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                <title>राष्ट्रीय - Yugantar Pravah </title>
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                <description>राष्ट्रीय RSS Feed</description>
                
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                <title>Cockroach Janta Party: 4 दिन में लाखों फॉलोअर्स, BJP को किया पीछे ! X पर हुई बैन, कौन हैं अभिजीत दिपके और क्यों वायरल हुई CJP?</title>
                                    <description><![CDATA[कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम का व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन देशभर में चर्चा का विषय बन गया है. महज चार दिनों में लाखों फॉलोअर्स जुटाने वाली इस मुहिम ने इंस्टाग्राम पर भाजपा और कांग्रेस को भी पीछे छोड़ दिया. अब इसका X अकाउंट भारत में बैन हो गया है. जानिए कौन हैं संस्थापक अभिजीत दिपके और आखिर क्यों वायरल हो रही है CJP.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/cockroach-janta-party-x-ban-abhijeet-dipke-cjp/article-8911"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-05/who-is-cockroach-janata-party.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Cockroach Janta Party X Banned: </strong>भारत की राजनीति और सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है — कॉकरोच जनता पार्टी (CJP). बेरोजगार युवाओं, सिस्टम से नाराज जेन जी और डिजिटल व्यंग्य के मेल से बनी इस मुहिम ने कुछ ही दिनों में ऐसा तूफान खड़ा किया कि इसके फॉलोअर्स करोड़ों तक पहुंच गए. इंस्टाग्राम पर भाजपा और कांग्रेस को पीछे छोड़ने वाली CJP का X अकाउंट अब भारत में बैन हो चुका है. इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं अभिजीत दिपके, जिन्होंने इसे एक “डिजिटल जन-आंदोलन” बताया है.</p>
<h3><strong>सोशल मीडिया पर अचानक कैसे छा गई कॉकरोच जनता पार्टी</strong></h3>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत 16 मई 2026 को हुई थी. यह एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में सामने आई, लेकिन कुछ ही दिनों में देशभर के युवाओं, खासकर जेन जी यूजर्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गई. पार्टी का नाम उस विवादित टिप्पणी से निकला जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवी” से की थी.</p>
<p>हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा फर्जी डिग्री धारकों की ओर था और उन्होंने युवाओं की तारीफ भी की, लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर “कॉकरोच” शब्द एक राजनीतिक व्यंग्य और विरोध के प्रतीक में बदल चुका था. इसी माहौल में कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म हुआ.</p>
<p>इस प्लेटफॉर्म ने खुद को “आलसी, बेरोजगार और सिस्टम से निराश युवाओं की आवाज” बताया. इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स तेजी से बढ़े और कुछ समय के लिए इसकी संख्या भाजपा और कांग्रेस दोनों से ज्यादा पहुंच गई. यही वजह रही कि यह केवल एक मीम पेज नहीं बल्कि एक बड़े डिजिटल जन-आंदोलन की तरह चर्चा में आ गया.</p>
<h4><strong>X अकाउंट बैन होने के बाद क्या बोले अभिजीत दिपके</strong></h4>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने निजी X अकाउंट के जरिए जानकारी दी कि CJP का आधिकारिक अकाउंट भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है. उन्होंने लिखा कि जैसा अनुमान था, अकाउंट को बैन कर दिया गया. दिपके के अनुसार, अकाउंट लॉन्च होने के चार दिन के भीतर 2 लाख से अधिक लोग इससे जुड़ गए थे.</p>
<p>उन्होंने यह भी दावा किया कि अब इंस्टाग्राम अकाउंट को हैक करने की कोशिश की जा रही है. इसके साथ ही उन्होंने समर्थकों से नए X हैंडल को फॉलो करने की अपील की. सोशल मीडिया पर इस बैन को लेकर बहस तेज हो गई. कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की पॉलिसी का हिस्सा बता रहे हैं.</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे विवाद ने CJP की लोकप्रियता को और बढ़ा दिया. इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स करोड़ों में पहुंच गए और कई बड़े राजनीतिक नेताओं ने भी इस प्लेटफॉर्म को लेकर सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं दीं.</p>
<h5><strong>क्या है कॉकरोच जनता पार्टी का एजेंडा और घोषणापत्र</strong></h5>
<p>हालांकि यह प्लेटफॉर्म खुद को व्यंग्यात्मक आंदोलन बताता है, लेकिन इसके पोस्ट और घोषणापत्र में कई गंभीर राजनीतिक मुद्दे उठाए गए हैं. पार्टी का दावा है कि भारतीय राजनीति असली मुद्दों से भटक चुकी है और रोजगार, शिक्षा, एआई, उद्योग और युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है.</p>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी ने तीन बड़े उद्देश्यों का जिक्र किया है. पहला, राजनीतिक विमर्श को धार्मिक ध्रुवीकरण से हटाकर रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर केंद्रित करना. दूसरा, नीट पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या जैसे मामलों में सरकार और सिस्टम की जवाबदेही तय करना. तीसरा, न्यायपालिका, चुनाव आयोग और मीडिया जैसी संस्थाओं की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना.</p>
<p>इसके अलावा पार्टी ने पांच सूत्रीय घोषणापत्र भी जारी किया. इसमें रिटायरमेंट के बाद जजों को राजनीतिक पद न देने, चुनाव आयोग की निष्पक्षता, संसद और कैबिनेट में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण, दलबदल करने वाले नेताओं पर 20 साल की रोक और बड़े उद्योगपतियों के मीडिया नियंत्रण को खत्म करने जैसी मांगें शामिल हैं.</p>
<p>इन मांगों ने युवाओं के बीच इस प्लेटफॉर्म को केवल मजाक तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि कई लोग इसे व्यवस्था के खिलाफ डिजिटल असंतोष का नया चेहरा मानने लगे हैं.</p>
<h6><strong>पार्टी से जुड़ने की अनोखी शर्तों ने खींचा लोगों का ध्यान</strong></h6>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी की सदस्यता शर्तें सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा वायरल हुईं. इन शर्तों को जानबूझकर व्यंग्यात्मक अंदाज में तैयार किया गया ताकि बेरोजगारी और युवाओं को लेकर बनी धारणाओं पर कटाक्ष किया जा सके.</p>
<p>पार्टी के मुताबिक, सदस्य बनने के लिए व्यक्ति का बेरोजगार होना जरूरी है, चाहे वह मजबूरी में हो या अपनी पसंद से. इसके अलावा “शारीरिक रूप से आलसी लेकिन मानसिक रूप से अत्यधिक सक्रिय” होना भी एक शर्त बताई गई. दिन में कम से कम 11 घंटे इंटरनेट पर बिताना और प्रोफेशनल तरीके से शिकायत करने की क्षमता भी पात्रता का हिस्सा बनाई गई.</p>
<p>इन शर्तों को सोशल मीडिया यूजर्स ने मीम्स और रील्स के जरिए तेजी से वायरल कर दिया. खासकर जेन जी यूजर्स ने इसे अपने अनुभवों से जोड़कर देखा. यही वजह रही कि CJP महज राजनीतिक व्यंग्य नहीं बल्कि एक डिजिटल कल्चर ट्रेंड में बदल गई.</p>
<h6><strong>कौन हैं अभिजीत दिपके, जिनका नाम पूरे देश में चर्चा में है</strong></h6>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके 30 वर्षीय भारतीय छात्र और राजनीतिक संचार रणनीतिकार हैं. उन्होंने पुणे से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया और बाद में अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स की पढ़ाई की. फिलहाल वह अमेरिका में रह रहे हैं.</p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिजीत पहले आम आदमी पार्टी के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने 2020 से 2023 के बीच पार्टी की सोशल मीडिया और चुनाव प्रचार रणनीति में भूमिका निभाई थी. दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान मीम आधारित डिजिटल प्रचार अभियान में भी उनकी भागीदारी रही थी.</p>
<p>अभिजीत का कहना है कि सीजेआई की टिप्पणी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रभावित किया. उन्होंने उसी टिप्पणी को व्यंग्य के हथियार में बदलते हुए CJP की शुरुआत की. उनका दावा है कि यह प्लेटफॉर्म युवाओं की हताशा, बेरोजगारी और राजनीतिक निराशा को आवाज देने के लिए बनाया गया.</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल 2029 चुनाव लड़ने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है. अभी उनका फोकस युवाओं की राय सुनने और इस आंदोलन को जन-आवाज में बदलने पर है.</p>
<h6><strong>राजनीति में कितना बड़ा असर डाल सकती है CJP</strong></h6>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड है या भविष्य में यह एक गंभीर राजनीतिक आंदोलन बन सकता है. जिस तरह लाखों युवा इससे जुड़ रहे हैं, उससे साफ है कि देश की नई पीढ़ी पारंपरिक राजनीति से अलग मुद्दों पर चर्चा चाहती है.</p>
<p>जेन जी भारत की सबसे बड़ी आबादी वाली पीढ़ी मानी जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के कुल उपभोक्ता खर्च का बड़ा हिस्सा इसी पीढ़ी से आता है. यही वजह है कि सोशल मीडिया आधारित कोई भी आंदोलन तेजी से राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन सकता है.</p>
