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                <title>Editor-Choice - Yugantar Pravah </title>
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                <title>Brahaman Voter In UP:ब्राह्मण वोटरों के लिए इस बार क्यों परेशान हैं सभी राजनीतिक दल</title>
                                    <description><![CDATA[इस बार के यूपी विधानसभा चुनाव में जिस वर्ग की चर्चा सबसे ज़्यादा हो रही है वह वर्ग है ब्राह्मण.पिछले चुनावों के तुलना में इस बार सभी प्रमुख दल ब्राह्मण वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं.यह वर्ग इस चुनाव में क्यों इतना महत्वपूर्ण हो चला है.पढ़ें यह रिपोर्ट. UP chunav 2022 Brahaman voter up me kitne pratishat hai]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/uttar-pradesh-lucknow-brahmin-voter-in-up-why-all-political-parties-are-worried-about-brahmin-voters-in-up-election-2022-289822-27-12-2021/article-3753"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2021-12/wpctud2vgftiontwdtfo8ywcbsyss5vt7kmzrc8u.jpg" alt=""></a><br /><div class="news-content-item"><div class="news-content-item-text"><p><strong>UP Me Brahaman Voter</strong>:यूपी औऱ बिहार का चुनावी जोड़ गणित हमेसा से जातिवाद पर टिका रहा है.भारतीय राजनीति में मोदी युग (2014 के बाद) की शुरुआत होने के बाद भले ही इसका असर कुछ कम हुआ हो.औऱ चुनाव अल्पसंख्यक बनाम बहुसंख्यक हो गए हों.लेकिन जातिवाद का असर एकदम से खत्म हो गया है यह बात कहना बेमानी होगी. <strong>Up Election 2022</strong></p></div></div><div class="news-content-item"><div class="news-content-item-text"><p>इस बार का यूपी विधानसभा चुनाव बीजेपी भले ही राष्ट्रवाद औऱ हिंदुत्व के मुद्दे पर ही लड़ने जा रही है.लेकिन जानकार बताते हैं कि कई वर्ग ऐसे हैं जो इस बार बीजेपी से नाराज हो चले हैं. खासकर यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार से कई वर्गों में नाराजगी हैं.योगी भले ही सन्यासी बिरादरी के हैं लेकिन सन्यास से पूर्व उनकी जाति ठाकुर है औऱ विपक्षी दल लगातार योगी आदित्यनाथ सरकार को ठाकुरवादी सरकार होने का आरोप लगाते रहे हैं. <strong>Brahaman Voter In UP</strong></p>  <p>जमीनी स्तर पर भी इन आरोपों का व्यापक असर है. खासकर ब्राह्मण औऱ ओबीसी समाज में इसको लेकर नाराजगी है.जहाँ तक ब्राह्मणों का सवाल है तो इस बार के चुनाव में सपा, बसपा, कांग्रेस ब्राह्मणों को अपने पाले में लाने के लिए जोर लगाए हुए हैं. वहीं बीजेपी ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने के लिए विभिन्न तरीक़े के कार्य्रक्रमों को चला रही है. <strong>UP Me Brahman Voter Percentage</strong></p>  <p><span style="color:#b22222;"><strong>यूपी में क्यों महत्वपूर्ण हैं ब्राम्हण..</strong></span></p>  <p>यूपी में ब्राह्मण वोटरों की संख्या क़रीब 10 प्रतिशत है.यदि इस आंकड़े को देखे तो यह संख्या बहुत कम लगती है लेकिन राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि यह वर्ग अपने वोट प्रतिशत से कई गुना ज़्यादा वोटरों को इधर से उधर करने में माहिर होता है.किसी भी पार्टी की हवा बनाने में इस वर्ग का बड़ा रोल होता है.औऱ यदि यह वर्ग विरोध में उतर जाए तो किसी भी पार्टी की हवा ख़राब करने का माद्दा रखता है. <strong>Up Me Brahaman Voter Kitne Hai</strong></p>  <p>ऐसे में इस वर्ग को अपने पाले में करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए काफ़ी फायेदमंद साबित होता है. यूपी में बीजेपी से ब्राह्मण नाराज है ऐसी चर्चा पिछले दो सालों से काफ़ी ज़्यादा है. बीजेपी से ब्राह्मणों की इसी नाराजगी का फायदा दूसरे दल उठाना चाह रहे हैं. <strong>UP Election 2022 Latest News</strong></p>  <p>यदि ज़िलेवार ब्राह्मण वोटरों की बात करें तो सूबे की करीब पांच दर्जन से ज्यादा सीटों पर ब्राह्मण वोटर निर्णायक भूमिका अदा करते हैं.एक दर्जन जिलों में इनकी आबादी 20 फीसदी से ज्यादा है. वाराणसी, चंदौली, महाराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, भदोही, जौनपुर, बस्ती, संत कबीर नगर, अमेठी, बलरामपुर, कानपुर, प्रयागराज में ब्राह्मण मतदाता 15 फीसदी से ज्यादा है.यहां पर ब्राह्मण वोटर्स किसी भी उम्मीदवार की हार या जीत में अहम रोल अदा करते हैं. <strong>UP Me Brahmin Voter Kitne Percent Hai</strong></p>  <p><span style="color:#b22222;"><strong>कांग्रेस ने दिए सबसे ज़्यादा ब्राह्मण मुख्यमंत्री..</strong></span></p>  <p>यूपी के इतिहास की बात करें तो कांग्रेस से ही ब्राह्मण मुख्यमंत्री हुए हैं.आजादी के बाद से 1989 तक यूपी की सियासत में ब्राह्मण समाज का वर्चस्व कायम रहा. गोविंद बल्लभ पंत से नारायण दत्त तिवारी तक कुल आठ बार ब्राह्मण मुख्यमंत्री बने.लेकिन मंडल कमीशन के बाद बदले सियासी समीकरण में ब्राह्मणों के हाथ से सत्ता खिसकी तो फिर आजतक नहीं मिली.ऐसे में यूपी का ब्राह्मण समाज पिछले तीन दशक से महज एक वोटबैंक की तरह बनकर रह गया है,जिन्हें अपने पाले में लाने के लिए सभी दल मशक्कत कर रहे हैं. <strong>Brahmin CM In Up</strong></p>  <p><span style="color:#b22222;"><strong>ब्राह्मण जिधर गया उधर ही सरकार बनी..</strong></span></p>  <p>ब्राह्मण जिधर गया उधर ही सरकार बनी यह कहने में भले ही थोड़ा अजीब या यूं कहें अतिशयोक्ति लग रहा हो लेकिन सच यही है आंकड़े इसकी गवाही देते हैं.1989 तक ब्राह्मण कांग्रेस का मजबूत वोटबैंक था.लेकिन अयोध्या राम मंदिर आंदोलन फ़िर भाजपा में अटल युग की शुरुआत से ब्राह्मण पूरी तरह से बीजेपी के साथ हो चला.लेकिन 2000 के बाद धीरे धीरे ब्राह्मण बीजेपी से भी खिसकने लगा.मायावती ने 2007 में सूबे की सियासी नब्ज़ पकड़ ली और ब्राह्मण कार्ड खेला. ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा का नारा देकर सत्ता के शिखर पर पहुँचीं.<strong>Brahaman voter in up</strong></p>  <p>लेकिन पाँच साल बाद ब्राह्मणों का बसपा से भी मोहभंग हो गया.औऱ यह वर्ग 2012 के चुनाव में सपा के साथ हो चला.जिसके बाद यूपी में अखिलेश यादव सत्ता में आए.लेकिन 2014 में मोदी युग की शुरुआत के साथ ही हिंदुत्व के मुद्दे पर ब्राह्मण एक बार फ़िर पूरी तरह से बीजेपी के साथ चला गया. <strong>UP Me Brahaman Voter</strong></p>  <p><span style="color:#b22222;"><strong>योगी से नाराजगी..</strong></span></p>  <p>2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद दो साल तक तो ठीक रहा लेकिन ब्राह्मणों को अब ऐसा लगने लगा है कि यह सरकार ठाकुरवादी है.विकास दुबे औऱ उसके साथियों के हुए एनकाउंटर के बाद इस मुद्दे को विपक्षियों ने औऱ हवा दे दी.यह प्रचार किया जाने लगा कि यूपी में जो भी क्षत्रिय बिरादरी के अपराधी हैं उनको सरकार संरक्षण दे रही है. जबकि दूसरी ओर ब्राह्मण समाज के बाहुबलियों का एनकाउंटर कराया जा रहा है या उन्हें जेल भेजा जा रहा है. <strong>up chunav 2022 Brahman voter</strong></p>  <p><span style="color:#b22222;"><strong>बीजेपी मनाने में जुटी..</strong></span></p>  <p>योगी आदित्यनाथ पर ठाकुरवाद की राजनीति के आरोप के बीच बीजेपी को लगने लगा है कि यूपी में ब्राह्मण वर्ग की नाराजगी सूबे में सत्ता की वापसी में सबसे बड़ी बाधा न बन जाए. इसीलिए माधव प्रसाद त्रिपाठी से लेकर श्रीपति मिश्र तक के नाम ले ले कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्राह्मणों को साधते नजर आए हैं.वहीं, बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व भी यूपी के ब्राह्मण नेताओं को साथ लेकर दिल्ली में रणनीति बनाने लगा है. <strong>UP Brahaman voter </strong></p>  <p>चुनाव से पहले ब्राह्मण वोटों की नाराजगी दूर करने के लिए बीजेपी शीर्ष नेतृत्व एक्टिव हो गया है.केंद्रीय मंत्री और यूपी चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान के बाद यूपी ब्राह्मण नेताओं की बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ बैठक हुई है.बीजेपी ने बैठक में सूबे के ब्राह्मण नेताओं से फीडबैक लिया और ब्राह्मण वोटों को साधने के लिए एक कमेटी बनाई है.बीजेपी सरकार में ब्राह्मण वर्ग के लिए किए गए कामों को लोगों को तक पहुंचाने का प्लान बनाया गया है.  <strong>UP Brahaman voter percentage</strong></p></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Editor-Choice</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Dec 2021 14:15:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shubham Mishra]]></dc:creator>
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                <title>World Photography Day:फतेहपुर के इस युवा फ़ोटो जर्नलिस्ट की कहानी आपको जाननी चाहिए..!</title>
                                    <description><![CDATA[19 अगस्त को वर्ल्ड फ़ोटोग्राफी डे के तौर पर मनाया जाता है..इस मौक़े पर हम आपको फतेहपुर के एक युवा फ़ोटो जॉर्लनिस्ट के बारे में बताना चाह रहें हैं..जिसने अपनी लगन और मेहनत से फ़ोटोग्राफी में ऊंचे मुकाम हासिल करने के लिए प्रयत्नशील है..पढ़ें युगान्तर प्रवाह की यह रिपोर्ट..]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/world-photography-day-uttar-pradesh-fatehpur-news-story-of-a-young-photo-journalist-neeraj-patel/article-2163"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2020-08/1597854040.jpg" alt=""></a><br /><p><a href="https://www.yugantarpravah.com"><strong>फतेहपुर</strong></a>:19 अगस्त को पूरी दुनियां में वर्ल्ड फ़ोटो ग्राफी डे मनाया जाता है।दरअसल साल 1826 में दुनिया की पहली दिखने वाली तस्वीर खींचने का श्रेय जाता है फ्रांस के जुझारू इनवेंटर जोसेफ नाइसफोर और उनके मित्र लुइस डॉगेर को, जिन्होंने अपनी आधी उम्र सिर्फ इसी काम के लिए समर्पित कर दी। इन दोनों की फोटो खींचने की इसी उपलब्धि को दुनिया 'डॉगेरोटाइप' प्रोसेस कहती है और इसे सम्मान देने के लिए वर्ल्ड फोटोग्राफी डे मनाए जाने का सिलसिला शुरू हुआ। <strong>world photography day</strong></p>    <p><u><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/crime/uttar-pradesh-fatehpur-news-the-young-lover-had-reached-to-meet-married-girlfriend-house-who-were-killed">ये भी पढ़ें-फतेहपुर:शादीशुदा प्रेमिका से मिलने उसके घर पहुँचा था नवयुवक प्रेमी..ससुरों ने मार डाला..!</a></strong></u></p>    <p><u><strong><img alt="" src="https://www.yugantarpravah.com/media/2020-08/img-20200819-wa0005(1).jpg" style="height:282px;width:330px;"></img></strong></u>(<strong>नीरज पटेल फ़ोटो जर्नलिस्ट</strong>)</p>    <p>इस मौक़े पर हम फतेहपुर के जिस फ़ोटो जर्नलिस्ट की बात कर रहें हैं उसका नाम <a href="https://www.yugantarpravah.com"><strong>नीरज पटेल </strong></a>उम्र क़रीब 30 साल है।नीरज जनपद के बहुआ विकास खण्ड के एक छोटे से गाँव रसूलपुर के रहने वाले हैं।मध्यवर्गीय परिवार में पले बढ़े नीरज को बचपन से ही फ़ोटोग्राफ़ी करने का शौक था, लेक़िन परिवार इस स्थित में नहीं था कि उन्हें फोटोग्राफी का कोई कोर्स करा सके।</p>    <p><u><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/spirituality/hartalika-teej-know-complete-vrat-and-puja-vidhi-for-unmarried-girls-and-married-women">ये भी पढ़ें-Hartalika Teej 2020:सुहागन और कुंवारी कन्याएं रखती हैं व्रत..जानें तिथि,शुभ मुहूर्त और पूजा विधि..!</a></strong></u></p>    <p>नीरज बताते हैं कि उन्होंने मनोविज्ञान से एम.ए की डिग्री ली,IGD (बाम्बे आर्ट) का डिप्लोमा लिया।घर वालों की इच्छा थी कि वह बीएड करें।घर वालों की भावनाओं का सम्मान करते हुए नीरज ने बीएड कोर्स में एडमिशन ले लिया लेक़िन फोटोग्राफी के प्रति बढ़ते जुनून के चलते उन्होंने बीएड का कोर्स बीच में ही छोड़ दिया।</p>    <p><img alt="" src="https://www.yugantarpravah.com/media/2020-08/img-20200819-wa0010(1).jpg" style="height:287px;width:330px;"></img><strong>(फोटो:नीरजपटेल)</strong></p>    <p>और साल 2009 में एक दैनिक समाचार पत्र में बतौर फ़ोटो जॉर्लनिस्ट नौकरी कर ली।तब से लेकर वह आज तक यूपी के कई  जिलों में बतौर फ़ोटो जर्नलिस्ट नौकरी कर चुकें हैं।औऱ अभी भी एक लीडिंग समाचार पत्र में बतौर सीनियर फ़ोटो जॉर्लनिस्ट फतेहपुर जनपद में ही काम कर रहें हैं। <strong>world photography day fatehpur</strong></p>    <p><strong><img alt="" src="https://www.yugantarpravah.com/media/2020-08/img-20200819-wa0006(1).jpg" style="height:324px;width:330px;"></img></strong>(<strong>फोटो:नीरजपटेल</strong>)</p>    <p>नीरज कहते हैं कि उन्होंने फोटोग्राफी का कोई अलग से कोर्स नहीं किया बस एक कैमरा किसी तरह रुपए जोड़कर खरीद लिया था।सीनियर फ़ोटो जर्नलिस्टों द्वारा खींची फ़ोटो को देख देखकर ही फ़ोटो खींचना सीखा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Editor-Choice</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2020 00:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shubham Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत का मिडिल क्लास अच्छा है..उसे भत्ता नहीं..बस व्हाट्सएप पर मीम और वीडियो चाहिए..!</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना काल और लॉकडाउन में सबसे ज़्यादा प्रभावित मिडिल क्लास हुआ है।लेकिन मिडिल क्लास अपनी पीड़ा कहे तो किससे कहे और कहे भी तो उसकी सुनेगा कौन..देश के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार का यह लेख आप सभी पढ़े..]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/senior-journalist-ravish-kumar-article-on-middle-class-people-affected-by-corona-and-lockdown/article-1973"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2020-07/1593596105.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>डेस्क</strong>:अमरीका में 36,000 पत्रकारों की नौकरी चली गई है या बिना सैलरी के छुट्टी पर भेज दिए गए हैं या सैलरी कम हो गई है। कोविड-19 के कारण। इसके जवाब में प्रेस फ्रीडम डिफेंस फंड बनाया जा रहा है ताकि ऐसे पत्रकारों की मदद की जा सके। यह फंड मीडिया वेबसाइट दि इंटरसेप्ट चलाने वाली कंपनी ने ही बनाया है। इस फंड के सहारे पत्रकारों को 1500 डॉलर की सहायता दी जाएगी। एक या दो बार। इस फंड के पास अभी तक 1000 आवेदन आ गए हैं।</p>

