ज ये आंकड़े बताते हैं कि पंकज चौधरी देश के संपन्न सांसदों में शामिल हैं. उनकी संपत्ति और कारोबारी पृष्ठभूमि यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद को और भी प्रभावशाली बनाती है.</p>
<h6><strong>नितिन नबीन को मिली राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी</strong></h6>
<p>बीजेपी ने बिहार सरकार में मंत्री नितिन नबीन को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है. यह नियुक्ति 14 दिसंबर 2025 से प्रभावी मानी जा रही है. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि नितिन नबीन का संगठनात्मक अनुभव और जमीनी पकड़ राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को मजबूती देगी. वह बीजेपी के सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्षों में गिने जा रहे हैं, जिससे युवाओं में भी नया संदेश गया है.</p>
<h6><strong>बांकीपुर से चार बार विधायक, मजबूत राजनीतिक विरासत</strong></h6>
<p>नितिन नबीन बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट से चार बार विधायक चुने जा चुके हैं. यह सीट उनके पिता स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की भी राजनीतिक पहचान रही है.</p>
<p>2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने आरजेडी की रेखा कुमारी को 51,936 वोटों से हराया था. इस जीत के बाद उन्हें नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बनाया गया. संगठन और सरकार दोनों में उनकी सक्रिय भूमिका उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में आगे ले जा रही है.</p>
<h6><strong>नितिन नबीन की संपत्ति और आय का पूरा लेखा-जोखा</strong></h6>
<p>चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार नितिन नबीन की कुल संपत्ति लगभग 3.1 करोड़ रुपये है. वहीं उन पर 56.7 लाख रुपये का कर्ज दर्ज है. उनकी सालाना आय करीब 4.8 लाख रुपये बताई गई है. उनके खिलाफ 5 आपराधिक मामले लंबित हैं, हालांकि इनमें से कोई भी गंभीर श्रेणी का नहीं है. संपत्ति के लिहाज से वह पंकज चौधरी से पीछे हैं, लेकिन संगठनात्मक प्रभाव में उनकी गिनती मजबूत नेताओं में होती है.</p>
<h6><strong>युवा मोर्चा से राष्ट्रीय नेतृत्व तक का सफर</strong></h6>
<p>नितिन नबीन ने भारतीय जनता युवा मोर्चा से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय एकता यात्रा और गुवाहाटी से तवांग तक 1965 के शहीदों को श्रद्धांजलि देने वाली यात्रा में भाग लिया.</p>
<p>सिक्किम और छत्तीसगढ़ में बीजेपी के प्रभारी और सह-प्रभारी के रूप में काम करते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत किया. छत्तीसगढ़ में पार्टी की चुनावी सफलता में उनका योगदान अहम माना जाता है. सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी आवास से जुड़े उनके कामों की भी पार्टी के भीतर सराहना होती रही है.</p>]]>
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                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Dec 2025 19:18:48 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]>
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                <title>फतेहपुर में पूर्व मंत्री के खिलाफ दाखिल हुआ आरोप पत्र: चुनाव में पकड़े गए थे हजारों साड़ियों के बंडल, जानिए क्या है मामला</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[उत्तर प्रदेश के फतेहपुर पुलिस ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान अमेठी विधानसभा में मतदाताओं को साड़ी बांटने के मामले में पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ दर्ज मुकदमे में अब आरोप पत्र दाखिल कर दिया है. शुक्रवार को उनकी अदालत में पेशी हुई और अगली सुनवाई 10 अक्टूबर तय की गई.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/uttar-pradesh/fatehpur/gayatri-prasad-prajapati-saree-distribution-case/article-8381"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-09/fatehpur_gaytri_prajapati_news.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Gayatri Prajapati News: </strong>यूपी में वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को साड़ी बांटने के मामले ने एक बार फिर सियासी हलचल तेज कर दी है. फतेहपुर जिले की हुसेनगंज पुलिस द्वारा दर्ज इस मुकदमे में अब अभियोजन ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है. शुक्रवार को उनकी पेशी हुई, जहां अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 10 अक्टूबर मुकर्रर कर दी.</p>
<h3><strong>फतेहपुर की सीमा पर पकड़ी गई थीं हजारों साड़ियां</strong></h3>
<p>बताया जा रहा है कि 11 जनवरी 2017 को हुसेनगंज थाने की पुलिस टीम असनी पुल के पास वाहनों की चेकिंग कर रही थी. इस दौरान एक लोडर वाहन से 42 बंडल साड़ियां बरामद हुईं. प्रत्येक बंडल में 106 साड़ियां थीं, यानी कुल 4452 साड़ियां पकड़ी गईं. ये साड़ियां फतेहपुर की सीमा से अमेठी जनपद ले जाई जा रही थीं, जहां चुनावी प्रचार में उन्हें मतदाताओं को बांटने की तैयारी थी.</p>
<h4><strong>पुलिस ने दर्ज किया था मुकदमा</strong></h4>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लोडर चालक अंकित शुक्ला ने उस समय पुलिस को बताया था कि ये साड़ियां अमेठी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी प्रत्याशी गायत्री प्रसाद प्रजापति के प्रचार हेतु बांटने के लिए भेजी गई थीं. इसी आधार पर फतेहपुर पुलिस ने तत्कालीन मंत्री के खिलाफ आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा दर्ज कर लिया था.</p>
<h5><strong>अन्य आरोपियों को हो चुका है अर्थदंड</strong></h5>
<p>इस मामले में लोडर चालक अंकित शुक्ला, शैलेष मिश्र और हिदायत उल्ला बेग को भी नामजद किया गया था. अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद 2 जनवरी 2020 को इन तीनों को दोषी मानते हुए अर्थदंड की सजा सुनाई थी. हालांकि पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति का मुकदमा अब तक लंबित रहा, जो अब फिर से सक्रिय हो गया है.</p>