<p>समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, आप नेता मनीष सिसोदिया और प्रशांत भूषण जैसे नेताओं द्वारा सार्वजनिक समर्थन दिए जाने के बाद इस प्लेटफॉर्म की चर्चा और तेज हो गई है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि CJP भविष्य में राजनीतिक दल बनेगी या नहीं, लेकिन इतना तय है कि इसने भारतीय राजनीति में युवाओं की नाराजगी और डिजिटल व्यंग्य की ताकत को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 16:44:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Petrol Diesel New Rates: फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, एक हफ्ते में दूसरी बार लगा महंगाई का झटका</title>
                                    <description><![CDATA[देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को फिर बढ़ोतरी कर दी गई. तेल कंपनियों ने पेट्रोल पर 87 से 96 पैसे और डीजल पर 86 से 94 पैसे प्रति लीटर तक दाम बढ़ाए हैं. महज एक सप्ताह में दूसरी बार कीमतें बढ़ने से आम जनता और परिवहन क्षेत्र पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/petrol-diesel-new-rate-india-price-hike/article-8907"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-05/petrol-diesel-new-rates-in-india.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Petrol Diesel New Rates: </strong>देश में महंगाई से जूझ रही आम जनता को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. सरकारी तेल कंपनियों ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है. यह पिछले एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं. लगातार हो रही इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जेब, परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है.</p>
<h3><strong>तीन दिन पहले ही बढ़े थे 3 रुपये प्रति लीटर</strong></h3>
<p>मंगलवार की बढ़ोतरी से पहले शुक्रवार को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की थी. उस फैसले के बाद दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गया था, जबकि डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया था.</p>
<p>अब नई वृद्धि के बाद दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. इस तरह सिर्फ कुछ दिनों में ईंधन की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है.</p>
<h4><strong>मुंबई में पेट्रोल 107 रुपये के पार</strong></h4>
<p>देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी पेट्रोल और डीजल के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. यहां पेट्रोल 91 पैसे महंगा होकर 107.59 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है. वहीं डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपये प्रति लीटर हो गई है. मुंबई में पहले से ही देश के प्रमुख शहरों की तुलना में ईंधन के दाम अधिक रहते हैं.</p>
<h5><strong>कोलकाता में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी</strong></h5>
<p>कोलकाता में मंगलवार को पेट्रोल के दाम में सबसे अधिक 96 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई. इसके बाद वहां पेट्रोल की कीमत 109.70 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है. डीजल भी 94 पैसे महंगा होकर 96.07 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. पश्चिम बंगाल की राजधानी में ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन पर साफ दिखाई देने लगा है.</p>
<h6><strong>चेन्नई में भी बढ़े दाम, डीजल 96 रुपये के पार</strong></h6>
<p>चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 82 पैसे बढ़कर 104.49 रुपये प्रति लीटर हो गई है. वहीं डीजल 86 पैसे महंगा होकर 96.11 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है. दक्षिण भारत के इस प्रमुख महानगर में ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर लॉजिस्टिक्स, बस सेवाओं और निजी वाहनों के संचालन खर्च पर पड़ने लगा है.</p>
<h6><strong>अंतरराष्ट्रीय तनाव बना कीमतों में उछाल की बड़ी वजह</strong></h6>
<p>पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां मुख्य कारण मानी जा रही हैं. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर बना हुआ है.</p>
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है, वहां बाधाएं उत्पन्न होने से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है. इसी वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं. वैश्विक बाजार में यह उछाल सीधे भारतीय ईंधन कीमतों पर असर डाल रहा है.</p>
<h6><strong>आम जनता और बाजार पर क्या पड़ेगा असर</strong></h6>
<p>पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि का प्रभाव केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता. इसका असर परिवहन, कृषि, उद्योग और खुदरा बाजार तक पहुंचता है. माल ढुलाई महंगी होने से फल, सब्जियां, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं. निजी वाहन उपयोग करने वालों के मासिक खर्च में वृद्धि होगी, जबकि सार्वजनिक परिवहन किराए बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>व्यापार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 08:40:46 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Suvendu Adhikari CM Oath: ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी बने बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री, जानिए क्यों अब तक नहीं की शादी</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के बीच भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी रहे शुभेंदु ने उन्हीं को हराकर सत्ता तक का सफर तय किया. अविवाहित शुभेंदु अधिकारी का पूरा जीवन राजनीति और जनसेवा को समर्पित रहा है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/suvendu-adhikari-first-bjp-chief-minister-west-bengal/article-8888"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-05/west-bengal-suvendu-adhikari-cm.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Suvendu Adhikari CM Oath: </strong>पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार राज्य की सत्ता पर कब्जा किया और पार्टी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नया अध्याय शुरू कर दिया. कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के शीर्ष नेताओं और हजारों समर्थकों की मौजूदगी में 57 वर्षीय शुभेंदु अधिकारी ने पद और गोपनीयता की शपथ ली. कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाने वाले शुभेंदु अब उन्हीं को हराकर बंगाल की सत्ता के शिखर तक पहुंच गए हैं.</p>
<h3><strong>ममता बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगी से बने BJP के CM</strong></h3>
<p>शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक जीवन पश्चिम बंगाल की सबसे दिलचस्प राजनीतिक यात्राओं में से एक माना जाता है. एक समय ऐसा था जब ममता बनर्जी के हर बड़े आंदोलन में शुभेंदु अधिकारी उनकी रणनीति के प्रमुख स्तंभ हुआ करते थे. खासकर नंदीग्राम आंदोलन ने उन्हें राज्य की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया.</p>
<p>लेकिन समय के साथ दोनों नेताओं के बीच दूरी बढ़ती गई और यही दूरी अंततः एक बड़े राजनीतिक संघर्ष में बदल गई. 2020 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने खुद को ममता बनर्जी के सबसे मजबूत चुनौतीकर्ता के रूप में स्थापित किया.</p>
<h4><strong>नंदीग्राम आंदोलन ने बनाया जननेता, 2021 की जीत ने दिलाई पहचान</strong></h4>
<p>2007 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन ने शुभेंदु अधिकारी को एक जननेता के रूप में स्थापित किया. इस आंदोलन में उनकी भूमिका निर्णायक रही और ममता बनर्जी को सत्ता तक पहुंचाने में उन्होंने अहम योगदान दिया. 2009 में वे तामलुक से सांसद बने. इसके बाद 2016 में नंदीग्राम से विधायक चुने गए और राज्य सरकार में मंत्री बने. 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर खुद ममता बनर्जी को हराकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. यह जीत उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई.</p>
<h5><strong>ममता को हराकर रचा इतिहास, बीजेपी को दिलाई पहली सरकार</strong></h5>
<p>2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके परंपरागत गढ़ भवानीपुर में चुनौती दी. इस चुनाव को बंगाल की राजनीति का सबसे प्रतिष्ठित मुकाबला माना जा रहा था. नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शुभेंदु अधिकारी अब राज्य की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो चुके हैं.</p>
<p>ममता बनर्जी को हराने के साथ ही उन्होंने भाजपा को पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता तक पहुंचाया. उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बंगाल की राजनीति में तीन दशक बाद सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय शुरू हुआ.</p>