<p><u><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/national/bihar-ptna-two-days-after-the-wedding-the-groom-died-one-hundred-eleven-people-involved-in-the-ceremony-were-coronavirus-positive-now">ये भी पढ़े-कोरोना:शादी के दो दिनों बाद हुई दूल्हे की मौत से मचा हड़कम्प..समारोह से जुड़े 111 लोग अब तक संक्रमित..!</a></strong></u></p>

<p>वैसे अमरीका ने जून के महीने में 100 अरब डॉलर का बेरोज़गारी भत्ता दिया है। अमरीका में यह सवाल उठ रहे हैं कि सरकार को बेरोज़गारों की संख्या को देखते हुए 142 अरब डॉलर खर्च करना चाहिए था ।</p>

<p>भारत का मिडिल क्लास अच्छा है। उसे किसी तरह का भत्ता नहीं चाहिए। बस व्हाट्स एप में मीम और वीडियो चाहिए। टीवी पर गुलामी। </p>

<p><u><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/crime/uttar-pradesh-farrukhabad-news-the-people-were-beaten-up-by-health-workers-after-entering-the-government-hospital-chc-qayamganj">ये भी पढ़े-UP:फर्रुखाबाद के सरकारी अस्पताल में घुसकर गुंडों ने की तोड़फोड़..स्वास्थ्यकर्मी को पीटा..!</a></strong></u></p>

<p>भारत में एडिटर्स गिल्ड, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को कम से कम सर्वे तो करना ही चाहिए कि कितने फ्री-लांस, पूर्णकालिक, रिटेनर, स्ट्रिंगर, अंशकालिक पत्रकारों की नौकरी गई है। सैलरी कटी है। उनकी क्या स्थिति है। इसमें टेक्निकल स्टाफ को भी शामिल किया जाना चाहिए। पत्रकारों के परिवार भी फीस और किराया नहीं दे पा रहे हैं। </p>

<p><u><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/politics/uttar-pradesh-lucknow-congress-leaders-arrested-including-up-congress-president-ajay-kumar-lallu-for-protesting-against-shahnawaz-alam-arrest">ये भी पढ़े-UP:कांग्रेसियों पर लाठीचार्ज..प्रदेश अध्यक्ष फिर हुए गिरफ्तार..!</a></strong></u></p>

<p>ख़ैर ये मुसीबत अन्य की भी है। प्राइवेट नौकरी करने वाले सभी इसका सामना कर रहे हैं। एक प्राइवेट शिक्षक ने लिखा है कि सरकार उनकी सुध नहीं ले रही। जैसे सरकार सबकी सुध ले रही है। उन्हीं की क्यों, नए और युवा वकीलों की भी कमाई बंद हो गई है। उनकी भी हालत बुरी है। कई छोटे-छोटे रोज़गार करने वालों की कमाई बंद हो गई है। छात्र कहते हैं कि किराया नहीं दे पा रहे हैं। </p>

<p>इसका मतलब यह नहीं कि 80 करोड़ लोगों को अनाज देने की योजना का मज़ाक उड़ाए। मिडिल क्लास यही करता रहा। इन्हीं सब चीज़ों से उसके भीतर की संवेदनशीलता समाप्त कर दी गई है। जो बेहद ग़रीब हैं उन्हें अनाज ही तो मिल रहा है। जो सड़ जाता है। बल्कि और अधिक अनाज मिलना चाहिए। सिर्फ 5 किलो चावल और एक किलो चना से क्या होगा।</p>

<p>यह बात गलत है कि मिडिल क्लास को कुछ नहीं मिल रहा है। व्हाट्स ऐप मीम और गोदी मीडिया के डिबेट से उसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। उसके बच्चों की शिक्षा और नौकरियों पर बात बंद हो चुकी है। ताकि वे मीम का मीमपान कर सकें। उसके भीतर जितनी तरह की धार्मिक और ग़ैर धार्मिक कुंठाएं हैं, संकीर्णताएं हैं उन सबको खुराक दिया गया है।  जिससे वह राजनीतिक तरीके से मानसिक सुख प्राप्त करता रहा है। </p>

<p>ख़ुद यह क्लास मीडिया और अन्य संस्थाओं के खत्म करने वाली भीड़ का साथ देता रहा, अब मीडिया खोज रहा है। उसे पता है कि मीडिया को खत्म किए जाने के वक्त यही ताली बजा रहा था।मिडिल क्लास में ज़रा भी खुद्दारी बची है तो उसे बिल्कुल मीडिया से अपनी व्यथा नहीं कहनी चाहिए। उसे सिर्फ मीम की मांग करनी चाहिए। कुछ नहीं तो नेहरू को मुसलमान बताने वाला मीम ही दिन बार तीन बार मिले तो इसे चैन आ जाए। </p>

<p>खुद्दार मिडिल क्लास को पता होना चाहिए कि प्रधानमंत्री ने उसका आभार व्यक्त किया है। ईमानदार आयकर दाताओं का अभिनंदन किया है। ऐसा नहीं है कि आप नोटिस में नहीं हैं।</p>

<p>(<span style="color:#b22222;"><strong>यह लेख मूल रूप से रवीश कुमार के फेसबुक पेज पर प्रकाशित हुआ है।</strong></span>)</p>
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                                                            <category>Editor-Choice</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2020 00:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shubham Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यही बात आदित्यनाथ को योगी बनाती है..!</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट लंबे समय से बीमार चल रहे थे जिनका आज दिल्ली के एम्स में निधन हो गया..पिता की मृत्यु की सूचना जैसे ही उनको मिली उनका मन अचानक द्रवित हो उठा..आँखें छलक उठीं..लेकिन कर्तव्यबोध उनको डिगा न सका..पिता के प्रति प्रेम और राष्ट्र के प्रति समर्पण का सीएम वो पत्र.. जो यथार्थ रूप में आदित्यनाथ को योगी बनाता है..उनकी देश के प्रति ऐसी भावना को शब्दों में बता रहे हैं शुभम मिश्रा..]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/chief-minister-yogi-adityanath-will-not-go-to-the-funeral-of-his-father-anand-singh-bisht-shubham-mishra-is-seeing-this-sacrifice-of-yogi-in-a-new-form/article-1687"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2020-04/1587389929.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ:</strong>यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का एक नया रूप कोरोना महामारी के दौरान देखने को मिला है।एक ऐसा सीएम जो दिन रात जनता की सेवा में लगा हुआ है।आबादी के लिहाज़ से देश का सबसे बड़ा राज्य सीएम की ग़जब की कार्यकुशलता के चलते कई अन्य राज्यों की तुलना में कोरोना के संक्रमण को काफ़ी हद तक कंट्रोल किए हुए है।</p>

<p><u><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/uttar-pradesh/anand-singh-bisht-father-of-uttar-pradesh-chief-minister-yogi-adityanath-dies-in-AIIMS-been-ill-for-a-long-time">ये भी पढ़े-:सीएम योगी के पिता का निधन..!</a></strong></u></p>

<p>जब प्रदेश का सीएम किसी भी मोर्चे की लड़ाई को सबसे पहली पंक्ति पर खड़े होकर लड़ता है तो उसके नीचे काम करने मंत्री और अधिकारियों को अपने आआप ही प्रेरणा मिलती है।</p>

<p>सीएम ने कोरोना के विरुद्ध जारी इस जंग में जिस तरह से कार्य किया है और कर रहें हैं।उस यूपी मॉडल की चर्चा देश ही नहीं पूरे विश्व में हो रही है। <a href="https://www.yugantarpravah.com"><strong>shubham mishra article</strong></a></p>

<p>मैं ये क्यों लिख रहा हूँ कि 'यही बात आदित्यनाथ को योगी बनाती है।' उसके पीछे है आज घटित हुई दुःखद घटना।दरअसल सोमवार सुबह योगी के पिता आनन्द सिंह बिष्ट की दिल्ली के एम्स में मौत हो गई है।उनको कल ही एम्स में भर्ती कराया गया था लेकिन राज्य की चिंता में लगे योगी देखने नहीं जा पाए थे।आज जिस वक्त सीएम योगी को अपने पिता के मौत की सूचना मिली उस समय वह सरकार के उच्चाधिकारियों के साथ कोरोना को लेकर मीटिंग कर रहे थे।पिता की मौत की सूचना पर उनकी आँखों से आंसू तो निकले लेक़िन कुछ पल में ही अपने आप को संभालते हुए उन्होंने मीटिंग को जारी रखा।</p>

<p>ये उम्मीद की जा रही थी योगी पिता के अंतिम दर्शन करने जाएंगे।लेकिन उन्होंने अपने परिजनों को पत्र लिखकर जो कहा है शायद उसको पढ़कर हर किसी के आंखों में आँसू आ जाएं। <strong>cm yogi father death</strong></p>

<p>पत्र में सीएम योगी ने लिखा है कि- "अपने पूज्य पिताजी के कैलाशवासी होने पर मुझे भारी दुःख एवं शोक है।वे मेरे पूर्वाश्रम के जन्मदाता हैं। जीवन में ईमानदारी कठोर परिश्रम एवं निस्वार्थ भाव से लोक मंगल के लिए समर्पित भाव के साथ कार्य करने का संस्कार बचपन में उन्होंने मुझे दिया।</p>

<p>अन्तिम क्षणों में उनके दर्शन की हार्दिक इच्छा थी, परन्तु वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ देश की लड़ाई को यूपी की 23 करोड़ जनता के हित में आगे बढ़ाने का कर्तव्यबोध के कारण मैं न कर सका। कल 21 अप्रैल को अन्तिम संस्कार के कार्यक्रम में लॉकडाउन की सफलता तथा महामारी कोरोना को परास्त करने की रणनीति के कारण भाग नहीं ले पा रहा हूं। पूजनीया मां, पूर्वाश्रम से जुड़े सभी सदस्यों से भी अपील है कि वे लॉकडाउन का पालन करते हुए कम से कम लोग अन्तिम संस्कार के कार्यक्रम में रहें। पूज्य पिताजी की स्मृतियों को कोटि-कोटि नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूं। लॉकडाउन के बाद दर्शन करने आऊंगा।"</p>

