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                <title>राष्ट्रीय - Yugantar Pravah </title>
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                <title>Dharmendra Pradhan Resigns: कॉकरोच के चक्रव्यूह में फंसे धर्मेंद्र प्रधान ! मंत्री पद से दिया इस्तीफा, साझा किया संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[नीट-यूजी परीक्षा विवाद और लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को त्यागपत्र भेजने की जानकारी दी. अपने पत्र में उन्होंने युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए यह निर्णय लेने की बात कही.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/dharmendra-pradhan-resigns-after-neet-ug-controversy/article-9032"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-07/dharmendra-pradhan-resigns.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Dharmendra Pradhan Resigns: </strong>NEET-UG परीक्षा को लेकर देशभर में छिड़े विवाद और पिछले कई दिनों से जारी राजनीतिक एवं छात्र संगठनों के विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है.</p>
<h3><strong>एक्स पर दी इस्तीफे की जानकारी</strong></h3>
<p>धर्मेंद्र प्रधान ने अपने आधिकारिक एक्स पोस्ट में बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेज दिया है. उन्होंने लिखा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें बेहद दुखी किया है. उन्होंने कहा कि भारत की युवाशक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और उसे किसी भी भ्रम या भटकाव के कुचक्र में फंसने नहीं दिया जाएगा.</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/i/status/2080938216505667663">https://twitter.com/i/status/2080938216505667663</a></blockquote>
<p>

</p>
<h4><strong>इस्तीफा पत्र में शिक्षा व्यवस्था पर जताया भरोसा</strong></h4>
<p>अपने त्यागपत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार से जुड़े रहे हैं. उनके अनुसार मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही विकसित भारत की आधारशिला है. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विद्यार्थियों का विश्वास बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है.</p>
<h5><strong>नीट विवाद पर क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान</strong></h5>
<p>पूर्व शिक्षा मंत्री ने अपने पत्र में NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि जैसे ही मामले की जानकारी मिली, केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी. साथ ही परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया ताकि किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो.</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में NEET-UG परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने का निर्णय लिया गया है, जिससे परीक्षा प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाई जा सके.</p>
<h6><strong>20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा कराना थी प्राथमिकता</strong></h6>
<p>धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार का सबसे बड़ा उद्देश्य 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षा को निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना था. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के समन्वय से 21 जून 2026 को परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित कराई गई.</p>
<h6><strong>पहले दिन से जिम्मेदारी स्वीकार की</strong></h6>
<p>उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि उन्होंने शुरुआत से ही इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी भी इससे पीछे नहीं हटे. उनका संकल्प था कि परीक्षा माफिया किसी भी मेधावी छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ न कर सके और किसी भी विद्यार्थी के साथ अन्याय न हो.</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG परीक्षा परिणाम में गरीब और सामान्य परिवारों से आने वाले कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की, जो शिक्षा व्यवस्था में विश्वास का प्रतीक है.</p>
<h6><strong>विरोध प्रदर्शन और युवाओं के भविष्य का जिक्र</strong></h6>
<p>धर्मेंद्र प्रधान ने जंतर-मंतर सहित देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा से कहीं बड़ा है. उन्होंने कहा कि देश की एकता और विद्यार्थियों के भविष्य को किसी भी प्रकार की कानूनी या राजनीतिक जटिलता में नहीं फंसने देना चाहिए.</p>
<p>उन्होंने लिखा कि राष्ट्र विरोधी ताकतें मौजूदा परिस्थितियों का लाभ न उठा सकें और विद्यार्थी आंदोलन की बजाय अपनी पढ़ाई एवं करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकें, इसी सोच के साथ उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया.</p>
<h6><strong>प्रधानमंत्री का जताया आभार</strong></h6>
<p>अपने संदेश के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है और वह भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की सेवा के लिए समर्पित रहेंगे.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 17:44:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NTA News: पेपर लीक विवाद के बीच बड़ा एक्शन, NTA के 47 अधिकारी बर्खास्त, परीक्षा प्रणाली में होंगे व्यापक सुधार</title>
                                    <description><![CDATA[NEET समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है. सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है. शिक्षा मंत्रालय परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए व्यापक सुधार लागू करने की तैयारी में जुट गया है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/nta-47-officers-dismissed-after-paper-leak-major-exam-reforms/article-9031"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-07/nta-47-officers-suspended-news.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>New Delhi:</strong> देशभर में NEET समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक को लेकर लगातार उठ रहे सवालों, छात्र संगठनों के विरोध-प्रदर्शनों और परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है. सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है. इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए व्यापक सुधार लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है. सरकार का कहना है कि इन बदलावों से भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी और लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत होगा.</p>
<h3><strong>पेपर लीक विवाद के बीच सरकार का बड़ा फैसला</strong></h3>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार के इस एक्शन का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना और उम्मीदवारों का भरोसा बहाल करना है. इसके तहत परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़े कई नए प्रावधान लागू किए जा सकते हैं. सरकार का मानना है कि मजबूत व्यवस्था के जरिए भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.</p>
<h4><strong>परीक्षा प्रणाली में होंगे व्यापक सुधार</strong></h4>
<p>शिक्षा मंत्रालय परीक्षा संचालन को पहले से अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए कई तकनीकी और प्रशासनिक बदलावों पर काम कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, परीक्षा केंद्रों की मॉनिटरिंग, अधिकारियों की जवाबदेही और पूरी परीक्षा प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए नई व्यवस्था तैयार की जा रही है. सरकार का दावा है कि इन सुधारों से प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार होगा.</p>
<h5><strong>जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी</strong></h5>