<h6><strong>क्यों नहीं की शादी, राजनीति और जनसेवा को बना लिया जीवन</strong></h6>
<p>शुभेंदु अधिकारी की निजी जिंदगी भी हमेशा चर्चा का विषय रही है. 57 वर्ष की उम्र में भी वे अविवाहित हैं. उनकी तरह पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी विवाह नहीं किया. शुभेंदु अधिकारी ने अपना पूरा जीवन राजनीति और समाजसेवा को समर्पित कर दिया.</p>
<p>उनका मानना रहा कि सार्वजनिक जीवन में पूरी ऊर्जा और समय देने के लिए निजी जीवन से दूरी जरूरी है. यही वजह है कि उन्होंने शादी नहीं की. सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले शुभेंदु के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास 85.87 लाख रुपये की संपत्ति है, कोई कर्ज नहीं है और उनके नाम पर कोई निजी वाहन भी दर्ज नहीं है.</p>
<h6><strong>परिवार, शिक्षा और शुरुआती राजनीतिक सफर</strong></h6>
<p>शुभेंदु अधिकारी वरिष्ठ नेता शिशिर कुमार अधिकारी के पुत्र हैं. राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े शुभेंदु ने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने 31 वर्ष की उम्र में अपना पहला चुनाव जीता, जब वे कोंटाई नगर परिषद से कांग्रेस के पार्षद बने.</p>
<p>बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर 2006 में पहली बार कोंटाई दक्षिण से विधायक चुने गए. इसके बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया और वे बंगाल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हो गए.</p>
<h6><strong>पांच मंत्रियों ने भी ली शपथ, नई सरकार पर पूरे देश की नजर</strong></h6>
<p>मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ पांच अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली. इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक शामिल हैं. नई सरकार से प्रशासनिक बदलाव, निवेश और कानून व्यवस्था में सुधार की उम्मीदें जताई जा रही हैं. भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए यह क्षण वर्षों की राजनीतिक मेहनत का परिणाम माना जा रहा है. पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब एक नए दौर की शुरुआत हो चुकी है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:20:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bihar Politics: बिहार की राजनीति से समाप्त हुआ नीतीश युग! 20 साल बाद सत्ता से विदा हुए कुमार, जानिए पूरा राजनीतिक सफर</title>
                                    <description><![CDATA[करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार ने आखिरकार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस फैसले के साथ ही एक लंबे राजनीतिक युग का अंत माना जा रहा है. गठबंधन बदलने और सत्ता संतुलन साधने की उनकी राजनीति अब इतिहास बनती दिख रही है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/nitish-kumar-era-end-bihar-politics-full-journey/article-8858"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-04/nitish-kumar-bihar-cm-political-journey.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Nitish Kumar Political Journey: </strong>बिहार की राजनीति में ‘सुशासन’ की पहचान बने नीतीश कुमार ने 20 साल लंबे सत्ता काल के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर एक युग के अंत का संकेत दे दिया है. 2005 में जब उन्होंने सत्ता संभाली थी, तब बिहार की छवि अपराध और अव्यवस्था से जुड़ी थी. लेकिन अपने फैसलों, गठबंधन रणनीतियों और राजनीतिक संतुलन से उन्होंने राज्य की राजनीति को नई दिशा दी थी. लेकिन उनके सत्ता से जाने की पठकथा चुनाव से पहले ही लिखी जा चुकी थी.</p>
<h3><strong>1977 से शुरुआत, हार से सीखकर बने मजबूत नेता</strong></h3>
<p>नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर 1977 में शुरू हुआ, जब उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन वो हार गए. हालांकि यह हार उनके लिए अंत नहीं बल्कि सीख साबित हुई. 1985 में उन्होंने जीत दर्ज कर विधानसभा में जगह बनाई और धीरे-धीरे अपनी पहचान मजबूत की.</p>
<p>1987 में लोक दल के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उनकी राजनीतिक पकड़ और मजबूत हुई. 1989 में वे पहली बार लोकसभा पहुंचे और केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई. यह वह समय था जब बिहार की राजनीति में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी और नीतीश खुद को एक विकल्प के रूप में स्थापित कर रहे थे.</p>
<h4><strong>समता पार्टी और केंद्र की राजनीति, ऐसे बनी मजबूत पकड़</strong></h4>
<p>1990 के दशक में उन्होंने जॉर्ज फर्नांडीस के साथ समता पार्टी की स्थापना की. शुरुआती चुनावों में बहुत सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. 1996 में सांसद बनने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्होंने रेल, कृषि और परिवहन जैसे अहम मंत्रालय संभाले.</p>
<p>रेल मंत्री के रूप में तत्काल टिकट व्यवस्था की शुरुआत उनकी बड़ी उपलब्धियों में शामिल रही. 1999 में गैसल ट्रेन हादसे के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना उनकी साफ-सुथरी छवि को और मजबूत करता है. इस दौर ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक जिम्मेदार नेता के रूप में स्थापित किया.</p>
<h5><strong>2005 का दौर जब बिहार में दिखा ‘सुशासन’ मॉडल</strong></h5>
<p>2005 में भाजपा के साथ मिलकर नीतीश कुमार ने बिहार की सत्ता संभाली और यहीं से उनके राजनीतिक स्वर्णकाल की शुरुआत हुई. उस समय बिहार अपराध, भ्रष्टाचार और पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था. नीतीश ने कानून व्यवस्था सुधारने, सड़कों के निर्माण, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया. पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देने जैसे फैसलों ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया. 2010 में भारी बहुमत से मिली जीत ने यह साबित कर दिया कि बिहार की जनता उनके नेतृत्व पर भरोसा करती है.</p>
<h6><strong>गठबंधन बदलने की राजनीति, सत्ता में बने रहने की रणनीति</strong></h6>
<p>नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर गठबंधन बदलने की रणनीति के लिए भी जाना जाता है. 2014 में लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दिया और जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया.</p>
<p>2015 में महागठबंधन के साथ चुनाव जीतने के बाद उन्होंने फिर सत्ता संभाली, लेकिन 2017 में तेजस्वी यादव पर लगे आरोपों के बाद उन्होंने गठबंधन तोड़कर भाजपा के साथ सरकार बना ली. इसके बाद 2022 में फिर महागठबंधन में वापसी और 2024 में फिर एनडीए में शामिल होना उनके राजनीतिक लचीलेपन को दर्शाता है. यही रणनीति उन्हें लंबे समय तक सत्ता में बनाए रखने में सफल रही.</p>
<h6><strong>2020 से 2026 के बीच नीतीश की घटती पकड़, सत्ता से विदाई</strong></h6>
<p>2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू की सीटें कम हो गईं, लेकिन नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने रहे. हालांकि जनता के बीच उनकी पकड़ कमजोर हो रही थी. 2025 में दसवीं बार मुख्यमंत्री बनने के बाद भी राजनीतिक समीकरण बदलते रहे.</p>
<p>अंततः 14 अप्रैल 2026 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. उनका राज्यसभा जाना इस फैसले की बड़ी वजह माना जा रहा है. बिहार चुनाव से पहले ही ये तय हो चुका था कि नीतीश अब प्रदेश की राजनीति से बाहर हो जाएंगे और हुआ भी कुछ ऐसा.</p>
<h6><strong>सादगी, संघर्ष और सीमित पारिवारिक दायरा ही नीतीश की कहानी</strong></h6>
<p>1 मार्च 1951 को बख्तियारपुर में जन्मे नीतीश कुमार का जीवन बेहद सादा रहा है. उनके पिता आयुर्वेदिक डॉक्टर थे और उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. नौकरी छोड़कर वे जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े और राजनीति में आए.</p>
<p>उनकी पत्नी मंजू कुमारी का 2007 में निधन हो गया था. उनके बेटे निशांत कुमार अब राजनीति में कदम रख चुके हैं. परिवार हमेशा सार्वजनिक जीवन से दूर रहा, जिसने उनकी छवि को एक सादगीपूर्ण और गंभीर नेता के रूप में बनाए रखा. यही सादगी और रणनीति उनके लंबे राजनीतिक जीवन की पहचान बनी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 19:00:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराष्ट्र में बदलेगा मौसम का मिजाज: बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट, सावधान रहें किसान</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र में लगातार बढ़ रही गर्मी से जल्द राहत मिलने के संकेत मिल रहे हैं. मौसम विभाग ने 17 से 20 मार्च के बीच राज्य के कई हिस्सों में बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि की संभावना जताई है. कृषि विभाग ने किसानों को फसलों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/maharashtra-weather-alert-rain/article-8782"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-03/maharashtra-weather-alert-rain.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Maharatra Weather News: </strong>महाराष्ट्र में बीते कई दिनों से पड़ रही तेज गर्मी के बीच मौसम विभाग ने राहत भरी खबर दी है. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 17 मार्च के बाद राज्य के कई इलाकों में मौसम अचानक करवट ले सकता है. दोपहर बाद बादल छाने, गरज-चमक के साथ बारिश होने और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है. कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है, जिसे देखते हुए किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है.</p>