<p>यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह सिद्ध कर दिया है कि एक आदर्श राजा का न तो कोई धर्म होता है और न ही उसके कोई सांस्कारिक रिश्ते राज्य की प्रजा(जनता) ही राजा के लिए पुत्र और माता-पिता के सामान होती है।जब प्रजा पर संकट हो तो राजा के लिए हर निजी सुख व दुःख से बढ़कर प्रजा की रक्षा  व सेवा करना सबसे बड़ा धर्म होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Editor-Choice</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2020 00:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shubham Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दीया,टॉर्च और मोमबत्ती से कैसे दूर होगा कोरोना-सन्तोष..!</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी ने शुक्रवार को देश की जनता से अपील की है कि वह रविवार को रात 9 बजे 9 मिनट के लिए घरों की सभी लाइट बन्द करके अपने अपने घरों के बाहर या बालकनी में खड़े होकर मोमबत्ती, दीया ,टार्च, या मोबाइल की फ़्लश लाइट जलाए..पीएम मोदी की इस अपील पर कई लोगों ने तीख़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है..समाजवादी विचारक व स्वंत्रत लेखक सन्तोष द्विवेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए हैं..युगान्तर प्रवाह पर पढ़े उनका यह लेख...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/corona-lockdown-socialist-thinker-santosh-dwivedi-sharp-response-to-pm-modi-light-off-appeal/article-1615"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2020-04/1585992805.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>संपादकीय</strong>:प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लॉकडाउन के बीच एक बार फिर जनता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने भाषण में एक बार फिर से शिगूफा छोड़ते हुए लोगों से आगामी रविवार 5 अप्रैल को रात 9 बजे, 9 मिनट के लिए घर की बत्तियां बंद कर घर के बाहर दीया, टार्च, मोमबत्ती आदि किसी चीज को जलाकर रोशनी करने को कहा। पीएम मोदी का कहना था कि इससे गरीबों के जीवन का अंधकार दूर होगा और देश में कोरोना के कारण जो अंधकार फैला है वह दूर होगा। अब तक लॉकडाउन के 9 दिनों के बीच ये तीसरी बार है, जब प्रधानमंत्री ने जनता को संबोधित किया है।</p>

<p><u><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/national/corona-virus-lockdown-news-there-will-be-a-danger-of-blackout-if-the-electricity-will-be-closed-for-the-nine-minute-know-do-and-donts">ये भी पढ़े-कोरोना:नौ मिनट के लिए एक साथ लाइट बंद हो जाने से ब्लैकआउट का ख़तरा..करें ये महत्वपूर्ण काम..!</a></strong></u></p>

<p>कोरोना वायरस के बाद लॉकडाउन के बीच देश भर में जिस तरह से लाखों लोग पलायन कर गए, देश के तमाम राज्यों में जिस तरह गरीबों के बीच भगदड़ मची, लोग रोजी-रोटी और रोजगार के संकट से जूझने लगे, देश के मध्यम वर्ग में भी अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई, ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ऐसी किसी बात पर चर्चा नहीं कर देश की जनता को दीया जलाने के कर्मकांड की ओर धकेलना समझ से परे है। सोशल मीडिया पर इसकी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त हुई है। पीयूष मित्रा ने जो लिखा, आप खुद देखिए-</p>

<p>मेरी तरह के कुछ बेवकूफ लोग सोच रहे थे कि<br />
– टेस्ट की संख्या बढ़ाने पर बात होगी।<br />
– डॉक्टरों के पीपीई की संख्या बढ़ने का ऐलान होगा।<br />
– लॉक डाउन की समीक्षा और आगे की योजना पर बात होगी।<br />
– ठप पड़े रोजी रोजगार के बारे में बात होगी।<br />
– बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर बात होगी।<br />
– गेंहू की कटनी का समाधान बताया जाएगा।</p>

<p>यहां तो पंडित जी, एक और कर्मकांड थमा गए। अब समझ आ रहा है कि यह देश क्यों इतना कर्मकांडी है।<br />
वैसे हर चतुर सरकार बेवकूफ जनता के साथ यही व्यवहार करती है। उसे इवेंट और एंटरटेनमेंट में उलझा देती है, ताकि उसकी कमजोरियों पर बातचीत कम हो।</p>

<p>पत्रकार सुमित चौहान लिखते हैं-<br />
मैं सार्वजनिक माफी मांगना चाहता हूं। ये मेरी गलती है कि मैंने देश के प्रधानमंत्री से इस संकट में कुछ राहत भरी पहल की उम्मीद की… अगर मैं अपना पुराना स्टैंड लेकर ही उनका वीडियो देखता तो निराश नहीं होता… वो एक अव्वल जोकर हैं और वो इस जोकरगिरी में मुझे कभी निराश नहीं करते। मैं आगे से इसी स्टैंड के साथ उनका वीडियो संदेश देखूंगा। शायद थोड़ी कम तकलीफ होगी।</p>

<p>दरअसल लोगों का यह गुस्सा गलत नहीं है। देश अभी भयंकर स्वास्थ सेवाओं की कमी से जूझ रहा है। बेरोजगारी का संकट मुंह बाए खड़ा है। कोरोना की वजह से भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पलायन देखने में आया है। देश की अर्थव्यवस्था औंधे मुंह गिर पड़ी है। लोगों की जान सांसत में है। पूरा देश डरा हुआ है। कोरोना पोजिटिव पाए गए लोगों की जांच करने वाले स्वास्थकर्मियों को तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अच्छा होता प्रधानमंत्री उन्हें दिलासा देते। अच्छा होता कि वह कंपनियों से कहते कि किसी युवा को नौकरी से नहीं निकालना है। अच्छा होता वो पलायन कर गए लाखों लोगों को भरोसा देते कि वो उनके लिए बेहतर देश बनाएंगे। अच्छा होता कि वो लोगों को यह बताते कि देश में स्वास्थ सेवाओं की अभी क्या स्थिति है। कोरोना से लड़ने के लिए उनकी क्या तैयारी है।</p>

<p>यही बताते कि देश भर के कितने लोगों ने प्रधानमंत्री राहत मदद कोष में योगदान दिया है। यही बता देते कि मुख्यमंत्रियों के साथ मिलकर उन्होंने क्या बात की, और राज्यों की क्या तैयारियां हैं। यही बताते कि पार्टी लाइन से अलग होकर देश के सभी राज्यों की सरकारें कैसे एक साथ मिलकर इस खतरे को रोक देंगी।</p>

<p>अगर वो इतना कुछ कर पाते तो भारत के लोगों में एक भरोसा जगता। वरना अगर थाली और ताली ही बजवानी है और दीया जलाने की अपील ही करनी है तो मोदी जी हम ऐसा करते हैं कि आपकी तस्वीर फ्रेम करवा कर घर में टांग लेते हैं। एक मोदी चालीसा भी बंटवा दीजिये, उसमें ये निर्देश दे दीजिए कि साल के 365 दिन हमें क्या-क्या करना है। आप भी निश्चिंत, आपकी रियाया (जनता) भी निश्चिंत। … हद है, बत्ती जला कर आप गरीबों के जीवन से अंधकार मिटाएंगे।</p>

<p><strong style="color:#b22222;">(नोट:-लेखक संतोष द्विवेदी सपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं इनके द्वारा लिखे इस लेख के लिए युगान्तर प्रवाह उत्तरदायी नहीं होगा)</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Editor-Choice</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2020 00:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shubham Mishra]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना:भारत में कोरोना मरीज़ कम हैं..या भारत टेस्ट ही नहीं कर पा रहा..पढ़े पूरे आंकड़े..!</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में कोरोना के मरीज बढ़ तो रहे हैं,लेक़िन कोरोना प्रभावित अन्य देशों की तुलना में यह आंकड़ा बहुत कम क्यों नज़र आ रहा है..पढ़े देश के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार का यह लेख..युगान्तर प्रवाह पर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/why-india-is-not-able-to-do-fast-corona-tests-this-article-by-senior-journalist-ravish-kumar/article-1595"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2020-03/1585639476.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>डेस्क</strong>:29 फरवरी को भारत में कोरोना संक्रमण के 3 मामले थे। 30 मार्च तक यह संख्या 1,251 हो गई। 30 मार्च को 227 नए मामले सामने आए। अभी तक 24 घंटे के भीतर इतनी संख्या कभी नहीं बढ़ी थी।</p>

<p>क्या भारत में कोरोना का संक्रमण कम हुआ है या भारत टेस्ट कम कर रहा है? क्यों कम टेस्ट कर रहा है? क्या भारत के पास टेस्ट किट नहीं हैं?</p>

<p><u><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/national/corona-virus-live-update-in-india-faster-increases-case-in-last-one-day">ये भी पढ़े-कोरोना:पिछले 24 घण्टों में सबसे अधिक मामले..अब इतनी हुई संख्या..!</a></strong></u></p>

<p>संक्रमण के बारे में जानने का यही तरीका है कि टेस्ट हो जाए। जांच रिपोर्ट आ जाए।भारत ने 6 मार्च तक 3404 टेस्ट किए थे। 30 मार्च तक भारत ने 38,442 टेस्ट ही किए। यानि 24 दिनों में भी भारत एक लाख टेस्ट नहीं कर सका। सवाल उठ रहा है कि क्या भारत को इस वक्त तक पता भी है कि कोरोना किस हद तक फैल चुका है? क्या कम टेस्ट करके इसका जवाब हासिल किया जा सकता है? यह कोई जवाब नहीं है। बहाना है। इतना कम टेस्ट दुनिया को कोई भी सक्षम देश नहीं कर रहा है।</p>

<p>16 मार्च को भारतीय चिकित्सा शोध परिषद (ICMR) के प्रमुख बलराम भार्गव ने कहा था कि भारत एक दिन में 10,000 टेस्ट कर सकता है। 24 मार्च को भार्गव ने कहा कि 12000 सैंपल टेस्ट कर सकता है। <br />
अगर ऐसा था तो भारत अभी तक हर रोज़ 1500 टेस्ट भी क्यों नहीं कर पाया?</p>

<p><span style="color:#b22222;"><strong>क्या भारत के पास टेस्ट किट नहीं है?</strong></span></p>

<p>28 मार्च, 29 मार्च और 30 मार्च को ICMR के वैज्ञानिक आर गंगाखेड़कर का बयान सुनिए। जो उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कांफ्रेंस में कहा है।तीनों दिन गंगाखेड़कर कह रहे हैं कि भारत अपनी क्षमता का 30 प्रतिशत ही इस्तमाल कर पा रहा है। यानि तीन दिनों तक भारत की एक ही गति है। चाल है। दुनिया का हर सक्षम देश अपनी जांच की क्षमता हर दिन बढ़ा रहा है। भारत तीन दिनों से एक ही बिन्दु पर अटका है। ऐसी घोर परिस्थिति में भी अगर हम अपनी 100 फीसदी क्षमता का इस्तमाल नहीं करेंगे तो तब करेंगे। </p>

<p>प्रेस कांफ्रेंस में गंगाखेड़कर ने पहली बार आंकड़ा दे दिया कि भारत के पास कितने टेस्ट किट हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास 1 लाख टेस्ट किट हैं। और अमरीका से 5 लाख टेस्ट किए आ गए हैं। </p>

<p>यह आंकड़ा बता रहा है कि भारत के पास 30 मार्च तक टेस्ट किट न के बराबर थे। आटे में नून बराबर भी नहीं। यह संख्या बता रही है कि टेस्ट किट के इंतज़ाम को लेकर भारत ने आक्रामक तरीके से काम ही नहीं किया।</p>

<p>अब जाकर पुणे की एक कंपनी ने भारतीय मॉडल बनाया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फरवरी में ही दुनिया के 70 देशों को अपना मॉडल दे दिया था। तभी दक्षिण कोरिया ने अपनी कंपनियों को बुलाकर टेस्ट किट बनाने की रणनीति बना ली थी। भारत ने इसमें भी देरी कर दी। </p>

<p><span style="color:#b22222;"><strong>तो क्या भारत टेस्टिंग बढ़ाने जा रहा है या बचा बचा कर टेस्ट करेगा? </strong></span></p>

<p>इससे तो कोई लाभ नहीं। सिर्फ यही होगा कि आप जानेंगे नहीं कि कितनों को कोरोना का संक्रमण हुआ है। एक संख्या आपके सामने नहीं होगी, लेकिन बीमारी तो होगी।  </p>

<p>जर्मनी सप्ताह में पांच लाख टेस्ट कर रहा है और अब हर दिन एक लाख टेस्ट करने जा रहा है। 30 अप्रैल तक दो लाख टेस्ट रोज़ करेगा। जर्मनी इस वक्त हर रोज़ 70,000 टेस्ट कर रहा है। जर्मनी की लड़ाई दक्षिण कोरिया की तरह मिसाल बन गई है। वहां कोरोना की संख्या तो बढ़ रही है मगर मृत्यु दर बहुत ही कम है। खासकर स्पेन इटली, फ्रांस और ब्रिटेन के मुकाबलले।</p>