<h6><strong>कोर्ट में पेश हुए गायत्री प्रसाद प्रजापति</strong></h6>
<p>शुक्रवार को मामला अपर मुख्य न्यायाधीश कोर्ट नंबर-1 के पीठासीन अधिकारी मोहम्मद सादित की अदालत में आया. पूर्व मंत्री को पेश किया गया, जहां अभियोजन की ओर से अभियोजन अधिकारी विजय कुमार रावत ने दलीलें पेश कीं, जबकि बचाव पक्ष की ओर से सैय्यद नाजिस रजा ने पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान समाजवादी पार्टी के कई नेता भी अदालत में मौजूद रहे.</p>
<h6><strong>पूर्व मंत्री बोले यह भाजपा की साजिश</strong></h6>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गायत्री प्रसाद प्रजापति ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि जिन साड़ियों की बरामदगी दिखाई जा रही है, उन पर कमल का फूल अंकित था. उनके मुताबिक यह पूरी तरह भाजपा की साजिश थी, ताकि उनकी छवि खराब हो और चुनावी माहौल प्रभावित किया जा सके. अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 10 अक्टूबर तय कर दी है.</p>]]>
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                                                            <category>उत्तर-प्रदेश</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>फतेहपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 09:57:39 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>NDA ने किया उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का ऐलान: जानिए कौन हैं सीपी राधाकृष्णन? कैसा रहा अभी तक उनका सफ़र</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[एनडीए ने उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार का नाम घोषित कर दिया है. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बताया कि महाराष्ट्र के राज्यपाल और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सीपी राधाकृष्णन इस बार एनडीए की ओर से चुनावी मैदान में होंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/politics/nda-cp-radhakrishnan-vice-president-candidate/article-8264"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-08/who_is_cp_radhakrishnan_vice_president.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Who Is CP Radhakrishnan: </strong>भारतीय राजनीति में एक और बड़ा निर्णय सामने आया है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ नेता सीपी राधाकृष्णन को एनडीए का उम्मीदवार बनाया गया है. पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद इस नाम पर अंतिम मुहर लगी.</p>
<h3><strong>प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में तय हुआ नाम</strong></h3>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली में बीजेपी संसदीय बोर्ड की अहम बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए. लंबी चर्चा और विचार-विमर्श के बाद सीपी राधाकृष्णन का नाम उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित किया गया.</p>
<p>बैठक के बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बताया कि सभी सहयोगी दलों ने इस नाम पर सहमति जताई है. उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष से भी बातचीत की जाएगी ताकि सर्वसम्मति से उपराष्ट्रपति का चुनाव हो सके.</p>
<h4><strong>कौन हैं सीपी राधाकृष्णन (Who Is CP Radhakrishnan)</strong></h4>
<p>20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर में जन्मे चन्द्रपुरम पोनुस्वामी राधाकृष्णन यानी सीपी राधाकृष्णन लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं. उन्होंने आरएसएस और जनसंघ से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. 1998 और 1999 में वे कोयम्बटूर से बीजेपी के टिकट पर लोकसभा सांसद चुने गए. 2003 से 2006 तक तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष रहे. वर्तमान में वे महाराष्ट्र के राज्यपाल के पद पर आसीन हैं.</p>
<h5><strong>गवर्नर के तौर पर निभाई कई जिम्मेदारियां</strong></h5>
<p>सीपी राधाकृष्णन फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक झारखंड के राज्यपाल रहे. इस दौरान उन्हें तेलंगाना का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था. मार्च से अगस्त 2024 तक उन्होंने पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त दायित्व भी संभाला. 31 जुलाई 2024 को उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया. उनके प्रशासनिक अनुभव और लंबे राजनीतिक सफर ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत पहचान दिलाई है.</p>
<h6><strong>राजनीतिक और सामाजिक पहल</strong></h6>
<p>तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने 2004 से 2007 के बीच 93 दिनों की रथयात्रा निकाली. इस यात्रा का उद्देश्य नदियों को आपस में जोड़ना, आतंकवाद के खिलाफ जनजागरूकता और समाज में अस्पृश्यता उन्मूलन था.</p>
<p>संसद में भी उनकी सक्रियता रही और वे वस्त्र उद्योग पर स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे. साथ ही उन्होंने कई वित्तीय और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़ी समितियों में भी अहम भूमिका निभाई. कोयम्बटूर के वीओ चिदंबरम कॉलेज से उन्होंने BBA की पढ़ाई की है.</p>
<h6><strong>क्या बोले राधाकृष्णन और किसका मिला समर्थन?</strong></h6>
<p>एनडीए की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद सीपी राधाकृष्णन ने X पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने पत्नी सुमति के साथ मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन किए और देश-राज्य की खुशहाली के लिए प्रार्थना की.</p>