<h3><strong>17 मार्च के बाद बदलेगा मौसम का रुख</strong></h3>
<p>मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार महाराष्ट्र में 17 मार्च के बाद मौसम में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है. अभी तक राज्य के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा था, जिससे लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा था.</p>
<p>लेकिन आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से बादल छाने और बारिश होने की संभावना बन रही है. विशेष रूप से दोपहर के बाद मौसम तेजी से बदल सकता है. आसमान में बादल घिर सकते हैं और कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है.</p>
<p>मौसम विभाग का कहना है कि यह बदलाव अस्थायी राहत जरूर देगा, लेकिन इसके साथ कुछ स्थानों पर तेज आंधी और बिजली गिरने का खतरा भी बना रह सकता है.</p>
<h4><strong>विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में ज्यादा असर</strong></h4>
<p>मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी मौसम गतिविधियों का सबसे अधिक प्रभाव विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश और मध्य महाराष्ट्र के कुछ जिलों में देखने को मिल सकता है. इन क्षेत्रों में 17 से 20 मार्च के बीच दोपहर के बाद बादल छाने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है.</p>
<p>इसके अलावा कुछ स्थानों पर तेज हवाएं भी चल सकती हैं, जिनकी गति काफी अधिक हो सकती है. मौसम विभाग का अनुमान है कि कई जिलों में अचानक मौसम खराब हो सकता है, जिससे स्थानीय स्तर पर आंधी जैसी स्थिति भी बन सकती है. इसलिए लोगों को मौसम से जुड़े ताजा अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है.</p>
<h5><strong>18 से 20 मार्च के बीच बढ़ सकती है गतिविधि</strong></h5>
<p>मौसम विभाग के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 18 से 20 मार्च के बीच मौसम गतिविधियों की तीव्रता और बढ़ सकती है. इस दौरान कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने के साथ बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं.</p>
<p>कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है, जिससे खेतों में खड़ी या कटाई के लिए तैयार फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक होने वाली इस प्रकार की मौसम गतिविधियां किसानों के लिए चुनौती बन सकती हैं. इसलिए पहले से तैयारी और सावधानी बेहद जरूरी है.</p>
<h6><strong>रबी फसलों पर पड़ सकता है असर</strong></h6>
<p>इस समय महाराष्ट्र के कई जिलों में रबी फसलों की कटाई का काम तेजी से चल रहा है. गेहूं, चना और अन्य फसलों की कटाई के बीच अगर अचानक बारिश या ओलावृष्टि होती है तो किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है. कटाई के बाद खेतों में रखी फसलें बारिश के कारण खराब हो सकती हैं.</p>
<p>इसके अलावा तेज हवाएं और ओले भी फसलों की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में अचानक बदलाव के दौरान किसानों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए ताकि नुकसान को कम किया जा सके.</p>
<h6><strong>किसानों को दी गई जरूरी सावधानियां</strong></h6>
<p>मौसम विभाग के अलर्ट के बाद कृषि विभाग ने भी किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है. किसानों से अपील की गई है कि वे अगले कुछ दिनों तक मौसम के ताजा पूर्वानुमान पर लगातार नजर बनाए रखें और उसी के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाएं.</p>
<p>कृषि विभाग ने सलाह दी है कि जिन किसानों ने फसल की कटाई कर ली है वे उसे खुले में न छोड़ें. कटाई की गई फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखें या उन्हें तिरपाल से ढककर सुरक्षित करें. इसके साथ ही तेज हवाओं और संभावित ओलावृष्टि से बचाव के लिए खेतों में जरूरी इंतजाम करने की भी सलाह दी गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते सावधानी बरतने से किसानों को संभावित नुकसान से काफी हद तक बचाया जा सकता है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/national/maharashtra-weather-alert-rain/article-8782</link>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 22:44:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PM Kisan 22nd Installment 2026: जारी हुई 22वीं किस्त, लेकिन कई किसानों के खाते में नहीं पहुंचे 2000 रुपये, तुरंत करें ये 5 काम</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त जारी कर दी है. असम के गुवाहाटी से 9.32 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 18,640 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए. हालांकि कई किसानों के खाते में 2000 रुपये नहीं पहुंचे. अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो 5 जरूरी चीजें तुरंत चेक करनी होंगी.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/pm-kisan-22nd-installment-2026/article-8781"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-03/pm-kisan-22nd-installment-2026.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>PM Kisan 22nd Installment 2026: </strong>देश के करोड़ों किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त जारी कर दी है. असम के गुवाहाटी से सिंगल क्लिक के जरिए करोड़ों किसानों के बैंक खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर किए गए. हालांकि कई किसान ऐसे भी हैं जिनके खाते में अभी तक 2000 रुपये नहीं पहुंचे. ऐसे में किसानों को कुछ जरूरी प्रक्रियाएं तुरंत जांचनी चाहिए.</p>
<h3><strong>गुवाहाटी से जारी हुई पीएम किसान की 22वीं किस्त</strong></h3>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को असम के गुवाहाटी से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त जारी की. सिंगल क्लिक के जरिए देश के 9.32 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 18,640 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए. यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के माध्यम से भेजी गई.</p>
<p>फरवरी 2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक किसानों के खातों में 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है. यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए बड़ी आर्थिक मदद मानी जाती है और खेती से जुड़े खर्चों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.</p>
<h4><strong>पीएम किसान योजना क्या है, किसानों को कैसे मिलता है लाभ</strong></h4>
<p>प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को की गई थी. इस योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है. इसके तहत पात्र किसानों को हर चार महीने में 2000 रुपये की किस्त दी जाती है.</p>
<p>इस तरह एक साल में तीन किस्तों के रूप में कुल 6000 रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे जाते हैं. सरकार यह पैसा DBT के माध्यम से ट्रांसफर करती है जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है. देश के करोड़ों किसानों के लिए यह योजना खेती के खर्चों को संभालने में काफी मददगार साबित हो रही है.</p>
<h5><strong>कई किसानों के खाते में क्यों नहीं पहुंचे 2000 रुपये</strong></h5>
<p>हालांकि सरकार ने करोड़ों किसानों के खातों में पैसा भेज दिया है, लेकिन कई किसानों को अभी तक किस्त नहीं मिली है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. सबसे आम कारण e-KYC का अपडेट न होना है. अगर किसान ने PM किसान पोर्टल पर अपनी e-KYC पूरी नहीं की है तो उसकी किस्त रोक दी जाती है.</p>
<p>इसके अलावा आधार और बैंक खाते के बीच लिंक न होना भी भुगतान रुकने की वजह बन सकता है. कई बार आवेदन में नाम की स्पेलिंग गलत होना, जन्मतिथि में गलती या दस्तावेजों में मिसमैच होने के कारण भी किस्त नहीं पहुंच पाती.</p>
<h6><strong>किसानों को तुरंत पूरे करने होंगे ये 5 जरूरी काम</strong></h6>
<p>अगर किसान चाहते हैं कि उनकी किस्त बिना किसी रुकावट के खाते में पहुंचे तो उन्हें पांच जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी. सबसे पहले e-KYC को अपडेट करना जरूरी है, जिसे PM किसान पोर्टल पर OTP या फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए किया जा सकता है.</p>