<p>उधर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अलग-अलग राज्यों से पहुंचे हजारों छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्र संगठनों का कहना है कि पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है. प्रदर्शनकारी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ परीक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार की मांग कर रहे हैं.</p>
<h6><strong>सरकार के अगले कदम पर टिकी निगाहें</strong></h6>
<p>दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देशभर में पेपर लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच सरकार का यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है. अब सभी की नजर शिक्षा मंत्रालय की ओर से लागू किए जाने वाले नए सुधारों पर रहेगी. माना जा रहा है कि यदि प्रस्तावित बदलाव प्रभावी ढंग से लागू होते हैं तो भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता को नई मजबूती मिल सकती है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 00:18:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Sonam Wangchuk Health Update: मेदांता अस्पताल के ICU में भर्ती हुए सोनम वांगचुक ! दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया दख़ल</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को मंगलवार शाम सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया. उन्हें ICU में भर्ती किया गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है. सफदरजंग अस्पताल ने बताया कि डिस्चार्ज के समय उनकी हालत लगभग स्थिर थी, हालांकि पैनसाइटोपीनिया और पोटैशियम का स्तर अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/sonam-wangchuk-shifted-to-medanta-hospital-icu/article-9025"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-07/sonam-wangchuk-shifted-medanta.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Sonam Wangchuk Health: </strong>अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है. अदालत ने उनकी पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्काल निजी अस्पताल में स्थानांतरण का आदेश दिया था. फिलहाल वांगचुक ICU में भर्ती हैं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए है.</p>
<h3><strong>दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद मेदांता अस्पताल पहुंचे सोनम </strong></h3>
<p>मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने सोनम वांगचुक को तत्काल सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने का आदेश दिया. यह आदेश उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो की याचिका पर दिया गया, जिसमें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई थी.</p>
<h4><strong>मेदांता के ICU में भर्ती, डॉक्टरों की टीम कर रही निगरानी</strong></h4>
<p>प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल के दूसरे फ्लोर स्थित ICU में भर्ती किया गया है. उनके इलाज की जिम्मेदारी अस्पताल की इंटरनल मेडिसिन टीम को सौंपी गई है. विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी 24 घंटे निगरानी कर रही है. मंगलवार रात भी उन्हें ICU में ही रखा गया ताकि स्वास्थ्य की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके.</p>
<h5><strong>सफदरजंग अस्पताल ने डिस्चार्ज के समय बताई स्वास्थ्य स्थिति</strong></h5>
<p>सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि मंगलवार शाम 6:40 बजे सोनम वांगचुक को डिस्चार्ज कर मेदांता अस्पताल की मेडिकल टीम को सौंप दिया गया. अस्पताल के अनुसार, डिस्चार्ज के समय उनके सभी जरूरी स्वास्थ्य पैरामीटर लगभग स्थिर थे.</p>
<p>हालांकि डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें अब भी पैनसाइटोपीनिया की समस्या बनी हुई है. इसके अलावा उनके शरीर में पोटैशियम का स्तर 3.4 mEq/L दर्ज किया गया, जिसे सामान्य स्तर से कम माना जाता है. इलाज की निरंतरता बनाए रखने के लिए उनकी सभी मेडिकल रिपोर्ट, जांच और उपचार से जुड़े दस्तावेज मेदांता अस्पताल की टीम को सौंप दिए गए हैं.</p>
<h6><strong>28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं सोनम वांगचुक</strong></h6>
<p>सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं. वह नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. लगातार उपवास के कारण उनकी सेहत बिगड़ने लगी थी.</p>
<h6><strong>19 जुलाई को जंतर-मंतर से अस्पताल ले गई थी दिल्ली पुलिस</strong></h6>
<p>19 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था. इसके बाद उनकी पत्नी ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मांगते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया. अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद मंगलवार को उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए तत्काल मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने का निर्देश दिया.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 22:06:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Rahul Gandhi Detained: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर पीएम आवास पर धरना ! राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव हिरासत में</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन मंगलवार को उस समय तेज हो गया जब राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव प्रधानमंत्री आवास के पास धरने पर बैठ गए. दिल्ली पुलिस ने तीनों नेताओं को हिरासत में ले लिया. इस दौरान विपक्ष ने केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/rahul-gandhi-detained-pm-residence-protest-dharmendra-pradhan-resignation/article-9024"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-07/rahul-akhilesh-priyanka-detained-cjp.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Delhi News In Hindi:</strong> शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों का प्रदर्शन मंगलवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम बन गया. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव प्रधानमंत्री आवास के पास धरने पर बैठे, जहां दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. कार्रवाई के बाद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करने का आरोप लगाया.</p>
<h3><strong>पीएम आवास के पास धरने पर बैठे राहुल गांधी हुए डिटेन</strong></h3>
<p>शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी नेताओं का विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर से आगे बढ़कर प्रधानमंत्री आवास के पास पहुंच गया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए. इसी दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी अपने सांसदों के साथ राहुल गांधी को समर्थन देने पहुंचे.</p>
<p>दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सुरक्षा टीम को हिरासत में लिया. इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव को भी धरना स्थल से हटाकर पुलिस वाहन में बैठाया गया और थाने ले जाया गया.</p>
<h4><strong>प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर बोला हमला</strong></h4>
<p>हिरासत में लिए जाने के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, "वे डरपोक हैं. वे डरे हुए हैं. हम उनसे नहीं डरते. वे हमसे डरते हैं."</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रियंका गांधी पुलिस बस के गेट पर खड़ी रहीं और अंदर जाने से इनकार करती रहीं. इसके बाद महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़कर बस में बैठाया.</p>
<h5><strong>अखिलेश यादव बोले, छात्रों की मांगें क्यों नहीं सुन रही सरकार</strong></h5>
<p>हिरासत में लिए जाने के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों की मांगें सुनें. वे उनकी मांगें क्यों नहीं मान रहे हैं?" उन्होंने कहा कि विपक्ष छात्रों के हितों की आवाज उठाता रहेगा और उनकी मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.</p>
<h6><strong>रणदीप सुरजेवाला बोले, यह नई क्रांति की शुरुआत</strong></h6>