<p>इसी बीच आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और TDP अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी उन्हें बधाई दी. नायडू ने कहा कि राधाकृष्णन एक प्रतिष्ठित और अनुभवी नेता हैं, जिन्होंने देश की सेवा में उल्लेखनीय योगदान दिया है. TDP ने उनके नामांकन का समर्थन करने की घोषणा की.</p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/politics/nda-cp-radhakrishnan-vice-president-candidate/article-8264</link>
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                <pubDate>Sun, 17 Aug 2025 21:20:21 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]>
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                <title>Shibu Soren Death Reason: झारखंड के ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन का निधन ! तीन बार बने मुख्यमंत्री, आदिवासी आंदोलन के थे अगुवा</title>
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                        <![CDATA[झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया. वह 81 वर्ष के थे और लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे. उनके बेटे और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर पिता के निधन की जानकारी दी.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/politics/shibu-soren-death-jharkhand-former-cm-passed-away/article-8234"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-08/shibu_soren_death_jharkhand_f_cm.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Shibu Soren Death Reason:</strong> झारखंड की राजनीति को गहराई से प्रभावित करने वाले दिग्गज आदिवासी नेता शिबू सोरेन का 81 वर्ष की उम्र में सोमवार सुबह निधन हो गया. दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उन्होंने सुबह 8:56 बजे अंतिम सांस ली. पिछले डेढ़ महीने से वह गंभीर रूप से बीमार थे और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखे गए थे. उनके निधन से झारखंड में शोक की लहर है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे व्यक्तिगत और सार्वजनिक क्षति बताया है.</p>
<h3><strong>दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस</strong></h3>
<p>शिबू सोरेन को जून के आखिरी सप्ताह में दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों की टीम ने उनकी हालत को गंभीर बताते हुए उन्हें आईसीयू में रखा था. उन्हें किडनी संबंधी बीमारी थी और भर्ती के कुछ दिनों बाद उन्हें स्ट्रोक भी आया था.</p>
<p>इसके बाद उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई. अस्पताल की ओर से सोमवार को जारी बयान में बताया गया कि सुबह 8:56 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया. करीब एक महीने से वह वेंटिलेटर पर थे और डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी था, लेकिन अंततः उन्हें बचाया नहीं जा सका.</p>
<h4><strong>हेमंत सोरेन ने कहा- आज मैं शून्य हो गया हूं</strong></h4>
<p>शिबू सोरेन के निधन की जानकारी उनके बेटे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की. उन्होंने भावुक होते हुए लिखा, "आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं. आज मैं शून्य हो गया हूं...।" इस संदेश के साथ उन्होंने एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें वे अपने पिता के साथ नजर आ रहे हैं. शिबू सोरेन का जाना सिर्फ एक पिता की कमी नहीं है, बल्कि झारखंड की राजनीतिक चेतना के एक स्तंभ का पतन है.</p>
<h5><strong>तीन बार बने झारखंड के मुख्यमंत्री</strong></h5>
<p>शिबू सोरेन झारखंड राज्य के गठन के बाद तीन बार मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए. पहली बार 2 मार्च 2005 को उन्होंने सीएम पद की शपथ ली थी, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण उन्हें 12 मार्च 2005 को इस्तीफा देना पड़ा.</p>
<p>यानी वे पहली बार केवल 10 दिन मुख्यमंत्री रह सके. इसके बाद 27 अगस्त 2008 को दोबारा मुख्यमंत्री बने और 19 जनवरी 2009 तक पद पर रहे. तीसरी बार 30 दिसंबर 2009 को उन्होंने सीएम पद संभाला और 1 जून 2010 तक इस पद पर रहे. हालांकि हर बार उनका कार्यकाल अस्थिर राजनीतिक हालातों के कारण छोटा रहा.</p>
<h6><strong>38 साल तक झारखंड मुक्ति मोर्चा का नेतृत्व किया</strong></h6>
<p>शिबू सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की स्थापना कर आदिवासी अधिकारों और पृथक राज्य की मांग को लेकर लंबा संघर्ष किया. वे 38 वर्षों तक पार्टी के अध्यक्ष और संरक्षक के रूप में सक्रिय रहे. 'दिशोम गुरु' के नाम से लोकप्रिय शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति का सबसे मजबूत आदिवासी चेहरा थे. उन्होंने आदिवासियों की जमीन, अधिकार और सम्मान के लिए न सिर्फ आंदोलन चलाया बल्कि कई बार जेल भी गए. उनके संघर्ष की बदौलत झारखंड को अलग राज्य का दर्जा मिला.</p>
<h6><strong>झारखंड की राजनीति में शोक की लहर</strong></h6>
<p>शिबू सोरेन के निधन से पूरे झारखंड में शोक की लहर है. राजनीतिक, सामाजिक और आदिवासी संगठनों ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत तमाम नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. झारखंड में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है. शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा और अंत्येष्टि की तैयारियां झामुमो की ओर से की जा रही हैं.</p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/politics/shibu-soren-death-jharkhand-former-cm-passed-away/article-8234</link>
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                <pubDate>Mon, 04 Aug 2025 11:50:57 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]>
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                <title>NCP SR Kohli: एनसीपी के वरिष्ठ नेता एस. आर. कोहली का निधन ! संगठन के शिल्पकार को खोने का ग़म, पार्टी में शोक की लहर</title>