<p>दूसरा आधार सीडिंग है यानी बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए और DBT सक्रिय होना चाहिए. तीसरा लैंड सीडिंग है जिसमें जमीन के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है. चौथा बैंक अकाउंट KYC है ताकि बैंक रिकॉर्ड में कोई गलती न हो. पांचवां फार्मर आईडी है. अगर फार्मर आईडी में कोई गड़बड़ी होगी तो किस्त रुक सकती है.</p>
<h6><strong>लाभार्थी सूची में ऐसे चेक करें अपना नाम</strong></h6>
<p>अगर किसी किसान को यह देखना है कि उसका नाम लाभार्थी सूची में है या नहीं, तो वह pmkisan.gov.in वेबसाइट पर जाकर यह जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकता है. वेबसाइट के फॉर्मर कॉर्नर सेक्शन में लाभार्थी सूची का विकल्प दिया गया है. यहां किसान अपना राज्य, जिला और ब्लॉक चुनकर सूची में अपना नाम देख सकते हैं.</p>
<p>सरकार के नियमों के अनुसार अगर किसी किसान ने 1 फरवरी 2019 के बाद जमीन खरीदी है तो उसे इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा. साथ ही एक परिवार से केवल एक ही सदस्य इस योजना का लाभ उठा सकता है.</p>
<h6><strong>लगातार किस्त नहीं मिलने पर यहां करें शिकायत</strong></h6>
<p>कई किसानों की शिकायत रहती है कि उन्हें कई किस्तों का पैसा नहीं मिला. अगर किसी किसान को लगातार तीन किस्तें नहीं मिली हैं तो उसे तुरंत अपनी e-KYC और अन्य दस्तावेजों की स्थिति जांचनी चाहिए. अगर सभी जानकारी सही होने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ है तो किसान अपने जिले की शिकायत निवारण निगरानी समिति से संपर्क कर सकते हैं. इन समितियों का गठन खास तौर पर ऐसे मामलों के समाधान के लिए किया गया है ताकि पात्र किसानों को योजना का लाभ मिल सके.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/national/pm-kisan-22nd-installment-2026/article-8781</link>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 22:00:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खाड़ी संकट से कांपा मोरबी का टाइल हब: गैस आपूर्ति रुकी, 100 से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद, 4 लाख नौकरियों पर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-इज़राइल युद्ध का असर अब भारत के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच गया है. गुजरात के मोरबी में गैस आपूर्ति बाधित होने से 100 से अधिक सिरेमिक टाइल फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं, जबकि 400 से ज्यादा इकाइयां बंद होने की कगार पर हैं. इससे करीब 4 लाख मजदूरों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ गई है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/morbi-ceramic-tile-industry-gas-crisis-iran-israel-war-impact/article-8766"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-03/morbi-ceramic-tile-industry-gas-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Morbi Ceramic Tile Industry: </strong>मध्य पूर्व में बढ़ते ईरान-इज़राइल संघर्ष ने भारत के सबसे बड़े सिरेमिक टाइल हब मोरबी को भी संकट में डाल दिया है. खाड़ी देशों से आने वाली प्रोपेन और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बाधित होने के कारण टाइल उद्योग का उत्पादन प्रभावित हो रहा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि 100 से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं और सैकड़ों अन्य इकाइयां बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं.</p>
<h3><strong>दुनिया के सबसे बड़े सिरेमिक टाइल हब में गहराया संकट</strong></h3>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुजरात का मोरबी शहर सिरेमिक टाइल उद्योग का वैश्विक केंद्र माना जाता है. यहां करीब 600 से अधिक औद्योगिक इकाइयां टाइलों का निर्माण करती हैं और इनका निर्यात दुनिया के कई देशों में होता है. भारत के निर्माण क्षेत्र में उपयोग होने वाली टाइलों का बड़ा हिस्सा भी यहीं से सप्लाई होता है.</p>
<p>इन उद्योगों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 4 लाख लोग काम करते हैं. लेकिन खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए संकट ने इस पूरे औद्योगिक नेटवर्क को हिला दिया है. गैस आपूर्ति में आई बाधा के कारण कई फैक्ट्रियों को उत्पादन रोकना पड़ा है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो यह संकट मोरबी की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ देश के निर्माण क्षेत्र को भी प्रभावित कर सकता है.</p>
<h4><strong>गैस की कमी से उत्पादन पर ब्रेक, तीन दिन का ही बचा प्रोपेन स्टॉक</strong></h4>
<p>सिरेमिक टाइलों के निर्माण में अत्यधिक तापमान वाली भट्टियों का उपयोग किया जाता है, जिसके लिए प्रोपेन गैस और प्राकृतिक गैस जरूरी होती है. लेकिन युद्ध के कारण इन ईंधनों की आपूर्ति बाधित हो गई है.</p>
<p>सिरेमिक टाइल्स निर्माताओं के संघ के अध्यक्ष हरीशभाई बोपलिया ने बताया कि कई इकाइयों के पास प्रोपेन गैस का स्टॉक सिर्फ तीन दिन का ही बचा है, जबकि प्राकृतिक गैस का भंडार अधिकतम एक सप्ताह तक ही चल सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो सैकड़ों इकाइयों को उत्पादन पूरी तरह बंद करना पड़ेगा. उद्योग जगत के अनुसार यह स्थिति पिछले कई वर्षों में सबसे गंभीर संकटों में से एक है.</p>
<h5><strong>सऊदी बंदरगाह की समस्या के बाद युद्ध ने बढ़ाई परेशानी</strong></h5>
<p>उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि गैस आपूर्ति में व्यवधान की शुरुआत पिछले महीने ही हो गई थी. सऊदी अरब के एक प्रमुख बंदरगाह पर तकनीकी समस्याओं के कारण गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई थी.</p>
<p>हालांकि उद्योगपतियों को उम्मीद थी कि कुछ दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी. लेकिन इसी दौरान ईरान और इज़राइल के बीच संघर्ष तेज हो गया. इसके बाद खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग गतिविधियां प्रभावित होने लगीं और गैस की आपूर्ति लगभग ठप हो गई. कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों को उस मार्ग से भेजने से परहेज करना शुरू कर दिया है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह प्रभावित हो गई है.</p>
<h6><strong>होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से वैश्विक गैस बाजार हिला</strong></h6>
<p>मध्य पूर्व के इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी अस्थिर कर दिया है. दुनिया की करीब 20 प्रतिशत एलएनजी आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है. लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद वहां जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. ईरान ने चेतावनी दी है कि वह किसी भी ऐसे जहाज पर हमला कर सकता है जो उसके विरोधी देशों के साथ व्यापार कर रहा हो. इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग पर भारी दबाव बन गया है.</p>
<p>इसके अलावा ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के हमलों के जवाब में कुछ पड़ोसी देशों में स्थित गैस संयंत्रों को भी निशाना बनाया है. इनमें कतर जैसे बड़े गैस निर्यातक देश शामिल हैं. इससे वैश्विक गैस बाजार में कीमतों में तेजी से उछाल देखा जा रहा है.</p>
<h6><strong>लाखों मजदूरों की रोजी पर खतरा, सरकार से मदद की मांग</strong></h6>
<p>मोरबी के उद्योगपतियों का कहना है कि अगर गैस संकट लंबे समय तक बना रहा तो इसका असर लाखों मजदूरों की आजीविका पर पड़ेगा. उद्योगपति मणिभाई बावरवा के अनुसार सिरेमिक उद्योग पूरी तरह खाड़ी देशों से आने वाली गैस पर निर्भर है.</p>
<p>उन्होंने कहा कि अगर गैस की कीमतों में 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होती है तो उत्पादन लागत भी उतनी ही बढ़ जाएगी. ऐसे में टाइलों की कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन जाएगा और बाजार पर भी इसका असर पड़ेगा.</p>
<p>उद्योग प्रतिनिधियों ने गुजरात गैस के अधिकारियों से मुलाकात कर स्थिति पर चर्चा की है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द वैकल्पिक ईंधन व्यवस्था और आपूर्ति बहाल करने के लिए कदम उठाए जाएं, ताकि मोरबी के इस विशाल उद्योग और इससे जुड़े लाखों परिवारों को बचाया जा सके.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 21:07:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला दिवस पर जानिए बेटियों का कानूनी अधिकार: पिता की संपत्ति में कितना होता है बेटी का हिस्सा, क्या कहता है कानून</title>
                                    <description><![CDATA[महिला दिवस के मौके पर बेटियों के संपत्ति अधिकार को लेकर जागरूकता जरूरी है. भारतीय कानून के अनुसार अब बेटियों को भी पिता की पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार प्राप्त हैं. शादीशुदा बेटियां भी इस हक से वंचित नहीं होतीं और जरूरत पड़ने पर कानूनी दावा कर सकती हैं.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/daughter-rights-in-father-property-india/article-8753"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-03/daughter-rights-in-father-property-india.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Women Day 2026: </strong>हर साल 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के अधिकार, समानता और सम्मान की बात करता है. समाज में महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन कई बार उन्हें अपने कानूनी अधिकारों की पूरी जानकारी नहीं होती. खासतौर पर पिता की संपत्ति में बेटियों के अधिकार को लेकर लोगों में कई भ्रम बने रहते हैं. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि भारतीय कानून के अनुसार बेटी को अपने पिता की संपत्ति में कितना हक मिलता है.</p>