<p>चौथे नंबर की अर्थव्यवस्था है जर्मनी। वो एक दिन 70,000 टेस्ट कर रहा है। अब एक लाख करेगा। एक सप्ताह में 5 लाख टेस्ट कर रहा है।पांचवें नंबर की अर्थव्यवस्था है भारत। वो एक दिन में 1500 टेस्ट भी नहीं कर पा रहा है।</p>

<p><span style="color:#b22222;"><strong>क्या अमरीका ने टेस्ट करने में देरी कर ग़लती कर दी? </strong></span></p>

<p>टेस्ट करने में भारत और अमरीका दोनों ने एक महीने का महत्वपूर्ण वक्त गंवा दिया। जिसकी सज़ा आम लोग भुगतेंगे।भारत ने 6 मार्च को 3404 टेस्ट किए थे। अमरीका ने 1 मार्च तक 3600 टेस्ट किए थे। जबकि उसके पास 75,000 टेस्ट करने की क्षमता थी। यहां तक दोनों देश बराबर गति से चल रहे थे। 24 फरवरी को अहमदाबाद में राष्ट्रपति ट्रंप रैली के लिए आए थे। जबकि दुनिया भर में एडवाइज़री जारी हो गई थी। बड़े कार्यक्रम रद्द होने लगे थे। </p>

<p>महामारी या प्राकृतिक आपदा से लड़ने में अमरीका की तैयारी का कोई जवाब नहीं। वहां हर साल चक्रवाती तूफान आते रहते हैं। नुकसान बहुत कम होता है। अमरीका के पास सिस्टम है। लेकिन लापरवाही ने उसे मुश्किल में डाल दिया है।जब टेस्टिंग को लेकर अमरीका की तीव्र आलोचना हुई और न्यूयार्क में लोग मरने लगे तब जाकर अमरीका ने टेस्टिंग की नीति बदली। </p>

<p>आलोचना के दबाव में अमरीका ने टेस्टिंग की नीति बदली। पहले वह उन्हीं का सैंपल जांच रहा था जिनके लक्षण स्पष्ट थे। 30 मार्च तक भारत की भी यही नीति है। मेरे हिसाब से यह बिल्कुल ग़लत है। मजबूर होकर अमरीका को सीमित टेस्टिंग की नीति बदलनी पड़ी। 1 मार्च को जहां 3600 टेस्ट हुए थे वहीं अमरीका ने 27 मार्च तक 5,40,718 टेस्ट कर लिए। काफी देर हो गई। अमरीका में दुनिया में सबसे ज्यादा कोरोना के संक्रमित मरीज़ हो गए हैं। यहां लिखे जाने तक 1,64,253 केस पोज़िटिव पाए गए हैं और 3165 <br />
लोगों की मौत हो चुकी है। (<span style="color:#0000ff;"><strong>नोट- संक्रमित मरीज़ों की संख्या लगातार बदल रही है।)</strong></span></p>

<p>(<span style="color:#b22222;"><strong>यह लेख वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के फेसबुक पेज से लिया गया है।</strong></span>)</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Editor-Choice</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/why-india-is-not-able-to-do-fast-corona-tests-this-article-by-senior-journalist-ravish-kumar/article-1595</link>
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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2020 00:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shubham Mishra]]></dc:creator>
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                <title>कोरोना:एक दिन में बढ़ गए कोरोना के दस हज़ार मामले..आख़िर क्यों पिछड़ गया अमेरिका इस लड़ाई में-रवीश कुमार!</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या इटली और चीन से भी ज़्यादा हो गई..इस मामले पर देश के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने एक लेख लिखा है..पढ़े युगान्तर प्रवाह पर.!]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/senior-journalist-ravish-kumar-article-on-the-continuous-increase-in-the-number-of-corona-infected-patients-in-america/article-1575"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2020-03/1585307948.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>डेस्क</strong>:अमरीका में एक दिन में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों की संख्या 10,000 बढ़ गई है। इस छलांग से अमरीका चीन और इटली से भी आगे निकल गया है। अमरीका में संक्रमित मरीज़ों की संख्या 85,500 हो गई है। चीन में 81,782 मामले सामने आ चुके हैं और इटली में 80,589 मामले। चीन में 81,000 मामलों में से 74,000 ठीक हो चुके हैं। लेकिन अमरीका में करीब 86,000 केस में से 800 के आस-पास ही ठीक हुए हैं। ध्यान रखिएगा कि संक्रमित मरीज़ों की संख्या दुनिया भर में पल पल बदल रही है।</p>

<p><u><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/national/corona-virus-latest-update-the-number-of-corona-infected-patients-in-india-has-increased">ये भी पढ़े-कोरोना:भारत में लगातार बढ़ रही कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या से लोगों की चिंता बढ़ी..ये रहा आंकड़ा..!</a></strong></u></p>

<p>अमरीका में कोरोना से मरने वालों की संख्या में तेज़ी से उछाल आया है। न्यूयार्क में बुधवार को मरने वालों की संख्या 285 थी। अगले दिन बढ़कर 385 हो गई। यानि 24 घंटे में 100 लोग मर गए। अमरीका में मरने वालों की संख्या 1300 के आस-पास है। वहीं इटली में कोरोना से मरने वालों की संख्या 8200 हो गई है। </p>

<p>कितनी तेज़ी से कोरोना फैल रहा है इसका अंदाज़ा इस बात से मिलता है कि ठीक 7 दिन पहले अमरीका में 18,200 मामले थे। शुक्रवार यानि 27 तारीख की सुबह तक 82,100 हो गए। अब 86000 के करीब संख्या पहुंच गई है। लुसियाना प्रान्त में 7 दिन में ही 350 मामले बढ़कर 3000 हो गए। पूरे अमरीका में 7 दिन पहले कोरोना से मरने वालों की संख्या 241 थी। अब 1300 से अधिक हो गई है। यह रफ्तार डरा रही है कि अभी तक बीमारी के फैलने को लेकर जितने भी अनुमान जताये गए हैं कहीं वो सच न हो जाए। न्यूयार्क तो लाशों को दफ्नाने की तैयारी में लग गया है। इतनी लाशें हो जाएंगी कि कब्रिस्तान कम पड़ जाएंगे।</p>

<p><u><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/national/corona-virus-india-lockdown-modi-government-will-send-five-hundred-rupees-per-month-in-the-accounts-of-women-holding-jan-dhan-account">ये भी पढ़े-कोरोना:महिलाओं के खातों में प्रति माह 500 और इन लोगों को मिलेगा फ़्री गैस सिलेंडर..सरकार ने किया ऐलान..!</a></strong></u></p>

<p>कोरोना से संक्रमित मरीज़ों की संख्या में उछाल इसलिए आया है क्योंकि अमरीका अब जाकर टेस्ट करने लगा है। भारत और अमरीका की फरवरी और आधे मार्च तक आलोचना होती रही है कि दोनों देश कम टेस्ट कर रहे हैं। भारत तो अभी तक 35000 सैंपल टेस्ट नहीं कर सका है जबकि पिछड़ने के बाद भी अमरीका ने 5 लाख 52 हज़ार से अधिक टेस्ट कर लिए हैं। यही कारण है कि अमरीका में एक दिन में 10,000 मामले सामने आ गए। </p>

<p>टेस्ट करने से ही पता चलेगा कि किसके भीतर लक्षण है और किसके नहीं। यानि आप बीमारी को मरीज़ के स्तर पर ही रोक सकते हैं। अगर वो अनजान होकर घूमता रहा तो पूरे शहर में बांट आएगा। टेस्टिंग कम होने के कारण भारत में संख्या कम है। इसके बाद भी भारत में भी तेज़ी से यह फैलता ही जा रहा है। दोनों ही देशों में जनवरी, फरवरी और मार्च का आधा महीना गंवा दिया। ढाई महीने की देरी लोगों को भारी पड़ेगी। भारत में सरकार गिराई जा रही थी। अहमदाबाद में रैली हो रही थी। दंगे हो रहे थे और दंगे को लेकर हिन्दू मुस्लिम चल रहा था। आज न कल सभी भारतवासियों को जनवरी और फरवरी के महीनों में लौट कर देखना ही होगा कि वे और भारत सरकार क्या कर रही थीं। </p>

<p>अगर समय रहते बाहर से आने वाले लोगों की अमरीका में और भारत में टेस्ट कर ली गई होती तो आज दोनों मुल्कों को लाक डाउन नहीं करना पड़ता। सिस्टम की लापरवाही ने दोनों देशों के नागरिकों के जीवन को संकट में डाल दिया है। समय से पहले टेस्ट करने से बीमारी का पीछा किया जा सकता था। एयरपोर्ट पर ज्यादा से ज्यादा लाख से तीन लाख लोगों को टेस्ट करना पड़ता। उन्हें ट्रैक करना आसान था। लेकिन मार्च के पहले हफ्ते तक इस मामले में गंभीरता नहीं आई थी।</p>

<p>होना यह चाहिए था कि संदिग्धों को ट्रैक किया जाता और अस्पतालों को तैयार किया जाता। इस समय भारत और अमरीका के प्राइवेट और सरकारी अस्पताल पहले से ही भरे हुए हैं। इसलिए अस्पतालों पर इतना बोझ आ गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के एक अध्ययन के मुताबिक अमरीका को आने वाले दिनों में दस लाख वेंटिलेटर की ज़रूरत पड़ सकती है। हालत यह है कि अप्रैल के बाद इतने मरीज़ आ जाएंगे कि अस्पताल ही नहीं मिलेंगे। यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन की स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन के मुताबिक अमरीका में चार महीने में 80,000 लोग मर सकते हैं। अप्रैल से हर दिन 2300 लोग मरने लगेंगे। क्या ऐसे प्रोजेक्शन यानि अनुमान सही साबित होने जा रहे हैं? काश ग़लत हो जाएं।  </p>

<p>अमरीका और इटली की स्वास्थ्य व्यवस्था शानदार मानी जाती है। अमरीका में हेल्थ सेक्टर करीब-करीब पूरी तरह से प्राइवेट है। इटली की स्वास्थ्य व्यवस्था सरकारी है। जिसे दुनिया में श्रेष्ठ माना जाता है। एक अध्ययन के मुताबिक इसी खूबी के कारण वहां बुजुर्ग लोगों की संख्या ज्यादा है। एक कारण यह भी है इटली में मरने वालों में 70 प्रतिशत 80 साल के पार के हैं। </p>

<p>बहरहाल अमरीका ने भी अपनी तैयारी में लंबा वक्त गंवा दिया। जनवरी और फरवरी के महीने में भारत की तरह अमरीका भी कोरोना को लेकर चुटकुलाबाज़ी कर रहा था। जबकि ऐसी आपदाओं से लड़ने के लिए अमरीका का सिस्टम दुनिया में श्रेष्ठ माना जाता है। आपने देखा है कि कई चक्रवाती तूफानों के बीच अमरीका अपने नागरिकों के जान-माल का नुकसान कम से कम होने देता है। मगर लापरवाही और इस अति आत्मविश्वास ने अमरीका को घोर संकट में डाल दिया है। उसके पास दो ही रास्ते बचे हैं। अर्थव्यवस्था बचा ले या आदमी बचा ले। </p>

<p>न्यूयार्क में 24 घंटे के भीतर 100 लोगों की कोरोना वायरस से मौत हो गई है। बुधवार की सुबह कोरोना से मरने वालों की संख्या 285 थी। गुरुवार को 385 हो गई। यहां 37,258 लोगों को संक्रमण हो गया है। 5300 लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। इसमें से 1300 लोग वेंटिलेटर पर हैं। आने वाले दिनों में वेंटिलेटर की समस्या गंभीर होने वाली है क्योंकि कोरोना वायरस का मरीज़ लंबे समय के लिए वेंटिलेटर पर रहता है। इस दौरान सोचिए, दूसरी बीमारियों के मरीज़ों का क्या हाल होगा। उनकी मौत तो बिना इलाज के ही हो जाएगी।</p>

<p>भारत में भी लाखों वेंटिलेटर की ज़रूरत होगी। जब मैंने पहली बार अपने फेसबुक पेज पर वेंटिलेटर के बारे में  लिखा था तब आई टी सेल वाले गाली देने आ गए। आप जाकर सारे कमेंट पढ़ सकते हैं। ऐसे ही लोगों के कारण सरकार ढाई महीने खुशफहमी में रही। आज स्वास्थ्य सचिव लव अग्रवाल ने 40,000 वेंटिलेटर के आर्डर दिए हैं। पिछले हफ्ते उन्होंने बहुत ज़ोर देने के बाद कहा था कि 1200 आर्डर दिए गए हैं। 24 मार्च को भारत सरकार ने वेंटिलेटर के निर्यात पर रोक लगाई है। इन फैसलों से यही पता चलता है कि भारत सरकार को अब जाकर पता चल रहा है कि यह बीमारी कितनी भयावह हो सकती है। </p>