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                        <![CDATA[राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के राष्ट्रीय महासचिव और संस्थापक सदस्य एस. आर. कोहली का 82 वर्ष की उम्र में रविवार दोपहर निधन हो गया. लंबे समय से बीमार चल रहे कोहली का नोएडा के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था. उनके निधन पर अजीत पवार, प्रफुल्ल पटेल सहित कई शीर्ष नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/politics/ncp-leader-sr-kohli-death-ajit-pawar/article-8212"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-07/ncp_leader_sr_kohli_death.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>NCP SR Kohli:</strong> राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने रविवार को अपने सबसे वरिष्ठ और प्रतिष्ठित नेताओं में से एक, एस. आर. कोहली को हमेशा के लिए खो दिया. पार्टी के संस्थापक सदस्य और राष्ट्रीय महासचिव कोहली का निधन दोपहर 3 बजे नोएडा के एक अस्पताल में हुआ, जहां वे कई दिनों से इलाजरत थे. उनके जाने से पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक हर कोई स्तब्ध और शोकाकुल है. नेताओं ने इसे पार्टी के लिए "एक युग का अंत" बताया है.</p>
<h3><strong>संगठन के आधार स्तंभ कोहली का 82 वर्ष में निधन</strong></h3>
<p>82 वर्षीय एस. आर. कोहली बीते कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और नोएडा के एक निजी अस्पताल में इलाजरत थे. रविवार दोपहर 3 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर मिलते ही पार्टी के सभी स्तरों पर शोक की लहर दौड़ गई. कोहली जी उन चुनिंदा नेताओं में से थे जिन्होंने 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना के साथ ही संगठन के निर्माण में दिन-रात एक कर दिया था.</p>
<h4><strong>शरद पवार के साथ शुरू किया राजनीतिक सफर, NCP की नींव में रहा नाम</strong></h4>
<p>एस. आर. कोहली का राजनीतिक जीवन कांग्रेस से शुरू हुआ था, लेकिन 1999 में जब शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बनाई, तो कोहली भी उनके साथ हो लिए.</p>
<p>कोहली जी को संगठन निर्माण का शिल्पकार माना जाता है. उन्होंने न केवल पार्टी की विचारधारा को ज़मीन तक पहुंचाया, बल्कि युवाओं को मंच देने और बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाई.</p>
<h5><strong>चार दशक से अधिक का अनुभव, सादगी और अनुशासन से जीता सबका दिल</strong></h5>
<p>कोहली जी का राजनीतिक सफर चार दशकों से अधिक लंबा रहा. पार्टी में वे सादगी, अनुशासन और निष्ठा के प्रतीक माने जाते थे. कार्यकर्ताओं से लेकर बड़े नेताओं तक, हर कोई उन्हें बेहद सम्मान की निगाह से देखता था. वे वर्षों से पार्टी के स्थायी राष्ट्रीय महासचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे और हर अहम बैठक व रणनीतिक फैसले में उनकी राय को वरीयता दी जाती थी.</p>
<h6><strong>अजीत पवार और प्रफुल्ल पटेल के भरोसेमंद, हर रणनीति में निभाई अहम भूमिका</strong></h6>
<p>कोहली जी को NCP के शीर्ष नेतृत्व विशेषकर अजीत पवार और प्रफुल्ल पटेल का अत्यंत करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था. वे सभी गुटों के बीच संवाद और समन्वय की कड़ी थे.</p>
<p>उनके जाने से पार्टी में ऐसा खालीपन आया है जिसे भर पाना मुश्किल होगा. वे न सिर्फ संगठन के फैसलों में अहम भूमिका निभाते थे बल्कि संकट की घड़ी में भी नेतृत्व को दिशा देने का कार्य करते थे.</p>
<h6><strong>नेताओं ने जताया शोक, बोले - "एक युग का अंत है"</strong></h6>
<p>एस. आर. कोहली के निधन पर पार्टी प्रमुख अजीत पवार, वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल, सुप्रिया सुले सहित तमाम नेताओं ने गहरा शोक प्रकट किया. एनसीपी के नेशनल मीडिया कोऑर्डिनेटर प्रो. नवीन कुमार ने कहा, "कोहली साहब पार्टी की आत्मा थे. उनका जाना सिर्फ एक नेता का नहीं, एक युग का अंत है." पार्टी जल्द ही दिल्ली और मुंबई में श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने की योजना बना रही है.</p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Jul 2025 10:19:08 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]>
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                <title>Jagdeep Dhankhar Resigns: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इन कारणों के चलते दिया इस्तीफा ! जानिए उनके बारे में</title>
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                        <![CDATA[भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने सोमवार रात अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए त्यागपत्र सौंपा. यह इस्तीफा संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन आया, जिससे देश की राजनीति में हलचल मच गई है.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/vice-president-jagdeep-dhankhar-resigns/article-8186"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-07/vice_presi_jagdeep_dhankhar_resigns.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Jagdeep Dhankhar Resigns: </strong>भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार रात अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर यह जानकारी दी. 74 वर्षीय धनखड़ का कार्यकाल वर्ष 2027 तक था, लेकिन उन्होंने समय से दो साल पहले ही पद छोड़ दिया. यह इस्तीफा ऐसे वक्त में आया है जब संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ था.</p>
<h3><strong>राष्ट्रपति को पत्र लिखते हुए कहा- डॉक्टरों की सलाह मान रहा हूं</strong></h3>