<p>कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा, "यह अंत नहीं है. यह राहुल गांधी के नेतृत्व में एक नई क्रांति की शुरुआत है. वे हमें जेल में डाल सकते हैं, हम पर लाठीचार्ज कर सकते हैं या हमारे साथ बुरा बर्ताव कर सकते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन लाखों बेटे-बेटियों को जवाब देना होगा जिन्होंने पेपर लीक के कारण अपना भविष्य खो दिया है."</p>
<h6><strong>धरना खत्म कराने पहुंचे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह</strong></h6>
<p>पुलिस कार्रवाई से पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह प्रधानमंत्री आवास के पास पहुंचे और राहुल गांधी सहित कांग्रेस नेताओं से धरना समाप्त करने की अपील की. हालांकि कांग्रेस नेताओं ने उनकी बात नहीं मानी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे.</p>
<h6><strong>दिल्ली की राजनीति में बढ़ी हलचल</strong></h6>
<p>राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव की हिरासत के बाद राजधानी दिल्ली का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है. विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया है, जबकि पुलिस का कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई. विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रहेगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/national/rahul-gandhi-detained-pm-residence-protest-dharmendra-pradhan-resignation/article-9024</link>
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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 20:11:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Sonam Wangchuk Hunger Strike: संसद मार्च से पहले सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान, अनशन खत्म करने के लिए रखीं तीन शर्तें</title>
                                    <description><![CDATA[संसद मार्च और मानसून सत्र से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि वह 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए सरकार और राजनीतिक दलों के सामने तीन स्पष्ट शर्तें रखी हैं. वांगचुक का कहना है कि उनकी लड़ाई शिक्षा सुधार, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/sonam-wangchuk-hunger-strike-three-conditions/article-9017"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-07/sonam-wangchuk-hunger-strike.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Sonam Wangchuk Hunger Strike: </strong>शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने संसद मार्च से पहले बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि उनका अनशन तभी समाप्त होगा जब उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन मिलेगा. इसके लिए उन्होंने सरकार और सभी राजनीतिक दलों के सामने तीन अहम शर्तें रखी हैं.</p>
<h3><strong>संसद मार्च से पहले सोनम वांगचुक का बड़ा बयान</strong></h3>
<p>सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उनकी तबीयत चाहे जैसी भी हो, उनका आंदोलन संसद मार्च और शिक्षा सुधार की मांगों से जुड़ा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अनशन केवल औपचारिक आश्वासन पर नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई के भरोसे पर ही समाप्त होगा.</p>
<p>वांगचुक ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए है.</p>
<h4><strong>अनशन समाप्त करने के लिए रखीं तीन शर्तें</strong></h4>
<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>पहली शर्त</strong></span></p>
<p>वांगचुक ने कहा कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में हाल के वर्षों में सामने आई नाकामियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए. उनका मानना है कि जवाबदेही तय किए बिना शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है.</p>
<p><span style="color:rgb(132,63,161);"><strong>दूसरी शर्त</strong></span></p>
<p>उन्होंने कहा कि यदि उन्हें और उनके आंदोलन के नेतृत्व को संसद तक शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचने दिया जाता है तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता यह भरोसा दिलाते हैं कि वे शिक्षा सुधार और पेपर लीक के मुद्दे को संसद में मजबूती से उठाएंगे, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे.</p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>तीसरी शर्त</strong></span></p>
<p>वांगचुक ने कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों या किसी अन्य वजह से वह संसद तक नहीं पहुंच पाते हैं, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात करें और शिक्षा सुधार के मुद्दे को संसद में उठाने का स्पष्ट आश्वासन दें.</p>
<h5><strong>सफदरजंग अस्पताल में लगाए गंभीर आरोप</strong></h5>
<p>सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी तरीके से रोका गया है. उन्होंने कहा कि उनकी आवाजाही, बातचीत और लोगों से मिलने की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है. उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है.</p>
<h6><strong>पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने भी दोहराई मांग</strong></h6>
<p>इससे पहले शनिवार देर रात वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने भी कहा था कि यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सोमवार को सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर यह भरोसा दिलाते हैं कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा में जवाबदेही और शिक्षा सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे, तभी सोनम वांगचुक अपना अनशन समाप्त करेंगे.</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत मांग के लिए नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है.</p>
<h6><strong>शिक्षा सुधार और युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित है आंदोलन</strong></h6>
<p>सोनम वांगचुक का कहना है कि उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए है. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर संसद में गंभीरता से उठाएं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/national/sonam-wangchuk-hunger-strike-three-conditions/article-9017</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 09:34:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CJI सूर्यकांत को कथित अपशब्द, कोर्ट में उछाले कागज ! कौन हैं प्रबल प्रताप? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हुआ हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उस समय अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई जब स्वयं अपना पक्ष रख रहे याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने अदालत में कथित तौर पर अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया और कागज हवा में उछाल दिए. सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें कोर्टरूम से बाहर ले जाया. हालांकि, अदालत ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू नहीं करने का फैसला किया.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/who-is-prabal-pratap-supreme-court-cji/article-8991"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-07/who-is-advocate-prabal-pratap-cji.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Prabal Pratap Supreme Court: </strong>सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने सभी को हैरान कर दिया. स्वयं अपनी पैरवी कर रहे याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने कथित तौर पर अदालत के प्रति आपत्तिजनक व्यवहार किया, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ अपशब्द कहे और कोर्टरूम में कागज उछाल दिए. इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने संयम बरतते हुए उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की.</p>
<h3><strong>कौन हैं प्रबल प्रताप (Who Is Prabal Pratap)</strong></h3>