<h3><strong>हिंदू उत्तराधिकार कानून में बेटियों को मिला बराबरी का अधिकार</strong></h3>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में संपत्ति से जुड़े अधिकार मुख्य रूप से हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत तय किए जाते हैं. लंबे समय तक इस कानून में बेटियों को बेटों के बराबर अधिकार नहीं मिलते थे. परिवार की पैतृक संपत्ति में बेटों को प्रमुख उत्तराधिकारी माना जाता था, जबकि बेटियों की हिस्सेदारी सीमित थी.</p>
<p>हालांकि समय के साथ महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने के लिए कानून में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए. वर्ष 2005 में हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम लागू किया गया. इस संशोधन के बाद बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार दे दिया गया. अब बेटी को भी जन्म से ही परिवार की संपत्ति में उतना ही अधिकार प्राप्त होता है जितना बेटे को होता है. इस बदलाव को महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और समानता की दिशा में बड़ा कदम माना गया.</p>
<h4><strong>पैतृक संपत्ति में जन्म से ही हिस्सेदार होती है बेटी</strong></h4>
<p>संशोधित कानून के अनुसार बेटी को पैतृक संपत्ति में जन्म से ही हिस्सेदार माना जाता है. इसका मतलब यह है कि जिस तरह बेटा अपने पिता की पारिवारिक संपत्ति में अधिकार रखता है, उसी तरह बेटी को भी समान अधिकार प्राप्त है.</p>
<p>पैतृक संपत्ति वह होती है जो परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हो. इस संपत्ति में पिता, बेटा और बेटी सभी का समान अधिकार होता है. यदि संपत्ति का बंटवारा होता है तो बेटी को भी उतना ही हिस्सा मिलेगा जितना बेटे को दिया जाता है.</p>
<p>कानून यह भी स्पष्ट करता है कि बेटी न केवल हिस्सेदार होती है बल्कि वह परिवार की सह-अधिकारिणी यानी कॉपार्सनर भी मानी जाती है. इसका अर्थ यह है कि उसे संपत्ति में हिस्सा मिलने के साथ-साथ उससे जुड़े फैसलों में भी अधिकार प्राप्त होता है.</p>
<h5><strong>अगर पिता की मृत्यु बिना वसीयत के हो जाए तो क्या होगा?</strong></h5>
<p>कई मामलों में पिता अपनी संपत्ति के लिए वसीयत नहीं बनाते. ऐसी स्थिति में संपत्ति का बंटवारा कानून के अनुसार किया जाता है. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत यदि पिता की मृत्यु बिना वसीयत के हो जाती है तो उनकी संपत्ति सभी कानूनी वारिसों के बीच बराबर बांटी जाती है.</p>
<p>इन कानूनी वारिसों में पत्नी, बेटा और बेटी शामिल होते हैं. इसका मतलब यह है कि बेटी को भी उतना ही हिस्सा मिलता है जितना बेटे को दिया जाता है. चाहे बेटी शादीशुदा हो या अविवाहित, इस अधिकार पर उसका पूरा हक बना रहता है.</p>
<p>इस तरह के मामलों में अदालत या राजस्व विभाग के माध्यम से संपत्ति का वैधानिक बंटवारा कराया जा सकता है और बेटी कानूनी रूप से अपना हिस्सा प्राप्त कर सकती है.</p>
<h6><strong>स्वअर्जित संपत्ति में पिता की भूमिका क्या होती है?</strong></h6>
<p>पैतृक संपत्ति और स्वअर्जित संपत्ति के नियम अलग-अलग होते हैं. स्वअर्जित संपत्ति वह होती है जिसे पिता ने अपनी मेहनत और आय से खुद अर्जित किया हो. ऐसी संपत्ति के मामले में पिता को यह अधिकार होता है कि वह अपनी संपत्ति किसे देना चाहते हैं.</p>
<p>अगर पिता अपनी स्वअर्जित संपत्ति के लिए वसीयत बनाते हैं तो उस संपत्ति का बंटवारा वसीयत के अनुसार ही होता है. पिता चाहे तो पूरी संपत्ति किसी एक व्यक्ति को दे सकते हैं या सभी वारिसों में बांट सकते हैं.</p>
<p>हालांकि यदि वसीयत नहीं बनाई गई है तो स्वअर्जित संपत्ति भी कानूनी वारिसों के बीच बराबर बांटी जाती है, जिसमें बेटियां भी बराबर की हिस्सेदार होती हैं.</p>
<h6><strong>शादी के बाद भी खत्म नहीं होता बेटी का अधिकार</strong></h6>
<p>समाज में लंबे समय तक यह धारणा रही कि शादी के बाद बेटी का अपने पिता की संपत्ति पर अधिकार खत्म हो जाता है. लेकिन कानून इस धारणा को पूरी तरह खारिज करता है.</p>
<p>हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार शादीशुदा बेटी भी अपने पिता की पैतृक संपत्ति में उतनी ही अधिकार रखती है जितना अविवाहित बेटी या बेटा. विवाह के बाद भी उसका यह अधिकार समाप्त नहीं होता.</p>
<p>अगर किसी कारणवश बेटी को उसका हिस्सा नहीं दिया जाता, तो वह अदालत में जाकर कानूनी दावा कर सकती है. अदालत के माध्यम से वह अपने अधिकार को प्राप्त कर सकती है. यही कारण है कि महिला दिवस जैसे अवसर महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण अवसर बन जाते हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/national/daughter-rights-in-father-property-india/article-8753</link>
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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 13:47:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UPSC Topper Anuj Agnihotri: कौन हैं अनुज अग्निहोत्री जिन्होंने डॉक्टरी के पेशे को छोड़ अपनाई यूपीएससी की राह</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के रावतभाटा के डॉ. अनुज अग्निहोत्री ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर देशभर में चर्चा बटोरी है. AIIMS जोधपुर से MBBS करने वाले अनुज पहले SDM दिल्ली रह चुके हैं. तीसरे प्रयास में मिली इस सफलता ने लाखों युवाओं को नई प्रेरणा दी है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/upsc-topper-anuj-agnihotri-biography/article-8745"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-03/upsc-topper-anuj-agnihotri-biography.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Anuj Agnihotri IAS Biography:</strong> डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना अपने आप में बड़ा लक्ष्य होता है, लेकिन राजस्थान के रावतभाटा निवासी 26 वर्षीय डॉ. अनुज अग्निहोत्री ने इससे भी बड़ा सपना देखा. उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रशासनिक सेवा की राह चुनी और वर्षों की मेहनत के बाद UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया.</p>
<h3><strong>कौन हैं अनुज अग्निहोत्री जानिए उनके बारे में</strong></h3>
<p>राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा कस्बे से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC सिविल सेवा परीक्षा में टॉप करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है. डॉ. अनुज अग्निहोत्री ने यह मुकाम अपने तीसरे प्रयास में हासिल किया है.</p>
<p>अनुज का शैक्षणिक बैकग्राउंड मेडिकल का रहा है. उन्होंने जोधपुर स्थित एम्स से MBBS की डिग्री प्राप्त की. डॉक्टर बनने के बाद भी उन्होंने महसूस किया कि प्रशासनिक सेवा में काम करते हुए वह समाज के बड़े हिस्से के लिए बदलाव ला सकते हैं.</p>
<p>इसी सोच के साथ उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और लगातार प्रयास करते हुए आखिरकार UPSC 2025 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर ली.</p>
<h4><strong>पहले भी पास कर चुके थे UPSC, दिल्ली में रहें SDM</strong></h4>
<p>अनुज अग्निहोत्री की यह पहली सफलता नहीं है. इससे पहले भी वह UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर चुके हैं. वर्ष 2023 में अपने पहले प्रयास में उन्होंने परीक्षा पास की थी और उन्हें दिल्ली, अंडमान और निकोबार सिविल सेवा (DANICS) कैडर मिला था.</p>
<p>इस कैडर के तहत उन्हें दिल्ली में SDM के पद पर नियुक्ति मिली थी. उन्होंने दिसंबर 2024 में इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी.</p>
<p>हालांकि उनका लक्ष्य IAS बनना था, इसलिए उन्होंने नौकरी के साथ-साथ अपनी तैयारी जारी रखी. दूसरे प्रयास में उन्होंने मेंस परीक्षा पास कर ली थी लेकिन इंटरव्यू में चयन नहीं हो पाया. तीसरे प्रयास में उन्होंने पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर अपनी मेहनत को मुकाम तक पहुंचा दिया.</p>
<h5><strong>अनुज ने इंटरव्यू में क्या दिया जवाब?</strong></h5>
<p>डॉ. अनुज अग्निहोत्री ने बताया कि इंटरव्यू के दौरान उनसे उनके मेडिकल बैकग्राउंड से जुड़े कई सवाल पूछे गए. चूंकि उन्होंने MBBS किया है, इसलिए इंटरव्यू बोर्ड ने मेडिकल साइंस से संबंधित विषयों पर चर्चा की.</p>
<p>इसके अलावा राजस्थान के इतिहास और संस्कृति को लेकर भी सवाल किए गए. चित्तौड़गढ़ से जुड़े होने के कारण उनसे संत मीरा बाई के बारे में पूछा गया और यह भी सवाल किया गया कि उनके गुरु कौन थे.</p>