<p>धनखड़ ने राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में लिखा कि वह डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहे हैं. उन्होंने लिखा, <span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>"स्वास्थ्य को देखते हुए मैं तत्काल प्रभाव से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहा हूं." </strong></span>इस पत्र में उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया और प्रधानमंत्री व पूरी मंत्री परिषद का आभार जताया. उन्होंने अपने कार्यकाल को "सूझबूझ और सौभाग्य" से भरा हुआ बताया और कहा कि देश की आर्थिक प्रगति का साक्षी बनना उनके लिए एक संतोषजनक अनुभव रहा.</p>
<h4><strong>संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन दिया इस्तीफा</strong></h4>
<p>धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने यह इस्तीफा उस समय दिया जब संसद का मानसून सत्र शुरू ही हुआ था. 21 जुलाई की शाम तक उन्होंने बतौर राज्यसभा के सभापति अपना काम किया और उसी रात कुछ देर बाद त्यागपत्र भेज दिया.</p>
<p>इस घटनाक्रम से संसदीय हलकों में हलचल बढ़ गई. उपराष्ट्रपति न केवल देश के संवैधानिक पदों में दूसरा सर्वोच्च पद होता है, बल्कि राज्यसभा का अध्यक्ष भी होता है. ऐसे में उनका इस्तीफा सत्र के पहले दिन ही आना अभूतपूर्व माना जा रहा है.</p>
<h5><strong>राज्यसभा में कई बार विपक्ष से टकराव में रहे धनखड़</strong></h5>
<p>उपराष्ट्रपति के रूप में राज्यसभा के सभापति रहते हुए जगदीप धनखड़ कई बार विपक्षी नेताओं से तीखी बहसों में भी नजर आए. खासकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से उनकी कई बार तीखी नोकझोंक हुई. फिर भी, उनके इस्तीफे के बाद कई विपक्षी सांसदों ने उनके व्यवहार और निष्पक्ष कार्यशैली की तारीफ की. उनकी सख्त लेकिन गरिमामयी कार्यप्रणाली को सभी दलों ने सराहा.</p>
<h6><strong>वकील से लेकर राज्यपाल और उपराष्ट्रपति तक का सफर</strong></h6>
<p>धनखड़ ने अगस्त 2022 में देश के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला था. इससे पहले वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रह चुके थे. एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में उन्होंने जयपुर में लंबे समय तक वकालत की.</p>
<p>वे 1989 में झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी बने और वीपी सिंह व चंद्रशेखर सरकारों में मंत्री पद भी संभाला. उनका राजनीतिक और विधिक अनुभव उन्हें देश के शीर्ष संवैधानिक पदों तक लेकर गया.</p>
<h6><strong>राजस्थान से दिल्ली तक का संघर्षमय लेकिन प्रेरणादायक सफर</strong></h6>
<p>18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले में जन्मे जगदीप धनखड़ की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई. बाद में वे चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल में पढ़े और एनडीए में चयन भी हुआ, लेकिन उन्होंने आगे की पढ़ाई का रास्ता चुना.</p>
<p>राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक और फिर कानून की पढ़ाई कर उन्होंने जयपुर में बतौर अधिवक्ता अपनी पहचान बनाई. सामाजिक और संवैधानिक मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ ने उन्हें राजनीति में लाकर एक ऊंचा मुकाम दिलाया.</p>]]>
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                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Jul 2025 23:20:06 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]>
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                <title>Tej Pratap Yadav News: अपने ही बेटे को Lalu Yadav ने पार्टी से क्यों निकाला ! खत्म कर दिए सारे रिश्ते, जानिए पूरा मामला</title>
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                        <![CDATA[राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को पार्टी से 6 साल के लिए बाहर कर दिया गया है. उनके पिता और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह घोषणा की. तेज प्रताप की एक लड़की संग वायरल पोस्ट के बाद यह कदम उठाया गया.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/politics/lalu-yadav-expelled-tej-pratap-yadav-from-rjd/article-7952"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-05/tej_pratap_yadav_vs_lalu_yadav_news.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Tej Pratap Yadav News: </strong>राष्ट्रीय जनता दल के भीतर बड़ी सियासी हलचल मच गई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को आरजेडी (RJD) से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है. इस बात को उनके पिता और पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने खुद सार्वजनिक किया. तेज प्रताप की एक लड़की संग सोशल मीडिया पोस्ट के वायरल होने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद यह कठोर कार्रवाई हुई.</p>
<h3><strong>नाराज हुए लालू यादव, बेटे को पार्टी से निकाला</strong></h3>
<p>शनिवार शाम से मचे बवाल के बाद रविवार को आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया. लालू यादव ने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए दी.</p>
<p>उन्होंने लिखा कि तेज प्रताप का निजी और सार्वजनिक आचरण पार्टी और पारिवारिक मूल्यों के विपरीत है. उन्होंने कहा,<span style="color:rgb(52,73,94);"><strong> “निजी जीवन में नैतिक मूल्यों की अवहेलना हमारे सामाजिक न्याय के संघर्ष को कमजोर करती है”</strong></span> लालू यादव ने साफ कर दिया कि अब तेज प्रताप की न पार्टी में कोई भूमिका रहेगी और न परिवार में.</p>
<h4><strong>वायरल पोस्ट ने मचाया बवाल, लड़की से रिश्ते का दावा </strong></h4>
<p>पूरे विवाद की शुरुआत शनिवार शाम को तेज प्रताप यादव के फेसबुक अकाउंट से किए गए एक पोस्ट से हुई. इस पोस्ट में तेज प्रताप एक युवती के साथ तस्वीर में नजर आ रहे थे और लिखा था कि वे दोनों पिछले 12 साल से एक-दूसरे को प्यार करते हैं.</p>
<p>पोस्ट में लिखा गया, <span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>“मैं तेज प्रताप यादव और मेरे साथ इस तस्वीर में जो दिख रही हैं उनका नाम ***** है. हम दोनों पिछले 12 सालों से रिलेशनशिप में हैं. आज मैं आप सभी से अपने दिल की बात साझा कर रहा हूं.”</strong></span> यह पोस्ट कुछ ही देर में वायरल हो गई और राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गई.</p>