<p>सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले व्यक्ति की पहचान प्रबल प्रताप के रूप में हुई है. वह पेशे से वकील बताए जा रहे हैं और अपने ही मामले में स्वयं याचिकाकर्ता के रूप में अदालत के सामने पेश हुए थे. उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और सुनवाई के दौरान खुद अपनी दलीलें रख रहे थे.</p>
<h4><strong>सुनवाई के दौरान क्या हुआ?</strong></h4>
<p>सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप ने न्यायाधीशों को "न्यायिक सेवक" कहकर संबोधित किया. इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर अदालत से कहा कि वह लखनऊ के एक एएसपी के खिलाफ साइबर अपराध से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दे.</p>
<p>उनकी भाषा और व्यवहार पर पीठ में शामिल जस्टिस केवी विश्वनाथन ने आपत्ति जताई और पूछा कि क्या वह अदालत को आदेश दे रहे हैं. इसी दौरान माहौल और तनावपूर्ण हो गया. आरोप है कि प्रबल प्रताप ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ भी आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और हाथ में मौजूद दस्तावेज कोर्टरूम में उछाल दिए.</p>
<h5><strong>सुरक्षा कर्मियों ने संभाला मोर्चा</strong></h5>
<p>अचानक हुए घटनाक्रम के बाद सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप किया और प्रबल प्रताप को कोर्टरूम से बाहर ले गए. कुछ समय तक उन्हें अदालत परिसर में स्थित डीएसपी कार्यालय में भी रोके जाने की जानकारी सामने आई. घटना के बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या उनके खिलाफ अवमानना या अन्य कानूनी कार्रवाई होगी.</p>
<h6><strong>सुप्रीम कोर्ट ने नहीं की अवमानना की कार्रवाई</strong></h6>
<p>कोर्टरूम में हुए व्यवधान और कथित दुर्व्यवहार के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं की. जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा कि अदालत उनके खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करने का प्रस्ताव नहीं रखती. पीठ ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी खारिज कर दी.</p>
<h6><strong>अदालत ने जताई सहानुभूति</strong></h6>
<p>सुनवाई के दौरान अदालत की एक टिप्पणी भी चर्चा का विषय बनी. जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा कि याचिकाकर्ता काफी परेशान और हताश दिखाई दे रहे थे. अदालत ने कहा कि उसे उनके प्रति केवल सहानुभूति है और इसी कारण उनके व्यवहार के बावजूद अवमानना की कार्रवाई शुरू नहीं की गई.</p>
<h6><strong>क्या था पूरा मामला?</strong></h6>
<p>प्रबल प्रताप का विवाद लखनऊ के विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के एक आदेश से जुड़ा था. उन्होंने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी. हालांकि, मजिस्ट्रेट ने सीधे एफआईआर दर्ज कराने का आदेश देने के बजाय उनके आवेदन को निजी शिकायत के रूप में स्वीकार कर आगे की प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया था.</p>
<p>इसके खिलाफ उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन हाई कोर्ट ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया कि उनके पास प्रभावी वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध हैं.</p>
<h6><strong>सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं दी राहत</strong></h6>
<p>इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए प्रबल प्रताप सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. शीर्ष अदालत ने रिकॉर्ड और संबंधित आदेश का अध्ययन करने के बाद कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता.</p>
<p>इसके साथ ही उनकी विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी गई. हालांकि, सुनवाई के दौरान हुए पूरे घटनाक्रम के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने संयम का परिचय देते हुए प्रबल प्रताप के खिलाफ कोई अवमानना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/national/who-is-prabal-pratap-supreme-court-cji/article-8991</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:11:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्रीय मंत्री को 99.60 लाख की सब्सिडी: अपने ही मंत्रालय की योजना से लाभ मिलने पर उठा विवाद, जानिए पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना के तहत 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद विवाद खड़ा हो गया है. आरोप है कि उन्हें अपने ही मंत्रालय के अधीन संचालित योजना का लाभ मिला. वहीं मंत्री ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने एक किसान के रूप में नियमों के तहत आवेदन किया था और पूरी प्रक्रिया निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पूरी हुई.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/bhagirath-choudhary-nhb-subsidy-controversy/article-8967"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-06/bhagirath-chaudhary-subsidy-case.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>India News In Hindi:</strong> केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी इन दिनों राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की एक सब्सिडी योजना को लेकर चर्चा में हैं. राजस्थान में उनके पॉलीहाउस और खीरे की खेती वाले प्रोजेक्ट के लिए 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी स्वीकृत हुई है. हालांकि, जिस बोर्ड से यह सब्सिडी मिली, उसके पदेन उपाध्यक्ष स्वयं भागीरथ चौधरी हैं. इसे लेकर विपक्ष और विभिन्न स्तरों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि मंत्री का कहना है कि उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया है.</p>
<h3><strong>राजस्थान के पेह गांव में स्थापित है परियोजना</strong></h3>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पेह गांव में भागीरथ चौधरी का संरक्षित खेती का बड़ा प्रोजेक्ट संचालित हो रहा है. यहां चार बड़े पॉलीहाउस और एक कृत्रिम तालाब बनाया गया है, जहां व्यावसायिक स्तर पर खीरे की खेती की जा रही है.</p>
<p>परियोजना स्थल पर लगे बोर्ड में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की सहायता का उल्लेख है. बोर्ड पर लाभार्थी के रूप में भागीरथ चौधरी का नाम और 99.60 लाख रुपये की स्वीकृत सब्सिडी दर्ज है.</p>
<h4><strong>1.99 करोड़ रुपये की परियोजना, बैंक से लिया गया ऋण</strong></h4>
<p>दस्तावेजों के अनुसार इस परियोजना की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये है. इसमें लगभग 49.80 लाख रुपये लाभार्थी का अंशदान है, जबकि करीब 1.49 करोड़ रुपये का ऋण HDFC बैंक से लिया गया. बताया गया है कि मार्च 2026 में अंतिम स्वीकृति मिलने के कुछ सप्ताह बाद 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी सीधे HDFC बैंक के ऋण खाते में जमा कर दी गई.</p>
<h5><strong>आवेदन के 14 दिन बाद मिली सैद्धांतिक मंजूरी</strong></h5>
<p>जानकारी के मुताबिक भागीरथ चौधरी ने 15 अप्रैल 2025 को इस योजना के तहत आवेदन किया था. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केवल 14 दिनों के भीतर परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई.</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि योजना के नियमों के अनुसार स्वीकृति से पहले संयुक्त स्थल निरीक्षण आवश्यक होता है. इसी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है.</p>
<h6><strong>NHB के पदेन उपाध्यक्ष होने से बढ़ा विवाद</strong></h6>
<p>विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, जिसने इस परियोजना को मंजूरी दी, उसके पदेन उपाध्यक्ष स्वयं भागीरथ चौधरी हैं.</p>
<p>हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार अंतिम स्वीकृति देने वाली समिति में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते. इसी आधार पर मंत्री पक्ष का कहना है कि निर्णय प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं रही.</p>
<h6><strong>संपत्ति के ब्योरे को लेकर भी उठे सवाल</strong></h6>