<p>आज देरी और लापरवाही के कारण अमरीका दो मोर्चे पर लड़ रहा है। अमरीकी नागरिकों की जान बचाए या उनके लिए अर्थव्यवस्था बचाए। 2 लाख करोड़ डॉलर का पैकेज भी पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। अमरीकी प्रान्त झगड़ रहे हैं कि उन्हें कम पैसे मिले हैं। वहां सरकार की संस्था ने ही बता दिया है कि 33 लाख लोगों की नौकरियां चली गई हैं। यह तब पता चला जब एक हफ्ते के भीतर 33 लाख लोगों ने सरकारी सहायता के लिए आवेदन कर दिया। 1982 में 7 लाख लोगों ने आवेदन किया था।  </p>

<p>भारत में भी केंद्र सरकार ने 1.70 लाख करोड़ के पैकेज का एलान किया है। इस पैकेज में शामिल कई कैटगरी की संख्या 3 करोड़ से लेकर 30 करोड़ है। इसे ही जोड़ लें तो भारत की 60 फीसदी आबादी प्रभावित नज़र आ रही है। </p>

<p>हम एक विचित्र मोड़ पर आ गए हैं। न वर्तमान सुरक्षित लग रहा है। न भविष्य का पता है। अतीत का कोई मतलब नहीं रहा।</p>

<p><span style="color:#b22222;"><strong>(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के फेसबुक पेज़ से लिया गया है इसमें दिए आंकड़ों के लिए युगांतर प्रवाह जिम्मेदार नहीं है।)</strong></span></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Editor-Choice</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2020 00:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shubham Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विश्व हिंदी दिवस विशेष:हिंदी परचम आज बुलंदी पर-पूतू!</title>
                                    <description><![CDATA[दस जनवरी को हर साल विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है।इस अवसर पर हिंदी भाषा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण व रोचक तथ्यों की जानकारी पढें युगान्तर पर...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/read-the-special-article-by-author-piyush-kumar-dwivedi-on-world-hindi-day/article-1241"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2020-01/1578672567.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>डेस्क</strong>:किसी भी देश की भाषा उस देश की संस्कृति संवाहिका होती है, जिसमें उस देश की अस्मिता निहित होती है । समृद्ध भाषा समृद्ध इतिहास की द्योतक है । हिन्दी भाषा हमारे देश के गौरवशाली अतीत को अपने अंक में समेटे हुए है । यह भाषा मात्र नहीं है अपितु सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक परिवर्तनों को प्रतिबिम्बित करने वाला दर्पण है । संवैैधानिक रूप से 14 सितम्बर 1949 को हिन्दी भाषा को भारत की राजभाषा के रूप में मान्यता प्रदान की गई किंतु इससे पूर्व हिन्दी मातृभाषा, जनपदी क्षेत्रीय भाषा, साहित्यिक भाषा और संपर्क भाषा के रूप में प्रचलित थी । हिन्दी भाषा में रामचरितमानस अमूल्य रत्न है जो किसी भी अन्य देश के साहित्य में मिलना दुर्लभ है । (<a href="https://www.yugantarpravah.com"><strong>world hindi day)</strong></a></p>

<p>आज हिन्दी वैश्विक परिधि को लाँघकर संपूर्ण संसार में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है । विश्व में केवल हिन्दी बोली ही नहीं जाती अपितु उसमें निरंतर अनुसंधान भी जारी हैं, इस समय भारत के अतिरिक्त विश्व के 176 उच्च शिक्षण संस्थानों में हिन्दी का अध्ययन-अध्यापन हो रहा है जिसमें 30 अमेरिकी विश्वविद्यालय हैं । विश्वव्यापी सर्वेक्षणों के अनुसार विश्व की विभिन्न प्रमुख भाषाओं की सांख्यिकीय स्थिति कुछ इस प्रकार है-फ्रेंच 1%, अरबी 1.5%, रुसी 2.5%, अंग्रेजी व स्पेनी 5%,चीनी (मंदारिन)13%,हिंदी 18%। भारतवर्ष में हिंदी का सर्वाधिक विशाल जनाधार है और संपूर्ण देश में लगभग 80% भारतीय जनसमुदाय हिन्दी बोल व समझ सकता है ।</p>

<p>हिन्दी को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाने के उद्देश्य से पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी से 14 जनवरी 1975 तक नागपुर में आयोजित किया गया था । इस सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के तत्वावधान में हुआ था । सम्मेलन से सम्बन्धित राष्ट्रीय आयोजन समिति के अध्यक्ष तत्कालीन उपराष्ट्रपति जी थे । राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अध्यक्ष श्री मधुकर राव चौधरी उस समय महाराष्ट्र के वित्त, नियोजन व अल्पबचत मन्त्री थे । पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन का बोधवाक्य 'वसुधैव कुटुम्बकम' था । सम्मेलन के मुख्य अतिथि मॉरीशस के प्रधानमन्त्री श्री शिवसागर रामगुलाम जी थे । प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन में 30 देशों के कुल 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस सम्मेलन में पारित किए गए प्रस्ताव में तीन बिंदु प्रमुख थे-</p>

<p>1.संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थान दिलाया जाए ।<br />
2.वर्धा में विश्व हिन्दी विद्यापीठ की स्थापना होनी चाहिए।<br />
3- विश्व हिन्दी सम्मेलनों को स्थायित्व प्रदान करने के लिये अत्यन्त विचारपूर्वक एक योजना बनायी जाए ।<br />
प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन आयोजन की यादों को अक्षुण्ण रखने के लिए 2006 में भारत के तत्कालीन प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी  को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाये जाने की घोषणा की थी । उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिंदी दिवस मनाया था । विश्व हिन्दी दिवस मनाने के कई लक्ष्य हैं जिसमें हिन्दी का सार्वभौमिक प्रचार-प्रसार करना, हिन्दी को अन्तरराष्ट्रीय भाषा के रूप में प्रस्तुत करना, हिन्दी के प्रति लगाव उत्पन्न करना आदि प्रमुख हैं ।<br />
आज का युग तकनीक का है, ऐसे में हिन्दी को वैश्विक स्तर पर ले जाने में अंतर्जाल का महत्वपूर्ण योगदान है । गूगल की मानें तो हिन्दी में इंटरनेट पर सामग्री पढ़ने वाले प्रतिवर्ष 94 फीसदी बढ़ रहे हैं जबकि अंग्रेजी में यह दर हर वर्ष 17 फीसदी घट रही है। गूगल के अनुसार 2021 तक इंटरनेट पर 20.1 करोड़ लोग हिन्दी का उपयोग करने लगेंगे । हिन्दी को विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार विश्व की 10 शक्तिशाली भाषाओं में से एक स्वीकार किया गया है । भारत के लगभग 60 करोड़ लोग हिन्दी भाषा बोलते हैं जिसमें 26 करोड़ लोगों की मातृभाषा हिन्दी है ।</p>

<p>इस तरह विश्व हिंदी दिवस हिन्दी भाषा और साहित्य की वैश्विक समृद्धता को परिलक्षित एवं रेखांकित करने का दिन है । हिन्दी बस हिंदुस्तान की नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व की भाषा है । इस दिवस को सफल बनाने में विश्व के कोने-कोने में बसे प्रवासी भारतीयों का महत्वपूर्ण योगदान है जिन्होंने विदेश में भी रहकर हिन्दी को अपनाकर स्वयं को जड़ों से संबद्ध किए हुए हैं ।</p>

<p><strong>(लेखक <a href="https://www.yugantarpravah.com">पीयूष कुमार द्विवेदी</a> 'पूतू</strong><strong>' जगद्गुरू रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय चित्रकूट में असिटेंट प्रोफेसर(हिंदी) हैं।)</strong></p>
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                                                            <category>Editor-Choice</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/read-the-special-article-by-author-piyush-kumar-dwivedi-on-world-hindi-day/article-1241</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Jan 2020 00:00:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shubham Mishra]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फ़तेहपुर:साध्वी का चुनावी परिणाम तय करेगा ज़िले के भाजपा नेताओं का सियासी भविष्य..योगी कैबिनेट में भी फेरबदल की संभावना.!</title>
                                    <description><![CDATA[फतेहपुर लोकसभा सीट पर पांचवे चरण के अंतर्गत बीते 6 मई को वोट डाले जा चुके हैं। प्रत्याशियों की जीत हार से ज्यादा भाजपा के स्थानीय नेताओं का भविष्य साध्वी की जीत हार पर आकर टिक गई है..पढ़े युगान्तर प्रवाह की एक्सक्लुसिव रिपोर्ट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/politics-uttar-prdedh-fatehpur-election-results-of-sadhvi-niranjan-jyoti-will-decide-the-political-future-of-the-bjp-leaders-of-the-district-possibility-of-alteration-in-the-yogi-adityanath-cabinet/article-413"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2019-05/1557500715.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">फतेहपुर</a></strong>: लोकसभा चुनावों के परिणाम सबसे ज़्यादा किसी राज्य में प्रभाव डालेंगे तो वह उत्तर प्रदेश है..पूर्ण बहुमत से सूबे की सत्ता में काबिज योगी और प्रदेश भाजपा पर 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 में हुए विधानसभा चुनावों का परिणाम दोहराने का अतिरिक्त दबाव पूरी तरह से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर दिख रहा है।लेक़िन सपा,बसपा ,रालोद के मजबूत गठबंधन से यूपी में भाजपा की स्थिति पहले जैसी तो कतई नहीं दिख रही है। पांच चरणों के समाप्त हुए चुनाव के बाद आ रहीं रिपोर्ट भी कुछ इस ओर इशारा कर रहीं हैं।</p>

<p><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/Editor-Choice/politics-uttar-pradesh-fatehpur-after-the-election-rally-of-union-home-minister-rajnath-singh-what-will-be-changed-internal-politics-of-bjp-for-sadhvi-niranjan-jyoti-will-all-be-united">यह भी पढ़े:फ़तेहपुर-राजनाथ सिंह की रैली के बाद क्या साध्वी के लिए एकजुट हो पाएगा भाजपा का क्षत्रिय कुनबा.?</a></strong></p>

<p>आज बात करते हैं फतेहपुर लोकसभा सीट की जहां भाजपा ने दूसरी बार केंद्रीय राज्यमंत्री व सांसद <strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">साध्वी निरंजन ज्योति</a></strong> को दोबारा मैदान में उतारा है। साध्वी का कद भाजपा के अंदर किसी बड़े नेता से कम नहीं है।हाल ही में <strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">प्रयागराज</a></strong> में आयोजित कुम्भ मेले में उन्हें निरंजनी अखाड़ा का महामंडलेश्वर भी बनाया गया था।जिसके बाद उनके कद में और बढ़ोत्तरी हो गई है।इसके अलावा भाजपा के अंदर निषाद बिरादरी का एक बड़ा चेहरा मानी जाने वाली साध्वी भाजपा की स्टार प्रचारक भी हैं जो देश भर में चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशियों के लिए जनसभाओं और रोड शो के जरिए वोट की अपील भी कर रहीं हैं।ऐसे में साध्वी का फतेहपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना इस सीट को देश की वीआईपी सीटों की पंक्ति में लाकर खड़ा कर देता है। पर क्या साध्वी 2014 की तरह इस बार भी अपना प्रदर्शन दोहराने में सफ़ल हो पाई हैं।ये तो आगामी 23 मई को ही पता चल पाएगा। लेक़िन इतना तो जरूर तय है कि साध्वी की जीत या हार ज़िले में कई शीर्ष भाजपा नेताओं का सियासी भविष्य भी तय करेगा।</p>

<p><span style="color:#a52a2a;"><strong>साध्वी की जीत से कुछ का बढ़ेगा कद तो हार तय कर देगी कुछ का भविष्य...</strong></span></p>

<p>पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा द्वारा साध्वी निरंजन ज्योति को <strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">फतेहपुर लोकसभा सीट</a></strong> का प्रत्याशी घोषित करना एक बारगी सबको चौकानें वाला निर्णय लगा था।आपको बतादें कि निरंजन ज्योति <strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">हमीरपुर</a></strong> की सदर विधानसभा से 2012 में चुनाव जीत विधायक बनी थीं और उस समय तक साध्वी की गिनती भाजपा के अंदर एक औसत दर्जे के स्थानीय नेता से ज्यादा कुछ नहीं थी ऐसे में फतेहपुर लोकसभा क्षेत्र से उनका प्रत्याशी घोषित होना सबको हैरान करने वाला था लेक़िन जातीय समीकरण में फ़िट बैठीं तत्कालीन हमीरपुर सदर विधायक को भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने ज़िले के कद्दावर भाजपा नेताओं में वरीयता दे चुनाव लड़ाया और उन्होंने मोदी लहर के साथ-साथ तगड़ा जनसमर्थन हासिल कर लोकसभा का चुनाव भी जीता जिसके बाद उनको मोदी मंत्रीमण्डल में भी जगह मिली और धीरे-धीरे वह भाजपा की एक बड़ी नेता बनकर उभरी।</p>

<p><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/politics/uttar-pradesh-azamgarh-sp-has-canceled-the-public-meetings-of-akhilesh-yadav-last-day-six-phase-loksabha-election-district-collector-sivakant-dwivedi-told-the-whole-matter">यह भी पढ़े:अखिलेश यादव की जनसभाओं को सपा ने ख़ुद रद्द करवाया-डीएम ने बताया पूरा मामला.!</a></strong></p>