<h5><strong>हैकिंग का दावा कर तेज प्रताप ने दी सफाई</strong></h5>
<p>पोस्ट वायरल होने के बाद तेज प्रताप यादव ने रविवार सुबह एक और पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कहा कि उनका फेसबुक अकाउंट हैक हो गया था. तेज प्रताप ने लिखा,</p>
<p><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong> “मेरे सोशल मीडिया अकाउंट को हैक किया गया है और मेरी तस्वीरों को एडिट कर मुझे और मेरे परिवार को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है. मैं अपने सभी शुभचिंतकों और समर्थकों से अपील करता हूं कि किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और सतर्क रहें.” </strong></span>हालांकि, सोशल मीडिया पर लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.</p>
<h6><strong>जीतन राम मांझी का हमला कहा, परिवार में नैतिकता की कमी</strong></h6>
<p>इस पूरे मामले पर राजनीति भी तेज हो गई है. केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने तेज प्रताप और लालू परिवार पर सीधा हमला बोला.</p>
<p>उन्होंने कहा कि “जिस परिवार में नैतिकता की दुहाई देने वाले खुद अपने बेटे के आचरण से परेशान हों, वहां आम कार्यकर्ताओं को क्या सीख मिलेगी?” मांझी के इस बयान के बाद एक बार फिर बिहार की राजनीति में आरजेडी को घेरने की कोशिशें तेज हो गई हैं.</p>
<h6><strong>पार्टी और परिवार से दूर होंगे तेज प्रताप: लालू</strong></h6>
<p>लालू प्रसाद यादव के सोशल मीडिया पोस्ट में भावनात्मक अपील भी दिखी. उन्होंने लिखा, “ज्येष्ठ पुत्र की गतिविधि, लोक आचरण तथा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार हमारे पारिवारिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है. अतः मैं उसे पार्टी और परिवार से दूर करता हूं. अब उसकी कोई भूमिका नहीं रहेगी.”</p>
<p>लालू ने आगे यह भी जोड़ा कि तेज प्रताप अपने निजी जीवन के निर्णय स्वयं लें, लेकिन जो भी लोग उससे संबंध बनाए रखें वे अपनी समझ से फैसला लें. उन्होंने लोकलाज और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा का पालन करने की बात दोहराई.</p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 May 2025 17:38:02 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]>
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                <title>Jagdeep Dhankhar News: अब राष्ट्रपति भी कोर्ट के आदेश पर चलें? न्यायपालिका के 'सुपरपावर' पर उपराष्ट्रपति का तंज</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने न्यायपालिका की भूमिका पर तीखा प्रहार करते हुए अनुच्छेद 145(3) और 142 के दुरुपयोग पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति को निर्देश नहीं दे सकता और न्यायपालिका की जवाबदेही तय होनी चाहिए.'बेसिक स्ट्रक्चर' सिद्धांत पर भी उन्होंने कटाक्ष किया.]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/jagdeep-dhankhar-president-court-remark/article-7813"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-04/jagdeep_dhankhar_president_court.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Jagdeep Dhankhar News: </strong>देश की संवैधानिक संस्थाओं की सीमाओं और अधिकारों को लेकर उपराष्ट्रपति <strong>जगदीप धनखड़</strong> ने एक बार फिर बहस को गरमा दिया है. एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर सटीक तंज कसते हुए कई गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 145(3) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट को केवल संविधान की व्याख्या का अधिकार है, वह भी कम से कम पांच जजों की पीठ द्वारा, लेकिन आज स्थिति ऐसी हो गई है कि राष्ट्रपति तक को निर्देशित किया जा रहा है.</p>
<h3><strong>145(3) व्याख्या के लिए है, व्यवस्था चलाने के लिए नहीं</strong></h3>
<p>धनखड़ ने स्पष्ट कहा कि संविधान ने सुप्रीम कोर्ट को संविधान की व्याख्या का विशेषाधिकार दिया है, लेकिन उसकी भी एक तय सीमा है. "जब अनुच्छेद 145(3) तैयार किया गया, तब सुप्रीम कोर्ट में केवल आठ जज थे. अब 30 से अधिक हैं, लेकिन व्याख्या आज भी पांच जजों की पीठ ही करती है. क्या यह न्यायसंगत है?" उन्होंने पूछा. उनका इशारा न्यायिक सक्रियता के उस स्वरूप की ओर था, जिसमें कोर्ट अपनी व्याख्याओं के ज़रिए शासन के कार्यक्षेत्र में दखल देता दिखता है.</p>
<h4><strong>राष्ट्रपति को आदेश देना संविधान के खिलाफ है</strong></h4>
<p>उपराष्ट्रपति ने हाल के घटनाक्रमों का हवाला देते हुए गहरी चिंता जताई कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति को समय-सीमा में निर्णय लेने के निर्देश देना असंवैधानिक है. "राष्ट्रपति भारतीय सेना के सर्वोच्च कमांडर हैं. वे संविधान की रक्षा की शपथ लेते हैं। फिर उन्हें आदेश देना किस सिद्धांत के तहत आता है?" उन्होंने पूछा.</p>
<p>उनका साफ संदेश था कि न्यायपालिका अगर कार्यपालिका और राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद को निर्देश देने लगे तो यह संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन है.</p>
<h5><strong>अनुच्छेद 142 बना न्यूक्लियर मिसाइल–24x7 ऑन</strong></h5>
<p>धनखड़ ने विशेष रूप से अनुच्छेद 142 पर व्यंग्य करते हुए कहा, "यह अब लोकतंत्र के लिए एक न्यूक्लियर मिसाइल बन चुका है. जो चौबीसों घंटे न्यायपालिका के पास सक्रिय है" उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये शक्ति संतुलन के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है?</p>
<p>उन्होंने कहा कि न्यायपालिका अगर इस शक्ति का निरंतर और बेलगाम प्रयोग करती है तो संविधान का संतुलन खतरे में पड़ सकता है.</p>
<h6><strong>बेसिक स्ट्रक्चर बचा नहीं, बस दिखाया जा रहा है</strong></h6>