<p>रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय को अप्रैल 2025 में दिए गए संपत्ति विवरण में मंत्री ने अपनी कृषि भूमि का उल्लेख किया था, लेकिन इस लंबित NHB परियोजना का अलग से जिक्र नहीं किया गया. मंत्री के एक सहयोगी का कहना है कि आवश्यक जानकारी नियमानुसार सार्वजनिक की जाएगी.</p>
<h6><strong>2018 में भी किया था आवेदन</strong></h6>
<p>भागीरथ चौधरी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2018 में भी इसी योजना के तहत आवेदन किया था. उस समय तकनीकी कारणों और समय पर आवश्यक दस्तावेज जमा न होने की वजह से उनका आवेदन स्वीकृत नहीं हो सका था.</p>
<h6><strong>मंत्री ने आरोपों को बताया निराधार</strong></h6>
<p>विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि उन्होंने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है. उनके अनुसार देशभर में हजारों किसान पॉलीहाउस और कृत्रिम तालाब जैसी परियोजनाओं के लिए इसी योजना का लाभ ले रहे हैं और उन्होंने भी एक किसान के रूप में आवेदन किया था.</p>
<p>उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी हुई है और परियोजना स्थल पर लगा बोर्ड भी सरकारी सहायता का सार्वजनिक उल्लेख करता है. इसलिए इसमें कुछ भी छिपाया नहीं गया है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/national/bhagirath-choudhary-nhb-subsidy-controversy/article-8967</link>
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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 04:30:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कटनी सड़क हादसा: ओवरलोड हाइवा से टकराई यात्री बस, 3 की मौत, 25 से ज्यादा घायल, CM मोहन यादव ने किया मुआवजे का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश के कटनी जिले में रविवार को एक भीषण सड़क हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं. लमतरा ब्रिज के पास यात्री बस और ओवरलोड हाइवा की आमने-सामने की टक्कर में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक यात्री घायल हो गए. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल यात्री को 1 लाख रुपये सहायता देने की घोषणा की है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/mp-katni-bus-hiwa-accident-3-dead-25-injured/article-8948"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-06/mp-katni-accident-news.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Katni Madhya Pradesh:</strong> कटनी जिले के कुठला थाना क्षेत्र स्थित लमतरा ब्रिज के पास रविवार को दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. कटनी से विजयराघवगढ़ जा रही यात्रियों से भरी बस सामने से आ रहे एक ओवरलोड हाइवा से टकरा गई. टक्कर इतनी भीषण थी कि बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई. हादसे में एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक यात्री घायल हो गए.</p>
<h3><strong>लमतरा ब्रिज के पास हुई आमने-सामने की टक्कर</strong></h3>
<p>जानकारी के मुताबिक कटनी से विजयराघवगढ़ की ओर जा रही यात्री बस जब लमतरा ब्रिज के पास पहुंची, तभी सामने से आ रहे एक ओवरलोड हाइवा से उसकी जोरदार भिड़ंत हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों वाहनों की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क किनारे पलट गई.</p>
<p>बस में सवार कई यात्री सीटों और खिड़कियों के बीच फंस गए. हादसे के तुरंत बाद आसपास के ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया. कई यात्रियों को बस की खिड़कियां तोड़कर बाहर निकाला गया. दुर्घटना के बाद कुछ देर के लिए मार्ग पर यातायात भी प्रभावित रहा.</p>
<h4><strong>स्थानीय लोगों ने बचाई कई जिंदगियां</strong></h4>
<p>हादसे के बाद सबसे पहले स्थानीय लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए बचाव अभियान शुरू किया. बस में फंसे यात्रियों को निकालने के लिए लोगों ने काफी मशक्कत की. सूचना मिलने पर डायल-112, एंबुलेंस और पुलिस टीम भी मौके पर पहुंच गई. घायलों को तत्काल जिला अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है.</p>
<p>अस्पताल सूत्रों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है. राहत कार्य के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी. कई घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार के बाद वार्ड में भर्ती कराया गया है.</p>
<h5><strong>हादसे में तीन लोगों की मौत, मृतकों की हुई पहचान</strong></h5>
<p>इस भीषण सड़क दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हुई है. मृतकों की पहचान किशन कोल (30) निवासी कुशमा, नीलम प्रजापति (26) निवासी झिरिया और राजू चौधरी (26) निवासी खरखरी के रूप में हुई है. हादसे की सूचना मिलते ही मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया.</p>
<p>पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. प्रशासन मृतकों के परिजनों से संपर्क कर उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कह रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार मृतकों में कुछ लोग अपने निजी कार्य से यात्रा कर रहे थे. अचानक हुए इस हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है.</p>
<h6><strong>घायलों का अस्पताल में इलाज जारी, कई की हालत गंभीर</strong></h6>
<p>दुर्घटना में प्रेम भाई, कृष्णा भाई, भूरा चौधरी, राधाबाई, प्रेमलाल चौधरी, रीना चक्रवर्ती, रानी, पार्वती, मिली, राम बर्मन, वर्षा बर्मन, शिवा बर्मन, सूर्य बर्मन, शैलेष सोनी, अंजनी कुशवाहा, वीर कुशवाहा, चांदनी कुशवाहा, रंजन पाल, वंशिका लोधी, संध्या सोनी, रामवीर सोनी, ओमप्रकाश पटेल, दिवाकर दुबे, देवीदीन, जितेंद्र मिश्रा, अमित पटेल और माली आदिवासी सहित कई यात्री घायल हुए हैं.</p>
<p>सभी घायलों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है. चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि कुछ घायलों को गंभीर चोटें आई हैं, जिनका विशेष उपचार किया जा रहा है. प्रशासन लगातार घायलों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है. डॉक्टरों की टीम जरूरत पड़ने पर गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करने की तैयारी भी कर रही है. अस्पताल में घायलों के परिजन बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं.</p>
<h6><strong>मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जताया शोक, मुआवजे का किया ऐलान</strong></h6>
<p>कटनी हादसे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया है. मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही गंभीर रूप से घायल एक यात्री को 1 लाख रुपये की सहायता राशि देने का भी ऐलान किया गया है.</p>
<p>मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 23:39:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Kal Ka Mausam 15 June: यूपी से बिहार तक मौसम का बड़ा बदलाव, IMD ने जारी किया बारिश-आंधी का अलर्ट, 80 किमी प्रति घंटा तक चल सकती हैं हवाएं</title>
                                    <description><![CDATA[15 जून को देश के कई राज्यों में मौसम अचानक करवट लेने वाला है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-NCR, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश समेत कई इलाकों में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है. कुछ क्षेत्रों में हवाओं की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/kal-ka-mausam-15-june-imd-rain-thunderstorm-alert/article-8946"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-06/imd-alert-in-up-mp-bihar-delhi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>IMD Alert Heavy Rain: </strong>भीषण गर्मी और उमस के बीच मौसम अब राहत लेकर आने वाला है. भारतीय मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार 15 जून को देश के कई हिस्सों में तेज बारिश, गरज-चमक और धूलभरी आंधी देखने को मिल सकती है. उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक मौसम सक्रिय रहेगा. कई जिलों में तेज हवाओं और बिजली गिरने का खतरा देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.</p>