<p>लेक़िन मौजूदा लोकसभा चुनाव में साध्वी के टिकट पर संकट के बादल मंडरा रहे थे और कई भाजपा जनप्रतिनिधियों ने सीधे तौर पर साध्वी के टिकट का विरोध दिल्ली तक किया और ऐसी अटकलें भी जोर पकड़ने लगीं थीं की शायद इस बार भाजपा साध्वी का टिकट काटकर हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र या और किसी दूसरे क्षेत्र से प्रत्याशी बना दे लेक़िन ऐसा नहीं हुआ और एक बार फ़िर जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने उनको फतेहपुर से मैदान में उतार दिया। ऐसे में टिकट के दावेदार कई नेता अंदरखाने साध्वी से नाखुश हो गए। चुनाव के बीच में ही सूत्रों के हवाले से ऐसी भी खबरें आईं की चुनाव प्रचार के दौरान खागा आए सीएम <strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">योगी</a></strong> ने विधायकों के जमकर पेंच कसे थे औऱ यह भी कहा था कि साध्वी के परिणाम की समीक्षा विधानसभावार होगी ऐसे में यदि किसी भी विधायक के क्षेत्र से विधानसभा चुनाव 2017 के मुकाबले इस बार साध्वी को मिलने वाले वोट संतोषजनक नहीं रहे तो यूपी की कैबिनेट सहित आगामी विधानसभा चुनाव में भी टिकट को लेकर व्यापक फेरबदल किया जा सकता है।</p>

<p><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/politics/uttar-pradesh-fatehpur-what-is-the-present-equation-of-the-district-after-lok-sabha-elections-fifth-phase-who-will-become-the-mp-of-fatehpur-loksabha-consitoncy">यह भी पढ़े:फतेहपुर-वोटिंग के बाद क्या कहता है लोकसभा क्षेत्र का मौजूदा समीकरण किसके सिरपर सजेगा ताज.?</a></strong></p>

<p>अब देखना यह होगा कि योगी के आदेश का असर विधायकों पर कितना हुआ है। इसके अलावा यदि ज़िले का परिणाम भाजपा के अनुकूल नहीं रहता है तो जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं।</p>

<p><span style="color:#b22222;"><strong>साध्वी अगर लोकसभा चुनाव जीतती हैं तो जिले की क्या स्थिति बनेगी.?</strong></span></p>