<p>बात यहीं खत्म नहीं हुई. उपराष्ट्रपति ने 'बेसिक स्ट्रक्चर' सिद्धांत पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि 1973 के केशवानंद भारती केस में यह सिद्धांत 7-6 के बहुमत से स्वीकार हुआ था. लेकिन 1975 के आपातकाल में जब लाखों नागरिकों को जेल में डाल दिया गया और सुप्रीम कोर्ट ने मौलिक अधिकारों को नकार दिया, तब यह 'संविधान रक्षक' कहां था?</p>
<p>अगर यह सिद्धांत इतना ही ताकतवर था, तो 1975 में मौलिक अधिकार क्यों नष्ट हो गए? फिर किस ‘बेसिक स्ट्रक्चर’ की रक्षा हो रही थी? उन्होंने व्यंग्य करते हुए पूछा.</p>
<h6><strong>जज कानून भी बनाएं, संपत्ति भी न बताएं?</strong></h6>
<p>धनखड़ ने पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा, "हर सांसद और उम्मीदवार को अपनी संपत्ति घोषित करनी पड़ती है. लेकिन जजों के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। क्या यह समानता के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है?"</p>
<p>उन्होंने अफसोस जताया कि देश की जनता इन गहरे संवैधानिक प्रश्नों पर चर्चा नहीं करती और उन्हें सिर्फ एकतरफा कथाओं के सहारे गुमराह किया जा रहा है.</p>]]>
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                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Apr 2025 00:46:02 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>Uttarakhand News: उत्तराखंड के 4 जिलों में 17 जगहों के बदले नाम ! औरंगजेबपुर से बना शिवाजी नगर</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[उत्तराखंड (Uttarakhand) में 17 जगहों के नाम बदलकर भाजपा सरकार ने हिंदुत्व और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का संदेश दिया, लेकिन विपक्ष इसे विकास से भटकाने की साजिश बता रहा है. जनता में मिली-जुली प्रतिक्रिया है कुछ इसे गौरवपूर्ण बदलाव मान रहे हैं, तो कुछ इसे सिर्फ चुनावी हथकंडा कह रहे हैं.]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/politics/uttarakhand-news-4-districts-17-places-renamed-aurangzebpur-to-shivaji-nagar/article-7752"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-03/uttarakhand_news_dhami_name_change.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Uttarakhand News: </strong>उत्तराखंड सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राज्य के चार जिलों—हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में 17 स्थानों के नाम बदलने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बदलाव को भारतीय संस्कृति और जनभावना के अनुरूप बताया, जबकि विपक्ष ने इसे सरकार की नाकामी छुपाने का प्रयास करार दिया है.</p>
<h3><strong>हरिद्वार जिले में 8 जगहों के नाम बदले</strong></h3>
<p>हरिद्वार जिले में निम्नलिखित स्थानों के नाम बदल दिए गए हैं:</p>
<ul>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>औरंगजेबपुर → शिवाजी नगर</strong></span></li>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>गाजीवाली → आर्यनगर</strong></span></li>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>चांदपुर → ज्योतिबा फुले नगर</strong></span></li>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>मोहम्मदपुर जट → मोहनपुर जट</strong></span></li>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>खानपुर कुर्सली → अंबेडकर नगर</strong></span></li>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>इदरीशपुर → नंदपुर</strong></span></li>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>खानपुर → श्रीकृष्णपुर</strong></span></li>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>अकबरपुर फाजलपुर → विजयनगर</strong></span></li>
</ul>
<h4><strong>देहरादून में 4 जगहों को नया नाम मिला</strong></h4>
<p>देहरादून जिले में चार स्थानों का नाम बदला गया है:</p>
<ul>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>मियांवाला (देहरादून नगर निगम ब्लॉक) → रामजीवाला</strong></span></li>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>पीरवाला (विकासनगर ब्लॉक) → केसरी नगर</strong></span></li>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>चांदपुर खुर्द (विकासनगर) → पृथ्वीराज नगर</strong></span></li>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>अब्दुल्लापुर (सहसपुर ब्लॉक) → दक्षनगर</strong></span></li>
</ul>
<h5><strong>नैनीताल और उधमसिंह नगर में भी बदलाव</strong></h5>
<ul>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>नवाबी रोड (नैनीताल) → अटल मार्ग</strong></span></li>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>पनचक्की से आईआईटी मार्ग → गुरु गोलवलकर मार्ग</strong></span></li>
<li><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>नगर पंचायत सुल्तानपुर पट्टी (उधमसिंह नगर) → कौशल्या पुरी</strong></span></li>
</ul>
<h6><strong>सीएम धामी ने दिया बयान</strong></h6>
<p>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, यह बदलाव केवल नामों का नहीं, बल्कि हमारी भारतीय संस्कृति और विरासत को सम्मान देने का एक प्रयास है. यह महापुरुषों से प्रेरणा लेने और उनके योगदान को याद रखने का एक जरिया है.</p>
<h6><strong>कांग्रेस ने उठाए सवाल</strong></h6>
<p>विपक्षी दल कांग्रेस ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे सरकार की विफलताओं से ध्यान हटाने की रणनीति बताया. कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा, भाजपा के पास कोई वास्तविक विकास कार्य दिखाने को नहीं है, इसलिए वे नाम बदलने का नाटक कर रहे हैं.</p>
<h6><strong>सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया</strong></h6>