<h3><strong>दिल्ली-NCR में बारिश के साथ चलेंगी तेज हवाएं</strong></h3>
<p>राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में सोमवार को मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ सकता है. मौसम विभाग के अनुसार दिन और शाम के समय कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. इसके साथ ही तेज हवाएं चल सकती हैं जिनकी गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है.</p>
<p>बारिश की वजह से तापमान में हल्की गिरावट दर्ज होने की उम्मीद है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी. दिल्ली में अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान लगाया गया है.</p>
<h4><strong>उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश का असर</strong></h4>
<p>उत्तर प्रदेश में सोमवार को मौसम काफी सक्रिय रह सकता है. मेरठ, नोएडा, आगरा, मथुरा, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर समेत कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है.</p>
<p>IMD के अनुसार कुछ इलाकों में अचानक तेज आंधी चल सकती है, जिससे पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की संभावना बनी हुई है. किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना भी जताई गई है.</p>
<h5><strong>बिहार में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी</strong></h5>
<p>बिहार के कई हिस्सों में सोमवार को मौसम चुनौतीपूर्ण रह सकता है. पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर और पूर्णिया सहित कई जिलों के लिए बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है.</p>
<p>मौसम विभाग के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में हवाओं की गति 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. इसके अलावा बिजली गिरने की घटनाओं का भी खतरा बना हुआ है. लोगों से खराब मौसम के दौरान घरों में रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की गई है.</p>
<h6><strong>झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम में सबसे ज्यादा असर</strong></h6>
<p>पूर्वी भारत के कई राज्यों में मौसम का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है. झारखंड के रांची, जमशेदपुर, बोकारो और धनबाद में भारी बारिश और तेज तूफान की संभावना जताई गई है. वहीं पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी, कालिम्पोंग, मालदा और कोलकाता में भी मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है.</p>
<p>असम के गुवाहाटी, डिब्रूगढ़ और जोरहाट में भी तेज बारिश और आंधी का अनुमान है. बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को खुले मैदान, पेड़ों और ऊंचे स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है.</p>
<h6><strong>पहाड़ी राज्यों में भी बिगड़ सकता है मौसम</strong></h6>
<p>उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में सोमवार को बारिश और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है. देहरादून, नैनीताल, चमोली, पिथौरागढ़, शिमला, कुल्लू और कांगड़ा जैसे क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है.</p>
<p>जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है. पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों और पर्यटकों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है. खराब मौसम के कारण कुछ स्थानों पर यातायात भी प्रभावित हो सकता है, वहीं राजस्थान, मध्य प्रदेश और पंजाब के कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. इन राज्यों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/national/kal-ka-mausam-15-june-imd-rain-thunderstorm-alert/article-8946</link>
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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 21:11:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Cockroach Janta Party: 4 दिन में लाखों फॉलोअर्स, BJP को किया पीछे ! X पर हुई बैन, कौन हैं अभिजीत दिपके और क्यों वायरल हुई CJP?</title>
                                    <description><![CDATA[कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम का व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन देशभर में चर्चा का विषय बन गया है. महज चार दिनों में लाखों फॉलोअर्स जुटाने वाली इस मुहिम ने इंस्टाग्राम पर भाजपा और कांग्रेस को भी पीछे छोड़ दिया. अब इसका X अकाउंट भारत में बैन हो गया है. जानिए कौन हैं संस्थापक अभिजीत दिपके और आखिर क्यों वायरल हो रही है CJP.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/cockroach-janta-party-x-ban-abhijeet-dipke-cjp/article-8911"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-05/who-is-cockroach-janata-party.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Cockroach Janta Party X Banned: </strong>भारत की राजनीति और सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है — कॉकरोच जनता पार्टी (CJP). बेरोजगार युवाओं, सिस्टम से नाराज जेन जी और डिजिटल व्यंग्य के मेल से बनी इस मुहिम ने कुछ ही दिनों में ऐसा तूफान खड़ा किया कि इसके फॉलोअर्स करोड़ों तक पहुंच गए. इंस्टाग्राम पर भाजपा और कांग्रेस को पीछे छोड़ने वाली CJP का X अकाउंट अब भारत में बैन हो चुका है. इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं अभिजीत दिपके, जिन्होंने इसे एक “डिजिटल जन-आंदोलन” बताया है.</p>
<h3><strong>सोशल मीडिया पर अचानक कैसे छा गई कॉकरोच जनता पार्टी</strong></h3>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत 16 मई 2026 को हुई थी. यह एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में सामने आई, लेकिन कुछ ही दिनों में देशभर के युवाओं, खासकर जेन जी यूजर्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गई. पार्टी का नाम उस विवादित टिप्पणी से निकला जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवी” से की थी.</p>
<p>हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा फर्जी डिग्री धारकों की ओर था और उन्होंने युवाओं की तारीफ भी की, लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर “कॉकरोच” शब्द एक राजनीतिक व्यंग्य और विरोध के प्रतीक में बदल चुका था. इसी माहौल में कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म हुआ.</p>
<p>इस प्लेटफॉर्म ने खुद को “आलसी, बेरोजगार और सिस्टम से निराश युवाओं की आवाज” बताया. इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स तेजी से बढ़े और कुछ समय के लिए इसकी संख्या भाजपा और कांग्रेस दोनों से ज्यादा पहुंच गई. यही वजह रही कि यह केवल एक मीम पेज नहीं बल्कि एक बड़े डिजिटल जन-आंदोलन की तरह चर्चा में आ गया.</p>
<h4><strong>X अकाउंट बैन होने के बाद क्या बोले अभिजीत दिपके</strong></h4>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने निजी X अकाउंट के जरिए जानकारी दी कि CJP का आधिकारिक अकाउंट भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है. उन्होंने लिखा कि जैसा अनुमान था, अकाउंट को बैन कर दिया गया. दिपके के अनुसार, अकाउंट लॉन्च होने के चार दिन के भीतर 2 लाख से अधिक लोग इससे जुड़ गए थे.</p>
<p>उन्होंने यह भी दावा किया कि अब इंस्टाग्राम अकाउंट को हैक करने की कोशिश की जा रही है. इसके साथ ही उन्होंने समर्थकों से नए X हैंडल को फॉलो करने की अपील की. सोशल मीडिया पर इस बैन को लेकर बहस तेज हो गई. कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की पॉलिसी का हिस्सा बता रहे हैं.</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे विवाद ने CJP की लोकप्रियता को और बढ़ा दिया. इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स करोड़ों में पहुंच गए और कई बड़े राजनीतिक नेताओं ने भी इस प्लेटफॉर्म को लेकर सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं दीं.</p>
<h5><strong>क्या है कॉकरोच जनता पार्टी का एजेंडा और घोषणापत्र</strong></h5>