<p>साध्वी के साथ भाजपा के कुछ विधायक और एक अन्य जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि पूरे चुनाव में साध्वी के साथ नज़र आए हैं जिसका कारण यह था कि कुछ को साध्वी की जीत में अपने लिए विधानसभा का टिकट नज़र आ रहा है तो कुछ को योगी मंत्रीमंडल में मंत्री का पद दिख रहा है। और लगभग यह तय भी हो चुका है इस बार साध्वी के परिणाम काफ़ी हद तक ज़िले के भाजपा नेताओं का सियासी भविष्य तय कर देंगे...</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Editor-Choice</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/politics-uttar-prdedh-fatehpur-election-results-of-sadhvi-niranjan-jyoti-will-decide-the-political-future-of-the-bjp-leaders-of-the-district-possibility-of-alteration-in-the-yogi-adityanath-cabinet/article-413</link>
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                <pubDate>Fri, 10 May 2019 05:30:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
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                <title>Editor Choice:'ख़ाक भी जिस जमीं की पारस है, शहर मशहूर यह बनारस है'..मोक्ष नगरी में मोदी का मायावी संसार.!</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी लोकसभा सीट में बीते दो तीन दिनों के अंदर मचे सियासी घमासान पर देश के वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी का क्या है नजरिया..पढ़े युगान्तर प्रवाह के इस सम्पादकीय लेख में बनारस की पूरी कहानी..]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/uttar-pradesh-varanasi-renowned-senior-journalist-of-the-country-punya-prasun-bajpayee-has-given-the-entire-story-of-varanasi-in-its-own-words-in-which-the-current-political-situation-is-mentioned/article-390"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2019-05/1556784112.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>संपादकीय</strong>:<strong>(<a href="http://www.yugantarpravah.com"><span style="color:#b22222;">पुण्य प्रसून वाजपेयी</span></a>): </strong>खाक भी जिस ज़मी की पारस है, शहर मशहूर यह बनारस है। तो क्या बनारस पहली बार उस राजीनिति को नया जीवन देगा जिस पर से लोकतंत्र के सरमायेदारों का भी भरोसा डिगने लगा है। फिर बनारस तो मुक्ति द्वार है । और संयोग देखिये वक्त ने किस तरह पलटा खाया जो बनारस 2014 में हाई प्रोफाइल संघर्ष वाली लोकसभा सीट थी , 2019 में वही सीट सबसे फिकी लडाई के तौर पर उभर आई  । जी, देश के सबसे बडे ब्रांड अंबेसडर के सामने एक ऐसा शख्स खडा हो गया जिसकी पहचान रोटी - दाल से जुडी है ।</p>    <p><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/Editor-Choice/article-written-by-rajendra-singh-over-cleanliness-of-the-Ganga-has-become-more-dirty-than-before">यह भी पढ़े:गंगा जी के साथ मोदी सरकार ने किया धोखा,पहले से और मैली हो गईं हैं-जलपुरुष राजेंद्र सिंह.!</a></strong></p>    <p>यानी चाहे अनचाहे नरेन्द्र मोदी का ग्लैमर ही काफूर हो गया जो सामने तेज बहादुर खडा हो गया । राजनीतिक तौर पर इससे बडी हार कोई होती नहीं है कि राजा को चुनौती देने के लिये राजा बनने के लिये वजीर या विरोधी नेता चुनौती ना दे बल्कि जनता से निकला कोई शख्स आ खडा हो जाये , और कहे मुझ राजा नहीं बनना है । सिर्फ जनता के हक की लडाई लडनी है ।  तो फिर राजा अपने औरे को कैसे दिखाये और किसे  दिखाये । कयोकि राजा की नीतियो से हारा हुआ शख्स ही राजा को चुनौती देने खडा हुआ है तो फिर राजा के  चुनावी जीत के लिये प्रचार  की हर हरकत अपनी जनता को हराने वाली होगी । जो जनता की नहीं राजा की हार होगी । और ये सच राजा समझ गया तो व्यवस्था ही ऐसी कर दी गई कि जनता से निकला शख्स सामने खडा ही ना हो पाये ।</p>    <p>तो सूखी रोटी और पानी वाले दाल की लडाई करने वाले तेजबहादुर का पर्चा ही उस चुनाव आयोग ने खारिज क दिया जो खुद राजा के रहनुमा पर जी रहा है । तो क्या ये मान लिया जाये कि ये बनारस की ही महिमा है जिसने मुक्ति द्वार खोल दिया है और मोक्ष के संदेश देने लगा है । क्योकि बनारस को पुराणादि ग्रंथो के आसरे परखियेगा तो पुराणकार बताते है कि काशी तीनो लोकों में पवित्रतम स्थान रखती है , ये आकाश में स्थित है तछा मर्त्यलोक से बाहर है....</p>    <blockquote>  <p><strong><span style="color:#b22222;">वाराणसी महापुण्या त्रिषुलोकेषु विश्रुता । / अन्तरिक्षे पुरी सा तु मर्त्यलोक बाह्रात ।।<br />  हे पार्वती ! तीनो लोको का सार मेरी काशी सदा धन्य है : वाराणसीति भुवनत्रयसारभूता धन्या सदा ममपुरी गिरिराजपुत्री</span></strong></p>  </blockquote>    <p><img alt="" src="https://www.yugantarpravah.com/media/2019-05/img-20190502-wa0007.jpg" style="height:227px;width:330px;"></img></p>    <p>लेकिन <a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>बनारस</strong></a> तो सियासी छल कपट । घोखा फरेब की सियासत में इस तरह जा उलझी है । जहा राजा एक राज्य  संभालते हुये चुनावी दस्तावेज में खुद को अविवाहित बताता है । लेकिन देश संभालने के वक्त खुद को विवाहित बताता है । शिक्षा करत हुये मिलने वाली डिग्री भी चुनाव दर चुनाव बदलती है । लेकिन राजा तो राजा है । इसलिये <a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>वसंतसेना</strong></a> भी जब पांच बरस में ग्रेजुएट से बारहवी पास हो जाती है तो भी  चुनाव आयोग को कुछ गलत नहीं लगता ।</p>    <p>और तो और देश भर में चुनाव लडने वालो में 378 उम्मीदवार आपराधी या भ्रष्ट्राचर के दायरे में है , लेकिन लोकतंत्र ऐसी खुली छूट देता है कि चुनाव आयोग उन्हे छू भी नहीं पाता । लेकिन जनता से निकला <a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>तेजबहादुर</strong></a> जब राजा की नीतियो पर रोटी का सवाल उठाकर शिंकजा कसता है तो पहले नौकरी से बर्खास्गी फिर लोकतंत्र की परिभाषा तले  चुनाव लडने पर ही रोक लगाने में समूचा अमला लग जाता है । जिससे राजा को कोई परेशानी ना हो कि आखिर वह जनता को क्या कहगा ...जनता को हरा दो । मुस्किल है । तो फिर राजा काशी की महत्ता उसके सच को क्या जाने ।</p>    <p><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/politics/varanasi-the-reason-behind-the-cancellation-the-nomination-of-sp-candidate-tej-bahadur-is-being-mentioned-but-the-tej-bahadur-is-calling-it-the-dictatorship-of-modi">यह भी पढ़े:वारणसी तेजबहादुर का नामांकन रद्द होने के पीछे ये वज़ह बताई जा रही है लेकिन तेजबहादुर इसे मोदी की तानाशाही बता रहे हैं.!</a></strong></p>    <p>वह तो आस्था को चुनावी भावनाओ की थाली में समेट पी लेना चाहता है । तभी तो काशी की पहचान को ही बदल दिया जाता है । ऐसे में  काशी की  वरुणा और अस्सी नदी तो दूर गंगा तक ठगा जा रहा है तो फिर अतित की काशी को कौन परखे कैसे परखे । एक वक्त माना तो ये गया कि वरुणा और अस्सी नदियो के बीच स्थित बनारस में स्नान , जप , होम, मरण और देवपूजा सभी अक्षय होते है । लेकिन गंगा का नाम लेकर सियासत इन्हे भूल गई और गंगा की पहचान बनारस में है क्या इस समझ को भी सत्ता सियासत समझ नहीं पायी । बनारस में गंगा का पानी भक्त कभी घर नहीं ले जाते । क्योकि बनारस में तो गंगा भी मुक्ति द्वार है ।</p>    <p>काशी के प्रति लोगो में आस्था इस हद तक बढी कि लोग विधानपूर्वक आग में जलकर और गंगा में कूदकर प्राण देने लगे , जिससे कि मृतात्मा सीधे शिव के मुख में प्रवेश कर सके । उन्नीसवी सदी तक लोग मोक्ष पाने के विचार से , यहा गंगा में गले में पत्थर बांधकर डूब जाते थे । आज भी इस विचार को समेटे लोगो के बनारस पहुंचने वाले कम नहीं है । लेकिन अब तो इक्किसवी सदी है । और गंगा मुक्ति नहीं माया का मार्ग है । इसीलिए तो बनारस की सड़कों पर मु्कित नहीं सत्ता का द्वार खोजने के लिये जब तीन लाख से ज्यादा लोगो को नरेन्द्र मोदी के प्रचार क लिये लाया गया और गंगा को समझे बगैर , बनारस की महत्ता जाने बगैर अगर मेहनताना लेकर सभी राजा के लिये नारा लगाते हुये आये और खामोशी से लोट गये तो फिर चाहे अनचाहे भगवान बुद्द याद आ ही जायेगें । भगवान बुद्द भी अपने धर्म का प्थम उपदेश देने सबसे पहले बनारस ही आये थे । उन्होने कहा था....</p>    <blockquote>  <p><strong><span style="color:#b22222;">भेदी नादयितुं धर्म्या काशी गच्छामि साम्प्रतम ।<br />  न सुखाय न यशसे आर्तत्राणाय केवलम् ।।</span></strong></p>  </blockquote>    <p><img alt="" src="https://www.yugantarpravah.com/media/2019-05/img-20190502-wa0006.jpg" style="height:186px;width:330px;"></img></p>    <p>यानी धर्मभेरी बजाने के लिये इस समय मै काशी जा रहा हूं - न सुख के लिये और न यश के लिये, अपितु केवल आर्तो की रक्षा के लिये । तो हालात कैसे बिखरे है संस्कृति कैसे बिखरी है इसलिये बनारस की पहचान अब खबरो के माध्यम से जब परोसी जाती है तो चुनावी बिसात पर  बनारस की तहजीब, बनारस का संगीत , बनारस का जायका या फिर बनारस की मस्ती को खोजने में लगत है । और काशी की तुलना में <a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>दिल्ली</strong></a> को ज्यादा पावन बताने में कोई कोताही भी नहीं बरतता है ।</p>    <p> लेकिन 2019 में नरेन्द्र मोदी और तेज बहादुर का सियासी अखाड़ा बनारस बना तो फिर बनारस या तो बदल रहा है या फिर बनारस एक नये इतिहास को लिखने के लिये राजनीतिक पन्नों को खंगाल रहा है। बनारस से महज १५ कोस पर सारनाथ में जब गौतम बुद्द ने अपने ज्ञान का पहला पाठ पढ़ा, तब दुनिया में किसी को भरोसा नहीं था गौतम बुद्द की सीख सियासतों को नतमस्तक होना भी सिखायेगी और आधुनिक दौर में दलित समाज सियासी ककहरा भी बौध धर्म के जरीये ही पढेगा या पढ़ाने की मशक्कत करेगा।</p>    <p><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/Editor-Choice/General-reservation-Bill-related-to-reservation-for-ten-percent-of-the-upper-castes-has-been-passed-in-both-Houses-of-Parliament-but-will-it-be-possible-to-become-unemployed">यह भी पढ़े सवर्ण आरक्षण-गंजों के शहर में कंघियाँ बेच गए मोदी जी.!</a></strong></p>    <p><a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>गौतम बुद्ध</strong></a> ने राजपाट छोडा था। मायावती ने राजपाट के लिये बुद्द को अपनाया। इसी रास्ते को रामराज ने <a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>उदितराज</strong></a> बनकर बताना चाहा और समाजवादी पार्टी  ने तो गौतम बुद्द की थ्योरी को सम्राट अशोक की तलवार पर रख दिया। सम्राट अशोक ने बुद्दम शरणम गच्छामी करते हुये तलवार रखी और अखिलेश यादव ने तेजबहादुर के निर्दलिय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरन के बाद समझा कि समाजवादी बनाकर संघर्ष करवा दिया जाये तो सियासत साधी जा सकती है । तो <a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>अखिलेश</strong></a> ने सत्ता गच्छामी करते हुये सियासी तलवार भांजनी शुरु की। पर बनारस तो मुक्ति पर्व को जीता रहा है फिर यहा से सत्ता संघर्ष की नयी आहट <a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>नरेन्द्र मोदी</strong></a> ने क्यो दी।</p>    <p>मोक्ष के संदर्भ में काशी का ऐसा महात्म्य है कि प्रयागगादु अन्य तीर्थो में मरने से अलोक्य, सारुप्य तथा सानिद्य मुक्ती ही मिलती है और माना जाता है कि सायुज्य मुक्ति केवल काशी में ही मिल सकती है। तो क्या सोमनाथ से विश्वनाथ के दरवाजे पर दस्तक देने नरेन्द्र मोदी 204 में  इसलिये पहुंचे कि विहिप के अयोध्या के बाद मथुरा, काशी के नारे को बदला जा सके। या फिर संघ परिवार रामजन्मभूमि को लेकर राजनीतिक तौर पर जितना भटका, उसे नये तरीके से परिभाषित करने के लिये मोदी को काशी चुनना पड़ा। लेकिन 2019 में जिस तरह काशी को मोदी ने सियासी तौर पर आत्मसात कर लिया है उसमें मोदी कहीं भटके नहीं है । क्योंकि काशी को तो हिन्दुओं का काबा माना गया। याद कीजिये गालिब ने भी बनारस को लेकर लिखा,</p>    <blockquote>  <p><a href="http://www.yugantarpravah.com"><span style="color:#b22222;"><strong> "  तआलल्ला बनारस चश्मे बद्दूर, बहिस्ते खुर्रमो फिरदौसे मामूर, इबादत खानए नाकूसिया अस्त, हमाना काबए हिन्दोस्तां अस्त। "</strong></span></a></p>  </blockquote>    <p> यानी हे परमात्मा, बनारस को बुरी दृष्टि से दूर रखना, क्योंकि यह आनंदमय स्वर्ग है। यह घंटा बजाने वालों अर्थात हिन्दुओ का पूजा स्थान है, यानी यही हिन्दुस्तान का काबा है।  तो फिर तेज बहादुर यहां क्यों पहुंचे। क्या तेज बहादुर काशी की उस सत्ता को चुनौती देने पहुंचे हैं, जिसके आसरे धर्म की इस नगरी को बीजेपी अपना मान चुकी है। या फिर तेजबहादुर के अक्स तले अखिलेश यादव को लगने लगा है कि राजनीति सबसे बड़ा धर्म है और धर्म सबसे बड़ी राजनीति। संघ परिवार धर्म की नगरी से दिल्ली की सत्ता पर अपने राजनीतिक स्वयंसेवक को देख रहा है। और अखिलेश यादव , तेजबहादुर यादव के जरीये <a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>काशी</strong></a> में नैतिक जीत से दिल्ली की त्रासदी से मुक्ति चाहने लगे ।  तो क्या सबे प्रचिन नगरी कासी को ही सियासत पंचतंत्र की कहानियो में तब्दिल करना चाहती है जिससे यहा की सासंकृतिक महत्ता खत्म हो जाये । क्योकि  बनारस की राजनीतिक बिसात का सच भी अपने आप में चुनौतीपूर्ण है।</p>    <p><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/Editor-Choice/politics-uttar-pradesh-fatehpur-after-the-election-rally-of-union-home-minister-rajnath-singh-what-will-be-changed-internal-politics-of-bjp-for-sadhvi-niranjan-jyoti-will-all-be-united">यह भी पढ़े: फ़तेहपुर-राजनाथ सिंह की रैली के बाद क्या साध्वी के लिए एकजुट हो पाएगा भाजपा का क्षत्रिय कुनबा.!</a></strong></p>    <p>क्योंकि जितनी तादाद यहां <a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>ब्राह्मण</strong></a> की है, उतने ही मुसलमान भी हैं। करीब ढाई-ढाई लाख की तादाद दोनों की है। पटेल डेढ़ लाख तो यादव एक लाख है और जायसवाल करीब सवा लाख। मारवाडियों की तादाद भी ४० हजार है। इसके अलावा मराठी, गुजराती, तमिल , बंगाली, सिख और राजस्थानियों को मिला दिया जाये तो इनकी तादाद भी डेढ लाख से उपर की है। तो 17 लाख वोटरों वाले काशी में मोदी का शंखनाद गालिब की तर्ज पर हिन्दुओं का काबा बताकर मोदी का राजतिलक एक बार फिर कर देगा या फिर काशी को चुनौती देने वाले कबीर से लेकर भारतेन्दु की तर्ज पर तेजबहादुर की चुनौती स्वीकार करेगा। क्योंकि गालिब बनारस को लेकर एकमात्र सत्य नहीं है। इस मिथकीय नगर की धार्मिक और आध्यात्मिक सत्ता को चुनौतिया भी मिलती रही हैं।</p>    <p>ऐसी पहली चुनौती १५ वी सदी में कबीर से मिली। काशी की मोक्षदा भूमि को उन्होंने अपने अनुभूत-सच से चुनौती दी और ऐसी बातों को अस्वीकार किया। उन्होंने बिलकुल सहज और सरल ढंग से परंपरा से चले आते मिथकीय विचारों को सामने रखा और बताया कि कैसे ये सच नहीं है। अपने अनुभव ज्ञान से उन्होने धार्मिक मान्यताओं के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया, जो एक ओर काशी की महिमा को चुनौती देता था तो दूसरी ओर ईश्वर की सत्ता को। उन्होंने दो टूक कहा-जो काशी तन तजै कबीरा। तो रामहिं कौन निहोरा। यह ऐसी नजर थी , जो किसी बात को , धर्म को भी , सुनी -सुनायी बातो से नहीं मानती थी। उसे पहले अपने अनुभव से जांचती थी और फिर उस पर भरोसा करती थी।<br />  काशी का यह जुलाहा कबीर कागद की लेखी को नहीं मानता था, चाहे वह पुराण हो या कोई और धर्मग्रंथ। उसे विश्वास सिर्फ अपनी आंखो पर था। इसलिये कि आंखों से देखी बातें उलझाती नहीं थी…तू कहता कागद की लेखी, मै कहता आंखन की देकी। मै कहता सुरझावनहरी, तू देता उरझाई रे।</p>    <p>वैसे बनारस की महिमा को चुनौती तो <a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>भारतेन्दु</strong></a> ने १९ वी सदी में भी यह कहकर दी…..<a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>देखी तुमरी कासी लोगों , देखी तुमरी कासी। जहां बिराजे विस्वनाथ , विश्वेश्वर जी अविनासी।</strong></a> ध्यान दें तो बनारस जिस तरह २०१४ का सियासी अखाडा बन रहा था 2019 के हालात ठीक उसके उलट है । 2014 में नेताओ के कद टकरा रह थे । 2019 में जनता के कद के आगे राजा का बौनापन है जो बनारस को जीता है और जीत भी सकता है । यानी 2014 में  सियासी आंकड़े में कूदने वाले राजनीति के महारथियो को जैसे जैसे बनारस के रंग में रंगने की सियासत भी शुरु हुई है। वह ना तो बनारस की संस्कृति है और ना ही बनारसी ठग का मिजाज।</p>    <p>लेकिन अब तो वाकई काशी की जमीन पर गंवई अंदाज में काशी मे मुक्ति का सवाल है । और मुक्ति जीत पर भारी है । इसे दिल्ली का राजा चाहे ना समझे लेकिन काशी वासी समझ चुके है । पर उनकी समझ को भी राजा अपने छाती पर तमगे में टांगना चाहता है । पर राजा ये नहीं जानता कि काशी को जीत कर वह हार रहा है क्योकि राजा का लक्ष्य तो अमेरिका है । और बनारस को बिसमिल्ला खां के दिल को जीता है ।</p>    <p><a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>बिस्मिल्ला खां</strong></a> ने अमेरिका तक में बनारस से जुड़े उस जीवन को मान्यता दी, जहां मुक्ति के लिये मुक्ति से आगे बनारस की आबो हवा में नहाया समाज है। शहनाई सुनने के बाद आत्ममुग्ध अमेरिका ने जब बिस्मिल्ला खां को अमेरिका में हर सुविधा के साथ बसने का आग्रह किया तो बिस्मिल्ला खां ने बेहद मासूमियत से पूछा, सारी सुविधा तो ठीक है लेकिन गंगा कहा से लाओगे। और बनारस का सच देखिये। गंगा का पानी हर कोई पूजा के लिये घर ले जाता है लेकिन बनारस ही वह जगह है जहा से गंगा का पानी भरकर घर लाया नहीं जाता ।</p>    <p>तो ऐसी नगरी में मोदी  किसे बांटेंगे या किसे जोड़ेंगे। वैसे भी घंटा-घडियाल, शंख, शहनाई और डमरु की धुन पर मंत्रोच्चार से जागने वाला बनारस आसानी से सियासी गोटियो तले बेसुध होने वाला शहर भी नहीं है। बेहद मिजाजी शहर में गंगा भी चन्द्राकार बहती है बनारस हिन्दु विश्वविघालय के ३५ हजार छात्र हो या काशी विघापीठ और हरिश्चन्द्र महाविघालय के दस -दस हजार छात्र। कोई भी बनारस के मिजाज से इतर सोचता नहीं और छात्र राजनीति को साधने के लिये भी बनारस की रंगत को आजमाने से कतराता नहीं। फिर बनारस आदिकाल से शिक्षा का केन्द्र रहा है और अपनी इस विरासत को अब भी संजोये हुये हैं।</p>    <p>ऐसे में सेना के जवान हाथो में सूखी रोटिया और पानी की दाल का सच दिखाकर पहचान पाये है तो दूसरी तरफ <a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>गुजरात</strong></a> के राजधर्म और दिल्ली के लोकतंत्र पर चढाई कर नरेन्द्र मोदी बनारस में है । मोदी  की बिसात पर बनारसी मिजाज प्यादा हो नहीं सकता और  तेज बहादुर सियासी बिसात पर चाहे प्यादा साबित हो खारिज कर दिये गये लेकिन बनारसी मिजाज तो उन्हे मोक्ष दे रहा है । क्योकि मोदी वजीर बनने के लिये लालालियत है  और तेज बहादुर मुक्ति पाने की छटपटाहट में बनारस पहुंचे है । तो फिर बनारस का रास्ता जायेगा किधर। नजरें सभी की इसी पर हैं। क्योंकि बनारस की बनावट भी अद्भुत है….यह आधा जल में है । आधा मंत्र में है । आधा फूल में है । आधा शव में है । आधा नींद में है। आधा शंख में है । और काशी का आखरी सच यही है कि यहा सूई की नोंक भर भी स्थान नहीं है , जहा जाने वाले को मोक्ष ना मिले । और मोक्ष में लिंग जाति वर्ण वर्ग का कोई भेद नहीं होता । तो आप तय किजिये मोक्ष किसे मिलेगा या किसे मिलना चाहिये ।</p>    <p><strong> (लेखक देश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार हैं यह इनके विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Editor-Choice</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/uttar-pradesh-varanasi-renowned-senior-journalist-of-the-country-punya-prasun-bajpayee-has-given-the-entire-story-of-varanasi-in-its-own-words-in-which-the-current-political-situation-is-mentioned/article-390</link>
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                <pubDate>Thu, 02 May 2019 05:30:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ़तेहपुर:राजनाथ सिंह की रैली के बाद क्या साध्वी के लिए एकजुट हो पाएगा भाजपा का क्षत्रिय कुनबा.?</title>
                                    <description><![CDATA[शनिवार को ज़िले के गाजीपुर क़स्बे में हुई केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की रैली के बाद क्या भाजपा के स्थानीय क़द्दावर क्षत्रिय नेता साध्वी के लिए एकजुट हो पाएंगे...पढ़े युगान्तर प्रवाह की यह एक्सक्लुसिव रिपोर्ट.?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/politics-uttar-pradesh-fatehpur-after-the-election-rally-of-union-home-minister-rajnath-singh-what-will-be-changed-internal-politics-of-bjp-for-sadhvi-niranjan-jyoti-will-all-be-united/article-369"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2019-04/1556395923.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">फतेहपुर</a></strong>: पांचवें चरण के चुनावों के लिए सभी पार्टियों का प्रचार प्रसार अपनी चरम सीमा है। सभी पार्टियों के प्रत्याशी अपनी अपनी पार्टियों के सभी बड़े नेताओं को अपने चुनावी क्षेत्र में बुलाकर जनसभाओं के ज़रिए अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हुए हैं।</p>