<p>सरकार के इस फैसले पर सोशल मीडिया पर जनता की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग इसे भारतीय संस्कृति के सम्मान में उठाया गया कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे केवल चुनावी एजेंडा मान रहे हैं.</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Mar 2025 23:10:06 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>Fatehpur News: अखिलेश यादव का BJP पर वार ! भाजपा 8 साल बेमिसाल मना रही है, लेकिन फतेहपुर याद आएगा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर (Fatehpur) में मचे सियासी घमासान में सपा मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने BJP पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा 8 साल बेमिसाल मना रही है उन्हें फतेहपुर जरूर याद आएगा. पढ़ें पूरी ख़बर ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/uttar-pradesh/fatehpur/akhilesh-yadav-slams-bjp-8-years-bemisaal/article-7723"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-03/fatehpur_akhilesh_yadav_mukhlal_pal.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Fatehpur Mukhlal Pal Akhilesh Yadav News: </strong>यूपी के फतेहपुर में <a href="https://www.yugantarpravah.com/uttar-pradesh/fatehpur/fatehpur-news-jackies-dholak-in-fatehpur-bjp-holi-and-phag/article-7720">भाजपा</a> की सियासत में उबाल आ गया है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि</p>
<p>भाजपा 8 साल बेमिसाल मना रही है, लेकिन <a href="https://www.yugantarpravah.com/uttar-pradesh/fatehpur/fatehpur-news-bjp-district-president-fell-but-political-vault-opened/article-7712">फतेहपुर</a> जरूर याद आएगा उन्होंने सत्तारूढ़ दल पर भ्रष्टाचार और अवैध कब्जों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब खुद भाजपा के नेता एक-दूसरे पर घोटाले और जमीन हड़पने के आरोप लगा रहे हैं, तो पूरे प्रदेश का हाल क्या होगा?</p>
<h3><strong>300 बीघे तक का सफर, जेसीबी, डंपर और ट्रक </strong></h3>
<p>अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने इशारों-इशारों में भाजपा की पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जिनके पास कभी तीन बीघे खेती की जमीन थी, अब उनके पास 300 बीघे हो गई है. साथ में जेसीबी, डंपर और ट्रक भी चलने लगे हैं. सरकारी जमीनों और तालाबों पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि ये मैं नहीं कह रहा हूं ये उन्हीं की पार्टी के मौजूदा पदाधिकारी कह रहे हैं. </p>
<h4><strong>जिलाध्यक्ष पर 50 लाख की ठगी का आरोप, गुटबाजी उजागर</strong></h4>
<p>इस पूरे विवाद की जड़ भाजपा के फतेहपुर जिलाध्यक्ष <a href="https://www.yugantarpravah.com/uttar-pradesh/fatehpur/bjp-mukhlal-pal-50-lakh-scam/article-7711">मुखलाल पाल</a> पर लगे घोटाले के आरोप हैं. भाजपा नेता अजीत कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया कि मुखलाल पाल ने उन्हें पार्टी में बड़ा पद दिलाने के नाम पर 50 लाख रुपये हड़प लिए. मामले की जांच प्रदेश स्तर पर हुई, जिसमें जांच कमेटी ने जिलाध्यक्ष को दोषी ठहरा दिया. </p>
<h5><strong>जब भाजपा जिलाध्यक्ष ने खुद की पार्टी पर ही दागे आरोप</strong></h5>
<p>सियासी ड्रामा तब और बढ़ गया, जब जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल (Mukhlal Pal) ने खुद को निर्दोष बताते हुए प्रेस कांफ्रेंस में अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं को निशाने पर ले लिया.</p>
<p>उन्होंने पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति, पूर्व जिलाध्यक्ष आशीष मिश्रा, स्थानीय नेता अनु श्रीवास्तव और एक अन्य शीर्ष भाजपा नेता पर साजिश रचने का आरोप लगा दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने इन नेताओं को 'भूमाफिया' तक करार दे दिया. हालांकि इस पूरे मामले में नेताओं ने जिला अध्यक्ष चुनाव को लेकर अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है. </p>
<h6><strong>भाजपा में गहरी फूट, विपक्ष को मिला मौका</strong></h6>
<p>मुखलाल पाल के इस बयान के बाद भाजपा के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए. पार्टी के ही पदाधिकारी एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने लगे हैं, जिससे जिले की भाजपा इकाई में भारी गुटबाजी देखने को मिल रही है. विपक्ष इसे भाजपा के 'असली चेहरे' के रूप में भुनाने में जुट गया है. </p>
<p>अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले पर कटाक्ष करते हुए कहा, <em><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>"जब फतेहपुर में ही भाजपा नेता एक-दूसरे पर घोटालों और अवैध कब्जों के आरोप लगा रहे हैं, तो पूरे उत्तर प्रदेश की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।" </strong></span></em>उन्होंने भाजपा को 'भ्रष्टाचारियों की पार्टी' करार देते हुए कहा कि जनता अब सच्चाई जान चुकी है और आने वाले चुनावों में भाजपा को इसका जवाब मिलेगा. </p>
<h6><strong>फतेहपुर की 'सियासी फिल्म' अभी खत्म नहीं हुई</strong></h6>
<p>भाजपा के अंदर मचा यह घमासान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. विपक्षी दल इसे बड़ा मुद्दा बनाकर भाजपा पर हमले तेज कर सकते हैं. देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस विवाद से कैसे निपटती है और क्या वाकई कोई कार्रवाई होगी या यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?</p>]]>
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                                                            <category>उत्तर-प्रदेश</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>फतेहपुर</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/uttar-pradesh/fatehpur/akhilesh-yadav-slams-bjp-8-years-bemisaal/article-7723</link>
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                <pubDate>Mon, 24 Mar 2025 16:54:11 +0530</pubDate>
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