<p>हालांकि यह प्लेटफॉर्म खुद को व्यंग्यात्मक आंदोलन बताता है, लेकिन इसके पोस्ट और घोषणापत्र में कई गंभीर राजनीतिक मुद्दे उठाए गए हैं. पार्टी का दावा है कि भारतीय राजनीति असली मुद्दों से भटक चुकी है और रोजगार, शिक्षा, एआई, उद्योग और युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है.</p>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी ने तीन बड़े उद्देश्यों का जिक्र किया है. पहला, राजनीतिक विमर्श को धार्मिक ध्रुवीकरण से हटाकर रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर केंद्रित करना. दूसरा, नीट पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या जैसे मामलों में सरकार और सिस्टम की जवाबदेही तय करना. तीसरा, न्यायपालिका, चुनाव आयोग और मीडिया जैसी संस्थाओं की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना.</p>
<p>इसके अलावा पार्टी ने पांच सूत्रीय घोषणापत्र भी जारी किया. इसमें रिटायरमेंट के बाद जजों को राजनीतिक पद न देने, चुनाव आयोग की निष्पक्षता, संसद और कैबिनेट में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण, दलबदल करने वाले नेताओं पर 20 साल की रोक और बड़े उद्योगपतियों के मीडिया नियंत्रण को खत्म करने जैसी मांगें शामिल हैं.</p>
<p>इन मांगों ने युवाओं के बीच इस प्लेटफॉर्म को केवल मजाक तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि कई लोग इसे व्यवस्था के खिलाफ डिजिटल असंतोष का नया चेहरा मानने लगे हैं.</p>
<h6><strong>पार्टी से जुड़ने की अनोखी शर्तों ने खींचा लोगों का ध्यान</strong></h6>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी की सदस्यता शर्तें सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा वायरल हुईं. इन शर्तों को जानबूझकर व्यंग्यात्मक अंदाज में तैयार किया गया ताकि बेरोजगारी और युवाओं को लेकर बनी धारणाओं पर कटाक्ष किया जा सके.</p>
<p>पार्टी के मुताबिक, सदस्य बनने के लिए व्यक्ति का बेरोजगार होना जरूरी है, चाहे वह मजबूरी में हो या अपनी पसंद से. इसके अलावा “शारीरिक रूप से आलसी लेकिन मानसिक रूप से अत्यधिक सक्रिय” होना भी एक शर्त बताई गई. दिन में कम से कम 11 घंटे इंटरनेट पर बिताना और प्रोफेशनल तरीके से शिकायत करने की क्षमता भी पात्रता का हिस्सा बनाई गई.</p>
<p>इन शर्तों को सोशल मीडिया यूजर्स ने मीम्स और रील्स के जरिए तेजी से वायरल कर दिया. खासकर जेन जी यूजर्स ने इसे अपने अनुभवों से जोड़कर देखा. यही वजह रही कि CJP महज राजनीतिक व्यंग्य नहीं बल्कि एक डिजिटल कल्चर ट्रेंड में बदल गई.</p>
<h6><strong>कौन हैं अभिजीत दिपके, जिनका नाम पूरे देश में चर्चा में है</strong></h6>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके 30 वर्षीय भारतीय छात्र और राजनीतिक संचार रणनीतिकार हैं. उन्होंने पुणे से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया और बाद में अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स की पढ़ाई की. फिलहाल वह अमेरिका में रह रहे हैं.</p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिजीत पहले आम आदमी पार्टी के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने 2020 से 2023 के बीच पार्टी की सोशल मीडिया और चुनाव प्रचार रणनीति में भूमिका निभाई थी. दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान मीम आधारित डिजिटल प्रचार अभियान में भी उनकी भागीदारी रही थी.</p>
<p>अभिजीत का कहना है कि सीजेआई की टिप्पणी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रभावित किया. उन्होंने उसी टिप्पणी को व्यंग्य के हथियार में बदलते हुए CJP की शुरुआत की. उनका दावा है कि यह प्लेटफॉर्म युवाओं की हताशा, बेरोजगारी और राजनीतिक निराशा को आवाज देने के लिए बनाया गया.</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल 2029 चुनाव लड़ने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है. अभी उनका फोकस युवाओं की राय सुनने और इस आंदोलन को जन-आवाज में बदलने पर है.</p>
<h6><strong>राजनीति में कितना बड़ा असर डाल सकती है CJP</strong></h6>
<p>कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड है या भविष्य में यह एक गंभीर राजनीतिक आंदोलन बन सकता है. जिस तरह लाखों युवा इससे जुड़ रहे हैं, उससे साफ है कि देश की नई पीढ़ी पारंपरिक राजनीति से अलग मुद्दों पर चर्चा चाहती है.</p>
<p>जेन जी भारत की सबसे बड़ी आबादी वाली पीढ़ी मानी जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के कुल उपभोक्ता खर्च का बड़ा हिस्सा इसी पीढ़ी से आता है. यही वजह है कि सोशल मीडिया आधारित कोई भी आंदोलन तेजी से राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन सकता है.</p>
<p>समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, आप नेता मनीष सिसोदिया और प्रशांत भूषण जैसे नेताओं द्वारा सार्वजनिक समर्थन दिए जाने के बाद इस प्लेटफॉर्म की चर्चा और तेज हो गई है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि CJP भविष्य में राजनीतिक दल बनेगी या नहीं, लेकिन इतना तय है कि इसने भारतीय राजनीति में युवाओं की नाराजगी और डिजिटल व्यंग्य की ताकत को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 16:44:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
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                <title>Petrol Diesel New Rates: फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, एक हफ्ते में दूसरी बार लगा महंगाई का झटका</title>
                                    <description><![CDATA[देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को फिर बढ़ोतरी कर दी गई. तेल कंपनियों ने पेट्रोल पर 87 से 96 पैसे और डीजल पर 86 से 94 पैसे प्रति लीटर तक दाम बढ़ाए हैं. महज एक सप्ताह में दूसरी बार कीमतें बढ़ने से आम जनता और परिवहन क्षेत्र पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/petrol-diesel-new-rate-india-price-hike/article-8907"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-05/petrol-diesel-new-rates-in-india.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Petrol Diesel New Rates: </strong>देश में महंगाई से जूझ रही आम जनता को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. सरकारी तेल कंपनियों ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है. यह पिछले एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं. लगातार हो रही इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जेब, परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है.</p>
<h3><strong>तीन दिन पहले ही बढ़े थे 3 रुपये प्रति लीटर</strong></h3>
<p>मंगलवार की बढ़ोतरी से पहले शुक्रवार को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की थी. उस फैसले के बाद दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गया था, जबकि डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया था.</p>
<p>अब नई वृद्धि के बाद दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. इस तरह सिर्फ कुछ दिनों में ईंधन की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है.</p>
<h4><strong>मुंबई में पेट्रोल 107 रुपये के पार</strong></h4>
<p>देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी पेट्रोल और डीजल के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. यहां पेट्रोल 91 पैसे महंगा होकर 107.59 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है. वहीं डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपये प्रति लीटर हो गई है. मुंबई में पहले से ही देश के प्रमुख शहरों की तुलना में ईंधन के दाम अधिक रहते हैं.</p>
<h5><strong>कोलकाता में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी</strong></h5>
<p>कोलकाता में मंगलवार को पेट्रोल के दाम में सबसे अधिक 96 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई. इसके बाद वहां पेट्रोल की कीमत 109.70 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है. डीजल भी 94 पैसे महंगा होकर 96.07 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. पश्चिम बंगाल की राजधानी में ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन पर साफ दिखाई देने लगा है.</p>