<p><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/politics/politics-uttar-pradesh-bhadohi-bjp-candidate-ramesh-kumar-bind-controversial-and-conflicting-remarks-on-brahmins-speech-said-i-beat-the-brahmins">यह भी पढ़े:भाजपा प्रत्याशी रमेश कुमार बिंद के विवादित बोल कहा ब्राह्मणों को मरवाता और पिटवाता हूँ.!</a></strong></p>

<p>इसी क्रम में शनिवार को ज़िले में आए केंद्र की मौजूदा सरकार में गृहमंत्री व भाजपा के दिग्गज नेता <strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">राजनाथ सिंह</a></strong> ने गाजीपुर क़स्बे में आयोजित जनसभा में शिरकत कर पार्टी प्रत्याशी साध्वी निरंजन ज्योति के लिए वोट की अपील की। वैसे तो राजनाथ सिंह ने इस रैली के माध्यम से भाजपा के प्रमुख चुनावी मुद्दे राष्ट्रवाद पर ही फ़ोकस किया परंतु सिंह की इस रैली को जिले में भाजपा के भीतर ही उतपन्न मौजूदा सियासी हालातों से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>

<p><strong><span style="color:#b22222;">आख़िर राजनाथ सिंह की क्यों पड़ी ज़रूरत..?</span></strong></p>

<p>मोदी लहर में साल 2014 का चुनाव जीतकर लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में पहुंची ज़िले की मौजूदा सांसद <strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">साध्वी निरंजन ज्योति</a></strong> इस बार के चुनाव में भी फतेहपुर लोकसभा सीट से मैदान में हैं। परन्तु मौजूदा वक़्त के हालातों को देखते हुए साध्वी की राह 2014 के मुकाबले इस बार के चुनाव में चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।जहाँ एक ओर <strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">सपा बसपा</a></strong> का गठबंधन हो जाने से साध्वी को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं दूसरी ओर सूत्रों की माने तो भाजपा के अंदर ही कुछ स्थानीय विधायकों का पूरे मन से साध्वी को सपोर्ट न करना अपने आप मे साध्वी के लिए दोहरी मुसीबत पैदा किए हुए है।</p>

<p><strong><a href="https://www.yugantarpravah.com/Story/politics/uttar-pradesh-fatehpur-senior-bjp-leader-suresh-gangwar-who-reached-the-helipad-to-welcome-congress-general-secretary-priyanka-gandhi-pictures-viral">यह भी पढ़े: प्रियंका गांधी का स्वागत करने हेलीपैड पहुंचे वरिष्ठ भाजपा नेता..तस्वीरें वायरल.!</a></strong></p>

<p>ग़ौरतलब है कि साध्वी के सांसद बनने के बाद से ही भाजपा के एक स्थानीय विधायक से सांसद की कई मुद्दों पर अलग राय रखने से दोनों का आपस में विरोध पूरे पाँच साल लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा है। लेक़िन पिछले कुछ समय से यह विरोध तब औऱ ज्यादा दिखने लगा जब वही विधायक मौजूदा लोकसभा चुनाव में टिकट की रेस में बहुत ऊपर तक निकल गए पर शीर्ष नेतृत्व ने साध्वी पर ही भरोसा जता उन्हें दोबारा चुनावी मैदान में उतार दिया।इसके साथ ही एक अन्य स्थानीय विधायक का अपने पुत्र के लिए लोकसभा का टिकट मांगना भी लोगों के बीच चर्चा का केंद्र रहा।</p>

<p><br />
सूत्रों की माने तो दोनों स्थानीय विधायकों ने साध्वी को इस बार टिकट दिए जाने का ऊपर तक पुरजोर विरोध किया था परन्तु शीर्ष नेतृत्व ने साध्वी पर ही भरोसा जता उन्हें मैदान में उतार दिया।जिसके बाद से दोनों ने साध्वी के चुनाव से पर्याप्त दूरी बना ली थी।ऐसे बिगड़े हालातों के बीच <strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">पीएम मोदी</a></strong> का ज़िले में दौरा भी न होना साध्वी की मुश्किलें बढ़ाने वाला था।जिसके बाद से साध्वी किसी भी क़ीमत पर राजनाथ सिंह को ज़िले में लाकर बिगड़े हुए चुनावी समीकरण को दुरुस्त करने की कोशिश में थी आखिरकार वह सफ़ल हुई और गृहमंत्री ने गाजीपुर क़स्बे में पहुंच भाजपा के अंदर जान फूंकने की कोशिश की।</p>

<p><br />
आपको बता दे कि राजनाथ सिंह भाजपा के अंदर बड़े नेता तो हैं ही साथ ही पूरे देश का एक बहुत बड़ा तबका वर्तमान में उनको क्षत्रियों का सबसे बड़ा नेता मानती है।शनिवार के दिन हुई ज़िले के गाजीपुर क़स्बे में राजनाथ सिंह की रैली भाजपा के अंदर बिखरे हुए क्षत्रिय कुनबे को साध्वी के लिए कितना एकजुट कर पाई है ये तो आगामी 23 मई को परिणाम आने के बाद ही पता चल पाएगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Editor-Choice</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Apr 2019 05:30:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फतेहपुर:कांग्रेस के अंदर ही अलग थलग पड़े सचान.?प्रियंका के दूसरे दौरे को लेकर भी नहीं दिख रहा कांग्रेसियो में उत्साह.!</title>
                                    <description><![CDATA[ज़िले में पांचवें चरण के अंतर्गत यानी 6 मई को वोट डाले जाएंगे,जिसके चलते सभी प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवार चुनाव प्रचार में जी जान लगाए हुए हैं..कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी महीने भर के अंदर दोबारा बार ज़िले में बुधवार को आ रही हैं..पर उनके दौरे क्या प्रत्यासी राकेश सचान के पक्ष में चुनावी माहौल बना पाएंगे..पढ़े युगान्तर प्रवाह की एक्सक्लुसिव रिपोर्ट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/editor-choice/politics-uttar-prdesh-fatehpur-second-election-tour-of-congress-general-secretary-priyanka-gandhi-in-district-will-congress-workers-get-together-by-joining-congress-candidate-rakesh-sachan/article-355"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2019-04/1556041682.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>फतेहपुर</strong>: लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण की मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।अब सभी राजनीतिक दल चौथे और पांचवे चरण वाली लोकसभा सीटों के लिए प्रचार अभियान तेज किए हुए हैं।चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी भी अपने लोकसभा क्षेत्रो में अधिक से अधिक अपनी पार्टी के बड़े नेताओं की जनसभाओं व रोड शो कराने को लेकर परेशान हैं।</p>

<p>फतेहपुर से कांग्रेस प्रत्याशी <a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>राकेश सचान</strong></a> भी अपने पक्ष में चुनावी माहौल बनाने को लेकर संघर्षरत हैं और महीने भर के अंदर ही ज़िले में <a href="http://www.yugantarpravah.com"><strong>प्रियंका गांधी</strong></a> का दूसरा कार्यक्रम लाने में सफल हो गए हैं। पर अब तक राकेश के पक्ष में उस तरह का चुनावी माहौल बनता दिख नहीं रहा जैसी वो उम्मीद किए बैठे हुए हैं।</p>

<p><strong>प्रियंका के करीब 7 घण्टे तक ज़िले में रहने के बावजूद नहीं एकजुट हो सके थे कांग्रेसी...</strong></p>

<p>प्रियंका गांधी ने ज़िले में अपना पहला दौरा क़रीब 20 दिनों पहले ही किया था और लगभग 2 तिहाई जनपद को नुक्कड सभाओं,महिला संवाद और रोड शो के ज़रिए मथा था।लेक़िन उस वक़्त भी प्रियंका का हाई प्रोफाइल ग्लैमर कांग्रेसियो को एकजुट करने में सफल नहीं हो पाया था। हालत ये थी कि जनपद के विभिन्न गांवों और कस्बो में हुई प्रियंका की नुक्कड़ सभाओं में बमुश्किल उंगलियों में गिन लिए जाने वाली भीड़ ही सचान इकठ्ठा कर पाए थे।सचान के लिए गनीमत यह थी कि प्रियंका का काफ़िला जब शहर क्षेत्र में घुसा था तो कुछ शहरवासी रोड में प्रियंका का दीदार करने के लिए आ गए थे।अन्यथा प्रियंका को अपने पहले फतेहपुर दौरे में मायूस होकर ही लौटना पड़ता। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि राकेश सचान को प्रियंका के पहले दौरे में भीड़ जुटाने के लिए अपने गृह नगर से भी लोग बुलाने पड़े थे।</p>

<p><strong>प्रियंका के दूसरे दौरे में भीड़ जुटाने का अतिरिक्त दबाव...</strong></p>

<p><strong>प्रियंका</strong> के पहले दौरे में बेहद ही कम रही भीड़ ने कांग्रेस प्रत्यासी राकेश सचान की चिंता को बढ़ा दिया था।जिसके चलते यह कयास उस वक़्त ही लगाए जा रहे थे सचान किसी भी क़ीमत पर प्रियंका का दूसरा दौरा ज़िले में कराएंगे और वह सफ़ल भी हुए अब जबकि प्रियंका बुधवार को एक बार फ़िर ज़िले की दो अलग-अलग विधानसभाओं में चुनावी जनसभाओं की संबोधित करने के लिए आ रही हैं तो प्रत्याशी के साथ-साथ स्थानीय कांग्रेसी नेताओं के ऊपर भी जनसभाओं में अधिक से अधिक भीड़ जुटाने का अतिरिक्त दबाव होगा। लेक़िन स्थानीय पार्टी नेताओं की राकेश सचान से दूरी अभी भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।गौरतलब है कि बुधवार को प्रियंका पहले <strong>खागा</strong> और फ़िर <strong>गाजीपुर</strong> क़स्बे में चुनावी जनसभाओं को संबोधित करेंगी।</p>

<p><strong>कांग्रेसी होकर भी समाजवादी बनकर रह गए हैं सचान...</strong></p>

<p><strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">सपा बसपा गठबंधन</a></strong> के बाद बसपा कोटे में गई ज़िले की लोकसभा सीट पर सुखदेव वर्मा के प्रत्याशी घोषित होने के बाद राकेश सचान ने लगभग तीन दशक तक समाजवादी पार्टी में रहने के बाद पलटी मार दी और कांग्रेस में शामिल होकर लोकसभा का टिकट हथिया लाए।राकेश के टिकट पाते ही ज़िले के मूल कांग्रेसी नेता शीर्ष नेतृत्व से खासा खफ़ा हो गए और आज भी ज़िले का एक बड़ा कांग्रेसी तबका राकेश के चुनाव में पूरे मन से जुड़ाव नहीं कर पाया है।जिले के कई बड़े कांग्रेसी नेताओं ने नाम न छापने की शर्त में बताया कि सचान अब तक पूर्ण कांग्रेसी ही नहीं बन पा रहे हैं और उनका रवैया अब तक <strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">समाजवादी पार्टी</a></strong> की विचारधारा से ही प्रेरित लग रहा है।कुछ युवा कांग्रेसी नेताओं ने तो दबी ज़बान यह तक कह दिया कि राकेश सचान को प्रत्याशी घोषित कर पार्टी ने अपने ही पैरों में कुल्हाड़ी मारने का काम किया है।</p>

<p><strong>जब छलक पड़ा था सचान का दर्द...</strong></p>

<p>टिकट न मिलने के चलते कांग्रेस में शामिल होकर टिकट लाए राकेश सचान ने क़रीब महीने भर पहले एक प्रेस वार्ता कर यह जताने की कोशिश की थी कि वह अभी भी समाजवादी हैं और वह कांग्रेस में तब शामिल हुए जब पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। अपनी प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि सपा संरक्षक <strong><a href="http://www.yugantarpravah.com">मुलायम सिंह</a></strong> के वह बहुत क़रीबी हैं और मुलायम का बस चलता तो उन्हें फतेहपुर लोकसभा सीट से सपा सिंबल से चुनाव लड़ने को जरूर मिलता इस प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने अखिलेश के ऊपर मुलायम सिंह का अपमान करने का भी आरोप लगाया था।</p>

<p>अब देखना दिलचस्प होगा कि प्रियंका गांधी का ज़िले में होने वाला दूसरा दौरा क्या ज़िले की जनता को राकेश सचान के पक्ष में मोड़ने में सफल हो पाएगा या राकेश पहले की तरह ही अपनी पार्टी के अंदर ही अलग थलग पड़े रहेंगे..?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Editor-Choice</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Apr 2019 05:30:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
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