<p>इसके साथ ही राजस्थान के इतिहास को प्रसिद्ध करने वाले इतिहासकार के बारे में पूछा गया, जिसका जवाब उन्होंने जेम्स टॉड बताया. अनुज के अनुसार इंटरव्यू के दौरान आत्मविश्वास और शांत रहना बहुत जरूरी होता है.</p>
<h6><strong>परिवार ने दिया पूरा साथ, माता-पिता ने जताया गर्व</strong></h6>
<p>अनुज अग्निहोत्री की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा योगदान है. उनके पिता केबी अग्निहोत्री राजस्थान परमाणु बिजलीघर की यूनिट 1 और 2 में कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां मंजू अग्निहोत्री गृहिणी हैं.</p>
<p>उनके पिता ने कहा कि बेटे की इस उपलब्धि से पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है. उन्होंने बताया कि अनुज शुरू से ही पढ़ाई में बहुत होनहार थे और हमेशा अपने लक्ष्य को लेकर गंभीर रहते थे.</p>
<p>वहीं उनकी मां ने कहा कि उन्होंने बेटे के खानपान और दिनचर्या का पूरा ध्यान रखा ताकि उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो. परिवार के इसी सहयोग ने अनुज को कठिन तैयारी के दौरान भी मजबूती दी.</p>
<h6><strong>रावतभाटा से AIIMS और फिर UPSC टॉपर बनने तक का सफर</strong></h6>
<p>अनुज अग्निहोत्री की शुरुआती पढ़ाई रावतभाटा परमाणु ऊर्जा केंद्रीय विद्यालय से हुई. स्कूल के समय से ही वह पढ़ाई में काफी तेज थे.</p>
<p>उन्होंने 12वीं कक्षा में 94 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. इसके बाद उन्होंने AIIMS की मेडिकल प्रवेश परीक्षा में 215वीं रैंक प्राप्त की और जोधपुर एम्स में MBBS की पढ़ाई शुरू की.</p>
<p>मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का निर्णय लिया. पढ़ाई के साथ-साथ अनुज को टेबल टेनिस खेलना पसंद है. इसके अलावा वह क्रिकेट देखना और स्टैंड-अप कॉमेडी देखना भी पसंद करते हैं. उनका मानना है कि कठिन तैयारी के बीच थोड़ा मानसिक संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होता है.</p>
<h6><strong>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दी बधाई</strong></h6>
<p>UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में देश में पहला स्थान हासिल करने पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी अनुज अग्निहोत्री को बधाई दी है.</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुज की यह उपलब्धि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है. उन्होंने कहा कि उनकी सफलता राज्य के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी.</p>
<p>मुख्यमंत्री ने परीक्षा में सफल हुए सभी अभ्यर्थियों को भी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे सभी पूरी निष्ठा के साथ राष्ट्र सेवा के अपने संकल्प को पूरा करेंगे.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 19:48:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>IMD Weather Alert: उत्तर प्रदेश सहित 11 राज्यों में बदलेगा मौसम, आंधी-बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तर प्रदेश समेत 11 राज्यों में मौसम बदलाव का अलर्ट जारी किया है. पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से आंधी, बारिश, तेज हवाएं और पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी के आसार हैं. तापमान में हल्की गिरावट संभव है, लेकिन ठंड की वापसी नहीं होगी.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/imd-weather-alert-uttar-pradesh-delhi-bihar-rain-thunderstorm/article-8699"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-02/imd-alert-in-india-news.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>IMD Weather Alert:</strong> उत्तर भारत में फरवरी के मध्य तक गर्मी का एहसास हो रहा था, लेकिन अब मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है. IMD ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, बिहार समेत 11 राज्यों में बारिश, आंधी और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है. पश्चिमी विक्षोभ के असर से पहाड़ी और मैदानी इलाकों दोनों में मौसम बदलेगा और अगले कुछ दिन उतार-चढ़ाव वाले रहेंगे.</p>
<h3><strong>उत्तर प्रदेश में 17 और 18 को आंधी-बारिश का अलर्ट</strong></h3>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश में फिलहाल मौसम साफ बना हुआ है, लेकिन यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं रहेगी. IMD के अनुसार 17 और 18 फरवरी को प्रदेश के कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है. सहारनपुर, अलीगढ़, हाथरस, कासगंज, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद और मैनपुरी जैसे जिलों में मौसम अचानक करवट ले सकता है.</p>
<p>इन जिलों में बादल छाने के बाद हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग का कहना है कि इससे अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, हालांकि ठंड की वापसी नहीं होगी. किसानों को सलाह दी गई है कि तेज हवाओं और बारिश को देखते हुए फसल और कृषि उपकरणों को सुरक्षित स्थान पर रखें.</p>
<h4><strong>दिल्ली-एनसीआर में धूप और बादलों की आंख-मिचौली</strong></h4>
<p>दिल्ली-एनसीआर में आज मौसम सुहावना रहने की उम्मीद है. सुबह और शाम हल्की ठंड महसूस होगी, जबकि दोपहर में तेज धूप के कारण गर्मी बढ़ सकती है. बीते 24 घंटों में दिल्ली-एनसीआर में करीब 17 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, जिससे मौसम अपेक्षाकृत साफ बना रहा.</p>
<p>IMD के अनुसार 17 और 18 फरवरी को राजधानी में बादल छा सकते हैं और कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी भी हो सकती है. हालांकि भारी बारिश की संभावना नहीं जताई गई है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर असर के कारण होगा.</p>
<h5><strong>बिहार में घने कोहरे का अलर्ट, दृश्यता होगी कम</strong></h5>
<p>बिहार में मौसम विभाग ने घने कोहरे की चेतावनी जारी की है. सीवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, पूर्वी चंपारण, गया, जहानाबाद, पूर्णिया, सहरसा और किशनगंज जिलों में कोहरा छाने की संभावना है. खासतौर पर सुबह के समय दृश्यता काफी कम हो सकती है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित होने की आशंका है.</p>
<p>IMD ने वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. तापमान में बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं, लेकिन नमी बढ़ने के कारण ठंड का अहसास बना रह सकता है. ग्रामीण इलाकों में कोहरे का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है.</p>
<h6><strong>उत्तराखंड और हिमाचल में बिगड़ेगा मौसम, बर्फबारी के आसार</strong></h6>
<p>पर्वतीय राज्यों में मौसम ज्यादा खराब हो सकता है. उत्तराखंड में 16 और 17 फरवरी को भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है. चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, पौड़ी और गढ़वाल जिलों में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है. ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी भी हो सकती है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी.</p>
<p>वहीं हिमाचल प्रदेश में फिलहाल मौसम साफ है, लेकिन 15 फरवरी के बाद बादल छाने लगेंगे. ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बर्फबारी होने की संभावना है, जिससे जनजीवन और यातायात प्रभावित हो सकता है.</p>
<h6><strong>पश्चिमी विक्षोभ से 15 से 20 तक मौसम में उतार-चढ़ाव</strong></h6>
<p>मौसम विभाग के अनुसार 15 से 20 फरवरी के बीच उत्तर भारत के मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिलेगा. महाशिवरात्रि के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसका असर मैदानी और पहाड़ी दोनों इलाकों में दिखाई देगा.</p>
<p>इस दौरान बादल बढ़ेंगे और कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. हालांकि IMD का कहना है कि यह बदलाव अस्थायी होगा. फरवरी के अंत तक ठंड की वापसी की संभावना नहीं है, लेकिन मौसम का मिजाज बदला-बदला रहेगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 10:56:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
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                <title>80 के दशक की देश की आवाज हुई शांत: दूरदर्शन की दिग्गज एंकर सरला माहेश्वरी का निधन, जानिए उनके बारे में</title>
                                    <description><![CDATA[दूरदर्शन की प्रतिष्ठित और भरोसेमंद समाचार वाचक सरला माहेश्वरी का 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया. 80 और 90 के दशक में अपनी मधुर आवाज, शुद्ध हिंदी और गरिमामय प्रस्तुति से उन्होंने टीवी पत्रकारिता को नई पहचान दी. आज शाम दिल्ली के निगम बोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार होगा.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/80s-voice-sarala-maheshwari-doordarshan/article-8693"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-02/sarala-maheshwari-doordarshan.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Sarla Maheshwari Biography: </strong>भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के स्वर्ण युग की एक मजबूत और विश्वसनीय आवाज अब हमेशा के लिए शांत हो गई है. दूरदर्शन की दिग्गज समाचार एंकर सरला माहेश्वरी का 71 साल की उम्र में निधन हो गया. उनके जाने से मीडिया जगत ने न सिर्फ एक एंकर बल्कि भरोसे, गरिमा और शुद्ध हिंदी की पहचान को खो दिया है.</p>