<h6><strong>चेन्नई में भी बढ़े दाम, डीजल 96 रुपये के पार</strong></h6>
<p>चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 82 पैसे बढ़कर 104.49 रुपये प्रति लीटर हो गई है. वहीं डीजल 86 पैसे महंगा होकर 96.11 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है. दक्षिण भारत के इस प्रमुख महानगर में ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर लॉजिस्टिक्स, बस सेवाओं और निजी वाहनों के संचालन खर्च पर पड़ने लगा है.</p>
<h6><strong>अंतरराष्ट्रीय तनाव बना कीमतों में उछाल की बड़ी वजह</strong></h6>
<p>पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां मुख्य कारण मानी जा रही हैं. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर बना हुआ है.</p>
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है, वहां बाधाएं उत्पन्न होने से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है. इसी वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं. वैश्विक बाजार में यह उछाल सीधे भारतीय ईंधन कीमतों पर असर डाल रहा है.</p>
<h6><strong>आम जनता और बाजार पर क्या पड़ेगा असर</strong></h6>
<p>पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि का प्रभाव केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता. इसका असर परिवहन, कृषि, उद्योग और खुदरा बाजार तक पहुंचता है. माल ढुलाई महंगी होने से फल, सब्जियां, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं. निजी वाहन उपयोग करने वालों के मासिक खर्च में वृद्धि होगी, जबकि सार्वजनिक परिवहन किराए बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>व्यापार</category>
                                    

                <link>https://www.yugantarpravah.com/national/petrol-diesel-new-rate-india-price-hike/article-8907</link>
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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 08:40:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
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                <title>Suvendu Adhikari CM Oath: ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु अधिकारी बने बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री, जानिए क्यों अब तक नहीं की शादी</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के बीच भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी रहे शुभेंदु ने उन्हीं को हराकर सत्ता तक का सफर तय किया. अविवाहित शुभेंदु अधिकारी का पूरा जीवन राजनीति और जनसेवा को समर्पित रहा है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/national/suvendu-adhikari-first-bjp-chief-minister-west-bengal/article-8888"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-05/west-bengal-suvendu-adhikari-cm.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Suvendu Adhikari CM Oath: </strong>पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार राज्य की सत्ता पर कब्जा किया और पार्टी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नया अध्याय शुरू कर दिया. कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के शीर्ष नेताओं और हजारों समर्थकों की मौजूदगी में 57 वर्षीय शुभेंदु अधिकारी ने पद और गोपनीयता की शपथ ली. कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाने वाले शुभेंदु अब उन्हीं को हराकर बंगाल की सत्ता के शिखर तक पहुंच गए हैं.</p>
<h3><strong>ममता बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगी से बने BJP के CM</strong></h3>
<p>शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक जीवन पश्चिम बंगाल की सबसे दिलचस्प राजनीतिक यात्राओं में से एक माना जाता है. एक समय ऐसा था जब ममता बनर्जी के हर बड़े आंदोलन में शुभेंदु अधिकारी उनकी रणनीति के प्रमुख स्तंभ हुआ करते थे. खासकर नंदीग्राम आंदोलन ने उन्हें राज्य की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया.</p>
<p>लेकिन समय के साथ दोनों नेताओं के बीच दूरी बढ़ती गई और यही दूरी अंततः एक बड़े राजनीतिक संघर्ष में बदल गई. 2020 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने खुद को ममता बनर्जी के सबसे मजबूत चुनौतीकर्ता के रूप में स्थापित किया.</p>
<h4><strong>नंदीग्राम आंदोलन ने बनाया जननेता, 2021 की जीत ने दिलाई पहचान</strong></h4>
<p>2007 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन ने शुभेंदु अधिकारी को एक जननेता के रूप में स्थापित किया. इस आंदोलन में उनकी भूमिका निर्णायक रही और ममता बनर्जी को सत्ता तक पहुंचाने में उन्होंने अहम योगदान दिया. 2009 में वे तामलुक से सांसद बने. इसके बाद 2016 में नंदीग्राम से विधायक चुने गए और राज्य सरकार में मंत्री बने. 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर खुद ममता बनर्जी को हराकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. यह जीत उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई.</p>
<h5><strong>ममता को हराकर रचा इतिहास, बीजेपी को दिलाई पहली सरकार</strong></h5>
<p>2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके परंपरागत गढ़ भवानीपुर में चुनौती दी. इस चुनाव को बंगाल की राजनीति का सबसे प्रतिष्ठित मुकाबला माना जा रहा था. नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शुभेंदु अधिकारी अब राज्य की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो चुके हैं.</p>
<p>ममता बनर्जी को हराने के साथ ही उन्होंने भाजपा को पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता तक पहुंचाया. उनके मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बंगाल की राजनीति में तीन दशक बाद सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय शुरू हुआ.</p>
<h6><strong>क्यों नहीं की शादी, राजनीति और जनसेवा को बना लिया जीवन</strong></h6>
<p>शुभेंदु अधिकारी की निजी जिंदगी भी हमेशा चर्चा का विषय रही है. 57 वर्ष की उम्र में भी वे अविवाहित हैं. उनकी तरह पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी विवाह नहीं किया. शुभेंदु अधिकारी ने अपना पूरा जीवन राजनीति और समाजसेवा को समर्पित कर दिया.</p>
<p>उनका मानना रहा कि सार्वजनिक जीवन में पूरी ऊर्जा और समय देने के लिए निजी जीवन से दूरी जरूरी है. यही वजह है कि उन्होंने शादी नहीं की. सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले शुभेंदु के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास 85.87 लाख रुपये की संपत्ति है, कोई कर्ज नहीं है और उनके नाम पर कोई निजी वाहन भी दर्ज नहीं है.</p>
<h6><strong>परिवार, शिक्षा और शुरुआती राजनीतिक सफर</strong></h6>
<p>शुभेंदु अधिकारी वरिष्ठ नेता शिशिर कुमार अधिकारी के पुत्र हैं. राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े शुभेंदु ने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने 31 वर्ष की उम्र में अपना पहला चुनाव जीता, जब वे कोंटाई नगर परिषद से कांग्रेस के पार्षद बने.</p>
<p>बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर 2006 में पहली बार कोंटाई दक्षिण से विधायक चुने गए. इसके बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया और वे बंगाल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हो गए.</p>
<h6><strong>पांच मंत्रियों ने भी ली शपथ, नई सरकार पर पूरे देश की नजर</strong></h6>
<p>मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ पांच अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली. इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक शामिल हैं. नई सरकार से प्रशासनिक बदलाव, निवेश और कानून व्यवस्था में सुधार की उम्मीदें जताई जा रही हैं. भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए यह क्षण वर्षों की राजनीतिक मेहनत का परिणाम माना जा रहा है. पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब एक नए दौर की शुरुआत हो चुकी है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:20:03 +0530</pubDate>
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