<h3><strong>दूरदर्शन के स्वर्ण युग की पहचान थीं सरला माहेश्वरी</strong></h3>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरला माहेश्वरी उन चुनिंदा एंकरों में थीं जिनकी आवाज सुनते ही दर्शक स्क्रीन के सामने ठहर जाते थे. 80 और 90 के दशक में जब समाचार का मतलब केवल दूरदर्शन हुआ करता था, उस दौर में सरला माहेश्वरी न्यूज बुलेटिन का सबसे भरोसेमंद चेहरा थीं.</p>
<p>उनकी प्रस्तुति में न तो आक्रामकता थी और न ही दिखावा, बल्कि तथ्य, संयम और गंभीरता का संतुलन था. ब्लैक एंड व्हाइट टीवी से लेकर कलर टीवी के दौर तक उन्होंने समाचार को गरिमा और मर्यादा के साथ प्रस्तुत किया और दूरदर्शन की साख को मजबूत बनाया.</p>
<h4><strong>मधुर आवाज, शुद्ध हिंदी और सादगी बनी पहचान</strong></h4>
<p>सरला माहेश्वरी की सबसे बड़ी ताकत उनकी शुद्ध हिंदी और सटीक उच्चारण था. वह खबरों को बिना किसी नाटकीयता के सहज और स्पष्ट अंदाज में पढ़ती थीं. माथे पर गोल बिंदी, सलीके से पहनी गई साड़ी और आत्मविश्वास से भरा व्यक्तित्व उनकी अलग पहचान बन गया था. उनकी आवाज में एक ठहराव था जो दर्शकों को भरोसा देता था. यही वजह थी कि उन्हें केवल एंकर नहीं बल्कि देश की आवाज कहा जाने लगा.</p>
<h5><strong>शिक्षा से एंकरिंग तक का प्रेरणादायक सफर</strong></h5>
<p>1954 में दिल्ली में जन्मी सरला माहेश्वरी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी में बीए, एमए और पीएचडी की पढ़ाई की. 1976 में पीएचडी के दौरान उन्होंने दूरदर्शन में एनाउंसर के पद के लिए ऑडिशन दिया, जहां उनका चयन हुआ. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एनाउंसर के रूप में की और करीब पांच वर्षों तक इस भूमिका में काम किया. इस दौरान उन्होंने बच्चों के लोकप्रिय कार्यक्रम कपड़े की कहानी जैसे शोज की स्क्रिप्ट भी लिखी. बाद में उन्होंने समाचार वाचन में कदम रखा और जल्द ही दूरदर्शन की प्रमुख एंकर बन गईं.</p>
<h6><strong>इंग्लैंड, बीबीसी और परिवार के साथ संतुलन</strong></h6>
<p>सरला माहेश्वरी का निजी जीवन भी बेहद संतुलित और प्रेरक रहा. उन्होंने डॉक्टर पवन माहेश्वरी से विवाह किया, जो पेशे से गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट हैं. शादी के बाद वह इंग्लैंड चली गईं और वहां बीबीसी के लिए काम किया. अक्टूबर 1986 में बीबीसी से इस्तीफा देने के बाद वह भारत लौटीं.</p>
<p>इस दौरान वह दो बेटों कविश और हिमांशु की मां बनीं और परिवार को प्राथमिकता देते हुए करियर से कुछ समय का ब्रेक लिया. बच्चों के बड़े होने के बाद 1988 में उन्होंने दूरदर्शन पर दोबारा वापसी की और एक बार फिर दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई.</p>
<h6><strong>दूरदर्शन से विदाई और पूरे देश की श्रद्धांजलि</strong></h6>
<p>2005 में सरला माहेश्वरी ने दूरदर्शन से इस्तीफा दिया और इसके बाद वह सार्वजनिक जीवन से दूर रहीं. उनके निधन की जानकारी दूरदर्शन ने सोशल मीडिया के जरिए साझा की. डीडी नेशनल और डीडी न्यूज ने उनकी मधुर आवाज, सटीक उच्चारण और गरिमामय प्रस्तुति को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी.</p>
<p>ऑल इंडिया महिला कांग्रेस ने इसे टेलीविजन पत्रकारिता के स्वर्ण युग का अंत बताया. वरिष्ठ एंकर शम्मी नारंग सहित कई पत्रकारों ने उन्हें ग्रेस और तहजीब की मिसाल बताया. आज शाम 4 बजे दिल्ली के निगम बोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 18:57:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>Weather Update In India: उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में बारिश का अलर्ट ! कड़ाके की ठंड से जनजीवन होगा प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर भारत समेत देश के कई राज्यों में कड़ाके की ठंड का प्रकोप जारी है. मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी का अलर्ट जारी किया है. घना कोहरा भी परेशानी बढ़ाएगा.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/weather-update-india-up-rain-alert-cold-wave-fog/article-8634"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-01/weather-update-in-india-rain-cold.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Weather Update In India: </strong>मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के लिए बारिश और बर्फबारी की चेतावनी जारी की है. उत्तर भारत में ठंड का असर लगातार बढ़ता जा रहा है. घना कोहरा, शीतलहर और आने वाले दिनों में बारिश से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है. पश्चिमी विक्षोभ के कारण 22 से 24 जनवरी के बीच मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.</p>
<h3><strong>जम्मू कश्मीर, हिमाचल और लद्दाख में बर्फबारी का तेज दौर</strong></h3>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौसम विभाग ने 19 से 21 जनवरी के बीच जम्मू कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है. इसके बाद 22 से 24 जनवरी के बीच पश्चिमी विक्षोभ और ज्यादा सक्रिय होगा, जिससे भारी बारिश और भारी हिमपात की संभावना है. पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान में तेज गिरावट आ सकती है. बर्फबारी के कारण पहाड़ी सड़कों पर फिसलन बढ़ने और यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई है.</p>
<h4><strong>दिल्ली एनसीआर में घना कोहरा और हल्की बारिश की संभावना</strong></h4>
<p>दिल्ली एनसीआर में रविवार सुबह से ही घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई. मौसम विभाग के मुताबिक 19 जनवरी से मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा. सुबह के समय हल्का से घना कोहरा और दिन में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं. 18 से 20 जनवरी के बीच न्यूनतम तापमान में धीरे धीरे बढ़ोतरी होगी, लेकिन उत्तर पूर्वी ठंडी हवाओं के कारण सर्दी का असर बना रहेगा. इस दौरान हल्की बारिश की भी संभावना है.</p>
<h5><strong>उत्तर प्रदेश में कोहरा और बारिश दोनों का अलर्ट</strong></h5>
<p>उत्तर प्रदेश में अगले दो से तीन दिनों तक घने से बहुत घने कोहरे का असर रहने की संभावना है. इससे विजिबिलिटी प्रभावित हो सकती है और यातायात पर असर पड़ सकता है. मौसम विभाग के अनुसार 22 से 24 जनवरी के बीच राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. हालांकि अगले चार से पांच दिनों के दौरान तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन ठंड का असर लगातार बना रहेगा.</p>
<h6><strong>बिहार में कोहरे का कहर, तापमान में हल्की बढ़ोतरी</strong></h6>
<p>बिहार के कई जिलों में अगले दो से तीन दिनों तक घना से बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है. सुबह और रात के समय दृश्यता बेहद कम हो सकती है. हालांकि न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की धीरे धीरे बढ़ोतरी के संकेत हैं. फिलहाल बिहार के लिए बारिश या शीतलहर को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है, लेकिन कोहरे को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है.</p>
<h6><strong>राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में बारिश के आसार</strong></h6>
<p>राजस्थान के कुछ हिस्सों में 22 से 24 जनवरी के बीच हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. 22 और 23 जनवरी को कुछ क्षेत्रों में गरज चमक के साथ बारिश हो सकती है. वहीं 19 जनवरी को सुबह और रात के समय घना कोहरा छाए रहने का अनुमान है. पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी 22 से 24 जनवरी के बीच बारिश के आसार हैं, जबकि 19 जनवरी को घने कोहरे की चेतावनी जारी की गई है.</p>
<h6><strong>उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में ठंड और शीतलहर का असर</strong></h6>
<p>उत्तराखंड में मौसम ने करवट ले ली है. पहाड़ी इलाकों में हल्का हिमपात और मैदानी क्षेत्रों में कोहरा और धुंध छाई हुई है. 21 और 22 जनवरी को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है. 23 और 24 जनवरी को राज्य के बड़े हिस्से में वर्षा की संभावना जताई गई है. मध्य प्रदेश के रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग में शीतलहर का असर रह सकता है, जबकि ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में घना कोहरा छाने की संभावना है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/national/weather-update-india-up-rain-alert-cold-wave-fog/article-8634</link>
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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 19:40:36 +0530</pubDate>
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